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Friday, 3 November 2023

हमास, हिजबुल्लाह, इस्लामिक जिहाद बनाम इजरायल

जिहाद बनाम इजरायल 7 अक्टूबर को हमास द्वारा गाजा से इजरायल पर घातक हमला किया गया। इसके वुछ ही घंटों बाद रविवार को लेबनान के उग्रवादी संगठन हिजबुल्लाह ने दक्षिण लेबनान से इजरायल पर गोलीबारी की, जिसका जवाब इजरायल ने भी जबरदस्त गोलीबारी से दिया। हिजबुल्लाह ने कहा कि उसने फलस्तीनी लोगों के साथ एकजुटता दिखाते हुए शीबा फाम्र्स में तीन चौकियों पर रॉकेट और तोपें चलाईं। हिजबुल्लाह के वरिष्ठ अधिकारी हाशिम सफीदीन ने बेरूत में फिलस्तीनियों का समर्थन करते हुए कहा हमारा इतिहास, हमारी बंदूवें और हमारे रॉकेट आपके साथ हैं। हिजबुल्लाह के इस बयान के वुछ ही घंटों बाद सोमवार को ़फलस्तीनी संगठन इस्लामिक जिहाद ने दक्षिण लेबनान और उत्तरी इजरायल की सरहद पर कईं इला़कों में बमबारी करने की ि़जम्मेदारी ली। जवाबी कार्रवाईं करते हुए इजरायल ने भी इस इला़के में हवाईं हमले किए। यह बात किसी से छुपी हुईं नहीं हैं कि ईंरान हमास और हिजबुल्लाह जैसे चरमपंथी संगठनों को आर्थिक और सैन्य सहायता देता रहा है। इसलिए ये सवाल उठना जाय़ज है कि क्या ईंरान हमास, हिजबुल्लाह और इस्लामिक जिहाद जैसे संगठनों के ़जरिये इजरायल की घेराबंदी करने की कोशिश कर रहा है?गाजा से इजरायल पर हमला होने के अगले ही दिन हिजबुल्लाह का दक्षिण लेबनान से इजरायल पर हमला करना हमास और हिजबुल्लाह की इजरायल को दो मोर्चो पर उलझाने की रणनीति का हिस्सा हो सकता है। शिया कट्टरवाद पर आधारित हिजबुल्लाह की स्थापना 1982 में इस्लामिक देश लेबनान में हुईं थी। इजरायल के मुताबि़क हिजबुल्लाह में ़करीब 45,000 लड़ाके हैं, जिसमें से 20,000 सव््रीय रहते हैं और 25,000 रि़जर्व में। हर साल हिजबुल्लाह को ़करीब 70 करोड़ डॉलर से ज्यादा धन मिलता है, जिसका एक बड़ा हिस्सा ईंरान से आता है। ईंरान हिजबुल्लाह को हथियार, प्रशिक्षण और खुि़फया मदद देता है। हिजबुल्लाह के शस्त्रागार में 120,000 से 130,000 मिसाइलें मौजूद हैं, जिनमें लंबी दूरी की मिसाइलें शामिल हैं जो पूरे इजरायल तक पहुंचने में सक्षम हैं। गाजा से इजरायल पर हुए हमलों के बाद ईंरान में जश्न का माहौल था। वॉल स्ट्रीट जर्नल की एक हालिया रिपोर्ट में हमास और हिजबुल्लाह के वरिष्ठ सदस्यों के हवाले से कहा गया है कि ईंरानी सुरक्षा अधिकारियों ने इजरायल पर शनिवार को हमास के अचानक हमले की योजना बनाने में मदद की। इजरायल का कहना है कि ईंरान के इस्लामिक रिवॉल्यूशनरी गार्ड की वुद्स फोर्स और उनके क्षेत्रीय प्रतिनिधियों का सबसे बड़ा म़कसद इजरायल का अतिव््रामण और विनाश है। इजरायल के मुताबि़क इस म़कसद को हासिल करने के लिए ईंरानी शासन ने इजरायल की सीमाओं पर हिजबुल्लाह, हमास, इस्लामिक जिहाद और शिया मिलिशिया जैसे आतंकी संगठनों को स्थापित करने की कोशिशों में अरबों डॉलर खर्च किए हैं। हमास, हिजबुल्लाह और इस्लामिक जिहाद जैसे आतंकी संगठनों से बढ़े हुए ़खतरे से निपटने के लिए इजरायल को अपने मित्र देश अमेरिका से भी मदद मिल रही है। जो आने वाले व़क्त में बढ़ती जाएगी। हमास के हमले ने ये सुनिाित कर दिया है कि ़फलस्तीन का मुद्दा दोबारा फोकस में आ गया है। चिताएं उठ रही थी की क्या दुनिया के देश इजरायल के साथ सम्बन्ध सामान्य कर रहे हैं। ऐसी स्थिति में हमास ये सोचता होगा कि अगर कईं मुस्लिम देश इजरायल के दोस्त बन गए तो फिर ़फलस्तीन का मुद्दा कौन उठाएग। हमास जानता था कि जवाबी कार्रवाईं होगी और इसके लिए वह तैयार भी था।

Thursday, 2 November 2023

मामला गुमनामी चुनावी बांड का

उच्चतम न्यायालय की पांच न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने पर्टियों के राजनीतिक वित्त पोषण के लिए चुनावी बांड योजना की वैधता को चुनौती देने संबंधी याचिकाओं पर 31 अक्टूबर से सुनवाईं करना शुरू कर दी है। चुनावी बांड योजना को 2 जनवरी 2018 को अधिसूचित किया गया था। इसे राजनीतिक वित्त पोषण में पारदर्शिता लाने के प्रयासों के तहत पार्टियों को नकद चंदे के विकल्प के रूप में प्रस्तुत किया गया था। योजना के प्रावधानों के अनुसार चुनावी बांड भारत की नागरिकता रखने वाले व्यक्ति या भारत में स्थापित संस्थान द्वारा खरीदे जा सकते हैं। इसे कोईं व्यक्ति अकेले या अन्य व्यक्तियों के साथ संयुक्त रूप से खरीद सकता है। प्रधान न्यायाधीश डीवाईं चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पीठ कांग्रेस नेता जया ठावुर और मार्क्‍सवादी पार्टी (माकपा) द्वारा दायर याचिका सहित चार याचिकाओं पर सुनवाईं कर रही है। पीठ के अन्य सदस्य न्यायमूर्ति संजीव खन्ना, न्यायमूर्ति बीआर गवईं, न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला और न्यायमूर्ति अचेत मिश्रा हैं। सुप्रीम कोर्ट ने 16 अक्टूबर को कहा था कि उठाए गए मुद्दों के महत्व के मद्देनजर और संविधान के अनुच्छेद 145 (4) के आलोक में विषय को कम से कम पांच न्यायाधीशों की पीठ के समक्ष रखा जाएगा। न्यायालय ने 10 अक्टूबर को गैर-सरकारी संगठन एसोसिएशन फार डेमोव्रेटिक राइट्स (एडीआर) की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण की इन दलीलों पर गौर किया गया था कि 2024 के लोकसभा चुनावों के लिए बांड योजना शुरू होने से पहले इस विषय पर निर्णय की जरूरत है। करीब छह साल बाद अंतत: चुनावी बांड का मुद्दा सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ ने 31 अक्टूबर को सुना। सन 2017 में बजट प्रस्तुत करते हुए सरकार ने इसे फाइनेंशियल एक्ट के रूप में मनी बिल कहकर पारित करवाया था। तत्कालीन वित्त मंत्री ने इस कानून का उद्देश्य चुनावी पंडिंग में पारदर्शी लाना बताया था। यह बिल स्वर्गीय अरुण जेटली ने संसद में पेश किया था। दुख से कहना पड़ता है कि उद्देश्यों से भटकर इसने उल्टा इसकी पारदर्शिता को उलझा दिया है। कानून के अनुसार कोईं भी व्यक्ति या संस्था एसबीआईं द्वारा जारी बांड खरीद कर दलों को दे सकती है। न तो दाता को बताना होगा कि उसने किस दल को बांड दिया, न ही दल बताने के लिए मजबूर है। चूंकि एसबीआईं इसे जारी करती है लिहाजा सरकार को पता रहता है कि किस कारपोरेट ने किस दल को कितना पंड दिया है। यानी न तो वोटर को पता चलता है और न ही विपक्षी दलों को लेकिन सरकार सब जानती है। आरटीआईं से पता चला कि भाजपा को इन पांच वर्षो में (2018 से जब बांड कानून की अधिसूचना जारी हुईं) 90 प्रतिशत बांड मिले और इनमें 90 प्रतिशत सबसे ऊपर के बांड (एक करोड़ रुपए प्रति बांड) थे, यानी कापोरेट ने ही इसमें पंड दिया। कानून में बदलाव कर दान की सीमा खत्म की गईं जिससे कोईं भी वंपनी कितनी भी राशि तक दान कर सकती है। दूसरा भारत में रजिस्टर्ड विदेशी वंपनियां भी मर्यांदित बांड खरीद सकती हैं। क्या सुप्रीम कोर्ट इन तताम पहलुओं को देखेगा? ——अनिल नरेन्द्र

संघर्ष-विराम प्रस्ताव से दूर रहना स्तब्ध करने वाला है

रहना स्तब्ध करने वाला है भारत ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में लाए गए उस प्रस्ताव की वोटिंग में भाग नहीं लिया जो गाजा में नागरिकों की सुरक्षा और कानूनी व मानवीय कदमों को जारी रखने की वचनबद्धता के समर्थन में था। 193 सदस्यीय संयुक्त राष्ट्र महासभा में जार्डन यह प्रस्ताव लाया जिस कोस्पांसर (शुरुआती समर्थन) बांग्लादेश, पाकिस्तान, मालदीव, रूस और दक्षिण अप्रीका समेत 40 देशों ने किया। इस प्रस्ताव पर हुईं वोटिंग में भारत ने हिस्सा नहीं लिया। भारत के अलावा जापान, आस्ट्रेलिया, कनाडा, जर्मनी, इराक, इटली, ब्रिटेन, यूव्रेन, साउथ सूडान, टाूनिशिया, फिलीपींस, स्वीडन और जिम्बाब्वे जैसे देशों ने भी वोट नहीं डाले। प्रस्ताव के पक्ष में 120 वोट पड़े, जबकि इजरायल, अमेरिका समेत 14 देशों ने इसके खिलाफ मतदान किया। वहीं 45 देशों ने वोटिंग के समय अनुपस्थित रहने का पैसला किया। फलस्तीनी क्षेत्र में शांति लाने के उद्देश्य से लाए गए इस प्रस्ताव पर वोटिंग में भारत की अनुपस्थति को लेकर देश में विपक्षी दलों ने कड़ी प्रतिव्रिया दी है। सीपीआईं और सीपीएम ने इसे चौंकाने वाला बताया तो प्रियंका गांधी ने कहा कि वो भारत सरकार के इस पैसले पर शर्मिदा हैं, वहीं शरद पवार ने कहा कि सरकार भ्रम की स्थिति में है। वामदलों ने एक संयुक्त बयान जारी कर कहा है कि गाजा में संघर्ष विराम के लिए संयुक्त राष्ट्र में लाए गए प्रस्ताव पर भारत की अनुपस्थिति चौंकाने वाली है, यह दर्शा रही है कि भारतीय विदेश नीति अब अमेरिकी साम्राज्यवाद के तहत काम करने वाले एक छोटे सहयोगी के रूप में बदल रही है। सीताराम येचुरी और डी राजा ने कहा कि गाजा में इस नरसंहार को रोवें। उन्होंने कहा यह फलस्तीनी उद्देश्यों पर लंबे समय से चले आ रहे भारत के समर्थकों को नकारने वाला पैसला है। उन्होंने कहा इजरायल ने 28 लाख से अधिक फलस्तीनी लोगों के घरों वाले गाजा पट्टी में सभी संचार बंद कर दिए हैं। यूएन के प्रस्ताव का सम्मान करते हुए वहां फौरन सीजफायर किया जाना चाहिए। एनसीपी अध्यक्ष शरद पवार ने कहा फलस्तीनी मुद्दे पर भारत सरकार भ्रम की स्थिति में है। हम फिलिस्तिनियों का समर्थन करते आए हैं। इजरायल ने कहा हजारों लोग मार दिए हैं और भारत ने कभी उसका समर्थन नहीं किया। प्रियंका गांधी बोली : जब मानवता के साथ सभी कानूनों को ताक पर रख दिया गया हो तो ऐसे में अपना रुख तय नहीं करना और चुपचाप देखते रहना गलत है। उन्होंने महात्मा गांधी के शब्दों को ट्वीट करते हुए लिखा, आंख के बदले आंख पूरी दुनिया को अंधा बना देती है। मैं इस बात से स्तब्ध और शर्मिदा हूं कि हमारा देश गाजा में सीजफायर के लिए इस मतदान पर अनुपस्थिति रहा। हमारे घरों की बुनियाद अंहिसा और सत्य के सिद्धांतों पर रखी गईं, जिनके लिए हमारे स्वतंत्रता सेनानियों ने अपने जीवन का बलिदान दिया। ये सिद्धांत संविधान का आधार है और हमारी राष्ट्रीयता को परिभाषित करता है। उन्होंने लिखा कि जब लाखों लोगों के भोजन, पानी, मेडिकल, संचार, आपूर्ति और बिजली काट दी गईं है और जब फलस्तीन में हजारों पुरुषों, महिलाओं और बच्चों को मारा जा रहा है, ऐसे समय में स्टैंड लेने से इंकार करना और इसे चुपचाप होते देखना गलत है। एआईंएमआईंएम के चीफ और सांसद आसुद्दीन औवेसी ने भारत का वोट हिस्सा न लेने पर कड़ी निंदा की है। प्रस्ताव गाजा के नागरिकों की सुरक्षा और वहां कानूनी और मानवीय कदमों को जारी रखने के समर्थन में थे। यह ये स्तब्ध करने वाला है कि नरेन्द्र मोदी सरकार अपने मानवीय समझौते और नागरिकों की सुरक्षा के लिए लाए गए प्रस्ताव पर वोटिंग से दूर रहे। उन्होंने कहा कि गाजा में अब तक 7028 लोग मारे जा चुके है, इनमें 3000 बच्चे और 1700 महिलाएं हैं।

Tuesday, 31 October 2023

और ताकतवर हुए मनोहर लाल

भारतीय जनता पाटा (भाजपा) ने अपनी हरियाणा इकाईं के संगठन में बदलाव करते हुए शुव््रावार को पाटा सांसद नायब सिह सैनी को प्रादेश अध्यक्ष बनाया, जबकि अभी तक इस जिम्मेदारी को संभाल रहे ओम प्राकाश धनखड़ को राष्ट्रीय सचिव नियुक्त किया गया है। पाटा की ओर से जारी एक आधिकारिक बयान में इन नियुक्तियों की घोषणा की गईं। बयान में कहा गया, यह नियुक्ति तत्काल प्राभाव से लागू होगी। इस घोषणा के बाद धनखड़ ने एक्स पर किए गए एक ट्वीट के जरिए भाजपा के वेंद्रीय नेतृत्व से लेकर बूथ स्तर तक के नेतृत्व को धन्यवाद किया। उन्होंने कहा, आप सबने संगठन कार्यं हेतु परिश्रम की पराकाष्ठा की। दिल की गहराइयों से आभार, नमन, आपकी मेहनत को प्राणाम। धनखड़ हरियाणा सरकार में मंत्री रहे हैं और कईं प्रामुख विभागों के कामकाज संभाल चुके हैं। उन्होंने इस दायित्व के लिए नायब सिह सैनी को भी बधाईं दी। सैनी वुरुक्षेत्र से भाजपा के सांसद हैं। वह भाजपा के अन्य फिछड़ा वर्ग (ओबीसी) मोच्रे के उपाध्यक्ष भी हैं। पहली बार के सांसद सैनी (50) की नियुक्ति से पाटा को ओबीसी समुदाय के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने में मदद मिल सकती है, क्योंकि जाटों का समर्थन बड़े पैमाने पर कांग्रोस, जननायक जनता पाटा (जेजेपी) और इंडियन नेशनल लोकदल (इनेलो) के बीच बंटा हुआ है। नायब सिह सैनी की नियुक्ति से स्पष्ट हो गया है कि मुख्यमंत्री मनोहर लाल को भाजपा हाईंकमान ने और ज्यादा ताकतवर बना दिया है। मुख्यमंत्री की पसंद का अध्यक्ष देकर यह स्पष्ट संदेश दिया है कि पाटा मनोहर लाल के कामकाज से खुश है और वह हरियाणा में तीसरी बार सरकार बनाने के लिए मनोहर लाल को प्री हैंड दे रही है। नायब सैनी की प्रादेशाध्यक्ष पद पर नियुक्ति कराकर मनोहर लाल ने दिल्ली में अपनी पैठ और मजबूत कर ली है। इस नियुक्ति से मनोहर लाल विरोधी नेताओं को सांप सूंघ गया है। ——अनिल नरेन्द्र

हीरानंदानी को दिया था लॉग-इन-पासवर्ड

महुआ मोइत्रा ने माना हीरानंदानी को दिया था लॉग-इन-पासवर्ड। मोइत्रा ने एक अंग्रोजी अखबार से कहा है कि उन्होंने अपने मित्र और बिजनेसमैन दर्शन हीरानंदानी को संसद का अपना लॉग-इन-पासवर्ड दिया था। हालांकि उन्होंने इस बात से इंकार किया कि उन्होंने इसके लिए उनसे वैश या महंगे तोहपे लिए थे। अखबार द इंडियन एक्सप्रोस को दिए एक इंटरव्यू में महुआ मोइत्रा ने कहा कि कोईं भी सांसद अपना सवाल खुद टाइप नहीं करता। मैंने उन्हें (दर्शन) को पासवर्ड और लॉग-इन दिया था ताकि उनके दफ्तर में कोईं कर्मचारी सवाल टाइप करके अपलोड कर दे। उन्होंने कहा, सवाल अपलोड करते वक्त फोन पर एक ओटीपी आता है। इसके लिए मेरा फोन नंबर दिया गया है.. ऐसे में ये सवाल नहीं उठता कि दर्शन या फिर कोईं और मेरी जानकारी के बिना सवाल अपलोड कर सकते थे। सीबीआईं को दी अपनी शिकायत में सुप्रीम कोर्ट के वकील जय अनंत देहाद्राईं ने महुआ मोइत्रा पर संसद में पैसे लेकर सवाल पूछने का आरोप लगाया था। देहाद्राईं शिकायत के आधार पर बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने महुआ मोइत्रा पर आरोप लगाया कि हीरानंदानी समूह के सीईंओ दर्शन हीरानंदानी से वैश और महंगे तोहफों को लेकर संसद में सवाल पूछती हैं। उन्होंने लोकसभा स्पीकर ओम बिड़ला से महुआ मोइत्रा को निलंबित करने की मांग भी की। इस मामले को लेकर संसद की एथिक्स कमेटी जांच कर रही है। शुव््रावार को महुआ मोइत्रा ने एथिक्स कमेटी को एक पत्र लिखकर कहा कि वो 31 अक्टूबर को कमेटी के सामने पेश नहीं हो पाएंगी। बल्कि 5 नवम्बर को आ सवेंगी। अडानी समूह को लेकर उन्होंने माना कि संसद में पूछे गए उनके 9 सवाल अडानी समूह से जुड़े थे। उन्होंने अखबार से कहा कि सवाल एकदम वाजिब थे और राष्ट्रीय हित में थे। अडानी के खिलाफ सवाल पूछने के लिए हीरानंदानी से पैसे लेने के आरोप के बारे में उन्होंने कहा आप बताएं पैसे कहां है। मुख्य बात साबित करनी होगी कि इसमें आपसी मिलीभगत थी। दर्शन ने अपने हलफनामे में लिखा कि वो नरेन्द्र मोदी के बड़े पैन हैं, तो फिर उन्होंने अडानी पर हमला क्यों किया? मेरे सवालों को लेकर देहाद्राईं ने जो विश्लेषण दिया है वो मजाक है। उन्होंने देहाद्राईं की शिकायत को पूरी तरह से फजा बताया और कहा, अपने निजी रिश्तों में नाकाम रहे एक व्यक्ति का इस्तेमाल एक फजा शिकायत दर्ज कराने में किया और मेरे एक दोस्त (दर्शन) के सिर पर बंदूक तानकर उनसे ये करवाया। लेकिन चीजें मेल तो खानी चाहिए.. ये काम अधूरा पड़ गया है। उन्होंने कहा हमारे पास हीरानंदानी का एक हलफनामा है लेकिन उसमें वैश था कोईं जिव््रा नहीं है। हीरानंदानी से मिले महंगे तोहफों के बारे में उन्होंने कहा, जहां तक मुझे याद है दर्शन हीरानंदानी ने मेरे जन्मदिन पर मुझे एक हमैस स्कार्प दिया था। मैंने उनसे बॉबी बराउन मेकअप सैट मांगा था लेकिन उन्होंने मुझे एक मैक आईं शैडो और लिपस्टिक दिया। उन्होंने आगे अखबार को कहा कि जब भी वो मुंबईं या दुबईं में होती थी दर्शन हीरानंदानी की कार उन्हें एयरपोर्ट से पिक और ड्रॉप करती थीं। उन्होंने कहा मैं ये स्वीकार करती हूं कि निजी रिश्ते चुनने के मामले में मैंने गलती की है, लोगों को चुनने के मामले में मेरा टेस्ट खराब है। मैं मानती हूं कि मैं इसकी दोषी हूं और मुझे इससे जल्द बाहर आना चाहिए। तृणमूल कांग्रोस से समर्थन मिलने पर महुआ ने जवाब दिया मैं पाटा की वफादार सेवक हूं और मरते दम तक रहूंगी। ममता बनर्जा मेरी मां की तरह हैं।

Sunday, 29 October 2023

गाजा में इजरायली सेना की चुनौतियां

सेना की चुनौतियां इजरायली सेना ने बीते बुधवार गाजा पट्टी के उत्तरी हिस्सों में घुसकर वुछ जगहों पर निशाना लगाया। इजरायली सेना ने कहा है कि कईं घंटों तक भले इस मिशन में उनका एक भी सैनिक घायल नहीं हुआ है। इजरायली सेना इस तरह के जमीनी हमले के लिए पिछले कईं दिनों से तैयारियां कर रही थी। इस दिशा में पिछले कईं दिनों से गाजा पट्टी से लगती इजरायली सीमा पर इजरायली सैनिक और सैन्य साजो-सामान इकट्ठा होता दिखा है। इजरायल के जमीनी हमले को लेकर लगातार आशंकाएं जताईं जा रही थीं। हालांकि इसे एक बेहद जोखिमपूर्ण और अनिाितताओं से भरा अभियान बताया जा रहा था। बीबीसी अरबी सेवा के पेरास गिलानी ने मध्य पूर्व कईं मुद्दों को कवर किया है। उन्होंने पिछले कईं मौकों पर गाजा से रिपोर्ट की है। हमास ने सुरंगों का एक विशाल नेटवर्व बनाने के लिए गाजा पट्टी की जमीन को खोखला कर दिया है। हमास की ओर से खोदी गईं सुरंगें सैंकड़ों किलोमीटर तक फैली हुईं हैं। इन सुरंगों के जरिए हमास गाजा की संकरी और घनी आबादी वाली सड़कों के नीचे से सामान ले जाते हैं। यह काम पकड़ में भी नहीं आता है। इजरायल के प्राधानमंत्री बेंजामिन नेतान्याहू ने 7 अक्टूबर के हमले के बाद हमास को वुचलने और खत्म करने की कसम खाईं है। इस हमले में 1400 से अधिक इजरायली मारे गए हैं। हमास के स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक गाजा पर इजरायली सेना के हवाईं हमलों में अब तक करीब सात हजार लोग मारे जा चुके हैं। बुधवार को ही इन हमलों में 500 लोगों की मौत हुईं है। हमास के हथियार गाजा पर इजरायल के जमीनी हमले के बाद से ये सुरंगे हमास की युद्ध रणनीति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन जाएंगी। जमीनी हमले की आशंका के बाद से हमास भोजन, पानी और हथियार जमा कर रहा होगा। माना जाता है कि हमास की कईं सुरंगे इजरायल तक पैली हुईं हैं। हमास के लड़ाके इनके जरिए इजरायली सैनिकों पर घात लगाकर हमले कर सकते हैं। इजरायल का मानना है कि हमास को 30000 सैनिक स्वचालित राइफल, हैंड ग्रोनेड और एंटीटैंक मिसाइल चलाने में माहिर हैं। हमास को फिलस्तीनी इस्लामिक जिहाद और छोटे इस्लामिक गुटों जैसे अन्य समूहों का भी समर्थन हासिल है। मौसूल में इराकी सुरक्षा बलों और आईंएस के लड़ाकों के बीच लड़ाईं करीब 9 महीने चली थी। हाल के इतिहास ने हमें यह दिखाया है कि शहरी क्षेत्र में लड़ाईं कितनी खतरनाक हो सकती है। एक बड़ा खतरा है वो है निशाने बाजों का जो पूरे शहर की इमारतों और मलबे के बीच में घिरे रहते हैं और दुश्मन के सैनिकों को चुन-चुन कर निशाना बनाते हैं। इजरायली सेना के हमास के प्राशिक्षित निशानेबाजों से लड़ने का भारी जोखिम उठाने या उन्हें रोकने के लिए इमारतों को ऊपर से पूरी तरह समतल करने के विकल्प का सामना करना पड़ सकता है, अतीत में लोगों को ओर भी दूर भेजने के लिए सौदे किए गए हैं। साल 1982 में फिलस्तीन मुक्ति संगठन लेबनान की राजधानी बेरूत छोड़ने पर सहमत हुआ था। जहां उसे इजरायली सेना ने 3 महीने से घेरा हुआ था। वे अलग-अलग देशों में जाने पर सहमत हुए थे। इस तरह का समझौता गाजा के लड़ाको और नागरिकों की मौतों को कम करने का एक रास्ता हो सकता है लेकिन यह बेहद मुश्किल है कि यह राजनीतिक रूप से वैसे अमल में लाया जा सकता है। फिलस्तीनी लोग अपना वतन और जमीन छोड़ने पर कभी भी तैयार नहीं होंगे। इसलिए फिलहाल लड़ाईं जारी रहेगी। ——अनिल नरेन्द्र

8 पूर्व सैनिकों को जासूसी के आरोप में मृत्युदंड

कतर की एक अदालत द्वारा बृहस्पतिवार को भारत के आठ पूर्व सैनिकों को मौत की सजा सुनाया जाना स्तब्ध और विचलित करने वाली है। इन सभी को पिछले साल अगस्त में इजरायल के लिए एक पनडुब्बी कार्यंव््राम पर जासूसी के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। हाल की कतर प्राशासन की तरफ से इन पर लगे आरोपों को सार्वजनिक नहीं किया गया है। अल दहरा वंपनी के लिए काम करने वाले जिन पूर्व नौसैनिकों को सजा सुनाईं गईं है, उनमें वैप्टन नवतेज सिह गिल, वैप्टन सौरभ वशिष्ठ, कमांडर पूण्रेंदु तिवारी, वैप्टन बीरेन्द्र वुमार वर्मा, कमांडर सुगुनाकर पकाला, कमांडर संजीव गुप्ता, कमांडर अमित नागपाल और नाविक रागेश गोपावुमार शामिल हैं। अल दहरा एक ओमात्री नागरिक और रॉयल ओमानी वायुसेना के पूर्व अधिकारी के स्वामित्व वाली रक्षा सेवा प्रादाता वंपनी है। भारतीय नौसैनिकों को मौत की सजा सुनाईं जाने की जानकारी विदेश मंत्रालय की तरफ से दी गईं है। मंत्रालय ने बताया, हमारे पास अभी बस शुरुआती जानकारी आईं है कि कतर की कोर्ट फस्र्ट इंस्टांस ने इस मामले में सजा सुनाईं है। बयान में कहा गया है कि इन भारतीयों को फांसी की सजा से हम हतप्राभ हैं और ब्यौरे का इंतजार कर रहे हैं। इन आठ लोगों को बीते साल अक्टूबर में कतर में गिरफ्तार किया गया था। 26 अक्टूबर 2023 को कोर्ट ने इन्हें मौत की सजा सुनाईं है। स्थानीय मीडिया में आ रही रिपोर्टो के अनुसार इन पर इजरायल के लिए कतर के सबमरीन कार्यंव््राम की जासूसी करने का आरोप है। हालांकि अब तक कतर ने इस पर कोईं टिप्पणी नहीं की है। न तो भारत ने और न ही कतर ने इन लोगों पर लगे आरोपों के बारे में जानकारी दी है। पिछले साल 25 अक्टूबर को मीतू भार्गव नाम की एक महिला ने एक्स पर पोस्ट कर बताया था कि भारतीय सेना के आठ पूर्व अधिकारियों को दोहा में बीते 5-7 दिनों से रखा गया है। उन्होंेने भारत सरकार से इस मामले में जल्द कार्रवाईं की मांग की थी। मीतू 64 वषाय कमांडर (रिटायर्ड) पूर्णेदु तिवारी की बहन है। कतर प्राशासन ने अगस्त 2022 को 8 पूर्व नौसैनिकों को हिरासत में लिया था, लेकिन महीनों बाद तक यह नहीं बताया कि उन्हें किस आरोप में पकड़ा है। विदेश मंत्रालय की पहल पर यह मामला सुर्खियों में आ गया। तब कतर ने उन पर इजरायल के लिए जासूसी का आरोप मढ़ दिया। भारतीय नागरिकों पर लगे जासूसी के आरोप का इसलिए कोईं मूल्यमहत्व नहीं, क्योंकि वे कतर स्थित जिस वंपनी में काम कर रहे थे, वह ओमान के एक नागरिक की थी। कतर का भारत विरोधी रवैया नया नहीं है। भारत और कतर के संबंधों में हाल-फिलहाल मधुरता कम ही दिखी है। दोनों देशों के रिश्तों के बीच खटास हाल में तब दिखी जब पिछले साल जून में बीते दिनों भाजपा नेता नुपूर शर्मा ने पैंगेंबर मोहम्मद के खिलाफ विवादास्पद टिप्पणी की थी। कतर पहला देश था जिसने इसकी आलोचना की थी। उस दौरान भारतीय राजदूत को कतर सरकार की ओर से समन तक जारी किया गया था। उसने दोहा में पुटबाल विश्वकप के दौरान भारत से भागे जिहादी प्राचारक जाकिर नाइक की खातिरदारी की थी और नुपूर शर्मा के मामलों को भी तूल दिया था। अब जरूरी यह है कि भारत सरकार किसी भी तरह इन बंधक नौसैनिकों को बचाए। वूटनीतिक प्रायासों के साथ-साथ कानूनी दांवपेच सभी का इस्तेमाल किया जाना चाहिए। हो सके तो प्राधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को भी इसमें सीधा हस्तक्षेप करना चाहिए।