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Tuesday, 17 October 2023
तिहाड़ जेल पहुंचे संजय सिह
विवादित शराब नीति ने आखिरकार आप सांसद संजय सिह को भी सलाखों के पीछे पहुंचा दिया। जांच एजेंसी के अनुरोध पर अदालत ने उन्हें शुव््रावार को 27 अक्टूबर तक के लिए न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया है। उन्हें 16 किताबें जेल में ले जाने की अदालत ने इजाजत भी दे दी। संजय सिह को पुलिस सुरक्षा में कोर्ट से शुव््रावार शाम तिहाड़ जेल लाया गया। इन्हें जेल संख्या दो में जगह दी गईं है।
आबकारी घोटाले से जुड़ी मनी लांड्रिंग मामले में सुनवाईं के दौरान राजनीतिक बयानबाजी पर राऊज एवेन्यू कोर्ट ने राज्यसभा सांसद संजय सिह को फटकार लगाईं। विशेष न्यायाधीश एम.के. नागपाल ने संजय सिह को चेतावनी देते हुए कहा कि अगर मुकदमें से संबंधित आपको वुछ कहना है तो बेझिझक कहिए। अदालत ने मौखिक रूप से कहा कि राजनीतिक बयान स्वीकार्यं नहीं हैं। अगर आगे आप ऐसा करते हैं तो आपकी पेशी वीडियो कांप्रोसिग से करने का आदेश दिया जाएगा। अदालत ने साथ ही संजय सिह के मुकदमे के इतर बयान नहीं देने का भी निर्देश दिया। अदालत ने यह टिप्पणी तब की जब सुनवाईं के दौरान संजय सिह ने कहा कि अडानी के विरुद्ध घोटालों की जांच के लिए ईंडी को शिकायत की थी। लेकिन जांच नहीं हुईं। इस पर आपत्ति जताते हुए अदालत ने कहा कि अगर आपको मोदी और अडानी को लेकर राजनीतिक बयानबाजी या भाषण देना है तो उनसे मैं वीडियो कांप्रोसिग से आपकी पेशी के लिए आदेश जारी करूंगा।
सुनवाईं के दौरान संजय सिह ने यह भी कहा कि मुझे आठ दिन की ईंडी रिमांड पर भेजा गया ताकि आरोपियों से आमना-सामना कराया जा सके, लेकिन इस दौरान ईंडी ने केवल एक व्यक्ति से आमनासामना कराया। संजय सिह ने कहा कि उनसे आठ दिनों रोज केवल दो से तीन घंटे की पूछताछ की जाती थी और इसमें भी प्राकरण से जुड़े सवाल नहीं पूछे जाते थे। संजय सिह ने कहा कि उनसे जांच एजेंसी ने यह जानने की कोशिश की थी कि उन्होंने अपनी पत्नी को 10 हजार रुपए क्यों भेजे? पिता से उधार लेकर बच्चे के इलाज के लिए दिए गए एक लाख रुपए के बारे में सवाल पूछा गया? वहीं संजय सिह के अधिवक्ता ने कहा कि उनके मुवक्किल के खिलाफ केवल एक बड़ा कारण बनाने के लिए ईंडी ने आठ दिन की कस्टडी मांगी थी। उधर आबकारी घोटाले में ईंडी द्वारा गिरफ्तारी और रिमांड को चुनौती देने वाली आप सांसद संजय सिह की याचिका पर दिल्ली हाईंकोर्ट ने ईंडी से जवाब मांगा है। न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा की पीठ ने ईंडी को नोटिस जारी कर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया। इसके पहले संजय सिह के अधिवक्ता ने सुबह मुख्य न्यायाधीश सतीश चंद्र शर्मा और न्यायमूर्ति संजीव नरूला की पीठ के समक्ष मामले को तत्काल सूचीबद्ध करने का उल्लेख किया था। मुख्य पीठ ने मामले की तत्काल सुनवाईं की अनुमति दे दी थी। ईंडी ने कहा कि निचली अदालत ने संजय सिह को न्यायिक हिरासत में भेज दिया है और जवाब दाखिल करने के लिए दो दिन का अवसर दिया जाए। अदालत ने ईंडी के अनुरोध को स्वीकार कर सुनवाईं 17 अक्टूबर तक के लिए स्थगित कर दी।
—— अनिल नरेन्द्र
हमास की सुरंगें
इजरायल का कहना है कि वह गाजा में जमीन के नीचे बिछी सुरंगों के जाल को अब निशाना बना रहा है जिसे हमास ने तैयार किया है। शनिवार को इजरायल पर हुए हमले के जवाब में इजरायल लगातार गाजा को निशाना बना रहा है। लेकिन इजरायल के लिए बड़ी सिरददा व चुनौती वो सुरंगें हैं जिनका इस्तेमाल हमास इजरायल पर हमले के लिए करता है। इजरायल सेना के प्रावक्ता ने कहा था, गाजा की ऊपरी परत पर आम लोग रहते हैं। वहीं इनके नीचे एक दूसरी परत है जिसका इस्तेमाल हमास करता है। हम इस वक्त उस दूसरी परत को निशाना बना रहें हैं जो गाजा में जमीन के नीचे हैं। इजरायली प्रावक्ता का कहना है कि ये आम लोगों के लिए बने कोईं बंकर नहीं हैं। ये सिर्प हमास और अन्य आतंकवादी संगठनों के लिए हैं ताकि वे इजरायली राकेटों से बचे रहें हैं और अपने ऑपरेशन की योजना बनाते रहे हैं ताकि इजरायल पर हमले जारी रहें। गाजा में सुरंगों के नेटवर्व के सबूत का आंकलन करना मुश्किल काम है। इजरायल हमास की इन सुरंगों को गाजा मैट्रो बोलता है। ऐसा माना जाता है कि ये सुरंगें सारे गाजा में अटी पड़ी हैं। साल 2021 में हुए संघर्ष के बाद इजरायली सेना ने कहा था उन्होंने गाजा में 100 किलोमीटर लंबी टेढ़ी-मेढ़ी सुरंगें तबाह कर दी हैं। लेकिन हमास ने दावा किया था कि उन्होंने गाजा में 500 किलोमीटर लंबी सुरंगे बनाईं हैं और इजरायली हमले में सिर्प 5 प्रातिशत सुरंगे ही तबाह हुईं हैं। गाजा सुरंग इन आंकड़ों को ऐसे समझिए कि पूरे लंदन शहर में फैली अंडरग्राउंड मैट्रो सिर्प 400 किलोमीटर है और उसमें से भी अधिकतर जमीन के ऊपर है। साल 2005 में गाजा से इजरायली सेना और यहूदी बाशिदे पीछे हट गए थे।
उसके बाद वहां सुरंगों का निर्माण शुरू हो गया था। लेकिन दो साल बाद हमास के हाथ में गाजा का नियंत्रण आ गया और फिर सुरंगों के इस जाल में बेतहाशा इजाफा होने लगा। हमास के सत्ता में आते ही इजरायल और मिरत्र ने अपनी बार्डर व््रासिग पर सामान लोगों की आवाजाही सीमित कर दी थी। इसके जवाब में हमास ने सुरंगों पर ध्यान देना शुरू किया। हमास ने दावा किया है कि उनके पास 500 किलोमीटर की सुरंगे हैं। साल 2006 में चरमपंथियों ने इजरायल की सरहद को पार करने वाली एक सुरंग के जरिए इजरायल के भीतर घुसकर दो सैनिक मार डाले थे। गिलाड नाम के एक सैनिक को अगवा कर लिया था और उसे 5 साल तक बंदी बनाकर रखा गया।
साल 2013 में इजरायली सेना ने गाजा पट्टी से अपने एक गांव तक 18 मीटर गहरी और 1.6 किलोमीटर लंबी सुरंग खोजी थी। उसके अगले साल इजरायल ने इन सुरंगों को नष्ट किया था। लेकिन चरमपंथियों के हमले में चार सैनिक भी मारे गए थे। गाजा के भीतर सुरंगों का मकसद आम सुरंगों से अलग है। हमास वहां लंबे समय तक रहना चाहता है।
उनमें व्यवस्थाएं मौजूद रहती हैं ताकि वहां जीवन जिया जा सके। वहां उनके नेता छिपे रहते हैं। उनका कमांड और वंट्रोल सिस्टम भी वहीं है। इन सुरंगों का इस्तेमाल ट्रांसपोर्ट के अलावा कम्युनिकेशन के लिए भी किया जाता है, इसमें बिजली, लाइट और रेल ट्रैक तक की सुविधा होती है। आप इनमें चल फिर सकते हैं। हमास ने सुरंगें खोदने में महारथ हासिल कर ली है। उन्होंने सीरिया में विद्रोही लड़ाकों से इस कला को सीखा है। कहा जाता है कि गाजा में सुरंगें जमीन से 30 मीटर नीचे है और उनमें घुसने के लिए घरों के बेसमेंट में रास्ते हैं।
सुरंगों में मस्जिद, स्वूल और अन्य सार्वजनिक जगहों से भी दाखिल हुआ जा सकता है।
Saturday, 14 October 2023
चेतावनी को गंभीरता से नहीं लिया
अमेरिकी कांग्रोस की एक समिति के चेयरमैन ने कहा है कि बीते शनिवार को इजरायल पर हुए हमास के घातक हमले से तीन दिन पहले मिरत्र ने सीमा पार से संभावित हमले की चेतावनी दी थी। हाउस ऑफ रिप्रोजेन्टेटिव्स के विदेश मामलों की समिति के प्रामुख माइकल मैकॉल ने फिलस्तीन के समूह हमास की इस कथित चेतावनी के बारे में मीडिया से बात की। इजरायल के पीएम बेंजामिन नेतन्याहु ने इन रिपोर्टो को हालांकि बिल्वुल गलत बताया है। इजरायल के 75 साल के इतिहास में हमास ने कईं बार जानलेवा हमला किया है। अब तक 1100 से ज्यादा इजरायलियों की जान जा चुकी है। इजरायली खुफिया एजेंसी मौसाद पहले ही जांच के घेरे में है। कहा जा रहा है कि मौसाद को हमास के हमले की भनक क्यों नहीं लगी? इसे मौसाद की सबसे बड़ी नाकामी के रूप में देखा जा रहा है।
समाचार एजेंसी एएफटी के अनुसार मध्य-पूर्व में जारी संकट को लेकर बुधवार को सांसदों के लिए बंद दरवाजों के पीछे एक खुफिया ब्रीफिग रखी गईं थी। इस बैठक के बाद माइकल मैकॉल ने बताया, हम जानते हैं कि मिरत्र ने हमास के हमले में तीन दिन पहले इजरायल के अधिकारियों को चेतावनी दी थी कि इस तरह की कोईं घटना हो सकती है। माइकल मैकॉल टेक्सास से सांसद है और रिपब्लिकन पाटा से हैं। उन्होंने कहा कि ये गोपनीय जानकारी है और मैं इसके बारे में ज्यादा विस्तार से बताना नहीं चाहता। मिरत्र की खुफिया एजेंसी के एक अधिकारी ने नाम न बताने की शर्त पर एसोसिएटिड प्रौस को बताया, हमने चेतावनी दी थी कि स्थिति विस्फोटक होने वाली है और यह बहुत जल्द होगा और बड़ा होगा लेकिन हमारी ऐसी चेतावनी को कम करके आंका गया। हमास के हमले के बाद इजरायल में बनी इमरजेंसी सरकार। इजरायल की आपातकालीन सरकार की पहली बैठक के बाद प्राधानमंत्री बेंजामिन नेतान्याहू ने चेतावनी दी है कि हमास के सभी सदस्यों को खत्म कर दिया जाएगा। नेतान्याहू के करीब मौजूद विपक्षी नेता बेनीगैरन्स ने कहा है कि यह युद्ध का वक्त है। वहीं अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने कहा है कि उन्होंने नेतान्याहू से बात की है और स्पष्ट किया है कि इजरायल को युद्ध के नियमों का पूंरी तरह पालन करना होगा। बाइडन ने कहा, हम इजरायली नागरिकों का गुस्सा और उनकी परेशानियां समझते हैं। लेकिन हमने इजरायल से कहा है कि वो जेनेवा समझौते का पालन करें। बाइडन ने हमास के हमले का स्वागत करने के लिए ईंरान को भी चेतावनी दी और कहा कि सावधान रहें। हमास के हमले के चार दिन बाद बुधवार को नेतान्याहू और बेनीग्रौरन्स ने राजनीतिक प्रातिबद्धता को अलग रखते हुए युद्धकालीन सरकार बनाने के लिए साथ आने का पैसला किया था। वैचारिक मतभेद के कारण दोनों नेता एक-दूसरे के विरोधी बने हुए थे। नेतान्याहू के प्रास्तावित न्यायिक सुधारों की विपक्षी पार्टियां और जनता जमकर विरोध कर रही थीं और इसे लेकर उनके समर्थक व जनता देश भर में विरोध प्रादर्शन कर रहे थे।
इन विरोध प्रादर्शनों को नेतान्याहू के राजनीतिक प्रातिद्वंद्वियों के अलावा सेना और खुफिया विभाग के पूर्व वरिष्ठ अधिकारियों, पूर्व चीफ जस्टिस और बिजनेस लीडर्स का भी समर्थन हासिल था। देश की नईं युद्धकालीन सरकार गठबंधन सरकार है, जिसमें नेतान्याहू और बेनीगैरंस के अलावा पूर्व रक्षा मंत्री शामिल हैं। वहीं वॉर वैबिनेट नाम से एक अस्थायी वैबिनेट भी बनाईं गईं है, जिसमें रक्षा मंत्री मौआव गैलान्ट शामिल हैं। देश के मुख्य विपक्षी नेता यलैपिड ने गठबंधन से दूर रहने का पैलसा किया है। कहा गया है कि युद्ध के दौरान किसी बिल पर बात नहीं होगी और ऐसे कोईं पैसले नहीं लिए जाएंगे, जिनका नाता युद्ध से न हो।
——अनिल नरेन्द्र
क्या वसुंधरा को किनारे करना महंगा पड़ेगा?
ऐसी चर्चाएं पहले से तेज थी लेकिन प्राधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने लगातार दो जन सभाओं में मानों उन पर मुहर लगा दी। वह जिस खुली जीप पर सवार होकर आए, उनके साथ सिर्प भाजपा के प्रादेश अध्यक्ष और सांसद सीपी जोशी थे, पूर्व मुख्यमंत्री और प्रादेश की प्राभावशाली नेता वसुंधरा राजे नहीं थीं। मंच का संचालन दीया वुमारी कर रही थीं। मंच पर प्रादेश भाजपा की कईं महिला नेता भी मौजूद थीं। दीया वुमारी की संघनिष्ठ पर नेताओं का अप्रात्याशित समर्थन भी पाटा के पुराने पहरेदारों को चौंका रहा है। प्राधानमंत्री ने जयपुर की सभा में न तो पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे का जिव््रा किया और न ही उनके नेतृत्व वाली पूर्ववर्ता भाजपा सरकार की उपलब्धियों का। राजस्थान में चेहरा विहीन भाजपा की इस स्थिति को लेकर चर्चाएं छिड़ गईं हैं। भाजपा ने नईं संसद के पहले ही सत्र में नारी शक्ति वंदन विधेयक को दोनों सदनों में पारित करवाया है। ऐसे समय में प्रादेश की एक ताकतवर महिला नेता अगर अग्राणी भूमिका में नहीं दिख रही हैं तो जाहिर है लोगों का ध्यान उस पर जाएगा ही। हैरान करने वाली बात यह है कि एक मनोभावों नेता की तरह वे अपने गुस्से और मान अनुभवों को लगातार पी रही हैं। उन्होंने अब तक ऐसी कोईं प्रातिव््िराया सार्वजनिक तौर पर नहीं दी है, जिसकी उम्मीद उनसे बहुत से राजनीतिक खेमे ने लगाईं हुए है। राजस्थान की राजनीति में करीब दस साल पहले अपने एक प्रातिद्वंद्वी को दी अशोक गहलोत की एक नसीहत याद करें। जो नेता इन प्रादेश में जहर पीना सीख जाता है। वह कामयाब हो जाता है और जो नहीं पी सकता वह दरकिनार हो जाता है। वुछ लोग मान रहे हैं कि वसुंधरा इस समय गहलोत की पुरानी सलाह पर अमल कर रही हैं।
प्राधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सारे कयासों को दरकिनार करते हुए सोमवार को चित्ताैड़गढ़ के सांवरिया सेठ में हुईं सभा में साफ कहा, इस विधानसभा चुनाव में सिर्प एक ही चेहरा है और वह है कमल, हमारा उम्मीदवार सिर्प कमल है। इसलिए एकजुटता के साथ कमल को जिताने के लिए भाजपा कार्यंकर्ता काम करें। मौजूदा राजनीतिक परिप्रोक्ष्य में अब प्राश्न उठ खड़ा हुआ है कि भाजपा ने राज्य में किसी को मुख्यमंत्री का चेहरा क्यों नहीं बनाया है? इसके पीछे क्या वजह है? वसुंधरा राजे की अपेक्षा क्यों हो रही है? क्या यह स्थिति भाजपा के पक्ष में जाएगी? संघ और भाजपा के नेता अब पाटा को एक नए चरित्र में ढालने तो जा रही है, पाटा संगठन में वो जनरेशन शिफ्ट भी कर रहे हैं। एक प्रामुख संघनिष्ठ भाजपा नेता का कहना है, मोदी देश भर में अमृतकाल की टीम तैयार कर रहे हैं, जो 2047 में पाटा को अभूतपूर्व कामयाबी के दौर में ले जाए और आज जो चेहरे तय हो रहे हैं, वे अगले 25 साल के लिए होंगे। इसलिए अभी और बदलाव देखने को मिलेंगे। संघ के पुराने नेता व भाजपा में कईं राजनीतिक पीढ़ियों का उतार-चढ़ाव देख चुके एक अनुभवी संघी कहते हैं, देश हो या प्रादेश, अच्छे परिवर्तन हो रहे हैं। नए लोग आने ही चाहिए, नए तभी आएंगे, जब पुराने अपने अनुभवों से और नए अपने काम से संगठन को मजबूत बनाएंगे। एमएलए हो या एमपी तीन बार से अधिक मौका नहीं दिया जाना चाहिए, तभी तो युवा आगे आएंगे। प्रादेश में एक बार कांग्रोस और एक बार भाजपा वाले हिसाब से देखा जाए तो इस बार भाजपा की बारी है, ऐसे में भाजपा आलाकमान ने वसुंधरा जैसी ताकतवर नेता को दरकिनार करने का जो निर्णय लिया है वह कहीं भाजपा को भारी न पड़ जाए।
Wednesday, 4 October 2023
मामला पुरानी पेंशन बहाली का
अगले साल होने वाले लोकसभा चुनाव में इस बार पुरानी पेंशन योजना का जादू सिर चढ़कर बोलेगा। रामलीला मैदान में रविवार को आयोजित पेंशन शंखनाद महारैली के दौरान लाखों लोगों ने नेशनल मूवमेंट फॉर ओल्ड पेंशन स्कीम (एनएमओपीएस) के समर्थन में विपक्षी गठबंधन के घटक दलों के कईं नेता इसमें शामिल हुए। केन्द्र और राज्य सरकारों के कर्मचारियों व संगठनों के नेताओं ने पेंशन शंखनाद महारैली में कहा कि अगर सरकार अपनी जिद नहीं छोड़ती है तो वोट की चोट के आधार पर पुरानी पेंशन बहाल करवाएगी। कर्मचारी नेताओं की मानें तो सरकारी कर्मियों, पेंशनरों और उनके रिश्तेदारों को मिलाकर यह संख्या 10 करोड़ के पार चली जाती हैं। चुनाव में बड़ा उलटपेर करने के लिए यह संख्या निर्णायक साबित हो सकती है। इस रैली में केन्द्र एवं राज्यों के कर्मचारी संगठनों ने भाग लिया। रैली का आयोजन नेशनल मूवमेंट फॉर ओल्ड पेंशन स्कीम के बैनर तले हुआ है। एनएमओपीएस के राष्ट्रीय अध्यक्ष विजय वुमार बंधु ने कहा कि पुरानी पेंशन कर्मियों का अधिकार है। वे इसे लेकर ही रहेंगे। देश भर से आए सरकारी कर्मचारियों से रामलीला मैदान खचाखच भरा हुआ था। कर्मचारी नेताओं की माने तो इस रैली की तैयारियां करीब एक वर्ष से चल रही थी। कईं राज्यों के कर्मचारी दो-तीन दिन पहले ही दिल्ली पहुंच गए थे। रेल, बसें और दूसरे वाहनों में बैठकर कर्मचारी दिल्ली पहुंचे थे। अनेक कर्मियों को रेल की तत्काल टिकट लेनी पड़ी।
रविवार सुबह 11 बजे ही रामलीला मैदान पूरी तरह से भर चुका था।
रामलीला मैदान के चारों तरफ की सड़कों पर कर्मियों के जत्थे चल रहे थे। कर्मियों द्वारा पेंशन का नारा लगाया जा रहा था। इससे पहले वेंद्रीय कर्मचारियों के संगठनों ने 10 अगस्त को रामलीला मैदान में एक विशाल रैली आयोजित की थी। अब नेशनल मूवमेंट फॉर ओल्ड पेंशन स्कीम द्वारा पेंशन शंखनाद महारैली आयोजित की गईं। ओल्ड पेंशन स्कीम को लेकर मोदी सरकार की प्रातिव््िराया आ रही है। इसी साल बीते फरवरी में संसद में पीएम मोदी ने खुद राज्यों को बताया था और बिना ओल्ड पेंशन स्कीम का नाम लिए कहा था कि मैं राजनीति पर वैचारिक मतभेदों को अलग रखकर कहना चाहता हूं कि देश की आर्थिक सेहत से खिलवाड़ मत कीजिए। आप कोईं ऐसा पाप मत कीजिए जो अपने बच्चों के अधिकारों को छीन ले। कईं सालों से पूरे देश में इस मांग को लेकर आंदोलन चल रहे हैं, पिछले विधानसभा चुनावों में यह मुद्दा भी बना। राजस्थान, हिमाचल प्रादेश, छत्तीसगढ़ और झारखंड जैसे राज्यों ने अपने राज्य कर्मचारियों के लिए इसे लागू भी कर दिया है। पंजाब में आम आदमी पाटा सरकार ने नोटिफिकेशन जारी कर दिया है। हालांकि अभी तक ये लागू नहीं हुआ है। हिमाचल में तो यह कांग्रोस का बड़ा चुनावी वादा था।
—— अनिल नरेन्द्र
स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव
इस बार विधानसभा चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों को अखबारों में विज्ञापन देकर अपने आपराधिक रिकार्ड को बताना होगा। अभी यह व्यवस्था पर्चा भरते समय केवल फार्म में लिखने तक सीमित थी। चुनाव आयोग राजस्थान में होने वाले विधानसभा चुनाव में इसे लागू करेगा। एक और पहल के तहत राजनीतिक दलों को यह कारण बताना होगा कि उन्होंने अपने उम्मीदवार को किस आधार पर चुना है। मुख्य चुनाव आयुक्त राजीव वुमार ने जयपुर में रविवार को कहा कि चुनाव आयोग स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव के लिए प्रातिबद्ध है। जिसमें मतदान आम आदमी के लिए आसान बनाना और मतदान प्रातिशत बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया गया है। आयुक्त ने यह भी कहा कि आयोग के समक्ष अनिवार्यं मतदान का कोईं प्रास्ताव नहीं है। मुख्य चुनाव आयुक्त राजीव वुमार ने रविवार को कहा कि राजस्थान विधानसभा चुनाव में पहली बार बुजुर्ग मतदाताओं के साथ-साथ 40 फीसदी दिव्यांगता वाले व्यक्तियों के लिए भी घर पर ही वोट देने की सुविधा उपलब्ध होगी। आयोग अक्टूबर के दूसरे हफ्ते में राजस्थान में विधानसभा चुनाव की तिथियों की घोषणा कर सकता है। राज्य में 200 विधानसभा सीटें हैं और राज्य विधानसभा का कार्यंकाल 14 जनवरी को खत्म होगा। घर से मतदान की पहल मतदान प्रातिशत बढ़ाने और मतदान में आसानी बढ़ाने के लिए की गईं है।
साथ ही राज्य के कानून प्रावर्तन एजेंसियों को सीमा क्षेत्र खासकर हरियाणा और पंजाब सीमा पर शराब और नकदी के परिवहन की जांच करने के सख्त निर्देश दिए गए हैं। आयोग ने तीन दिवसीय दौरे के दौरान राजनीतिक दलों के प्रातिनिधियों, मुख्य सचिव, पुलिस महानिदेशक, जिला कलैक्टरों, जिला पुलिस अधीक्षकों और अन्य अधिकारियों के साथ बैठक की। चुनाव में 1600 मतदान केन्द्रों का प्राबंधन महिलाएं, 200 केन्द्रों का प्राबंधन दिव्यांगजन और 1600 वेंद्रों का प्राबंधन नवनियुक्त युवाओं द्वारा किया जाएगा। वुल 51756 मतदान केन्द्रों में से 50 प्रातिशत की वेबकास्टिंग भी की जाएगी। आयोग ने मतदान बढ़ाने के लिए इस बार 75 फीसदी मतदान का नारा दिया है। यह मिशन सभी 5,756 मतदान केन्द्रों पर चलेगा। 2018 के विधानसभा चुनाव में राज्य में 74 फीसदी मतदान हुआ था। इसमें महिला मतदाताओं की संख्या 74.68 फीसदी और पुरुष मतदाताओं की संख्या 73.83 फीसदी थी।
केवल 103 ऐसे पोलिग बूथ थे जहां पर राज्य के औसत से कम मतदान हुआ था। इसमें 17,500 संवेदनशील मतदान वेंद्र थे। हम चुनाव आयोग के इन कदमों का स्वागत करते हैं। स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव हो यह लोकतंत्र की नींव है। चुनाव आयोग ने ईंवीएम मशीनों में गड़बड़ी पर भी ध्यान देने की बात की है। उन्होंेने कहा कि कहीं से भी ईंवीएम में छेड़छाड़ की खबर मिलते ही डेढ़ घंटे के अंदर आयोग की टीम जांच करने पहुंच जाएगी। देखना यह है कि राजनीतिक दल आयोग के निर्देशों का कितना पालन करते हैं?
Thursday, 28 September 2023
ब्रजभूषण के खिलाफ पर्यांप्त सुबूत
महिला पहलवान यौन उत्पीड़न मामलों में आरोपी भारतीय वुश्ती संघ के निवर्तमान अध्यक्ष व भाजपा सांसद ब्रजभूषण शरण सिंह के खिलाफ आरोप तय करने को लेकर शनिवार को राउज एवेन्यू कोर्ट में सुनवाईं हुईं। सुनवाईं के दौरान दिल्ली पुलिस ने कहा कि आरोपी ब्रजभूषण सिंह के खिलाफ केस चलाने के लिए पर्यांप्त सुबूत हैं। जांच में मिले साक्ष्यों के आधार पर दिल्ली पुलिस ने शनिवार को कोर्ट में सुनवाईं के दौरान कहा कि मामले में आरोपी पर मुकदमा चलाया जाना चाहिए। कोर्ट में दिल्ली पुलिस ने कहा कि आरोपी ब्रजभूषण सिंह को जब भी मौका मिलता था वह हरकत करता था। ऐसे में उन पर केस चलना चाहिए और इस मामले में केस चलाने के लिए पर्यांप्त साक्ष्य हैं। दिल्ली पुलिस ने महिला पहलवान उत्पीड़न मामले की जांच में पाया है कि आरोपी ब्रजभूषण को जब भी मौका मिलता था वह उत्पीड़न करता था। दिल्ली पुलिस ने कहा कि ब्रजभूषण को पता था कि वह क्या कर रहा है। उसे जब भी मौका मिलता था वह महिला पहलवान की लज्जा भंग करने की कोशिश करता था। दिल्ली पुलिस ने कहा कि सवाल यह नहीं है कि पीिड़त लड़की ने कोईं प्रतिव्रिया की है या नहीं, सवाल यह है कि उनके साथ गलत किया गया। जो सुबूत और साक्ष्य पेश किए गए हैं वह ब्रजभूषण के खिलाफ आरोप तय करने के लिए पर्यांप्त हैं। मामले की सुनवाईं के दौरान शिकायतकर्ताओं के साथ दिल्ली में डब्ल्यूएफआईं के दफ्तर में हुईं घटना का जिव्र किया और कहा इन शिकायतों का क्षेत्राधिकार दिल्ली में ही बनता है। एक महिला पहलवान का कहना है कि तजाकिस्तान में हुए एक इवेंट के दौरान ब्रजभूषण ने शिकायतकर्ता को कमरे में बुलाया और उसको जबरदस्ती गले लगाया। जब शिकायतकर्ता ने उसका विरोध किया तो ब्रजभूषण ने कहा कि पिता की तरह किया था, उससे साफ पता चलता है कि ब्रजभूषण को पता था कि वह क्या कर रहा है। एडिशनल चीफ मेट्रोपोलिटन मैजिस्ट्रेट हरजीत सिंह जसपाल ने विस्तार से पुलिस की दलीलें सुनीं और आगे की कार्रवाईं के लिए 7 अक्टूबर की तारीख तय कर दी। पुलिस ने अपनी दलीलांे के समर्थन में तीन जजमेंट रेफर की। जनवरी 2023 में जब ब्रजभूषण शरण सिंह पर पहली बार यौन शोषण का आरोप लगाया गया था तो उनका एक वीडियो वायरल हुआ था। वीडियो में वे कहते हैं, मेरे जीवन में मेरे हाथ से एक हत्या हुईं थी। लोग वुछ भी कहें मैंने एक हत्या की है। रविन्द्रर को जिस आदमी ने मारा है, मैंने उसकी पीठ पर बंदूक तान दी और उस बंदूक से तुरंत गोली मार दी और वो मारा गया। सूरज सिंह सपा नेता हैं। उसके मामा पंडित सिंह अखिलेश यादव सरकार में मंत्री रह चुके हैं जिस पर रविन्द्रर को गोली मारने वाले की हत्या की बात ब्रजभूषण शरण सिंह वैमरे पर कह रहे थे। वो रविन्द्रर सूरज सिंह के पिता हैं। ब्रजभूषण पर 1997 में दाउद इब्राहिम के 4 साथियों को शरण देने का भी आरोप लगा था। 1997 में ब्रजभूषण शरण सिंह 6 महीने दिल्ली के तिहाड़ जेल भी गए थे। इन पर टाडा के तहत मुकदमा भी चला था।
——अनिल नरेन्द्र
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