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Wednesday, 4 October 2023
मामला पुरानी पेंशन बहाली का
अगले साल होने वाले लोकसभा चुनाव में इस बार पुरानी पेंशन योजना का जादू सिर चढ़कर बोलेगा। रामलीला मैदान में रविवार को आयोजित पेंशन शंखनाद महारैली के दौरान लाखों लोगों ने नेशनल मूवमेंट फॉर ओल्ड पेंशन स्कीम (एनएमओपीएस) के समर्थन में विपक्षी गठबंधन के घटक दलों के कईं नेता इसमें शामिल हुए। केन्द्र और राज्य सरकारों के कर्मचारियों व संगठनों के नेताओं ने पेंशन शंखनाद महारैली में कहा कि अगर सरकार अपनी जिद नहीं छोड़ती है तो वोट की चोट के आधार पर पुरानी पेंशन बहाल करवाएगी। कर्मचारी नेताओं की मानें तो सरकारी कर्मियों, पेंशनरों और उनके रिश्तेदारों को मिलाकर यह संख्या 10 करोड़ के पार चली जाती हैं। चुनाव में बड़ा उलटपेर करने के लिए यह संख्या निर्णायक साबित हो सकती है। इस रैली में केन्द्र एवं राज्यों के कर्मचारी संगठनों ने भाग लिया। रैली का आयोजन नेशनल मूवमेंट फॉर ओल्ड पेंशन स्कीम के बैनर तले हुआ है। एनएमओपीएस के राष्ट्रीय अध्यक्ष विजय वुमार बंधु ने कहा कि पुरानी पेंशन कर्मियों का अधिकार है। वे इसे लेकर ही रहेंगे। देश भर से आए सरकारी कर्मचारियों से रामलीला मैदान खचाखच भरा हुआ था। कर्मचारी नेताओं की माने तो इस रैली की तैयारियां करीब एक वर्ष से चल रही थी। कईं राज्यों के कर्मचारी दो-तीन दिन पहले ही दिल्ली पहुंच गए थे। रेल, बसें और दूसरे वाहनों में बैठकर कर्मचारी दिल्ली पहुंचे थे। अनेक कर्मियों को रेल की तत्काल टिकट लेनी पड़ी।
रविवार सुबह 11 बजे ही रामलीला मैदान पूरी तरह से भर चुका था।
रामलीला मैदान के चारों तरफ की सड़कों पर कर्मियों के जत्थे चल रहे थे। कर्मियों द्वारा पेंशन का नारा लगाया जा रहा था। इससे पहले वेंद्रीय कर्मचारियों के संगठनों ने 10 अगस्त को रामलीला मैदान में एक विशाल रैली आयोजित की थी। अब नेशनल मूवमेंट फॉर ओल्ड पेंशन स्कीम द्वारा पेंशन शंखनाद महारैली आयोजित की गईं। ओल्ड पेंशन स्कीम को लेकर मोदी सरकार की प्रातिव््िराया आ रही है। इसी साल बीते फरवरी में संसद में पीएम मोदी ने खुद राज्यों को बताया था और बिना ओल्ड पेंशन स्कीम का नाम लिए कहा था कि मैं राजनीति पर वैचारिक मतभेदों को अलग रखकर कहना चाहता हूं कि देश की आर्थिक सेहत से खिलवाड़ मत कीजिए। आप कोईं ऐसा पाप मत कीजिए जो अपने बच्चों के अधिकारों को छीन ले। कईं सालों से पूरे देश में इस मांग को लेकर आंदोलन चल रहे हैं, पिछले विधानसभा चुनावों में यह मुद्दा भी बना। राजस्थान, हिमाचल प्रादेश, छत्तीसगढ़ और झारखंड जैसे राज्यों ने अपने राज्य कर्मचारियों के लिए इसे लागू भी कर दिया है। पंजाब में आम आदमी पाटा सरकार ने नोटिफिकेशन जारी कर दिया है। हालांकि अभी तक ये लागू नहीं हुआ है। हिमाचल में तो यह कांग्रोस का बड़ा चुनावी वादा था।
—— अनिल नरेन्द्र
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