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Wednesday, 2 May 2012

यौन संबंध के लिए सही उम्र क्या हो?

Vir Arjun, Hindi Daily Newspaper Published from Delhi
Published on 2 May 2012
अनिल नरेन्द्र
दिल्ली की रोहिणी जिला अदालत की अतिरिक्त न्यायाधीश डॉ. कामिनी लॉ अपने फैसलों के लिए अकसर चर्चा में रहती हैं। उन्होंने अब एक केस में सांसदों से कहा है कि उन्हें सामाजिक व्यवहार में आए बदलाव को ध्यान में रखते हुए यौन संबंधों के लिए उपयुक्त आयु से जुड़े मौजूदा कानून पर विचार करना चाहिए। अदालत की यह टिप्पणी एक लड़की के कथित अपहरण के मामले में युवक को बरी करते हुए की गई। इस युवक पर आरोप लगाया गया था कि जबरन शादी करने के लिए उसने लड़की का अपहरण किया था। न्यायाधीश लॉ ने कहा कि यह वक्त है कि सांसद सामाजिक व्यवहार और सामाजिक संवेदनाओं को देखते हुए आयु को लेकर सहमति-सुरक्षा से जुड़ी मंजूरी देने संबंधी मौजूदा कानून पर गम्भीरता से सोचें। अदालत ने कहा कि आरोपी युवक और लड़की के बीच प्रेम संबंध था तथा परिवार वालों के विरोध के कारण उन्हें भागना पड़ा। परिवार वाले नहीं चाहते थे कि दोनों शादी करके खुशहाल जिन्दगी बसर करें। अदालत ने कहा कि प्रेम कर रहे नौजवानों को दंडित करने के लिए हमारे देश के कानून तंत्र का इस्तेमाल नहीं किया जा सकता और यह अदालत उस स्थिति में इनकी जिन्दगी बर्बाद नहीं कर सकती। खासकर जब उनके बीच उम्र का फासला स्वीकार्य सीमा तक है और कोई जोर-जबरदस्ती वाली स्थिति भी नजर नहीं आती। अदालत ने कहा कि मामले को यहीं विराम देना चाहिए। किसी भी परिस्थिति में इन नौजवानों का भविष्य उनके अतीत को उजागर करके बर्बाद नहीं किया जा सकता। इस मामले में अदालत ने अशोक विहार के निवासी कृष्ण राय चौधरी को बरी कर दिया। उस पर 20 अक्तूबर 2008 को लड़की को जबरन शादी करने की मंशा से अगवा करने का आरोप लगाया गया था। सुनवाई के दौरान लड़की की मां और उसने कहा कि इस घटना के कुछ महीने बाद ही उसकी उम्र शादी के लिए कानूनी तौर पर वाजिब हो गई थी और फिर बिहार के एक लड़के से शादी हो गई। दोनों ने कहा कि ऐसी स्थिति में उन्हें अदालत में तलब नहीं किया जाए क्योंकि इससे उसकी शादीशुदा जिन्दगी प्रभावित होगी। दस्तावेजी जांच के बाद पता चला कि घटना के वक्त लड़की की उम्र 18-19 साल की थी और आरोपी युवक के खिलाफ कुछ नहीं मिला। ऐसी स्थिति में उसे बरी कर दिया गया था। डॉ. लॉ का यह फैसला इसलिए विवादास्पद माना जाए, क्योंकि किसी भी देश में इस विषय पर एक राय नहीं है। कनाडा में कसैंट की उम्र मई 2008 तक 14 होती थी अब उसे 16 वर्ष कर दिया गया है पर जहां दोनों पार्टनरों की उम्र में पांच साल से कम का फर्प है तो यौन संबंध अपराध नहीं है। अगर युवक की उम्र लड़की से पांच साल ज्यादा है तो वह एक अपराध माना जाएगा। इसी तरह अमेरिका में 50 राज्यों में यौन संबंध की उम्र 16 से 18 वर्ष है। हर राज्य में अलग-अलग उम्र है सहमति की और अपराध माने जाने की। तकरीबन हर अमेरिकी राज्य में डेटिंग, हगिंग, हाथ पकड़ना व किसिंग अपराध नहीं है। सिनेमा और टीवी में बढ़ती अश्लीलता भी यौन संबंधों में आई तेजी का एक प्रमुख कारण है।
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Thursday, 26 April 2012

बुरे फंसे सिंघवी ः इधर पुंआ तो उधर खाई

Vir Arjun, Hindi Daily Newspaper Published from Delhi
Published on 26 April 2012
अनिल नरेन्द्र
संसद के बजट सत्र के दूसरे चरण शुरू होने से पहले ही कांग्रेस पार्टी ने पार्टी प्रवक्ता तेज-तर्रार अभिषेक मनु सिंघवी से सोमवार को संसदीय समिति के चेयरमैन और कांग्रेस प्रवक्ता से इस्तीफा ले लिया। पार्टी ने अपनी और सरकार की फजीहत बचाने का प्रयास किया है। अश्लील वीडियो देखने के मामले में पहले से बदनाम भारतीय जनता पार्टी को अब कांग्रेस से बदला लेने का मौका मिल गया है। अभिषेक मनु सिंघवी सीडी के मामले में बुरी तरह फंस गए हैं। सिंघवी से संबंधित एक सीडी 10 दिन पहले सोशल मीडिया पर जारी की गई थी। इसमें वे कथित तौर पर किसी महिला के साथ आपत्तिजनक स्थिति में दिखाए गए हैं। सीडी में दिखाई गई महिला वकील बताई गई है। इसके मुताबिक सिंघवी ने उसे जज बनवाने का लालच देकर उसके साथ संबंध बनाए। सीडी के प्रसारण पर दिल्ली हाई कोर्ट ने रोक लगा दी है पर इंटरनेट पर यह सीडी खूब चल रही है। कहा जा रहा है कि सिंघवी के ड्राइवर ने यह सीडी बनाई। बाद में उसने सीडी से छेड़छाड़ किए जाने की बात भी मानी। सिंघवी ने इस मामले में सफाई देते हुए कहा कि मैंने इस्तीफे का फैसला अपने बारे में वितरित की जा रही सीडी को लेकर संसद की कार्यवाही में व्यवधान होने की आशंकाओं को खत्म करने की खातिर लिया है। मुझ पर लगे सभी आरोप पूरी तरह से निराधार और झूठे हैं। सीडी पर अटकलें लगाने के बजाय लोगों को निजता का सम्मान करना चाहिए। बेशक सिंघवी ने इस्तीफा तो दे दिया है पर हमें नहीं लगता कि कांग्रेस की फजीहत इतनी आसानी से खत्म होगी। सिंघवी ने स्वेच्छा से इस्तीफा नहीं दिया, उन्हें ऐसा करने पर मजबूर किया गया। बजट सत्र के दूसरे चरण में सरकार पहले से ही दबाव में है और वह एक और सिरदर्द नहीं बढ़ाना चाहती पर भाजपा पहले से झेल रही सीडी प्रकरण (कर्नाटक विधानसभा) भला ऐसा मौका अपने हाथ से कैसे जाने देती? भाजपा नेता व राज्यसभा में नेता विपक्ष अरुण जेटली इस मामले में राज्य सभापति हामिद अंसारी से मिले और उन्होंने सभापति को कहा कि ऐसा व्यक्ति किसी संसदीय समिति का चेयरमैन नहीं रह सकता जिस पर बेहद आपत्तिजनक आरोप लग रहे हों। यह संदेश कांग्रेस के फ्लोर मैनेजरों तक भी पहुंचाए गए। भाजपा ने दोतरफा तरीके से सरकार और कांग्रेस को संसद में घेरने की रणनीति बनाई है। भाजपा नेताओं का कहना है कि अगर कांग्रेस ने सांसद के इस तर्प को मान लिया कि सीडी सही नहीं है और इसके साथ छेड़छाड़ की गई है और उनका ड्राइवर ब्लैकमेल कर रहा है तो यह मामला संसदीय विशेषाधिकार नियमों के तहत जांच की परिधि में आ जाता है। इसके मुताबिक किसी संसद सदस्य के साथ इस तरह का आचरण अवमानना की परिधि में आता है। दूसरी तरफ सीडी के कथित रूप से किसी को जज बनवाने के वादे का आरोप सही है तो यह मामला सदन की एथिक्स कमेटी के पास भेजा जाना चाहिए। सिंघवी के इस्तीफे के बाद भी भाजपा इस मामले को छोड़ने को तैयार नहीं है। जेटली ने कहा कि वह संसद में यह मामला जरूर उठाएंगे। संसद सदस्य होने की हैसियत से श्री सिंघवी को यह बताना पड़ सकता है कि उन्होंने इस्तीफा किस वजह से दिया है। संसद सदस्य होने की वजह से सिंघवी की यह निजी जीवन का तर्प इसलिए ढेर हो सकता है कि वह सार्वजनिक जीवन में हैं और इसके चलते ऐसा मामला प्राइवेट नहीं हो सकता। चूंकि वह सार्वजनिक जीवन में हैं, इसी वजह से संसद की विधि मामलों की स्थायी समिति के अध्यक्ष बनाए गए थे। इसलिए संसद को यह जानने का अधिकार है कि वह ऐसा कौन-सा निजी कारण है जो उनके सार्वजनिक जीवन को प्रभावित कर रहा है? दूसरी ओर अगर वह कहते हैं कि यह सीडी उन्हें बदनाम करने या उनकी प्रतिष्ठा को समाप्त करने के लिए किसी ने गलत तरीके से बनाई है तो यह किसी भी सांसद के विशेषाधिकार हनन का सीधा मामला है और अगर सीडी सच्ची है तो यह संसद की शिष्टाचार समिति का मामला बनता है जिसमें किसी भी सांसद के सार्वजनिक जीवन में आने पर सामाजिक व्यवहार का संज्ञान लिया जाता है। वैसे अगर सिंघवी को इससे संतोष होता है कि उनकी सेक्सी सीडी यू ट्यूब में डालने वाले शख्स ने दावा किया है कि उसके पास गृहमंत्री पी. चिदम्बरम की रूसी वेश्या के साथ सेक्स सीडी है जिसे वह तब जारी करेगा जब सिंघवी को कांग्रेस से निकाला नहीं जाएगा। बुरे फंसे सिंघवी `इधर पुंआ तो उधर खाई।
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Sunday, 4 March 2012

भंवरी देवी अपहरण व हत्या मामले में चार्जशीट क्या कहती है

Vir Arjun, Hindi Daily Newspaper Published from Delhi
Published on 4 March 2012
अनिल नरेन्द्र
बहुचर्चित भंवरी देवी हत्याकांड में सीबीआई ने बुधवार को जोधपुर की अदालत में चार्जशीट पेश कर दी है। 97 पेजों की चार्जशीट में 58 पेजों में आरोप व कहानी का खुलासा है। 300 गवाहों के बयान हैं और चार्जशीट में 313 दस्तावेज लगाए गए हैं। इनमें 93 साक्ष्यों की सूची भी लगाई गई है। चार्जशीट में पूर्व मंत्री महिपाल मदेरणा और लूणी विधायक मलखान सिंह बिश्नोई पर एक ही आरोप लगाए हैं। यह भी खुलासा हुआ है कि मलखान की बहन इन्दिरा ने मदेरणा की सीडी बनवाई थी। मदेरणा आपत्तिजनक सीडी से ब्लैकमेल हो रहे थे, तो मलखान सिंह भंवरी की एक बेटी का पिता होने व खेजड़ली मेले में पोल खोलने से परेशान थे। दोनों ने सहीराम व सोहन लाल को भंवरी को ठिकाने लगाने का जिम्मा सौंपा और उसी साजिश में एक सितम्बर को उसका अपहरण किया गया। आरोप पत्र के अनुसार भंवरी देवी और पूर्व मंत्री महिपाल मदेरणा की अश्लील सीडी के पीछे राजनीतिक साजिश थी एवं इस पूरे मामले में मास्टर माइंड इन्दिरा बिश्नोई थी। इन्दिरा ने ही अपने भाई मलखान को मंत्री बनवाने के लिए यह साजिश रची थी। गौरतलब है कि एक सितम्बर 2011 को भंवरी देवी गायब हुई थी और ठीक छह माह बाद कोर्ट में दूसरी चार्जशीट पेश की गई है। भंवरी देवी मामले के अपहरण और हत्या के मामले में मदेरणा, मलखान सिंह समेत 16 आरोपी जेल में हैं। यह आरोपी सोहन लाल, शहाबुद्दीन, बलदेव, सहीराम, परसराम, अमीरचन्द, उमेश राम, रेगचाराम, पुखराज, दिनेश, बिशन राम, ओम प्रकाश, कैलाश और अशोक हैं। इनमें इन्दिरा बिश्नोई अभी पकड़ी नहीं गई, वह चार माह से फरार है। पूर्व मंत्री महिपाल मदेरणा व मलखान एएनएम भंवरी देवी द्वारा ब्लैकमेलिंग से खासे परेशान थे। बदनामी से बचने के साथ ही राजनीतिक कैरियर को बचाने के मकसद से राजनीति के इन दोनों कद्दावर नेताओं ने भंवरी से छुटकारा पाने का षड्यंत्र रचा। आरोप पत्र के मुताबिक विधायक मलखान सिंह भंवरी देवी की जरूरतों को पूरा करता था। इसी कड़ी में उसने भंवरी की स्विफ्ट कार जो उसने 3 सितम्बर 2009 को खरीदी थी, का भुगतान 3 लाख 20 हजार 594 रुपये का अपनी ओर से भुगतान किया था। इस कार को दिलाने में महिपाल मदेरणा ने भी मदद की थी। इसी दिन भंवरी ने शिकारगढ़ में एक भूखंड भी खरीदा था। भंवरी देवी विधायक मलखान की सिर्प महिला मित्र बनकर ही नहीं रहना चाहती थी, ऐसे में वह अपनी छोटी पुत्री के अधिकार पाने की कोशिश में जुट गई। 7 सितम्बर 2010 को भंवरी जोधपुर के तत्कालीन एसपी के कार्यालय जा पहुंची और मलखान को छोटी पुत्री का पिता बताते हुए डीएनए टेस्ट कराने की गुहार लगाई किन्तु इन्दिरा उसे समझा-बुझाकर वहां से ले गई। फिर भंवरी ने ब्लैकमेलिंग का धंधा बढ़ा दिया। इन्दिरा के घर रची साजिशöमहिपाल मदेरणा व भंवरी की अश्लील सीडी मदेरणा के फार्म हाउस पर ही बनाई गई थी। टीवी चैनलों में इस सीडी के दिखाए जाने से दोनों परिवारों में खलबली मच गई। बहुत विचार-विमर्श के बाद भंवरी को जान से मारकर हमेशा के लिए इस मामले को खत्म करने की रणनीति बनाई गई। भंवरी का अपहरण व बाद में उसकी हत्या की पूरी जानकारी होने के बावजूद भंवरी का पति अमीरचन्द अनजान बना रहा। साजिश में शामिल अमीरचन्द ने पुलिस के काफी दबाव डालने पर पहले गुमशुदगी और फिर अपहरण की प्राथमिकी दर्ज कराई थी। उसे आशंका थी कि जांच के दौरान कहीं उसकी इस प्रकरण में संलिप्तता उजागर न हो जाए। इस कहानी में सभी हैं, लव, सेक्स, ब्लैकमेलिंग व हत्या।
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Thursday, 1 March 2012

समलैंगिक संबंधों की वैधानिकता पर गरमाया मामला

Vir Arjun, Hindi Daily Newspaper Published from Delhi
Published on 1st March 2012
अनिल नरेन्द्र
समलैंगिक संबंधों को निहायत अनैतिक करार देकर उन्हें अपराध की श्रेणी से बाहर रखने पर नामंजूरी जताने के बाद भारत सरकार ने अपना रुख पलट लिया है। गृह मंत्रालय की ओर से अतिरिक्त सालिसिटर जनरल पीपी मल्होत्रा ने सुपीम कोर्ट में दलील दी कि समलैंगिक संबंध सामाजिक व्यवस्था के खिलाफ है और भारतीय समाज विदेशों में व्याप्त पचलनों को नहीं अपना सकता। मल्होत्रा ने न्यायमूर्ति जीएस सिंघवी और न्यायमूर्ति एसजे मुखोपाध्याय की पीठ के समक्ष कहा, समलैंगिक संबंधों से बीमारियां फैलने की काफी अधिक संभावना है। सुपीम कोर्ट ने गत बुधवार को इस संबंध में समलैंगिक अधिकार विरोधी समूहों से सवाल-जवाब किए थे। शीर्ष अदालत ने समलैंगिक अधिकार विरोधी समूहों से दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले का विरोध करते समय सोच के दायरे को बढ़ाने और अपने तर्कों को सिर्प शारीरिक संबंधों तक ही सीमित नहीं रखने को कहा था, क्योंकि मुद्दे पर अंतिम फैसले में व्यापक जटिलताएं होंगी। कोर्ट ने यह भी पश्न किया कि देश में समलैंगिक लोगों के खिलाफ इस तरह की गतिविधयों में शामिल होने के लिए दर्ज मामलों की संख्या क्या है? कोर्ट ने यह भी कहा कि समलैंगिकता पर दूसरे देशों के कानूनों को भी जानना चाहिए कि कितने देशों में समलैंगिकता को अपराध श्रेणी में रखा गया है। अदालत ने कहा कि दो वयस्कों के बीच सहमति के आधार पर समलैंगिक संबंधों को अपराध की श्रेणी से अलग करने का दिल्ली हाईकोर्ट का निर्णय दूरगामी पभाव वाला है। इसके सभी पहलुओं पर गंभीरता से विचार होना चाहिए। पीठ ने जानना चाहा कि पुरुष समलैंगिकता (गे सेक्स) को कौन-कौन से देशों में अपराध माना गया है। समलैंगिकता समुदाय के खिलाफ आईपीसी धारा 377 के तहत केस दर्ज करने का पावधान है। समलैंगिक समुदाय धारा 377 को गलत मानता है। उनका कहना है कि इस कानून के जरिए उन्हें बेवजह परेशान किया जाता है। बेंच का मत था कि हाईकोर्ट के फैसले का पभाव अन्य कानूनों पर भी पड़ेगा। उल्लेखनीय है कि 2009 में समलैंगिक संबंधों को तब वैध मान लिया गया था जब दिल्ली हाईकोर्ट ने अपने फैसले में ऐसे संबंधों को अपराध की श्रेणी से बाहर कर दिया था। देश के कई सामाजिक, राजनीतिक और धार्मिक संगठनों ने इस फैसले पर आपत्ति जताई थी। इस फैसले के खिलाफ आधा दर्जन याचिकाएं सुपीम कोर्ट में हैं। शीर्ष अदालत ने हाईकोर्ट के फैसले का विरोध करते समय सोच के दायरे को बढ़ाने को कहा था। इससे पूर्व पीठ ने कहा था कि समलैंगिकता को बदलते समाज के परिपेक्ष्य में देखा जाना चाहिए। पीठ ने लिव इन रिलेशनशिप, सिंगल पेरेंट और सरोगेसीं का हवाला भी दिया था। बल संरक्षण आयोग की ओर से हाईकोर्ट के फैसले के विरोध में दलील दी कि हाईकोर्ट का फैसला विदेशी अदालतों के निर्णय पर आधारित है। भारत की संस्कृति विदेशों से अलग है। इसे भारतीय दृष्टिकोण से देखा जाना चाहिए। सुनवाई की पिछली तारीख पर सुपीम कोर्ट ने कहा था कि असामान्य और अपाकृतिक यौनाचार में फर्प है। कुदरत के विपरीत यौन इच्छाओं को असामान्य कहा जा सकता है। लेकिन इसे अपाकृतिक कहना मुनासिब नहीं होगा। समलैंगिकता को बदलते सामाजिक परिवेश के साथ देखने क जरूरत है। 20-25 साल पहले जिन चीजों को अनैतिक कहा जाता था, अब स्वीकार्य है। हाईकोर्ट के 2 जुलाई 2009 के फैसले पर देशभर में तीव्र पतिकिया हुई थी। हाईकोर्ट ने सहमति के आधार पर दो वयस्कों के बीच समलैंगिकता को स्वायत्तता पदान कर दी थी। सहमत वयस्कों के परिपेक्ष्य में धारा 377 के तहत इसे गैर कानूनी करार देने के पावधान को हाईकोर्ट ने असंवैधानिक घोषित किया था।
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Friday, 10 February 2012

कर्नाटक विधानसभा में डर्टी पिक्चर का किस्सा

Vir Arjun, Hindi Daily Newspaper Published from Delhi
Published on 10th February  2012
अनिल नरेन्द्र
भाजपा शासित कर्नाटक सरकार ने एक बार फिर पार्टी की जमकर फजीहत करवा दी, वह भी ऐसे समय जब उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव के वोट डलने शुरू हो गए हैं। सांस्कृतिक राष्ट्रवाद की झंडाबरदार इस पार्टी को कर्नाटक के आला नेताओं ने खासा करारा झटका दे दिया है। सरकार के तीन मंत्री विधानसभा में नंगी लड़कियों की तस्वीरें यानि ब्लू फिल्म देखते पकड़े गए। एक स्थानीय टीवी चैनल ने अपने कैमरे में इन तीन मंत्रियों की करतूत पकड़ी। इससे जमकर हंगामा हुआ। उत्तर प्रदेश के चुनावों को देखते हुए पार्टी आला कमान ने बगैर देरी के तीनों के इस्तीफे मांग लिए जो मंजूर भी हो गए हैं। कर्नाटक विधानसभा में मंगलवार को जिस समय पाकिस्तानी झंडा फहराने पर बहस हो रही थी, ठीक उसी समय में मंत्रिगण अपने मोबाइल की क्लिपिंग देख रहे थे। यही नहीं, कुछ हॉट तस्वीरें देखकर यह एक-दूसरे से अश्लील इशारे भी कर रहे थे। यह सब हरकतें कैमरे में दर्ज हो गईं। स्थानीय चैनल ने इनमें से कुछ तस्वीरें प्रसारित भी कर दीं। शर्मसार कर देने वाली इस घटना के एक दिन पहले ही इस बात को लेकर बहस जारी थी कि सरकार ने मंगलौर के समुद्र तट पर `रेव पार्टी' की इजाजत कैसे दी? आरोप लगा था कि पर्यटन के बढ़ावे के नाम पर सरकार ने इस अश्लील `रेव पार्टी' की इजाजत दे दी। इस पार्टी में ड्रग्स व शराब का खुलकर इस्तेमाल किया गया। पार्टी में कई विदेशी लड़कियों ने अपने कपड़े उतारकर जश्न मनाया था। इसकी तस्वीरें भी एक चैनल के कैमरे में आ गई थीं। इसी बीच चाल-चरित्र और चेहरे की दुहाई देने वाली पार्टी के मंत्रियों ने विधानसभा परिसर में ही `डर्टी पिक्चर' देखकर एक नया रिकार्ड बनाया है। इस विवाद के चलते यूपी में पार्टी की छवि को धक्का लग सकता है। इस प्रकरण में शर्मसार भाजपा नेतृत्व ने पार्टी की छवि को हुए नुकसान कम करने हेतु सहकारिता मंत्री लक्ष्मण सावदी व महिला एवं बाल विकास मंत्री सीसी पाटिल को पद छोड़ने के लिए कहा जबकि विज्ञान एवं तकनीकी मंत्री कृष्णा पालेमार, दोनों मंत्रियों को कथित रूप से ब्लू फिल्म देने के लिए बर्खास्त कर दिया। इस साल एक जनवरी को बीजापुर जिले में पाकिस्तानी झंडा फहराने पर मंगलवार को बहस चल रही थी उसी समय सावदी और पाटिल मोबाइल पर अश्लील वीडियो फुटेज देख रहे थे। सूत्रों के अनुसार मंत्रियों के इस्तीफे लेने का दबाव मंगलवार रात में लाल कृष्ण आडवाणी ने बनाया था। इसके बाद पार्टी अध्यक्ष नितिन गडकरी ने तीनों से इस्तीफे मांग लिए थे। आला कमान ने मुख्यमंत्री से कह दिया था कि आधी रात तक तीनों मंत्रियों के इस्तीफे नहीं आते तो इन्हें बर्खास्त कर दिया जाए। दिल्ली से आए इस फरमान के बाद ही तीनों ने आधी रात के बाद इस्तीफा भेजा था। वैसे कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा ने मीडिया से कहा कि मंत्रियों के इस्तीफे के बाद और चमत्कार हो जाएगा क्योंकि महज कुछ तस्वीरें देखने के लिए हमने अपने मंत्रियों को इतनी बड़ी सजा दे दी है। येदियुरप्पा की इस टिप्पणी को लेकर दिल्ली में भाजपा के कई बड़े नेता हैरान हैं। पार्टी अध्यक्ष नितिन गडकरी ने कहा है कि वे अनैतिक आचरण करने वाले अपने किसी नेता को रियायत नहीं देने वाले जबकि कांग्रेस ऐसी हिम्मत नहीं दिखाती।
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Sunday, 4 December 2011

शीघ्र सुलझ सकती है भंवरी देवी की गुत्थी

Vir Arjun, Hindi Daily Newspaper Published from Delhi
Published on 4th December 2011
अनिल नरेन्द्र
पिछले कई दिनों से पहेली बनी हुई भंवरी देवी कांड की गुत्थी अब जल्द ही सुलझने वाली लगती है। सीबीआई ने इस मामले में शुक्रवार को चालान पेश कर दिया है और राजस्थान के बर्खास्त मंत्री महिपाल मदेरणा और एक अन्य आरोपी परसराम बिश्नोई को जोधपुर में गिरफ्तार कर लिया है। साथ ही सीबीआई ने तीन आरोपियों सोहन लाल, शहाबुद्दीन और बलदेव राम जाट उर्प बलिया के खिलाफ जोधपुर के अतिरिक्त मुख्य न्याययिक मजिस्ट्रेट सीबीआई के समक्ष चालान पेश किया। सीबीआई की ओर से पेश चालान में राजस्थान के बर्खास्त मंत्री महिपाल मदेरणा का नाम सामिल नहीं है, लेकिन विचाराधीन जांच के रूप में महिपाल मदेरणा और इस प्रकरण में मुख्य आरोपी समझे जा रहे एवं फरार सही राम का नाम शामिल है। जोधपुर के बिलाडा उपखंड के एक उप स्वास्थ्य केंद्र में कार्यरत नर्स भंवरी देवी के लापता होने की उसके पति अमर सिंह ने पुलिस में एक एफआईआर दर्ज कराई थी जिसमें तत्कालीन मंत्री महिपाल मदेरणा पर भंवरी को लापता करवाने में शामिल होने का जिक्र किया गया था। राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने यह केस 14 सितम्बर को सीबीआई को सौंपा था। सीबीआई को जांच सौंपे जाने के बाद मदेरणा को उनके मंत्री पद से बर्खास्त कर दिया गया था। भंवरी देवी का क्या हुआ, यह अभी तक रहस्य ही बना हुआ है। सीबीआई जी-तोड़ कोशिश कर रही है कि पता चले कि भंवरी जिन्दा भी है या नहीं। सीबीआई ने तो भंवरी का सुराग देने वाले को 10 लाख रुपये और इस प्रकरण में मुख्य आरोपी माने जा रहे सही राम का सुराग देने वाले को पांच लाख रुपये का इनाम देने की घोषणा तक कर दी है।
भंवरी देवी के मोबाइल फोन नम्बर 9413958188 पर 375 सैकेंड क्या इस बात का खुलासा करेंगे कि भंवरी का क्या हुआ? मलखान की भाभी कुसुम बिश्नोई को बताना होगा कि इतने समय तक उसकी भंवरी से क्या बात हुई। क्योंकि इनकी बातचीत के बाद ही भंवरी राडार से बाहर हो गई और उसका पता नहीं चल सका। सूत्रों के अनुसार सीबीआई के हाथ बृहस्पतिवार को एक ऐसा सुबूत लगा है जो सीबीआई को अपराधी की गिरेबान तक पहुंचाने में काफी मदद कर सकता है। वह जांच का केंद्रबिन्दु है मलखान की भाभी। सूत्रों के अनुसार सीबीआई ने जांच में पाया है कि उक्त मोबाइल फोन पर 375 सैकेंड के लिए भंवरी और कुसुम की बातचीत हुई थी। सीबीआई के सूत्रों के अनुसार सीबीआई ने जांच में यह भी पाया कि भंवरी को इस बात का अन्देशा हो गया था कि उसके साथ कुछ अनहोनी हो सकती है। इसीलिए वह उसके पास भी रुपये लेने नहीं गई जिसके हाथ उसने अपनी जीप बेची थी। वैसे सीबीआई वहां की भट्ठी से मिले शरीर के कुछ अवशेष और बुलेरो जीप से मिले बालों के गुच्छे, जैकेट और लॉकेट को फोरेंसिक जांच के लिए भेजने वाली है। साथ ही भंवरी के परिवार के लोगों की डीएनए जांच कराने की तैयारी भी कर रही है। लगता है कि अब बहुत निकटभविष्य में भंवरी देवी का क्या हुआ, इसका पता चल जाएगा।
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Saturday, 26 November 2011

भंवरी देवी के बाद राजस्थान में एक और सेक्स स्कैंडल


Vir Arjun, Hindi Daily Newspaper Published from Delhi
Published on 26th November 2011
अनिल नरेन्द्र
भंवरी देवी का इतने दिन बाद भी कुछ पता नहीं चल सका। वह किस हालत में है, जिन्दा भी है या नहीं? जोधपुर जिले के नालीवाडा स्वास्थ्य केंद्र में कार्यरत नर्स भंवरी देवी गत एक सितम्बर को संदिग्ध परिस्थितियों में लापता हो गई थी। सीबीआई इस प्रकरण में राजस्थान के बर्खास्त काबीना मंत्री महिपाल मदेरणा उसकी पत्नी लीला मदेरणा, कांग्रेस विधायक मलखान सिंह, उसकी बहन इन्द्रा समेत कई लोगों से पूछताछ कर चुकी। सीबीआई ने इस केस में शहाबुद्दीन और सोहन लाल समेत तीन लोगों को गिरफ्तार भी किया है। ये तीनों न्यायिक हिरासत में हैं। 24 नवम्बर को इस केस की राजस्थान हाई कोर्ट में तारीख थी। सीबीआई को अदालत में प्रोग्रेस रिपोर्ट पेश करनी थी। सीबीआई ने अदालत से कहा कि उसे अपनी जांच रिपोर्ट पेश करने के लिए कुछ दिनों की और मौहलत चाहिए। अदालत ने उसके अनुरोध को स्वीकार करते हुए समय दे दिया है और अब अगली सुनवाई 15 दिसम्बर को होगी। न्यायाधीश गोविंद माथुर और न्यायाधीश एनके जैन की खंडपीठ ने लापता भंवरी देवी के पति की बन्दी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर बन्द कमरे में सुनवाई शुरू की। सीबीआई को इस केस में कोई उल्लेखनीय सफलता अब तक नहीं मिल सकी है। दो सौ से ज्यादा पुलिसकर्मियों ने लो हावर के खेतों में लगभग 20 किलोमीटर तक खेतों व ढाणियों में भंवरी के अवशेषों की तलाश की। साथ ही फोरेंसिक साइंस लेबोरेट्री के वैज्ञानिकों से भी पूछताछ की जिन्होंने आरोपी शहाबुद्दीन की उस बुलेरो की जांच की थी जिसमें भंवरी देवी का अपहरण हुआ था। दरअसल सीबीआई यह एंगल स्टडी कर रही है कि उसी बुलेरो में तो भंवरी के साथ अनहोनी तो नहीं हुई?
अभी भंवरी देवी मामला सुलझा नहीं कि एक और सेक्स स्कैंडल का खुलासा हुआ है। इसका खुलासा सिरसा के उपमंडल डबवाली के गांव आबू शहर की पीड़ित युवती ने किया है। इस मामले में कोर्ट के आदेश पर राजस्थान के एक पूर्व मंत्री, पूर्व सांसद और युवती के पति तथा देवर सहित 18 लोगों के खिलाफ केस जयपुर के विशाली नगर थाने में दर्ज किया गया है। आबू शहर की युवती ने 19 नवम्बर को न्यायिक मजिस्ट्रेट क्रम 11 जयपुर की अदालत में इस्तगासा देकर इस मामले में न्याय की गुहार की थी। युवती ने हनुमानगढ़ निवासी अपने पति ओम प्रकाश गोदारा पर आरोप लगाया था कि वह अपना प्रोपर्टी डीलर का कारोबार बढ़ाने के लिए उसे नशे की गोलियां खिलाकर प्रभावशाली लोगों को परोसता ता। इसके बाद अदालत के आदेश पर 21 नवम्बर की रात जयपुर थाना वैशाली नगर में मामला दर्ज किया गया। मामले की जांच कर रहे निरीक्षक ने बताया कि जिनके खिलाफ मामला दर्ज किया गया है उनमें महिला का पति ओम प्रकाश गोदारा, पूर्व मंत्री जोगेश्वर गर्ग, पूर्व सांसद निहाल चन्द मेघवाल, राजस्थान विवि छात्र संघ के पूर्व अध्यक्ष पुष्पेंद्र भारद्वाज, भाजपा नेताओं के निजी सहायक रहे विवेकानन्द, डीएसपी अनिल राय, पुलिस निरीक्षक महावीर सिंह समेत 18 लोग शामिल हैं। इन सबके खिलाफ धारा 376/328/343/323/506 आईपीसी तथा 120बी के तहत मामला दर्ज किया गया है। चर्चित भंवरी देवी प्रकरण की तरह इस एक और सेक्स रैकेट से राजस्थान की राजनीति में नया उफान आ सकता है। जहां तक भंवरी देवी का प्रश्न है समझ नहीं आ रहा कि उसे जमीन निगल गई या आसमान खा गया? अखबार में छपी एक खबर के अनुसार भंवरी देवी की हत्या हो चुकी है लेकिन इस तथ्य के लिए सीबीआई को अभी सुबूत जुटाने हैं। यह बात सीबीआई ने बृहस्पतिवार को जोधपुर हाई कोर्ट में पेश स्टेटस रिपोर्ट में अदालत से कही है। इसी पर अदालत ने उसे 15 दिन का समय दिया। उधर आबू शहर की युवती ने आरोप लगाया है कि उसके पति ने उसकी 34 सीडी बनाई हैं और इनके जरिये वह संबंधित नेताओं को ब्लैकमेल करता था।
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