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Sunday, 4 March 2012

भंवरी देवी अपहरण व हत्या मामले में चार्जशीट क्या कहती है

Vir Arjun, Hindi Daily Newspaper Published from Delhi
Published on 4 March 2012
अनिल नरेन्द्र
बहुचर्चित भंवरी देवी हत्याकांड में सीबीआई ने बुधवार को जोधपुर की अदालत में चार्जशीट पेश कर दी है। 97 पेजों की चार्जशीट में 58 पेजों में आरोप व कहानी का खुलासा है। 300 गवाहों के बयान हैं और चार्जशीट में 313 दस्तावेज लगाए गए हैं। इनमें 93 साक्ष्यों की सूची भी लगाई गई है। चार्जशीट में पूर्व मंत्री महिपाल मदेरणा और लूणी विधायक मलखान सिंह बिश्नोई पर एक ही आरोप लगाए हैं। यह भी खुलासा हुआ है कि मलखान की बहन इन्दिरा ने मदेरणा की सीडी बनवाई थी। मदेरणा आपत्तिजनक सीडी से ब्लैकमेल हो रहे थे, तो मलखान सिंह भंवरी की एक बेटी का पिता होने व खेजड़ली मेले में पोल खोलने से परेशान थे। दोनों ने सहीराम व सोहन लाल को भंवरी को ठिकाने लगाने का जिम्मा सौंपा और उसी साजिश में एक सितम्बर को उसका अपहरण किया गया। आरोप पत्र के अनुसार भंवरी देवी और पूर्व मंत्री महिपाल मदेरणा की अश्लील सीडी के पीछे राजनीतिक साजिश थी एवं इस पूरे मामले में मास्टर माइंड इन्दिरा बिश्नोई थी। इन्दिरा ने ही अपने भाई मलखान को मंत्री बनवाने के लिए यह साजिश रची थी। गौरतलब है कि एक सितम्बर 2011 को भंवरी देवी गायब हुई थी और ठीक छह माह बाद कोर्ट में दूसरी चार्जशीट पेश की गई है। भंवरी देवी मामले के अपहरण और हत्या के मामले में मदेरणा, मलखान सिंह समेत 16 आरोपी जेल में हैं। यह आरोपी सोहन लाल, शहाबुद्दीन, बलदेव, सहीराम, परसराम, अमीरचन्द, उमेश राम, रेगचाराम, पुखराज, दिनेश, बिशन राम, ओम प्रकाश, कैलाश और अशोक हैं। इनमें इन्दिरा बिश्नोई अभी पकड़ी नहीं गई, वह चार माह से फरार है। पूर्व मंत्री महिपाल मदेरणा व मलखान एएनएम भंवरी देवी द्वारा ब्लैकमेलिंग से खासे परेशान थे। बदनामी से बचने के साथ ही राजनीतिक कैरियर को बचाने के मकसद से राजनीति के इन दोनों कद्दावर नेताओं ने भंवरी से छुटकारा पाने का षड्यंत्र रचा। आरोप पत्र के मुताबिक विधायक मलखान सिंह भंवरी देवी की जरूरतों को पूरा करता था। इसी कड़ी में उसने भंवरी की स्विफ्ट कार जो उसने 3 सितम्बर 2009 को खरीदी थी, का भुगतान 3 लाख 20 हजार 594 रुपये का अपनी ओर से भुगतान किया था। इस कार को दिलाने में महिपाल मदेरणा ने भी मदद की थी। इसी दिन भंवरी ने शिकारगढ़ में एक भूखंड भी खरीदा था। भंवरी देवी विधायक मलखान की सिर्प महिला मित्र बनकर ही नहीं रहना चाहती थी, ऐसे में वह अपनी छोटी पुत्री के अधिकार पाने की कोशिश में जुट गई। 7 सितम्बर 2010 को भंवरी जोधपुर के तत्कालीन एसपी के कार्यालय जा पहुंची और मलखान को छोटी पुत्री का पिता बताते हुए डीएनए टेस्ट कराने की गुहार लगाई किन्तु इन्दिरा उसे समझा-बुझाकर वहां से ले गई। फिर भंवरी ने ब्लैकमेलिंग का धंधा बढ़ा दिया। इन्दिरा के घर रची साजिशöमहिपाल मदेरणा व भंवरी की अश्लील सीडी मदेरणा के फार्म हाउस पर ही बनाई गई थी। टीवी चैनलों में इस सीडी के दिखाए जाने से दोनों परिवारों में खलबली मच गई। बहुत विचार-विमर्श के बाद भंवरी को जान से मारकर हमेशा के लिए इस मामले को खत्म करने की रणनीति बनाई गई। भंवरी का अपहरण व बाद में उसकी हत्या की पूरी जानकारी होने के बावजूद भंवरी का पति अमीरचन्द अनजान बना रहा। साजिश में शामिल अमीरचन्द ने पुलिस के काफी दबाव डालने पर पहले गुमशुदगी और फिर अपहरण की प्राथमिकी दर्ज कराई थी। उसे आशंका थी कि जांच के दौरान कहीं उसकी इस प्रकरण में संलिप्तता उजागर न हो जाए। इस कहानी में सभी हैं, लव, सेक्स, ब्लैकमेलिंग व हत्या।
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Thursday, 12 January 2012

यह तो अब तय है कि भंवरी का मर्डर हुआ, पर इसे साबित करना?

Vir Arjun, Hindi Daily Newspaper Published from Delhi
Published on 12th January  2012
अनिल नरेन्द्र
सीबीआई ने राजस्थान की हाई कोर्ट को मंगलवार को सूचित किया है कि भंवरी देवी अब जीवित नहीं है और उसने अदालत से उसके पति अमर चन्द द्वारा दायर प्रत्यक्षीकरण याचिका को निरस्त करने का अनुरोध किया। अदालत ने हालांकि याचिका को निरस्त करने से इंकार कर दिया और सीबीआई से अंतिम रिपोर्ट 21 फरवरी को पेश करने को कहा। सीबीआई की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता आनन्द पुरोहित ने अदालत के समक्ष उपस्थित होकर कहा कि अब भंवरी देवी जीवित नहीं रही, इसलिए अब अदालत में उसे पेश करना सम्भव नहीं है। उन्होंने अदालत को यह भी सूचित किया कि वह मामले के करीब-करीब निष्कर्ष तक पहुंच गई है और जल्द आरोप पत्र दाखिल करने जा रही है। हां यह भंवरी का ही मर्डर हुआ था। यह प्रूफ करना सीबीआई के लिए एक बड़ी चुनौती होगी। लाश को जलाया गया, फिर हड्डियों को तोड़ा गया, जितना सम्भव हुआ चूरा भी किया गया, उस पर भी हत्यारी अस्थियां चार महीने से ज्यादा वक्त तक नहर में रहीं, इन सब कारणों से डीएनए टेस्ट भी फेल हो सकता है। इसलिए यह सीबीआई के लिए चैलेंज है और नहर से मिली भंवरी की घड़ी बड़ी उम्मीद बन गई है। कानूनी जानकारों का मानना है कि करीब दो सौ कर्मियों और गोताखोरों की मदद से सीबीआई ने भंवरी के अवशेष राजीव गांधी नहर से बरामद कर बड़ी कामयाबी हासिल की है। लेकिन यह बड़ी चुनौती भी है। पानी में तीन महीने से ज्यादा वक्त तक अस्थियों के डूबे रहने से डीएनए के रिजल्ट उम्मीद के हिसाब से सही नहीं आते हैं। इसलिए डीएनए के जरिये यह साबित करना मुश्किल हो सकता है कि भंवरी का मर्डर किया गया था? जब यह भी साफ नहीं होता है कि कौन मारा गया था तो यह बात कम मायने रखती है कि क्यों मारा गया था और किसने मारा-मरवाया था? अब सारा दारोमदार गवाहों पर है। सीबीआई के मुताबिक उनके पास केस को साबित करने के लिए पर्याप्त सुबूत हैं जिनमें गवाहियां महत्वपूर्ण कड़ी है। वैसे अभी तो जांच ही चल रही है। दो-तीन लोगों की तलाश भी जारी है, इसलिए अगली चार्जशीट से ही पता चलेगा इन प्रश्नों के उत्तर। हमारा अनुभव यह भी है कि मुकदमे के दौरान बहुत-सी बातें कमजोर पड़ जाती हैं। उदाहरण के तौर पर गवाह मुकर जाते हैं और हास्टाइल हो जाते हैं। नहर से भंवरी देवी की घड़ी और एक झुमके का मिलना अहम सुबूत हो सकते हैं, बशर्ते कि उसके परिवार के लोग कोर्ट में भी यही बात कहें कि ये चीजें भंवरी की ही हैं। अगर वह यह कह भी देते हैं तो भी यह साबित करना अहम होगा कि मर्डर की वजह से ही ये चीजें नहर में फेंकी गईं व नहर से मिलीं, किसी के द्वारा फेंकी नहीं गई? जोधपुर के ओसियां के जालौड़ा गांव के पास से गुजर रही इन्दिरा गांधी नहर से गोताखोरों ने शनिवार को भंवरी की कथित घड़ी, दांत के टुकड़े, खोपड़ी का हिस्सा, कान की बाली और भंवरी के हार के कुछ मोती बरामद किए हैं। सीबीआई को उम्मीद है कि नहर से अभी कुछ और कई सुबूत मिल सकते हैं। दिल्ली से गई सीएफएसएल की टीम ने दो दिन जिले के लोहावट में भंवरी के शव को खुर्दबुर्द करने के स्थानों का निरीक्षण किया तथा नहर से एक बैल्ट, प्लास्टिक थैली में दो देशी पिस्तौल, महिलाओं की चूड़ियां एवं एक कट्टे में मिट्टी एवं राख बरामद की गई थी। यह कामयाबी सीबीआई के आरोपी ओम प्रकाश तथा कैलाश जाखड़ की निशानदेही पर मिली। यही दोनों सीबीआई को उस गड्ढे तक ले गए थे, जहां उन्होंने भंवरी का शव जलाकर राख नहर में बहाई थी। आरोपियों ने डेमो कर बताया कि उन्होंने छुरे से लाश के टुकड़े किए, फिर लकड़ियां और पेट्रोल डालकर उन्हें सुबह तक जलाया। जली हुई हड्डियों को भी बल्ले से तोड़कर दोबारा जलाया गया। फिर राख, बल्ला और छुरा नहर में बहाकर भाग गए। बल्ला सतह पर नहीं आए इसलिए उसे पत्थर पर बांधकर फेंका गया। दूसरी रात वे फिर गए और जलने के निशान मिटाने के लिए मिट्टी खोदकर उसे भी नहर में डाल दिया। इन परिस्थितियों में जहां मर्डर के सारे साक्ष्य मिटाने का इतना प्रयास हुआ हो निश्चित रूप से सीबीआई को केस साबित करने में बहुत मशक्कत करनी पड़ेगी।
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Wednesday, 4 January 2012

और ऐसा हुआ भंवरी देवी का दुःखद अंत

Vir Arjun, Hindi Daily Newspaper Published from Delhi
Published on 4th January  2012
अनिल नरेन्द्र
करीब चार माह से लापता नर्स भंवरी देवी का अंत कैसे हुआ इसका तो अब खुलासा हो गया है पर अभी तक न तो उनकी लाश ही मिली है और न ही यह भी ठीक से पता चल सका है कि उनकी लाश को कैसे ठिकाने लगाया गया है। भंवरी देवी अपहरण एवं हत्याकांड के मुख्य सूत्रधार पूर्व उप-जिला प्रमुख सहीराम बिश्नोई के अपराध कबूल लेने से सीबीआई ने भी राहत की सांस ली है। सीबीआई और पुलिस का संयुक्त दल सहीराम के बयान की तस्दीक करने में जुट गया है। इसके चलते जांच दल फिर से उस रास्ते की बारीकी से पड़ताल कर रहा है जिस पर अपहरण करने के बाद भंवरी देवी की हत्या कर दी गई थी। सूत्रों ने बताया कि सहीराम ने भंवरी का अपहरण और उसकी निर्ममता से हत्या के बारे में सीबीआई को जो ब्यौरा दिया है, उसके हिसाब से भंवरी ने अपने अपहरण का अंदेशा होते ही बुलेरो से कूदकर भागने का प्रयास किया था। इस पर मुख्य अपहरणकर्ता सोहन लाल और शहाबुद्दीन ने मिलकर न केवल उसका गला दबा दिया बल्कि शहाबुद्दीन भंवरी को अपने पैरों तले तब तक रौंदता रहा, जब तक वह निढाल नहीं हो गई। भंवरी की हत्या की सनसनीखेज जानकारी सामने आते ही सीबीआई और पुलिस हत्या के ठोस सुबूत जुटाने में नए सिरे से लग गई है। जांच दल शहाबुद्दीन के उन जूतों की भी तलाश कर रहा है जो उसने वारदात के दौरान पहन रखे थे। बताया जाता है कि शहाबुद्दीन ने भंवरी का काम तमाम करने के बाद अपने जूते बीच रास्ते में फेंक कर नए जूते खरीद लिए थे। भंवरी के अपहरण के बाद हत्या के मामले में आरोपी सोहन लाल एण्ड पार्टी ने योजनाबद्ध तरीके से काम किया था। भंवरी को झांसा देने के लिए सोहन लाल ने शहाबुद्दीन को राजू सेठ के रूप में मिलवाया था। बुलेरो में भंवरी का अपहरण करने के बाद आपसी बातचीत में शहाबुद्दीन की पोल खुल जाने पर भंवरी ने जोर से चिल्लाते हुए यह कहा था कि मेरे साथ धोखा हुआ है। तुम राजू सेठ नहीं हो और इसके बाद भंवरी ने बुलेरो की खिड़की से बाहर कूदने का प्रयास भी किया था। भंवरी का सिर और आधा धड़ खिड़की से बाहर निकलते ही शहाबुद्दीन ने उसके दोनों पैरों को पकड़कर वापस गाड़ी के भीतर खींच लिया। इस दौरान सोहन लाल भी पीछे वाली सीट पर आ गया और दोनों ने मिलकर भंवरी के साथ मारपीट की और उसका गला घोंट दिया। इसके बाद शहाबुद्दीन ने भंवरी को सीट के नीचे पटक लिया और उसके गले को जूतों से तब तक रौंदता रहा, जब तक उसके प्राण-पखेरू उड़ नहीं गए। बताया जता है कि शहाबुद्दीन ने भंवरी के खून और झाग से सने जूतों को ओसिया और मथानिया के बीच पड़ने वाले चौराहे पर फेंका था। भंवरी का काम तमाम करने के बाद दोनों ने उसकी लाश को नेवरा रोड पर कुख्यात बदमाश बिशन राम के गैंग को सौंप दिया था। सीबीआई का कहना है कि बिशन की गिरफ्तारी के बाद ही भंवरी की लाश को कैसे ठिकाने लगाया गया, उसकी जानकारी मिल पाएगी। खबर है कि भंवरी के शव की तलाशी सीबीआई हाइटैक तरीकों से कर रही है। रविवार को रिमोट से संचालित एक मिनी हेलीकॉप्टर के जरिये जालोड़ा गांव के छोरों और नहरी क्षेत्र को खंगाला गया। हेलीकॉप्टर में लगे हाई रिजोल्यूशन फोटो इमेजिंग उपकरण और कैमरे से दो किलोमीटर क्षेत्र की तस्वीरें ली गईं। इनके जरिये उस जगह को चिन्हित करने का प्रयास किया गया जहां भंवरी का शव दबा होने की आशंका है। मामला वैसे तो सुलझ गया है पर जब तक शव नहीं मिलता या उसके ठिकाने लगाने के पुख्ता सुबूत नहीं मिलते तब तक केस खुला माना जाएगा।
करीब चार माह से लापता नर्स भंवरी देवी का अंत कैसे हुआ इसका तो अब खुलासा हो गया है पर अभी तक न तो उनकी लाश ही मिली है और न ही यह भी ठीक से पता चल सका है कि उनकी लाश को कैसे ठिकाने लगाया गया है। भंवरी देवी अपहरण एवं हत्याकांड के मुख्य सूत्रधार पूर्व उप-जिला प्रमुख सहीराम बिश्नोई के अपराध कबूल लेने से सीबीआई ने भी राहत की सांस ली है। सीबीआई और पुलिस का संयुक्त दल सहीराम के बयान की तस्दीक करने में जुट गया है। इसके चलते जांच दल फिर से उस रास्ते की बारीकी से पड़ताल कर रहा है जिस पर अपहरण करने के बाद भंवरी देवी की हत्या कर दी गई थी। सूत्रों ने बताया कि सहीराम ने भंवरी का अपहरण और उसकी निर्ममता से हत्या के बारे में सीबीआई को जो ब्यौरा दिया है, उसके हिसाब से भंवरी ने अपने अपहरण का अंदेशा होते ही बुलेरो से कूदकर भागने का प्रयास किया था। इस पर मुख्य अपहरणकर्ता सोहन लाल और शहाबुद्दीन ने मिलकर न केवल उसका गला दबा दिया बल्कि शहाबुद्दीन भंवरी को अपने पैरों तले तब तक रौंदता रहा, जब तक वह निढाल नहीं हो गई। भंवरी की हत्या की सनसनीखेज जानकारी सामने आते ही सीबीआई और पुलिस हत्या के ठोस सुबूत जुटाने में नए सिरे से लग गई है। जांच दल शहाबुद्दीन के उन जूतों की भी तलाश कर रहा है जो उसने वारदात के दौरान पहन रखे थे। बताया जाता है कि शहाबुद्दीन ने भंवरी का काम तमाम करने के बाद अपने जूते बीच रास्ते में फेंक कर नए जूते खरीद लिए थे। भंवरी के अपहरण के बाद हत्या के मामले में आरोपी सोहन लाल एण्ड पार्टी ने योजनाबद्ध तरीके से काम किया था। भंवरी को झांसा देने के लिए सोहन लाल ने शहाबुद्दीन को राजू सेठ के रूप में मिलवाया था। बुलेरो में भंवरी का अपहरण करने के बाद आपसी बातचीत में शहाबुद्दीन की पोल खुल जाने पर भंवरी ने जोर से चिल्लाते हुए यह कहा था कि मेरे साथ धोखा हुआ है। तुम राजू सेठ नहीं हो और इसके बाद भंवरी ने बुलेरो की खिड़की से बाहर कूदने का प्रयास भी किया था। भंवरी का सिर और आधा धड़ खिड़की से बाहर निकलते ही शहाबुद्दीन ने उसके दोनों पैरों को पकड़कर वापस गाड़ी के भीतर खींच लिया। इस दौरान सोहन लाल भी पीछे वाली सीट पर आ गया और दोनों ने मिलकर भंवरी के साथ मारपीट की और उसका गला घोंट दिया। इसके बाद शहाबुद्दीन ने भंवरी को सीट के नीचे पटक लिया और उसके गले को जूतों से तब तक रौंदता रहा, जब तक उसके प्राण-पखेरू उड़ नहीं गए। बताया जता है कि शहाबुद्दीन ने भंवरी के खून और झाग से सने जूतों को ओसिया और मथानिया के बीच पड़ने वाले चौराहे पर फेंका था। भंवरी का काम तमाम करने के बाद दोनों ने उसकी लाश को नेवरा रोड पर कुख्यात बदमाश बिशन राम के गैंग को सौंप दिया था। सीबीआई का कहना है कि बिशन की गिरफ्तारी के बाद ही भंवरी की लाश को कैसे ठिकाने लगाया गया, उसकी जानकारी मिल पाएगी। खबर है कि भंवरी के शव की तलाशी सीबीआई हाइटैक तरीकों से कर रही है। रविवार को रिमोट से संचालित एक मिनी हेलीकॉप्टर के जरिये जालोड़ा गांव के छोरों और नहरी क्षेत्र को खंगाला गया। हेलीकॉप्टर में लगे हाई रिजोल्यूशन फोटो इमेजिंग उपकरण और कैमरे से दो किलोमीटर क्षेत्र की तस्वीरें ली गईं। इनके जरिये उस जगह को चिन्हित करने का प्रयास किया गया जहां भंवरी का शव दबा होने की आशंका है। मामला वैसे तो सुलझ गया है पर जब तक शव नहीं मिलता या उसके ठिकाने लगाने के पुख्ता सुबूत नहीं मिलते तब तक केस खुला माना जाएगा।
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Sunday, 4 December 2011

शीघ्र सुलझ सकती है भंवरी देवी की गुत्थी

Vir Arjun, Hindi Daily Newspaper Published from Delhi
Published on 4th December 2011
अनिल नरेन्द्र
पिछले कई दिनों से पहेली बनी हुई भंवरी देवी कांड की गुत्थी अब जल्द ही सुलझने वाली लगती है। सीबीआई ने इस मामले में शुक्रवार को चालान पेश कर दिया है और राजस्थान के बर्खास्त मंत्री महिपाल मदेरणा और एक अन्य आरोपी परसराम बिश्नोई को जोधपुर में गिरफ्तार कर लिया है। साथ ही सीबीआई ने तीन आरोपियों सोहन लाल, शहाबुद्दीन और बलदेव राम जाट उर्प बलिया के खिलाफ जोधपुर के अतिरिक्त मुख्य न्याययिक मजिस्ट्रेट सीबीआई के समक्ष चालान पेश किया। सीबीआई की ओर से पेश चालान में राजस्थान के बर्खास्त मंत्री महिपाल मदेरणा का नाम सामिल नहीं है, लेकिन विचाराधीन जांच के रूप में महिपाल मदेरणा और इस प्रकरण में मुख्य आरोपी समझे जा रहे एवं फरार सही राम का नाम शामिल है। जोधपुर के बिलाडा उपखंड के एक उप स्वास्थ्य केंद्र में कार्यरत नर्स भंवरी देवी के लापता होने की उसके पति अमर सिंह ने पुलिस में एक एफआईआर दर्ज कराई थी जिसमें तत्कालीन मंत्री महिपाल मदेरणा पर भंवरी को लापता करवाने में शामिल होने का जिक्र किया गया था। राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने यह केस 14 सितम्बर को सीबीआई को सौंपा था। सीबीआई को जांच सौंपे जाने के बाद मदेरणा को उनके मंत्री पद से बर्खास्त कर दिया गया था। भंवरी देवी का क्या हुआ, यह अभी तक रहस्य ही बना हुआ है। सीबीआई जी-तोड़ कोशिश कर रही है कि पता चले कि भंवरी जिन्दा भी है या नहीं। सीबीआई ने तो भंवरी का सुराग देने वाले को 10 लाख रुपये और इस प्रकरण में मुख्य आरोपी माने जा रहे सही राम का सुराग देने वाले को पांच लाख रुपये का इनाम देने की घोषणा तक कर दी है।
भंवरी देवी के मोबाइल फोन नम्बर 9413958188 पर 375 सैकेंड क्या इस बात का खुलासा करेंगे कि भंवरी का क्या हुआ? मलखान की भाभी कुसुम बिश्नोई को बताना होगा कि इतने समय तक उसकी भंवरी से क्या बात हुई। क्योंकि इनकी बातचीत के बाद ही भंवरी राडार से बाहर हो गई और उसका पता नहीं चल सका। सूत्रों के अनुसार सीबीआई के हाथ बृहस्पतिवार को एक ऐसा सुबूत लगा है जो सीबीआई को अपराधी की गिरेबान तक पहुंचाने में काफी मदद कर सकता है। वह जांच का केंद्रबिन्दु है मलखान की भाभी। सूत्रों के अनुसार सीबीआई ने जांच में पाया है कि उक्त मोबाइल फोन पर 375 सैकेंड के लिए भंवरी और कुसुम की बातचीत हुई थी। सीबीआई के सूत्रों के अनुसार सीबीआई ने जांच में यह भी पाया कि भंवरी को इस बात का अन्देशा हो गया था कि उसके साथ कुछ अनहोनी हो सकती है। इसीलिए वह उसके पास भी रुपये लेने नहीं गई जिसके हाथ उसने अपनी जीप बेची थी। वैसे सीबीआई वहां की भट्ठी से मिले शरीर के कुछ अवशेष और बुलेरो जीप से मिले बालों के गुच्छे, जैकेट और लॉकेट को फोरेंसिक जांच के लिए भेजने वाली है। साथ ही भंवरी के परिवार के लोगों की डीएनए जांच कराने की तैयारी भी कर रही है। लगता है कि अब बहुत निकटभविष्य में भंवरी देवी का क्या हुआ, इसका पता चल जाएगा।
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Saturday, 26 November 2011

भंवरी देवी के बाद राजस्थान में एक और सेक्स स्कैंडल


Vir Arjun, Hindi Daily Newspaper Published from Delhi
Published on 26th November 2011
अनिल नरेन्द्र
भंवरी देवी का इतने दिन बाद भी कुछ पता नहीं चल सका। वह किस हालत में है, जिन्दा भी है या नहीं? जोधपुर जिले के नालीवाडा स्वास्थ्य केंद्र में कार्यरत नर्स भंवरी देवी गत एक सितम्बर को संदिग्ध परिस्थितियों में लापता हो गई थी। सीबीआई इस प्रकरण में राजस्थान के बर्खास्त काबीना मंत्री महिपाल मदेरणा उसकी पत्नी लीला मदेरणा, कांग्रेस विधायक मलखान सिंह, उसकी बहन इन्द्रा समेत कई लोगों से पूछताछ कर चुकी। सीबीआई ने इस केस में शहाबुद्दीन और सोहन लाल समेत तीन लोगों को गिरफ्तार भी किया है। ये तीनों न्यायिक हिरासत में हैं। 24 नवम्बर को इस केस की राजस्थान हाई कोर्ट में तारीख थी। सीबीआई को अदालत में प्रोग्रेस रिपोर्ट पेश करनी थी। सीबीआई ने अदालत से कहा कि उसे अपनी जांच रिपोर्ट पेश करने के लिए कुछ दिनों की और मौहलत चाहिए। अदालत ने उसके अनुरोध को स्वीकार करते हुए समय दे दिया है और अब अगली सुनवाई 15 दिसम्बर को होगी। न्यायाधीश गोविंद माथुर और न्यायाधीश एनके जैन की खंडपीठ ने लापता भंवरी देवी के पति की बन्दी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर बन्द कमरे में सुनवाई शुरू की। सीबीआई को इस केस में कोई उल्लेखनीय सफलता अब तक नहीं मिल सकी है। दो सौ से ज्यादा पुलिसकर्मियों ने लो हावर के खेतों में लगभग 20 किलोमीटर तक खेतों व ढाणियों में भंवरी के अवशेषों की तलाश की। साथ ही फोरेंसिक साइंस लेबोरेट्री के वैज्ञानिकों से भी पूछताछ की जिन्होंने आरोपी शहाबुद्दीन की उस बुलेरो की जांच की थी जिसमें भंवरी देवी का अपहरण हुआ था। दरअसल सीबीआई यह एंगल स्टडी कर रही है कि उसी बुलेरो में तो भंवरी के साथ अनहोनी तो नहीं हुई?
अभी भंवरी देवी मामला सुलझा नहीं कि एक और सेक्स स्कैंडल का खुलासा हुआ है। इसका खुलासा सिरसा के उपमंडल डबवाली के गांव आबू शहर की पीड़ित युवती ने किया है। इस मामले में कोर्ट के आदेश पर राजस्थान के एक पूर्व मंत्री, पूर्व सांसद और युवती के पति तथा देवर सहित 18 लोगों के खिलाफ केस जयपुर के विशाली नगर थाने में दर्ज किया गया है। आबू शहर की युवती ने 19 नवम्बर को न्यायिक मजिस्ट्रेट क्रम 11 जयपुर की अदालत में इस्तगासा देकर इस मामले में न्याय की गुहार की थी। युवती ने हनुमानगढ़ निवासी अपने पति ओम प्रकाश गोदारा पर आरोप लगाया था कि वह अपना प्रोपर्टी डीलर का कारोबार बढ़ाने के लिए उसे नशे की गोलियां खिलाकर प्रभावशाली लोगों को परोसता ता। इसके बाद अदालत के आदेश पर 21 नवम्बर की रात जयपुर थाना वैशाली नगर में मामला दर्ज किया गया। मामले की जांच कर रहे निरीक्षक ने बताया कि जिनके खिलाफ मामला दर्ज किया गया है उनमें महिला का पति ओम प्रकाश गोदारा, पूर्व मंत्री जोगेश्वर गर्ग, पूर्व सांसद निहाल चन्द मेघवाल, राजस्थान विवि छात्र संघ के पूर्व अध्यक्ष पुष्पेंद्र भारद्वाज, भाजपा नेताओं के निजी सहायक रहे विवेकानन्द, डीएसपी अनिल राय, पुलिस निरीक्षक महावीर सिंह समेत 18 लोग शामिल हैं। इन सबके खिलाफ धारा 376/328/343/323/506 आईपीसी तथा 120बी के तहत मामला दर्ज किया गया है। चर्चित भंवरी देवी प्रकरण की तरह इस एक और सेक्स रैकेट से राजस्थान की राजनीति में नया उफान आ सकता है। जहां तक भंवरी देवी का प्रश्न है समझ नहीं आ रहा कि उसे जमीन निगल गई या आसमान खा गया? अखबार में छपी एक खबर के अनुसार भंवरी देवी की हत्या हो चुकी है लेकिन इस तथ्य के लिए सीबीआई को अभी सुबूत जुटाने हैं। यह बात सीबीआई ने बृहस्पतिवार को जोधपुर हाई कोर्ट में पेश स्टेटस रिपोर्ट में अदालत से कही है। इसी पर अदालत ने उसे 15 दिन का समय दिया। उधर आबू शहर की युवती ने आरोप लगाया है कि उसके पति ने उसकी 34 सीडी बनाई हैं और इनके जरिये वह संबंधित नेताओं को ब्लैकमेल करता था।
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Thursday, 17 November 2011

गिरती साख को बचाने के लिए गहलोत ने उठाया सख्त कदम


Vir Arjun, Hindi Daily Newspaper Published from Delhi
Published on 17th November 2011
अनिल नरेन्द्र
पिछले कई दिनों से राजस्थान में अशोक गहलोत की कांग्रेस सरकार विवादों से बुरी तरह घिरी हुई है। भंवरी देवी का लापता होना और भरतपुर में हुए दंगे दोनों ही बातें अशोक गहलोत के लिए भंवर जैसी बन गई है। कांग्रेस पहले ही दल-दल में फंसी थी। भ्रष्टाचार, काले धन की वापसी और जन लोकपाल बिल जैसे मुद्दे कांग्रेस को परेशान कर रहे थे। अब राजस्थान जैसे दोनों मुद्दों ने पांच राज्यों और खासकर यूपी में होने वाले चुनावों के लिए कांग्रेस को बैकफुट पर ला दिया है। इसीलिए अशोक गहलोत भी भंवर में हैं। पहले भरतपुर के निकट गोपालगढ़ के दंगों पर राजस्थान सरकार ने राजधर्म का पालन ठीक से नहीं किया। पुलिस के अत्याचारों के कारण राजस्थान सरकार सुर्खियों में रही। इन दंगों में नौ लोग मारे गए थे। मुस्लिम समुदाय में भी भारी नाराजगी थी। दुख से कहना पड़ता है कि चाहे भंवरी देवी का मामला रहा हो या भरतपुर दंगे का दोनों मामलों में पशासन की मिस हैंडलिंग थी। मामला दिल्ली दरबार तक भी पहुंच गया और गहलोत को कई बार दिल्ली आना पड़ा। गहलोत को करीब डेढ़ महीने में करीब 15 बार दिल्ली के चक्कर लगाने पड़े।
उन्होंने मौके की नजाकत समझी और बिना देर किए दोनों ही मामले सीबीआई को सौंप दिए। चूंकि भंवरी कांड में राजस्थान सरकार के एक से ज्यादा मंत्री शामिल होने का संदेह है इसलिए गहलोत ने फटाफट न केवल सभी मंत्रियों से उनके त्यागपत्र ले लिए बल्कि गृहमंत्री शान्ति धारीवाल को छोड 5 विवादित मंत्रियों की छुट्टी कर 6 नये चेहरों को शामिल कर लिया है। लंबे समय से राज्य की राजनीति में अनिश्चितता का माहौल बना हुआ था। पार्टी हाईकमान के भी निर्देश थे। ऐसे में हमने गहलोत की ताकत बढ़ाने के लिए सामूहिक इस्तीफा देने का फैसला किया। दरअसल भंवरी देवी मामले में महिपाल मदेरणा के आरोपी होने के बाद से ही मंत्रिमंडल में फेरबदल की अटकलें बढ़ गई थीं। पिछले दिनों खान राज्यमंत्री रामलाल जाट के चरित्र पर उठे सवाल से भी गहलोत परेशान थे। हालांकि दोनों भंवरी देवी सैक्स स्कैंडल और भरतपुर दंगों में अशोक गहलोत किसी भी तरह इन्वाल्ब नहीं थे पर सरकार की भूमिका की हैसियत से जिम्मेदारी से नहीं बच सकते थे। मैं समझता हूं कि गहलोत ने सही कदम उठाया है। गिरती साख को बचाने के लिए यह कुछ हद तक जरूरी भी था।
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Tuesday, 8 November 2011

भंवरी देवी सेक्स, ब्लैकमेल और अपहरण का स्कैंडल



Vir Arjun, Hindi Daily Newspaper Published from Delhi
Published on 8th November 2011
अनिल नरेन्द्र
बहुचर्चित राजस्थान के भंवरी देवी सेक्स स्कैंडल में एक नया मोड़ आ गया है। क्या भंवरी देवी ने मंत्री महिपाल मदेरणा को एक सीडी को लेकर ब्लैकमेल करने का प्रयास किया था? पुलिस के हाथ एक चार मिनट की आडियो सीडी लगी है। इस क्लिप में कथित रूप से कांग्रेस विधायक मलखान बिश्नोई की बहन इन्द्रा एवं भंवरी के बीच मारवाड़ी भाषा में बातचीत है जिसमें भंवरी देवी इन्द्रा को यह भी धमकी दे रही है कि डील (धन का लेन-देन) नहीं हुई तो चार दिन बाद सीडी को टीवी पर चला दिया जाएगा। बर्खास्त मंत्री महिपाल मदेरणा और लूंगी में कांग्रेस विधायक मलखान का इसमें उल्लेख करते हुए सीडी का सौदा नहीं होने की स्थिति में एसपी के पास तक की बात कही गई है। बातचीत में दोनों पक्षों के पास सीडी होने की बात भी कही गई है। क्लिप में खुलकर अश्लील शब्दावली व गाली-गलौज का इस्तेमाल किया गया है। हालांकि इन्द्रा बिश्नोई का दावा है कि न तो उसे आडियो क्लिप की जानकारी है और न ही उसकी आवाज है। आडियो क्लिप में ही भंवरी, इन्द्रा और सोहन लाल के बीच सीडी को लेकर आपसी बातचीत का ब्यौरा रिकार्ड है और उसमें अशोक गहलोत सरकार को संकट में डालने और सात करोड़ रुपये तक की सौदेबाजी का भी जिक्र है। इस मामले में कुछ दिनों पूर्व सीबीआई ने मलखान के छोटे भाई परसराम से भी पूछताछ की थी। इस कांड में सर्वाधिक चर्चित आरोपी शहाबुद्दीन ने सीबीआई कोर्ट में सरेंडर कर दिया है। बताया जाता है कि सीबीआई टीम ने जोधपुर व आसपास के सम्भावित ठिकानों के साथ शहाबुद्दीन के घर जाकर उसके परिजनों से भी तहकीकात की थी। उसके परिजनों ने यह कहकर और गुमराह कर दिया कि शहाबुद्दीन की प्रेमिका का भी भंवरी देवी के अपहरण में बहुत बड़ा हाथ है। यह भी बात सामने आई कि शहाबुद्दीन पीपाड़ का रहने वाला है। अब यह आशंका भी जताई जा रही है कि घटना का मुख्य केंद्र पीपाड़ व आसपास का कोई इलाका हो सकता है। भंवरी देवी के पति अमीर चन्द ने अपनी पत्नी की हत्या की आशंका जताते हुए सीबीआई को कॉल डिटेल भी मुहैया करवाई है। इसमें वह सभी नम्बर हैं जिसके आधार पर भंवरी देवी प्रकरण की गुत्थी सुलझ सकती है। भंवरी के पति ने कांग्रेस विधायक मलखान सिंह के सेल नम्बर भी उपलब्ध कराए। सीबीआई टीम को अमीर चन्द ने बताया कि इन नम्बरों से मलखान सिंह लगातार फोन करते थे। पुलिस व सीबीआई टीम इस अफवाह की अब गहराई से जांच कर रही है कि क्या भंवरी देवी को पीपाड़ शहर और पीपाड़ रोड के बीच के चूने-भट्ठे में डालकर जिन्दा जला दिया गया? भंवरी देवी को चूने-भट्ठे में डालकर जिन्दा जला दिए जाने की आशंका के चलते सीबीआई ने पंचायत समिति के सदस्य गौरधन राम चौधरी के चूने-भट्ठे पर जाकर बाकायदा तलाशी ली और चौधरी के रिश्तेदारों से पूछताछ की है। सीबीआई भंवरी देवी अपहरण में इस्तेमाल की गई बोलेरो में मिले बालों के बारे में भी पता करने की कोशिश में है। भंवरी देवी अपहरण व आगे क्या हुआ इस मामले का अब जल्द खुलासा हो सकता है। सेक्स, ब्लैकमेल, अपहरण और फिर हत्या का यह मामला होने की पूरी सम्भावना है।
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Wednesday, 19 October 2011

सैक्स स्कैंडल में फंसे महिपाल मदेरणा की छुट्टी


Vir Arjun, Hindi Daily Newspaper Published from Delhi
Published on 19th October 2011
अनिल नरेन्द्र
नर्स भंवरी देवी के रहस्यमय परिस्थितियों में लापता होने के मामले में संदिग्ध राजस्थान के विवादित मंत्री महिपाल मदेरणा को रविवार को मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने निकाल बाहर किया। अशोक गहलोत ने रविवार शाम राज्यपाल शिवराज पाटिल को भेजे संचार में मदेरणा की बर्खास्तगी की सिफारिश की जिसके आधार पर राज्यपाल ने उन्हें बर्खास्त कर दिया। गहलोत ने पहले जल संसाधन मंत्री मदेरणा को राजी करने की कोशिश की लेकिन असफल रहने पर उन्होंने यह कदम उठाया। हम मुख्यमंत्री अशोक गहलोत द्वारा उठाए गए इस साहसी कदम का स्वागत करते हैं। जोधपुर जिले में बिलाडा के स्वास्थ्य केंद्र में काम करने वाली नर्स भंवरी देवी गत एक सितम्बर को संदिग्ध परिस्थितियों में लापता हो गई थी। उसके पति अमर चन्द द्वारा बिलाडा थाने में भंवरी देवी के लापता होने और उसकी गुमशुदगी में राजस्थान के जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी मंत्री महिपाल मदेरणा का हाथ होने संबंधी मामला दर्ज करवाए गए, लेकिन पुलिस ने यह मामला दर्ज नहीं किया। इस पर भंवरी देवी के पति ने बिलाडा की सिविल अदालत में महिपाल मदेरणा के खिलाफ मामला दर्ज किया। अदालत ने 23 सितम्बर को मामले की सुनवाई करते हुए पुलिस को मदेरणा के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने के निर्देश दिए। नर्स भंवरी देवी (36) जोधपुर जिले के 120 किलोमीटर दूर स्थित जलीवाड़ा गांव के एक स्वास्थ्य उपकेंद्र में नियुक्त है। स्थानीय लोगों का कहना है कि वह एशो-आराम वाली जिन्दगी जीती है, साथ ही उसके गहरे राजनीतिक संबंध है। मंत्री मदेरणा से उसकी मित्रता हो गई थी। मदरेणा का भंवरी के घर आना-जाना था। बार-बार फोन करने पर भंवरी के पति अमर चन्द ने आपत्ति जताई थी। दो लड़कियां और एक लड़के की मां भंवरी कुछ स्थानीय संगीत वीडियो एलबम में भी काम कर चुकी है। गुमशुदगी के बाद पुलिस ने एक ठेकेदार सोहणा लाल विश्नोई को गिरफ्तार किया। कहा जाता है कि भंवरी ने विश्नोई को एक कार बेची थी, एक सितम्बर को उससे रुपये लेकर लौटते वह लापता हो गई।
दरअसल मुख्यमंत्री अशोक गहलोत मदेरणा के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने पर कुछ हद तक मजबूर थे। एक तरफ अदालत का दबाव दूसरी तरफ सीबीआई की जांच के कारण उन्हें मदेरणा को हटाने का फैसला करना पड़ा। शनिवार को गहलोत ने महिपाल को तलब किया और उनको तत्काल पद छोड़ने की सलाह दी थी क्योंकि सोमवार को हाई कोर्ट में इस मामले में महत्वपूर्ण सुनवाई होने जा रही थी वहीं सीबीआई अब महिपाल पर हाथ डालने की तैयारी में थी, लेकिन महिपाल अपने अड़ियल रवैये पर कायम रहे और इस्तीफा नहीं दिया। उल्टे रविवार को वह दिल्ली रवाना हो गए। कहा जा रहा है कि वे पार्टी आलाकमान के सामने अपना पक्ष रखना चाहते थे। पिछले करीब डेढ़ महीने से चल रहे भंवरी देवी मामले में महिपाल को मंत्रिमंडल से हटाना, अब गहलोत की मजबूरी हो गई थी। कोर्ट के आदेश के बाद भंवरी देवी मामले में महिपाल के खिलाफ हत्या और अपहरण का मामला पुलिस में दर्ज हो चुका था, सीबीआई ने मामले की जांच भी शुरू कर दी। पुलिस ने मामला दर्ज होने के बाद एक बार भी महिपाल से पूछताछ नहीं किए जाने पर राजस्थान हाई कोर्ट ने यहां तक टिप्पणी कर दी थी कि इससे ज्यादा नाकारा राजस्थान सरकार उसने अब तक नहीं देखा। दूसरी ओर कांग्रेस आलाकमान ने भी मसले को गंभीरता से लेते हुए गहलोत को दिल्ली तलब किया था, जहां वे अपनी सफाई देने पर मजबूर हो गए। दूसरी तरफ महिपाल अपने रवैये पर अड़े हुए थे तथा अपने पिता परसराम मदेरणा के जन्म दिन के बहाने अपना शक्ति प्रदर्शन भी कर चुके थे। ऐसे में महिपाल की मंत्रिमंडल से रवानगी के अलावा अशोक गहलोत के पास दूसरा कोई रास्ता नहीं बचा था। भंवरी देवी कहां है, किस हालत में है इसका अभी तक पता नहीं चल सका। वह जिन्दा भी है या नहीं इसका भी पता नहीं। उम्मीद है कि राजस्थान पुलिस और सीबीआई भंवरी देवी का अता-पता लगा लेंगे और जल्द ही पूरे मामले की सच्चाई सामने आएगी।
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Friday, 14 October 2011

लापता भंवरी देवी केस में अदालत की सरकार को फटकार

Vir Arjun, Hindi Daily Newspaper Published from Delhi
Published on 14th October 2011
अनिल नरेन्द्र
राजस्थान हाई कोर्ट में मंगलवार को भंवरी देवी अपहरण मामले को लेकर सरकारी रवैये पर घोर नाराजगी जताई। भंवरी के पति अमीर चन्द की ओर से दायर बन्दी प्रत्यक्षीकरण याचिका की सुनवाई के दौरान न्यायाधीश गोविंद माथुर व न्यायाधीश एनके जैन की खंडपीठ ने मौखिक रूप से कहा कि एक महिला के गायब होने की सरकार को कोई चिन्ता नहीं है। ऐसी कमजोर सरकार इतिहास में कभी नहीं देखी। यदि काम नहीं कर सकते तो छोड़ें और चले जाएं। खंडपीठ ने सरकार की ओर से इस मामले को सीबीआई को सौंपे जाने से लेकर अब तक की कार्रवाई पर यह टिप्पणी की। खंडपीठ ने कहा कि एक महिला एक महीने से गायब है और सरकार को इसकी चिन्ता नहीं है। जनता पुलिस का भरोसा खो बैठी है और सरकार को अपनी पुलिस पर ही भरोसा नहीं है। अदालत ने पुलिस की जांच की प्रगति रिपोर्ट को कूड़ेदान में फेंकने लायक बताया है। हाई कोर्ट ने सरकार के प्रति कड़ा रवैया अपनाते हुए कहा कि मामले की सीबीआई जांच की कोई जरूरत नहीं है। सरकार आरोपियों को बचाने और मामले के तथ्यों को छिपाने की कोशिश कर ही है। अदालत ने निर्देश दिया कि मामले की जांच रिपोर्ट रोजाना पेश की जाए और इसकी हर दूसरे दिन सुनवाई होगी ताकि जांच पर निगरानी रखी जा सके।
जोधपुर की नर्स भंवरी देवी एक सितम्बर से लापता है। पुलिस भंवरी देवी का अभी तक पता नहीं लगा पाई है। पुलिस ने इस मामले में अभी तक दो लोगों को गिरफ्तार किया है और उनसे काफी पूछताछ की है। भंवरी देवी के अपहरण के दो आरोपी पुलिस के हाथ अभी तक नहीं लगे हैं। पुलिस ने गुजरात के पालनपुर इलाके में उस जीप को बरामद कर लिया है जिसमें भंवरी देवी का अपहरण किया गया था। इस मामले में जोधपुर जिले की बिलाडा की स्थानीय अदालत में भंवरी देवी के पति के इस्तगासे के आधार पर जलदाय मंत्री महिपाल मदेरणा के खिलाफ मामला भी दर्ज करने के निर्देश पुलिस को दिए थे। भंवरी देवी मामले में एक आपत्तिजनक सीडी की प्रमुख भूमिका मानी जा रही है। इस सीडी में मंत्री और कांग्रेस के एक विधायक के जुड़ा होने की आशंका है। इसी सीडी को लेकर भंवरी देवी का अपहरण किया जाना पुलिस मान रही है। उधर मंगलवार को सीबीआई ने भंवरी देवी का केस अपने हाथ में ले लिया है। जांच मंगलवार से सीबीआई भी आगे बढ़ाएगी। सीबीआई सूत्रों ने दिल्ली में बताया कि पिछले महीने राजस्थान सरकार ने इस मामले में जांच सीबीआई को सौंपने का केंद्र से अनुरोध किया था जिसके बाद यह केस सीबीआई ने अपने हाथ में ले लिया और मामले को दर्ज कर लिया। अदालत में जब सरकारी वकील को लिखे गए पत्र की कॉपी दी तो उसे पढ़ने के बाद खंडपीठ ने नाराजगी जताते हुए कहा कि सीबीआई ने छह माह के लिए भवन व पेट्रोल सहित गाड़ियों के अलावा अन्य सुविधाओं की मांग की है। अदालत छह माह क्या छह घंटे के लिए भी इंतजार नहीं कर सकती है?
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