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Tuesday, 7 June 2011

भारत को अमेरिका का शुकिया करना चाहिए कि कश्मीरी को मार गिराया


Vir Arjun, Hindi Daily Newspaper Published from Delhi
Published on 7th June 2011
अनिल नरेन्द्र
ओसामा बिन लादेन की हत्या के बाद अमेरिका को दूसरी उल्लेखनीय सफलता मिली है। अमेरिका की पांच मोस्ट वांटेड टेरोरिस्ट की सूची में शामिल इलियास कश्मीरी मारा गया है। अमेरिका ने उस पर 50 लाख डालर का इनाम घोषित कर रखा था। शुकवार लगभग 11.15 रात दक्षिण वजीरिस्तान में एक ड्रोन हमले में इलियास अपने कुछ साथियों के साथ ड्रोन मिसाइलों का शिकार हो गया। इसकी पुष्टि हरकत-उल-जिहाद-अल-इस्लामी के कुख्यात `313 ब्रिगेड' ने एक फैक्स जो पेशावर में कुछ पत्रकारों को भेजा गया उससे होती है। भारत को अमेरिका का शुकगुजार होना चाहिए कि उसने भारत के एक बहुत बड़े दुश्मन को हटा दिया है। हम तो उसका कुछ नहीं बिगाड़ सके। हालांकि इलियास अमेरिका से ज्यादा भारत का बड़ा गुनहगार था। भारत ने इस खूंखार दहशतगर्द की कई खतरनाक साजिशों के दंश झेले। ओसामा बिन लादेन के मारे जाने के बाद उसके उत्तराधिकारी के रूप में भी कश्मीरी का नाम चल रहा था। पाक अधिकृत कश्मीर में जन्मा इलियास की एक आंख और एक उंगली नहीं थी। उसने 26 नवम्बर, 2008 को मुंबई को दहलाने के लिए रची गई साजिश में अहम भूमिका निभाई।
जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद अगर इतना बढ़ा तो इसके पीछे इलियास कश्मीरी भी एक बहुत बड़ा कारण था। चूंकि यह खुद पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर के कोटली में पैदा हुआ था, तो इस वजह से उसका हमेशा ध्यान कश्मीर में लगा रहा। इलियास पर आरोप है कि इसने कई भारतीय फौजियों के सर कलम किए और इसी के इनाम के रूप में पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ ने इसे बाकायदा सम्मानित भी किया। बाद में यही इलियासी उसी मुशर्रफ को मारने की साजिश में शामिल था। दहशत की दुनिया में कश्मीरी ने सबसे पहले लश्कर-ए-तैयबा का साथ चुना। एक वक्त ऐसा भी आया जब कश्मीरी ने अपने खुद के आतंकी संगठन की बुनियाद रखी। इस संगठन को हरकत-उल-जिहाद-अल-इस्लामी (हूजी) नाम दिया गया। यह आतंकी संगठन बीते कई साल से भारत विरोधी गतिविधियों में संलिप्त था। गत दिनों सैयद सलीम शहजाद का कत्ल हुआ था।
शहजाद ने इसी इलियास के बारे में दो लेख लिखे थे। अपने एक लेख में उन्होंने बताया कि 23 जुलाई, 2003 को भारतीय सेना के सखनूर कैम्प पर एक हमला हुआ था। इसमें नौ आर्मी के अफसर मारे गए थे जिसमें ब्रिगेडियर वीके गोविल मारे गए थे और उत्तरी कमान के पमुख ले. जनरल हरि पसाद घायल हो गए थे। इलियास 1994 में दिल्ली में भी अपनी गतिविधियां चला रहा था। उमर शेख के साथ इलियास भी वाल स्ट्रीट जरनल के पत्रकार डेनियल पर्ल की हत्या में शामिल था।
भारत को अमेरिका का शुकगुजार होना चाहिए कि उसने वह काम कर दिया जो शायद हम कभी नहीं कर सकते। हमने तो इसी इलियास को एक नहीं दो बार पकड़कर भागने का मौका दिया। पहली बार सेना ने और दूसरी बार 1994 में गाजियाबाद के मसूरी थाना क्षेत्र से। पुलिस के साथ मुठभेड़ में वह घायल भी हुआ था, उसके दो साथी मारे गए थे। इनके कब्जे से एक अमेरिकी मूल के एक विदेशी नागरिक को छुड़ाया भी गया था। इलियास कश्मीरी जो मिशन पूरा करने भारत आया था वह भले ही पूरा कर लिया हो मगर पाप के घड़े का कोई लम्बा समय नहीं होता वह एक न एक दिन फूट ही जाता है। आखिरकार इलियास कश्मीरी पाकिस्तान में मारा गया। अमेरिका को इस उल्लेखनीय सफलता पर बधाई। ओसामा के बाद यह अमेरिका को दूसरी बड़ी सफलता मिली है।
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जयललिता का मारन बंधुओं व करुणानिधि को पहला तोहफा

Vir Arjun, Hindi Daily Newspaper Published from Delhi
Published on 7th June 2011
अनिल नरेन्द्र

तमिलनाडु की मुख्यमंत्री जयललिता ने सत्ता संभालते ही एम. करुणानिधि और उनके कुनबे को तोहफा दे दिया है। जया सरकार ने शुकवार को अपने पतिद्वंद्वी करुणानिधि के जन्मदिन पर उनकी सरकार द्वारा शुरू की गई कई महत्वाकांक्षी परियोजनाओं को बंद कर दिया। ये परियोजनाएं आवास एवं बीमा क्षेत्रों से जुड़ी थी। इसके साथ ही सरकार ने यहां बन रहे विधानसभा और मंत्रालय काम्पलैक्स के निर्माण के घोटालों के आरोप लगाते हुए उसकी जांच कराने की घोषणा की है। बात यहीं खत्म नहीं हुई। द्रमुक से जुड़े मारन बंधुओं पर निशाना साधते हुए जया सरकार ने राज्य के करोड़ों रुपए के केबल व्यवसाय का राष्ट्रीयकरण करने की घोषणा कर दी है। विधानसभा के नए सत्र को संबोधित करते हुए राज्यपाल सुरजीत सिंह बरनाला ने ये घोषणाएं शुकवार को की।
मारन साम्राज्य का सूरज कभी डूब नहीं सकता' कुछ इस पकार की बातें कारोबारी जगत के आला अधिकारी, कलानिधि मारन और उनके छोटे भाई मौजूदा कपड़ा मंत्री दयानिधि मारन के स्वामित्व वाले सन ग्रुप के बारे में कहते रहे हैं। लेकिन बीते तीन दिनों के घटनाकम इस बात के संकेत कर रहे हैं कि मारन बंधुओं के लिए संध्याकाल का समय करीब-करीब आ चुका है। अमेरिकी बिजनेस मैगजीन ने हाल ही में मारन बंधुओं की सम्पत्ति 4 अरब डॉलर करीब 179 अरब रुपए आंकी थी। जिन लोगों ने `सन ग्रुप' का विस्तार देखा है वे इसके विकास को आश्चर्यजनक मानते हैं। लेखक व राजनीतिक विश्लेषक जो रामास्वामी कहते हैं कि मारन बंधुओं की यह तरक्की उनके राजनीतिक संरक्षण और पभाव के कारण ही रही है। उनके लिए राजनीति ने कारोबारी दुनिया में पवेश के लिए लांच पैड का काम किया। दरअसल करुणानिधि एंड परिवार ने जितना आर्थिक लाभ राजनीति से उठाया है उतने परिवार कम ही देखने को मिलेंगे।
तमिलनाडु में केबल टीवी नेटवर्प का बाजार 1400 से 1500 करोड़ रुपए का है। इसमें मारन बंधुओं के स्वामित्व वाले `सुमंगली केबल विजन' की 65 फीसदी हिस्सेदारी 950 से 1000 करोड़ रुपए के बीच है। दयानिधि ने संचार मंत्री रहते अपने पभाव का इस्तेमाल दक्षिण भारतीय भाषा वाले केबल टीवी चैनल ऑपरेटरों को लाइसेंस देने में देरी की। वे नहीं चाहते थे कि `सन टीवी' का कोई पतिस्पर्धा खड़ा हो, इसलिए तमिलनाडु के कई टीवी चैनलों के लाइसेंस कई सालों तक लटकाए रखे। दयानिधि और कलानिधि मारन, पूर्व केन्द्राrय मंत्री व डीएमके के कद्दावर नेता रहे दिवंगत मुरासोली मारन के बेटे हैं और करुणानिधि के भांजे थे मुरासोली मारन। उनके छोटे भाई सेवलम का विवाह सेल्वी से हुआ है जो करुणानिधि-दयालु अम्माल की पुत्री हैं। 1990 में कलानिधि ने वीडियो मैगजीन `पुललाई' शुरू की थी। 1993 में दक्षिण भारत का पहला सैटलाइट चैनल सन टीवी शुरू किया। 1995 में उनकी कुल सम्पत्ति बढ़कर 45 करोड़ रुपए हो गई। सन गुप देश का सबसे बड़ा सैटलाइट टीवी नेटवर्प है। इसके तमिल, मलयालम, कनड़ और तेलगु भाषाओं में 20 चैनल हैं। वे तमिलनाडु के दूसरे बड़े अखबार `दिनाकरण' के अलावा एक दर्जन मैगजीन भी निकालते हैं।
उनके पास 45 रेडियो चैनल भी हैं। सन पिक्चर्स दक्षिण भारत का सबसे बड़ा मूवी पोडक्शन हाउस है। अब आप बताएं कि 1990 से लेकर 2011 तक यह 180 अरब रुपए के मालिक कैसे बन गए?
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Sunday, 5 June 2011

Alleviate poverty, Eliminate Poor

- Anil Narendra
We think that the Manmohan Singh government has adopted the policy of elimination of the poor in order to alleviate the poverty. Had it not been the case, the government would have at least tried to make efforts to control the inflation. But, there are preparations afoot to increase petrol prices once again and also to increase the prices of diesel and kerosene. This is the state of affairs, when per barrel crude prices have gone down in the international market. Union Minister of Petroleum, Jaipal Reddy said at Dehradun on Tuesday that in comparison to the international prices, the petrol prices are still lower in the domestic market. According to Mr Reddy, oil marketing companies are incurring a loss of Rs 4 per litre on petrol. The Indian Oil Chairman, RS Butala said in a press conference the same day that the net profit of the Company has gone down in 2009-10 due to selling the products at lower prices. The Company earned a profit of Rs 10,221 Crore during 2009-10, which came down to Rs 3905.16 Crore in the last quarter of the previous financial year. This means that the Chairman is talking of net profit, whereas the Minister is talking of loss to the Company.
Due to the consolidation of dollar in the global market vis-à-vis other currencies, the price of crude oil came down to 99 $ per barrel.  It may be mentioned that per barrel price of crude had touched the 115 $ mark, highest in last 34 months. It may be astonishing for the readers to know that petrol price in Pakistan is just Rs 17 per litre, and it is still lower in Indonesia.
These oil companies have made lives of the poor, middle class, employees miserable. We demand probe into their financial affairs. Where these companies are spending their revenue? Why should the common man suffer for their luxuries? In fact, these navratna companies are plundering the country. The government has never explained that how much petrol and diesel is consumed by the private commercial sector. According to our estimates, share of oil consumption by public and these navratna companies, Railways, Air Lines in the total oil consumption ranges between 70 to 80 %. Why does not the government reduce its quota of consumption by 10%? The government should desist from adding fuel to the inflation by increasing oil prices quite often. The government must officially inform the public about the share of government taxes in the price of the petrol, which is being sold at Rs 63-37 in Delhi at present. What is the cost to the government?
People had high expectations from Economist Prime Minister Dr. Manmohan Singh, but he has disappointed them. In fact, our Supreme Court is more sensitive than Manmohan Singh, who, in its recent ruling has said that a free market is not the solution to the problems. Strongly criticising the strategic pillars of the modern economy – liberalizaton, privatization and globalization, the Supreme Court has underlined the need to review the free market system. Justice Sudershan Reddy’s Bench clearly said that in the name of free market, the government cannot escape from its constitutional responsibility, under which it must work for the welfare of the people. Free market system without regulations, will lead us to the broader disappointment.

26/11 हमले की साजिश आईएसआई ने रची थी : शहजाद


Vir Arjun, Hindi Daily Newspaper Published from Delhi
Published on 5th June 2011
अनिल नरेन्द्र
पाकिस्तानी पत्रकार सैयद सलीम शहजाद की निर्मम हत्या ने पाकिस्तान में भी हड़कम्प मचा दिया है। तमाम मुल्क में उसकी हत्या की निंदा की जा रही है।
पाक मीडिया खुलकर लिख रहा है कि पाकिस्तान पत्रकारों के लिए कितना खतरनाक देश बन चुका है। एक तरफ जहां पाकिस्तानियत डॉट काम के ब्लागर अदील नजाम ने शहजाद की मौत को देश के लिए चेतावनी बताया है वहीं `ए केस ऑफ एक्सप्लोडिंग मैंगोज' के लेखक मोहम्मद हनीफ ने ट्विटर पर लिखा है। क्या यहां कोई ऐसा पत्रकार है जो यह मानता है कि इसके पीछे खुफियों का हाथ नहीं है? नजाम ने अपने ब्लाग में लिखा है कि पाकिस्तानियों को असुरक्षित और भयभीत रहने की आदत सी हो गई है। आज वे और ज्यादा असुरक्षित और भयभीत महसूस कर रहे हैं। डेली टाइम्स ने अपने सम्पादकीय में लिखा ः पत्रकार की हत्या पत्रकारों के लिए एक चेतावनी की तरह है कि अगर वे ईमानदारी से पत्रकारिता करेंगे तो उनका यही अंजाम होगा। डॉन अखबार लिखता है कि यदि दुनिया पाकिस्तान को पत्रकारों के लिए एक जान लेवा मुल्क कहती है, तो इस तोहमत से छुटकारा पाना उसके लिए वाकई मुश्किल है।
शहजाद ने एक किताब `इन साइड अलकायदा एंड तालिबान ः बियोड़ बिन लादेन एं 9/11 लिखी थी। गत बीस मई को पकाशित इस किताब को डॉन अखबार ने पकाशित किया है। किताब में 40 वर्षीय लेखक शहजाद ने मुंबई हमले की पृष्ठ भूमि का विस्तार से वर्णन किया है। इसमें शहजाद ने बताया है कि किस तरह वर्ष 2008 में मुंबई हमले को अंजाम दिया गया। भारत के खिलाफ अभियान में इलियास कश्मीरी को विशेषज्ञता हासिल है। उसने यह सुझाव देकर अलकायदा के नेताओं को स्तब्ध कर दिया था कि वर्तमान गतिरोध को समाप्त करने का एक मात्र रास्ता युद्ध का विस्तार है। उसने भारत में ऐसा बड़ा अभियान चलाने का सुझाव दिया जिससे भारत और पाक में युद्ध छिड़ जाए और उससे अलकायदा के खिलाफ सभी पस्तावित अभियान रुक जाएं। इससे रोमांचित हो अलकायदा ने भारत पर आतंकी हमले के पस्ताव को मंजूरी दे दी। शहजाद ने कहा कि कश्मीरी ने तय हमले की पूरी साजिश का खाका सेना के पूर्व मेजर हारुन आशिफ को सौंपा।
किताब में शहजाद ने कहा है कि सेना के पूर्व मेजर ने इलियास कश्मीरी के गुर्गों की सहायता से आईएसआई की साजिश को हड़प कर उसे 26 नवम्बर 2008 को मुंबई के विनाशकारी हमले के रूप में बदल दिया।
दरअसल शहजाद आईएसआई और अलकायदा के बारे में जरूरत से ज्यादा जानकारी पा चुका था। यदि खोजी पत्रकारिता शहजाद की मौत का सबब बनी। शहजाद ने आशंका व्यक्त की कि आईएसआई देश के अधिकारिक परमाणु हथियार कार्यकम के अलावा एक गुप्त कार्यकम भी चला रही है। इसके तहत कायमलाऊ परमाणु बम तैयार किए जा रहे हैं। आईएसआई के कुछ अधिकारी महाविनाश के इन हथियारों को आतंकी गुटों तक पहुंचा सकते हैं। अफगानिस्तान और पाकिस्तान में आतंकवाद के बारे में शहजाद बहुत कुछ जान चुके थे जो आईएसआई को बहुत सता रहा था। सैयद सलीम शहजाद को शायद अलकायदा के पास एटमी हथियार हेने और भारत या इस्राइल के खिलाफ उनके इस्तेमाल की साजिश की जानकारी थी। इससे पहले कि वह ऐसी गतिविधियों का और खुलासा करते उनका मुंह हमेशा-हमेशा के लिए बंद कर दिया गया। मुंह तो बंद कर दिया पर उनकी लेखनी अमर हो गई है।
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बहन जी ने एक ही छटके में विपक्ष की हवा निकाल दी

Vir Arjun, Hindi Daily Newspaper Published from Delhi
Published on 5th June 2011
अनिल नरेन्द्र
किसानों के साथ खड़े होकर कांग्रेस उत्तर पदेश में अपनी राह आसान करने का जो पयास कर रही थी उसको मायावती ने एक छटके में ही चूर कर दिया है। इतना ही नहीं, भूमि अधिग्रहण और पुनर्वास की लोक लुभावनी नई नीति घोषित करके बहन जी ने केन्द्र सरकार के सामने एक चुनौती भी खड़ी कर दी है।
महा-पारसौल कांड के बाद केन्द्र सरकार संसद के मानसून सत्र में भूमि अधिग्रहण के बाबत नए कानून का विधेयक लाने जा रही है। उत्तर पदेश में फिर से खुद को खड़ा करने में जुटे युवराज राहुल गांधी बहुत जोर लगा रहे हैं।
आंदोलन में शामिल होकर गिरफ्तारी तक दी, पधानमंत्री से पतिनिधिमंडल को मिलवा कर उनसे आश्वासन तक दिलाया पर बहन जी ने सब पर पानी फेर दिया।
मुख्यमंत्री मायावती ने किसानों की एक पंचायत बुलाकर उनसे बातचीत करने के बाद नई भूमि अधिग्रहण नीति की घोषणा की, जिसमें अब निजी कंपनियां परियोजनाओं के लिए किसानों से सीधी बातचीत करके भूमि खरीदेंगी। इससे अब शासन व पशासन की भूमिका सिर्प मध्यस्थ फैसिलिटेटर, की ही होगी। नई अधिग्रहण नीति तत्काल पभाव से लागू होगी। बहन जी ने केन्द्र सरकार से राज्य सरकार की तर्ज पर भूमि अधिग्रहण की नीति पूरे देश में लागू करने की मांग भी की है। पिछले दिनों सुपीम कोर्ट ने भी इस ज्वलंत पश्न पर सवाल पूछा था कि आखिर देश में भूमि अधिग्रहण की केन्द्र सरकार की नीति क्या है?
मायावती ने किसानों से बातचीत के बाद नई जमीन अधिग्रहण नीति से न केवल पश्चिमी उत्तर पदेश में अशांत महौल को शांत करने में मदद मिलेगी वहीं बहुत हद तक इससे विपक्ष को राजनीतिक लाभ उठाने से बहन जी ने अपनी सरकार व पार्टी को बचा लिया है। ये अधिग्रहण राज्य सरकार ने अपने आपात अधिकारों का इस्तेमाल करके किए। किसानों को शिकायत यह थी कि भूमि औद्योगिक विकास के नाम पर अधिग्रहण करके उसे निजी बिल्डरों को दे दिया गया। नई नीति से ये शिकायतें काफी हद तक दूर हो जाएंगी। इस नीति के तहत सरकार सिर्प सार्वजनिक उपकमों या औद्योगिक विकास के लिए ही जमीन लेगी। इसके अलावा 2010 की जमीन अधिग्रहण नीति के फायदे भी किसानों को मिलेंगे।
मुख्यमंत्री मायावती ने महा-पारसौल गांव का विशेष जिक करते हुए कहा कि वहां घटना के दौरान गांव के लोगों की सम्पत्ति को जो नुक्सान पहुंचा है, उसकी भरपाई राज्य सरकार करेगी। उन्होंने यह भी कहा कि इस नीति को उनकी पार्टी संसद के मानसून सत्र में राष्ट्रीय स्तर पर लागू कराने के लिए केन्द्र सरकार पर दबाव बनाएगी। ऐसा न होने पर वह संसद का घेराव करने से भी पीछे नहीं हटेंगी। राज्य सरकार की यह नीति केन्द्र सरकार की पस्तावित नीति से कई गुना ज्यादा बेहतर ओर किसान हितैषी साबित होगी। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी द्वारा हरियाणा सरकार की भूमि अधिग्रहण नीति की पशंसा राजनीति से पेरित है। मुख्यमंत्री ने विपक्षी दलों को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि विरोधी दल भूमि अधिग्रहण कानून तैयार करने के लिए केन्द्र सरकार पर दबाव न डाल कर उत्तर पदेश में राजनीति चमकाने में लगे हैं।
हमारी राय में बहन जी ने रास्ता दिखा दिया जिस पर केन्द्र और राज्य सरकारों को गंभीरता से विचार कर, ऐसी नीति की घोषणा करनी चाहिए जिससे किसान संतुष्ट हों और आंदोलन न हो।
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Saturday, 4 June 2011

बाबा रामदेव बनाम अन्ना हजारे

Vir Arjun, Hindi Daily Newspaper Published from Delhi
Published on 4th June 2011
अनिल नरेन्द्र
बाबा रामदेव अपना जन आंदोलन 4 जून से करने पर अडिग हैं। हालांकि भारत सरकार ने हिम्मत नहीं हारी है और बाबा के सामने दंडवत पणाम कर लिया है पर बाबा हैं कि मानते ही नहीं। एक नहीं कई मंत्री बाबा को मनाने में लगे हुए हैं पर बाबा की तैयारियां फुल स्पीड में चल रही हैं। दिल्ली के रामलीला मैदान में होने जा रही बाबा की सत्याग्रह लीला की तैयारियों का सुन कर ही मैं हैरान रह गया। बाबा के लिए स्पेशल टेंट लगा है, जिसमें सोफा, कूलर, एलसीडी और डीटीएम कनेक्शन की सुविधा है। सत्याग्रह के लिए पंडाल, साउंड और स्टेज के लिए कारीगर हरिद्वार और ऋषिकेश से बुलाए गए हैं। बाबा जिस स्टेज पर बैठेंगे उस पर एक बार में 250 लोग बैठ सकेंगे। आंदोलन के दौरान देश भर से करीब डेढ़ लाख से दो लाख लोगों के आने की उम्मीद है। इसके लिए विशेष पंडाल बनाया गया है। पंडाल में करीब 800 पंखे और 100 कूलर लगेंगे। पूरे पंडाल में 750 स्पीकर लगेंगे। एक तरफ बाबा के समर्थकों में भारी उत्साह है तो दूसरी ओर अन्ना हजारे ने भी घोषणा कर दी है कि वह भी बाबा रामदेव के साथ हैं। विदेशों में जमा काला धन देश में लाने और उसे राष्ट्र सम्पत्ति घोषित करवाने वाले बाबा राम देव को अन्ना हजारे ने कहा कि वह सरकार के झांसे में न आएं। अन्ना ने कहा कि वो 5 जून को बाबा से मिलने जाएंगे। अन्ना ने मुंबई से कहा कि सरकार आश्वासन तो दे देती है पर उसे पूरा नहीं करती। सरकार ने मुझे धोखा दिया है। उन्होंने कहा कि वो जब बाबा से मिलेंगे तो उनसे भ्रष्टाचार के खिलाफ एक साथ लड़ाई लड़ने की बात करेंगे। अन्ना ने कहा कि जब वो आमरण अनशन पर बैठे थे तो सरकार ने उनको मनाने के लिए पहले तो सारे वादे मान लिए लेकिन बाद में सबसे पलट गए। वैसे भी अन्ना और बाबा के व्यक्तित्व में फरक है।
मनमोहन सरकार बाबा के आगे नतमस्तक आखिर क्यों हो रही है? जहां तक हम समझ पाए हैं बाबा के तो मुद्दे अन्ना से सरकार के लिए आसान हैं। अन्ना का लोकपाल भ्रष्टाचार मिटाने के लिए अत्यन्त सख्त कदम उठाने को था जबकि बाबा तो विदेशी धन को वापस लाने के लिए अमादा हैं। सरकार इसलिए भी बाबा को ज्यादा भाव दे रही है क्योंकि वह समझती है कि बाबा के पीछे राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ और भाजपा है और अगर उन्हें संघ और भाजपा से तोड़ना है तो थोड़ा दिखावा तो करना पड़ेगा, तभी तो भारत सरकार के चार-चार मंत्री बाबा को मनाने के लिए पहुंच जाते हैं। बाबा के आंदोलन से भारत सरकार ज्यादा भयभीत भी है। दिल्ली के रामलीला मैदान के अलावा बाबा का आंदोलन देश के 624 जिलों में भी साथ-साथ चलेगा। सरकार को डर है कि इसमें करोड़ों लोग शामिल हो सकते हैं या अपना मसर्थन दे सकते हैं। कहीं यह 1974 का जेपी आंदोलन की तरह न बन जाए? सरकार को भलिभांति यह तो मालूम ही है कि जनता देश में भ्रष्टाचार, महंगाई, बेरोजगारी, बढ़ती कीमतों से बुरी तरह परेशान है और वह अपना गुस्सा निकालने का बहाना तलाश रही है। कहीं जनता को बाबा का आंदोलन वह मौका न दे दे। इसीलिए केन्द्र सरकार दिन-रात यह पयास कर रही है कि बाबा अपना आंदोलन टाल दें। बाबा को यह भी फायदा होगा कि उन्होंने अन्ना हजारे का ड्रामा देखा है और यह भी देखा है कि किस तरह उनकी सरकार ने हवा निकाल दी। बाबा और उनके समर्थकों का यह पयास होगा कि 4 जून से रामलीला मैदान में सिर्प अष्टांग योग शिविर ही न हो, बल्कि भारत सरकार को शीर्षासन करने के लिए सारा दबाव यहीं से पड़े। बाकी देखें होता है क्या?
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कनिमोझी, ए. राजा के बाद अब दयानिधि मारन का नंबर आ रहा है

Vir Arjun, Hindi Daily Newspaper Published from Delhi
Published on 4th June 2011
अनिल नरेन्द्र
वर्षों तक श्रीराम को गाली देने वाले एम. करुणानिधि और उनके परिवार ने तमिलनाडु और केन्द्र में मुगलों की तरह सत्ता सुख भोगा है और इतना पैसा बनाया है कि जिसका हिसाब ही कोई नहीं। पर जब श्रीराम की मार पड़ती है तो अच्छे-अच्छे धुरंधर धाराशाह हो जाते हैं। करुणानिधि के परिवार का भी दुर्दिन आरम्भ हो गया है। पूर्व संचार मंत्री ए. राजा के बाद सांसद बेटी कनिमोझी के भ्रष्टाचार के आरोपों में जेल जाने के बाद उनके परिवार का एक और सदस्य तथा केन्द्राrय कपड़ा मंत्री दयानिधि मारन का अब नम्बर आ रहा है। दयानिधि मारन के खिलाफ एक गैर सरकारी संगठन (एनजीओ) सेंटर फॉर पब्लिक लिटिगेशन ने सुपीम कोर्ट में एक याचिका दायर की है। इस याचिका में कहा गया है कि मारन द्वारा मलेशिया के मैक्सिस समूह का पक्ष लिए जाने से संबंधित दस्तावेज उसे कोर्ट में पेश करने की अनुमति दी जाए। इस समूह ने मई 2004 से मई 2007 के बीच मारन के दूरसंचार मंत्री रहने के दौरान चेन्नई की टेलीकॉम कंपनी एयरसेल को खरीद लिया था। आरोप है कि दूरसंचार मंत्री रहते शिवा गुप की कंपनी एयरसेल को यूएएस लाइसेंस देने का मामला अटका दिया था। दूरसंचार मंत्रालय के रवैए से क्षुब्ध होकर इस कंपनी के मालिक सी. शिवाशंकर एयरसेल को मैक्सिस समूह को बेचने के लिए बाध्य हो गए थे। मैक्सिस समूह के मालिक मलेशिया के बिजनेस टाइकून टी. आनंद कृष्णन हैं। आरोप है कि मैक्सिस समूह के एयरसेल के बाद मारन परिवार नियंत्रित सन टीवी में भारी निवेश करते हुए उसकी 20 पतिशत हिस्सेदारी खरीद ली। मारन के कार्यकाल में एयरसेल को 14 लाइसेंस दिए गए।
उधर, 2-जी स्पेक्ट्रम घोटाले की जांच कर रही सीबीआई ने राष्ट्रीय दूरसंचार नीति में 2001 से हुई अनियमितताओं की पड़ताल के लिए पारंभिक जांच दर्ज की है। इससे ए. राजा के पहले रहे दूरसंचार मंत्री दयानिधि मारन भी जांच के घेरे में आ गए हैं। गौरतलब है कि तहलका पत्रिका ने इस मामले का खुलासा किया था। हालांकि मारन ने इन आरोपों का खंडन करते हुए पत्रिका को कानूनी नोटिस भी भेजा है। सीबीआई के पवक्ता धारिणी मिश्रा ने कहा `सीबीआई ने 2001 से 2007 के बीच दूरसंचार नीति में हुई आपराधिक गड़बड़ियों के निर्धारण के लिए अज्ञात लोगों के खिलाफ यह जांच दर्ज की है। इसका लक्ष्य तत्कालीन अटल बिहारी वाजपेयी सरकार द्वारा पारित पहले आओ-पहले पाओ के पावधान का दूरसंचार नीति में पालन हुआ है या नहीं यह मालूम करना है।'
2006 में जब दयानिधि मारन दूरसंचार मंत्री थे, तब उन्होंने अपने परिवार के सन टीवी नेटवर्प को फायदा पहुंचाने के लिए स्पेक्ट्रम आवंटन में पद का दुरुपयोग किया था। दयानिधि मारन के कार्यकाल में दूरसंचार क्षेत्र में पत्यक्ष विदेशी निवेश की सीमा 49 फीसदी से बढ़ाकर 74 फीसदी की गई थी। एयरसेल में 74 फीसदी शेयर धारक मैक्सिस ने अपनी कंपनी एस्ट्रो के जरिए मारन बंधुओं के सन टीवी नेटवर्प में 600 करोड़ रुपए से अधिक का निवेश किया था। मारन ने दूरसंचार मंत्री रहते एयरसेल के लाइसेंस और स्पेक्ट्रम संबंधी आवेदनों को मंजूरी नहीं दी थी। इसके चलते एयरसेल के मालिक शिवाशंकर ने मारन परिवार के करीबी मैक्सिस को अपने 74 फीसदी शेयर बेच दिए थे। सीबीआई अधिकारियों का मानना है कि शिवाशंकर पर इस सौदे को लेकर भारी दबाव था।
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