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Sunday, 4 December 2011

मनमोहन ने अपनी सरकार, पार्टी व देश को दाव पर लगा दिया है


Vir Arjun, Hindi Daily Newspaper Published from Delhi
Published on 4th December 2011
अनिल नरेन्द्र
क्या प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और कांग्रेस पार्टी देश और संसद का ध्यान ज्वलंत मुद्दों, भ्रष्टाचार, महंगाई, ब्लैक मनी से हटाने के लिए यह खुदरा क्षेत्र में प्रत्यक्ष निवेश (एफडीआई) का मुद्दा लाए हैं? माकपा नेता सीताराम येचुरी तो कम से कम यह मानते हैं। उन्होंने आरोप लगाया है कि सरकार संसद की कार्यवाही में बाधा को जानबूझ कर जारी रख रही है। यह लोकपाल, भ्रष्टाचार, महंगाई आदि मुद्दों पर चर्चा और बहस से बचने की राजनीति का एक हिस्सा है। यह दिन-ब-दिन साफ होता जा रहा है कि सरकार इस सत्र में कामकाज नहीं होने देना चाहती। येचुरी की इस दलील में कुछ दम है। यह प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की रणनीति का एक हिस्सा हो सकता है पर जहां तक कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी का इस रणनीति में शामिल होने का सवाल है, हमें नहीं लगता कि वह ऐसा करने को अपनी हामी दे सकती हैं। अंदरुनी खबर तो यह है कि सोनिया गांधी व राहुल गांधी मनमोहन सिंह की इस हठधर्मिता से सख्त नाराज हैं। एफडीआई मुद्दे पर फंसी मनमोहन सिंह सरकार को सोनिया गांधी ने उसके हाल पर छोड़ दिया है। सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक दो दिन पहले हुई कांग्रेस कोर कमेटी की बैठक में सोनिया गांधी उस समय झल्ला गईं जब प्रधानमंत्री ने पूरा मामला सोनिया पर छोड़ना चाहा। डॉ. मनमोहन सिंह ने तो दो टूक कहा कि सरकार संसद में मतदान का सामना करे या फिर एफडीआई पर फैसला ले। इस पर पहले से ही नाराज चल रहीं सोनिया गांधी ने कहा कि जब केंद्र को एफडीआई पर निर्णय लेना था तो उनसे क्यों नहीं पूछा गया था और जब स्वयं अपने विवेक पर उन्होंने (प्रधानमंत्री ने) यह फैसला लिया है तो फिर उनको (प्रधानमंत्री) ही इस संकट से निपटना चाहिए। डॉ. मनमोहन सिंह पता नहीं क्यों अपना और अपनी सरकार व पार्टी का सब कुछ इस मुद्दे को लेकर दाव पर लगाने पर तुले हुए हैं। बार-बार वह यह दोहराते नहीं थकते कि अगर उन्होंने एफडीआई को वापस लिया या रोल बैक किया तो उनकी सरकार की साख घटेगी। उन्होंने सरकार के सहयोगी दलों तृणमूल कांग्रेस और द्रमुक के नेताओं से मुलाकात कर कहा कि इस पर वह अपनी जिद्द छोड़ दें, क्योंकि कोई भी फैसला वापस लेने से सरकार की विश्वसनीयता कम होती है। हम डॉ. मनमोहन सिंह से पूछना चाहते हैं कि आपकी और सरकार की विश्वसनीयता है कहां जो कम होगी? आप इतनी-सी बात नहीं समझ रहे कि आज पूरा देश आपके इस निर्णय के खिलाफ है और सड़कों पर उतर आया है। 22 नवम्बर से शुरू हुए संसद के शीतकालीन सत्र में एक दिन भी कामकाज नहीं हुआ है। अगर हम विभिन्न राज्यों की बात करें तो उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, तमिलनाडु, बिहार, उड़ीसा, प. बंगाल, केरल, पंजाब, छत्तीसगढ़, गुजरात, हिमाचल प्रदेश, कर्नाटक, झारखंड और उत्तराखंड एफडीआई के विरोध में हैं। सिर्प दिल्ली, आंध्र, अरुणाचल, राजस्थान, हरियाणा, मिजोरम, मणिपुर असम, गोवा और महाराष्ट्र (कांग्रेस शासित) राज्य ही इसके हक में हैं। अगर हम लोकसभा में सांसदों की बात करें तो कुल 543 में से 278 सांसद विरोध में हैं। इनमें भाजपा (115), अकाली दल (4), सपा (22), बसपा (21), जद (यू) (20), तृणमूल (18), लेफ्ट (24), द्रमुक (18), बीजद (14), अन्ना द्रमुक (9), शिवसेना (11) और तेदेपा (6) सांसद। सरकार के साथ कांग्रेस के 207 और एनसीपी के 9 सांसद हैं। अगर कल को वोटिंग की नौबत आई तो कुछ भी हो सकता है। सरकार गिर भी सकती है। प्रधानमंत्री पता नहीं यह क्यों नहीं समझ रहे कि उनके साथ तो उनके गठबंधन सहयोगी भी नहीं हैं। प्रधानमंत्री की तमाम कोशिशों के बावजूद तृणमूल कांग्रेस की ममता बनर्जी ने दो टूक कह दिया है कि उनकी पार्टी इस फैसले का समर्थन नहीं कर सकती। हालांकि ममता ने यह भी स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी संप्रग सरकार को गिराने के पक्ष में नहीं है। तृणमूल कांग्रेस ही क्यों, हमें नहीं लगता कि कोई भी विपक्षी दल इस समय संप्रग सरकार को गिराने में दिलचस्पी रखता है। पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। कोई भी दल देश को मध्यावधि चुनाव में घसीटना नहीं चाहेगा। हां, पर सरदार मनमोहन सिंह ने अपनी जिद्द को पूरा करने के लिए पूरे देश को, अपनी सरकार व अपनी पार्टी को दाव पर जरूर लगा दिया है। यह कहावत है न `सनम हम तो डूबेंगे तुम्हें साथ ले डूबेंगे' फिट बैठती है। जहां तक कांग्रेस पार्टी का सवाल है वह दिन-रात लोकसभा में आंकड़े पूरे करने में लग गई है। कल को अगर वोटिंग की नौबत आए तो सरकार को बचाने के लिए उसके पास पर्याप्त सांसद संख्या होनी चाहिए और यह नौबत केवल एक आदमी की हठधर्मिता के कारण आएगी।
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Saturday, 5 November 2011

कनिमोझी की जमानत रद्द होना कांग्रेस पर भारी पड़ सकता है

Vir Arjun, Hindi Daily Newspaper Published from Delhi
Published on 5th November 2011
अनिल नरेन्द्र
द्रमुक प्रमुख करुणानिधि को बहुत उम्मीद थी कि इस बार उनकी बेटी कनिमोझी को अदालत जमानत दे देगी। उन्होंने इसकी भूमिका भी तैयार की। हाल ही में करुणानिधि इसी काम को लेकर दिल्ली आए थे। उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से मुलाकात भी की थी जिसके बाद ही केंद्र सरकार के नियंत्रण वाली सीबीआई ने कनिमोझी की जमानत याचिका का विरोध न करने की बात अदालत में की। इसके बावजूद अदालत ने बृहस्पतिवार को कनिमोझी सहित अन्य की जमानत याचिका रिजैक्ट कर दी। अदालत ने कनिमोझी, कलैगनार टीवी प्रबंधक निदेशक शरद कुमार, कुसेगांव फ्रूट्स एण्ड वेजीटेबल्स के निदेशक आसिफ बलवा और राजीव अग्रवाल एवं बॉलीवुड फिल्म निर्माता करीम मोरानी की जमानत अर्जियां खारिज कर दीं। आरोपी पिछले 9 से पांच महीने जेल में बिता चुके हैं। कनिमोझी 20 मई से जेल में बन्द हैं। पांच आरोपियों के अलावा अदालत ने पूर्व संचार सचिव सिद्धार्थ बेहुरा, पूर्व संचार मंत्री ए. राजा के पूर्व निजी सचिव आरके चांदोलिया तथा स्वान टेलीकॉम के शाहिद उस्मान बलवा की जमानत अर्जियों को भी खारिज कर दिया। अदालत ने कहाöमामले से जुड़े तथ्य और आरोपियों के खिलाफ लगाए गए आरोप बहुत गम्भीर प्रवृत्ति के हैं, जिनका देश की अर्थव्यवस्था पर गम्भीर प्रभाव पड़ा। न्यायाधीश ओपी सैनी ने महिला होने के नाते छूट देने की कनिमोझी के वकील की दलील पर कहा कि आमतौर पर माना जाता है कि महिलाएं सामाजिक व आर्थिक तौर पर कमजोर होती हैं, इसलिए सीआरपीसी की धारा 437 के तहत महिलाओं को कुछ बेनिफिट दिए जाते हैं लेकिन कनिमोझी सांसद हैं और समाज के ऊपरी तबके से हैं। ऐसे में उनके साथ भेदभाव जैसी बात नजर नहीं आती। ट्रायल 11 नवम्बर से शुरू होगा। कनिमोझी की जमानत न होने पर उनके वकील राम जेठमलानी ने इसे न्याय की विफलता करार दिया। जेठमलानी ने कहा कि न्यायाधीश ने जो किया है वह न्याय की गम्भीर विफलता है। मैं समझता हूं कि न्यायाधीश ने सम्भवत तय कर लिया कि कोई राहत नहीं दी जानी चाहिए। सिर्प उच्चतम न्यायालय द्वारा ही राहत मिले तो मिले। उन्होंने कहा कि मुझे उम्मीद है कि उच्चतम न्यायालय जल्दी ही इसे सही कर देगी।
कनिमोझी की जमानत याचिका खारिज होने का कांग्रेस-द्रमुक संबंधों पर सीधा असर डाल सकती है। दोनों दलों की दोस्ती खतरे में पड़ती दिखाई दे रही है। मामले की गम्भीरता को भांपते हुए बृहस्पतिवार को ही तमिलनाडु के कांग्रेस प्रभारी गुलाम नबी आजाद ने पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी और उनके राजनीतिक सचिव अहमद पटेल से पूरे प्रकरण पर बातचीत की। हालांकि कांग्रेस ने अनौपचारिक रूप में फिलहाल गठबंधन पर इसका कोई असर न पड़ने की उम्मीद जताई है पर सूत्रों का कहना है कि द्रमुक नेताओं को इस बात का मलाल है कि सरकार की ओर से कनिमोझी के बचाव में मजबूत कोशिश नहीं की गई। एक तरह से उनको उन्हीं के हाल पर छोड़ दिया गया। इस बात को द्रमुक नेता वायदा खिलाफी की तरह मान रहे हैं। सम्भव है कि डीएमके जल्द कांग्रेस के साथ रहना है या नहीं फैसला कर सकती है। यहां यह भी गौरतलब है कि द्रमुक कोटे के दोनों मंत्रियों के स्थान पर अभी कोई मंत्री नियुक्त नहीं किया गया है। लाख कोशिशों के बाद भी डीएमके ने नए नाम नहीं भेजे हैं। लिहाजा कांग्रेस को अभी भी इस बात की आशंका है कि नए मंत्रिमंडल विस्तार में भी द्रमुक नेताओं से बात करने को कहा गया है। इस बात के लिए भी रणनीति बन रही है कि द्रमुक के समर्थन वापसी की स्थिति में नए राजनीतिक दलों से बात की जाए। छह सांसदों वाले राष्ट्रीय लोकदल से बात लगभग पक्की है। चौ. अजीत सिंह को नए विस्तार में जगह मिलनी लगभग पक्की है। इसके अलावा सपा और बसपा कांग्रेस के पास अतिरिक्त विकल्प हैं। अगर द्रमुक समर्थन वापस लेता है और उधर ममता बनर्जी भी पेट्रोल के दामों में वृद्धि को लेकर समर्थन वापस लेती हैं तो कांग्रेस के लिए मुश्किलें खड़ी हो सकती हैं। मायावती भी आसानी से मानने वाली नहीं। उनका ऐसे समय समर्थन देना जब यूपी विधानसभा चुनाव सिर पर है, एक चुनौतीपूर्ण फैसला होगा। भगवान राम को गाली देना करुणानिधि पर भारी पड़ रहा है।
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Thursday, 13 October 2011

मारन का नंबर आ गया है पर रतन टाटा अभी भी बचे हुए हैं

Vir Arjun, Hindi Daily Newspaper Published from Delhi
Published on 13th October 2011
अनिल नरेन्द्र
2जी स्पेक्ट्रम घोटाले में करुणानिधि एंड कंपनी का एक विकेट डाउन होने वाला है। ए. राजा, कनिमोझी के बाद पूर्व मंत्री दयानिधि मारन का नंबर है। दयानिधि मारन पर सीबीआई का फंदा कसा जा चुका है। इस मामले में सीबीआई ने एफआईआर दर्ज करा दी है। सीबीआई की एफआईआर में दयानिधि मारन के साथ उनके भाई कलानिधि मारन, मलेशिया के मैक्सिस ग्रुप के चेयरमैन टी आनंद कृष्णन व निदेशक रॉल्फ मार्शल समेत तीन कंपनियों को आरोपी बनाया गया है। रविवार को एफआईआर दर्ज करने के बाद जांच एजेंसी ने सोमवार को मारन के दिल्ली और चेन्नई स्थित आवास व दफ्तरों पर छापा मारा। एफआईआर के अनुसार संचार मंत्री रहते हुए दयानिधि मारन ने अनिवासी भारतीय उद्योगपति एस शिवशंकरन पर एयरसेल को बेचने के लिए दबाव डाला। एयरसेल स्पेक्ट्रम आवंटन को मारन ने लगभग दो साल तक लटकाए रखा और स्पेक्ट्रम तभी दिया गया जब शिवशंकरन ने एयरसेल को मलेशियाई कंपनी मैक्सिस ग्रुप को बेच दिया। यही नहीं 14 सर्पिल में एक साथ स्पेक्ट्रम मामले के बाद मैक्सिस ग्रुप की सहयोगी कंपनी एस्ट्रो ने मारन परिवार की कंपनी सन डायरेक्ट में लगभग 600 करोड़ रुपए का निवेश किया। आरोप है कि एस्ट्रो ने सन डायरेक्ट के शेयर को बाजार भाव से अधिक कीमत पर खरीद कर परोक्ष रूप से मारन को रिश्वत दी।
2जी स्पेक्ट्रम में घोटाले की जांच अभी चल ही रही है। जनसंपर्प एजेंसी चलाने वाली नीरा राडिया और उनके कानटेक्ट्स की जांच अभी भी अधूरी चल रही है। नीरा राडिया के टेप जब जनता के सामने उजागर हुए तब पूरे देश को यह जानकर गहरा धक्का लगा कि जो मंत्री सरकार चलाते हैं और जनता जिन्हें समझती है कि इन्हें देश के पधानमंत्री चुनते हैं वह मंत्री पधानमंत्री द्वारा न चुने जाकर देश के पमुख औद्योगिक घराने द्वारा बनाए जाते हैं और यह घराने अपने पसंदीदा नेताओं को मंत्री बनवाने के लिए किस तरह से और किस स्तर तक जाकर लाबिंग करते हैं, यह नीरा राडिया मामले के बाद सामने आया। नीरा पकरण में देश के पमुख औद्योगिक घराने टाटा का नाम सामने आया कि राडिया टाटा घराने के लिए काम करती है और उनके राजनैतिक तथा व्यापारिक हितों का कितना ध्यान रखती है। लेकिन यह खुलासा सिर्प एक सिरा था। राडिया टेप मामले का दूसरा सिरा 2जी स्पेक्ट्रम महाघोटाले से जाकर जुड़ गया। इस महाघोटाले में टाटा की भूमिका पर कैग ने अपनी रिपोर्ट में उल्लेख किया है। राडिया पकरण में होना तो यह चाहिए था कि सरकार यह सुनिश्चित करती कि भविष्य में अब ऐसा संदर्भ न जाए कि सरकार किसी भी औद्योगिक घराने से पभावित है। लेकिन दुर्भाग्य से ऐसा नहीं हुआ है। 2जी घोटाले की जांच से जिस पकार से रतन टाटा को बाहर किया जा रहा है वह निश्चित ही देश की जनता के सामने सरकार और औद्योगिक घराने की दुरभिसंधि का दूसरा झटका है। यूपीए सरकार के लिए 2जी स्पेक्ट्रम घोटाला किसी दलदल से कम साबित नहीं हो रहा है। सरकार इससे निकालने के लिए भले ही जितने पयास करती है उतना ही इसमें धंसती चली जा रही है। इस घोटाले में रोज ही नए-नए नाम सामने आ रहे हैं। मारन बंधुओं के खिलाफ एफआईआर दर्ज हो चुकी है। इसी पकार एस्सार ग्रुप के रुइया बंधुओं को भी सीबीआई जल्द लपेटने वाली है। एस्सार से पूर्व रिलायंस, यूनीटेक, स्वान और वीडियोकॉन जैसी कंपनियों के बड़े अधिकारी तिहाड़ में पहुंच चुके हैं। हाल ही में वित्त मंत्रालय द्वारा पधानमंत्री कार्यालय को भेजी गई चिट्ठी से गृहमंत्री पी. चिदंबरम का नाम भी सामने आया है। हालांकि इस घोटाले के सूत्रधार ए राजा पहले भी इस तरफ कई बार इशारा कर चुके थे लेकिन राजा के आरोप की बदले की भावना के तहत लगाया गया आरोप माना गया। लेकिन इस महाघोटाले के पकरण में सबसे बड़ा आश्चर्य यह है कि टाटा की भूमिका उन सभी औद्योगिक घराने से ज्यादा व्यापक और स्पष्ट है पर अभी तक कोई जांच या आरोप पत्र दाखिल नहीं किया गया? टाटा पर इस घोटाले में काफी महत्वपूर्ण भूमिका निभाने का न सिर्प आरोप है बल्कि काफी पुख्ता सबूत भी है। लेकिन रतन टाटा का सरकार से विपक्ष तक में कितना पभाव है यह इसी से साफ है कि टाटा घराना इस महाघोटाले की जांच के दायरे से लगभग बाहर है। इस महाघोटाले में टाटा की भूमिका पर सबसे पहले उंगली कैग ने उठाई। कैग ने अपनी रिपोर्ट में टाटा टेलीसर्विसिज की वजह से सरकारी राजस्व को 19.074 करोड़ रुपए का नुकमसान होने का दावा किया है। कैग ने अपनी रिपोर्ट में टाटा की भूमिका पर विस्तार से चर्चा की है। टाटा की इस महाघोटाले में भूमिका जगजाहिर है कि ए राजा को दूरसंचार मंत्री बनवाने के लिए टाटा ने नीरा राडिया के माध्यम से किस पकार लाबिंग की। पूर्व दूरसंचार मंत्री दयानिधि मारन ने रतन टाटा से संबंध मधुर नहीं थे और यूपीए के पथम कार्यकाल में टाटा को मारन का सहयोग नहीं मिला था। अत रतन टाटा नहीं चाहते थे कि दयानिधि मारन फिर से दूरसंचार मंत्री बनें। लेकिन सच तो यह है कि टाटा ने सिर्प लाबिंग ही नहीं की बल्कि एक तरीके से घूस के तौर पर डीएमके पमुख करुणानिधि को चेन्नई में करोड़ों की जमीन उपहार में दी और बाद में उस जमीन पर भवन का निर्माण भी करवाया। इसी सब का पभाव था कि ए राजा के मंत्री रहते रतन टाटा को 2जी लाइसेंस देने के लिए मंत्रालय ने किसी भी नियम की परवाह नहीं की। हमारा मानना है कि रतन टाटा की विस्तार से जांच होनी चाहिए। अगर ऐसा नहीं होता तो यह जांच और घोटाले का पूरा पर्दाफाश नहीं होगा। नीरा राडिया के टेपों की पता नहीं क्यों जांच और उन पर कोई कार्रवाई नहीं हो रही?
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Wednesday, 3 August 2011

धमकियों पर उतरे मनमोहन सिंह पहले ही दिन चित्त

Vir Arjun, Hindi Daily Newspaper Published from Delhi
Published on 3rd August 2011
अनिल नरेन्द्र
संसद का मानसून सत्र आरम्भ हो गया है। इस सत्र में आरोपों-प्रतिआरोपों की जबरदस्त बारिश होगी यह तय है। पहले ही दिन से यह शुरू हो गया। आमतौर पर शालीनता और कूल स्वभाव के प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने बौखलाहट में विपक्ष पर सीधा हमला बोल दिया। सोमवार से मानसून सत्र शुरू होने से पहले ही मनमोहन सिंह ने आक्रामक रुख अपनाते हुए कहा कि हमें किसी मुद्दे पर चर्चा कराने का खौफ नहीं है। हम हर विषय पर बहस कराने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। यहां तक तो बात समझ में आती है पर इससे आगे प्रधानमंत्री ने जो कहा वह जरूर समझ से बाहर है। डॉ. मनमोहन सिंह ने कहा कि हमारे पास विपक्षी खेमे को शर्मिंदा करने वाले बहुत सारे राज हैं। प्रधानमंत्री के इस हमले से विपक्ष बिफर गया। भाजपा नेता सुषमा स्वराज ने कहा कि एक तरफ तो प्रणब मुखर्जी, पवन बंसल और राजीव शुक्ला जैसे सरकार के प्रतिनिधि संसद को सुचारू रूप से चलाने का अनुरोध कर रहे हैं वहीं उनके नेता धमकियों पर उतर आए हैं। जब भाजपा नेता से इस बारे में पूछा गया तो नकवी ने कहा कि संसद चले और सभी कामकाज सुचारू रूप से चले ऐसी हमारी इच्छा है लेकिन सरकार टकराव और अहंकारी मुद्रा में है। उन्होंने कहा कि पहले उन्हें (प्रधानमंत्री) को मुर्दे उखाड़ने तो दीजिए फिर देखेंगे। पहले ही दिन सरकार एक ऐसी ओट से चारों खाने चित्त हुई जहां से शायद उसे उम्मीद नहीं रही होगी।
टीम अन्ना ने सरकार पर हल्ला बोल दिया। डॉ. मनमोहन सिंह की दूसरी पारी का दूसरा दिन ही मानसून सत्र ऐसा होगा किसी ने सपनों में भी नहीं सोचा होगा। गांधीवादी अन्ना हजारे पक्ष ने सोमवार को दावा किया कि केंद्रीय मंत्री कपिल सिब्बल के संसदीय निर्वाचन क्षेत्र चांदनी चौक सहित नागपुर, वर्धा और अमरावती के मतदाताओं ने लोकपाल विधेयक के सरकार के मसौदे को नामंजूर कर सामाजिक कार्यकर्ताओं के जन लोकपाल विधेयक का समर्थन किया है। अन्ना ने दावा किया कि सिब्बल के निर्वाचन क्षेत्र के 85 फीसदी मतदाता हजारे पक्ष के जन लोकपाल विधेयक के पक्ष में हैं और 82 फीसदी मतदाता चाहते हैं कि प्रधानमंत्री को लोकपाल के दायरे में लाया जाए। अन्ना ने कहा कि यह एक महत्वपूर्ण उदाहरण है जो देशवासियों को सही लोकशाही का रास्ता दिखाता है। यह जनमत संग्रह बताता है कि `सोशल ऑडिट' बहुत जरूरी है। हम चाहते हैं कि पूरे देश में इस तरह का जनमत संग्रह हो। नतीजे बताते हैं कि सिब्बल के निर्वाचन क्षेत्र में 88 फीसदी लोग संसद के भीतर सांसदों के आचरण और 86 फीसदी लोग उच्च न्यायपालिका को प्रस्तावित लोकपाल के दायरे में रखने के पक्षधर हैं। प्रश्नावली के जरिये 83 फीसदी मतदाताओं ने कहा कि संसद में लोकपाल विधेयक पर सांसदों को अपनी पार्टी के रुख के बजाय जनाकांक्षाओं के अनुरूप मतदान चाहिए।
टेलीकॉम घोटाला में एक बार फिर प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह का नाम सामने आया है। सोमवार को ही आरोपी शाहिद बलवा की ओर से दी गई दलील में उसके वकीलों ने कहा कि पीएम को 2जी स्पैक्ट्रम आवंटन प्रक्रिया की पूरी जानकारी थी। बलवा ने तत्कालीन विदेश मंत्री प्रणब मुखर्जी और सालिसिटर जनरल जी. वाहनवती का भी नाम लिया कि उन्हें भी आवंटन प्रक्रिया के संवाद की पूरी जानकारी थी। बलवा ने अपनी दलील को पुख्ता करने के लिए ए. राजा की उस चिट्ठी का भी जिक्र किया जो उन्होंने प्रधानमंत्री को लिखी थी। बलवा ने सीबीआई पर पक्षपात का भी आरोप लगाया और कहा कि वह टाटा को बचाने की कोशिश में अन्य लोगों पर हाथ डाल रही है। बलवा के वकीलों ने यहां तक कहा कि ये स्पैक्ट्रम आवंटन पॉलिसी सरकार की थी और यही वजह है कि कहीं भी उसका विरोध नहीं किया गया। हर कदम पर उसे अनुमति मिलती गई। न तो प्रधानमंत्री और न ही अभी के संचार मंत्री ने किसी स्टेज पर ये कहा है कि इस पॉलिसी से सरकार को नुकसान हुआ है, फिर वे कटघरे में क्यों हैं?
इस मानसून सत्र की शुरुआत हंगामी हुई है। इस समय तो समूचा विपक्ष अपने-अपने कारणों से कांग्रेस पार्टी और सरकार से नाराज है। यह सत्र ठीकठाक से निकल जाए, यह प्रधानमंत्री और उनके सिपहसालारों के लिए चुनौती है। संसद के अन्दर और संसद के बाहर दोनों ही जगहों पर सरकार के खिलाफ मोर्चा गरम है। देखें सरकार कैसे निपटती है।

Thursday, 28 July 2011

बकौल ए. राजा, प्रधानमंत्री-चिदम्बरम को सब पता था


Vir Arjun, Hindi Daily Newspaper Published from Delhi
Published on 28th July 2011
अनिल नरेन्द्र
लगभग एक सप्ताह बाद संसद का मानसून सत्र शुरू होने वाला है। पहले से ही कई तरफ से घिरी कांग्रेस पार्टी और उसके प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और घिरने वाले हैं। विपक्ष ने पहले से ही कई मुद्दों पर सरकार के खिलाफ लामबंदी तेज कर दी है। ऐसे में ए. राजा का सीबीआई की विशेष अदालत में प्रधानमंत्री और गृहमंत्री पर सीधे आरोप लगाने से पार्टी और सरकार दोनों की खासी फजीहत होने की सम्भावना है। Šजी स्पेक्ट्रम घोटाले मामले के मुख्य आरोपी पूर्व दूरसंचार मंत्री ए. राजा पर कार्रवाई में देर को लेकर पहले ही सुप्रीम कोर्ट की तीखी टिप्पणी झेल चुके प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह का नाम अब इस विवाद में घसीटे जाने से संप्रग सरकार में हड़कम्प मचना स्वाभाविक ही है। अदालत में अपने बचाव में दलील देते हुए राजा ने कह दिया कि 2जी स्पेक्ट्रम के तमाम महत्वपूर्ण फैसले उन्होंने अकेले नहीं किए। इनमें प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और तत्कालीन वित्तमंत्री पी. चिदम्बरम की सहमति भी रही थी। उल्लेखनीय है कि अदालत में 2जी स्पेक्ट्रम मामले में अभियोग पक्ष और बचाव पक्ष की दलीलों का दौर चल रहा है। अभियोजन पक्ष की दलीलें सुन ली गई हैं। अब बचाव पक्ष को अपनी दलीलें रखने का मौका मिला है। ए. राजा की तरफ से उसके वकील ने एक लिखित बयान पढ़ा था। इसमें कहा गया कि उन्होंने 2जी स्पेक्ट्रम लाइसेंसों के वितरण में कोई मनमानी नहीं की। भाजपा नेतृत्व वाली एनडीए सरकार के दौर से मंत्रालय में जो नीति चली आ रही थी, उन्होंने भी अपने कार्यकाल में इसका ही अनुसरण-भर किया। राजा का कहना था कि यदि मंत्रालय में चली आ रही इस नीति का पालन करके उन्होंने कोई गुनाह किया है तो इससे पहले के दूरसंचार मंत्री भी उतने ही दोषी हैं और उन्हें भी उनके साथ तिहाड़ में होना चाहिए। राजा ने यह कह दिया है कि यह बात प्रधानमंत्री की जानकारी में थी कि स्वान और यूनिटेक कम्पनियों की काफी हिस्सेदारी बहुराष्ट्रीय कम्पनियों के पास चली गई थी। इन कम्पनियों को 2जी स्पेक्ट्रम के लाइसेंस जारी किए गए थे। इस मुद्दे पर तत्कालीन वित्तमंत्री पी. चिदम्बरम ने कोई आपत्ति दर्ज नहीं की थी। ऐसे में उन पर यह आरोप सही नहीं हैं कि उन्होंने विदेशी कम्पनियों के मामले की जानकारी सरकार से छिपाई थी।
राजा के अदालती बयान से चिंतित सरकार ने अपने रणनीतिकार मंत्रियों की फौज `डैमेज कंट्रोल' के लिए लगा दी है। कपिल सिब्बल से लेकर पी. चिदम्बरम, पवन बंसल और नारायणस्वामी तक, सभी राजा के बयानों को एक आरोपी का बयान साबित कर विपक्ष के हमलों का जवाब देने में जुट गए हैं। यूपी, बिहार और कर्नाटक में उजागर हुए ताजा घोटालों के मद्देनजर भाजपा समेत सभी विपक्षी दलों को आईना दिखाने की रणनीति पर अमल शुरू हो चुका है। यह अपनी जगह ठीक हो सकता है पर इससे राजा के आरोप धुल नहीं जाते। इसलिए एक ओर कपिल सिब्बल ने राजा के बयानों को एक आरोपी का बयान साबित करने की कोशिश की तो चिदम्बरम ने भाजपा पर यह आरोप मढ़ दिया कि विस्फोट की घटनाओं में शामिल दक्षिणपंथी कट्टरपंथियों के खिलाफ कार्रवाई की वजह से भाजपा बौखलाई हुई है और इसी बौखलाहट में वह प्रधानमंत्री और गृहमंत्री के इस्तीफों की मांग कर रही है। मगर ए. राजा के बयान के बाद सरकार के सबसे ईमानदार कहे जाने वाले दोनों शीर्ष मंत्री की साख पर आंच आ गई है और वह कैसे साबित करें कि वाकई मनमोहन सिंह और चिदम्बरम को 2जी घोटाले की जानकारी नहीं थी? प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और उनके सिपहसालारों को यह भूलना नहीं चाहिए कि उन्होंने पहले इसी ए. राजा को डिफैंड किया था और यह भी कहा था कि राजा ने कोई गलत काम नहीं किया। अब उस स्टैंड से कैसे पलटेंगे? किसी भी घोटाले का अभियुक्त अपने बचाव में जो कुछ कहता है उस पर पूरी तरह भरोसा करना मुश्किल होता है, लेकिन यह भी मानकर नहीं चला जा सकता कि हर मामले में उसकी दलील खारिज ही कर देनी चाहिए। Šजी स्पेक्ट्रम घोटाले के अभियुक्त यह जो आरोप लगा रहे हैं कि स्पेक्ट्रम पाने वाली कम्पनियों द्वारा शेयर बेचे जाने के मुद्दे पर प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और तत्कालीन वित्तमंत्री चिदम्बरम के साथ चर्चा की गई थी एक गम्भीर आरोप है। राजा की मानें तो स्पेक्ट्रम पाने वाली कम्पनियों द्वारा अपनी हिस्सेदारी विदेशी कम्पनियों को बेचने के फैसले को केंद्रीय वित्तमंत्री ने प्रधानमंत्री की उपस्थिति में मंजूरी दी थी। सत्तापक्ष राजा के इस आरोप को एक अभियुक्त का बयान बताकर पल्ला झाड़ सकता है, लेकिन इतने मात्र से सन्देह के बादल छंटने वाले नहीं हैं। इसलिए और भी नहीं, क्योंकि यह बात पहले भी सामने आ चुकी है कि राजा के फैसलों पर प्रधानमंत्री के साथ-साथ चिदम्बरम ने भी एतराज जताया था। सच तो यह है कि इस सन्दर्भ में इन दोनों ने पत्र भी लिखे थे और उसके प्रमाण मौजूद हैं। आम जनता तो यह जानना चाहेगी कि आखिर राजा पर इस एतराज का कोई असर क्यों नहीं हुआ और उन्हें मनमानी करने से क्यों नहीं रोका जा सका? ए. राजा की ओर से लगाए गए आरोपों की जांच के कई आधार हो सकते हैं। सबसे महत्वपूर्ण तो यह है कि राजा की गिरफ्तारी में इतनी देर क्यों लगी? गिरफ्तारी से पहले तक यही प्रधानमंत्री और तत्कालीन गृहमंत्री उनका हर तरह से बचाव करने में लगे हुए थे। खुद प्रधानमंत्री ने स्पेक्ट्रम आवंटन में किसी तरह की गड़बड़ी से इंकार किया था। इतना ही नहीं, दोषपूर्ण और मनमाने तरीके से किए गए स्पेक्ट्रम आवंटन के चलते हुई राजस्व हानि को शून्य बताया गया था। इसके अतिरिक्त यह भी किसी से छिपा नहीं कि स्पेक्ट्रम हासिल करने वाली कम्पनियों ने किस तरह अपनी हिस्सेदारी बेचकर अरबों रुपये अर्जित किए और यह तो जगजाहिर है कि स्पेक्ट्रम आवंटन के समय सारे कायदे-कानूनों को ताक पर रख दिया गया था। क्या सरकार के मुखिया हमें यह बताने की कोशिश कर रहे हैं कि उनके मना करने पर भी उनके एक मंत्री ने मनमानी की और उनके आदेशों का खुला उल्लंघन किया? हम गठबंधन मजबूरियां तो एक हद तक समझ सकते हैं पर इस मजबूरी की आड़ में एक मंत्री को खुलेआम लूट मचाने की छुट्टी हो, यह बात अपनी समझ से बाहर है। अब सवाल यह है कि राजा अपने आरोपों को साबित करने के लिए अदालत में कैसे सबूत देते हैं और अदालत उस पर क्या रुख करती है? अभी तो ए. राजा ने यह आरोप लगाए हैं, आगे देखते जाइए कौन-कौन क्या आरोप लगाता है।
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Saturday, 9 July 2011

द्रमुक की तीसरी भ्रष्ट विकेट डाउन, मारन का इस्तीफा

Vir Arjun, Hindi Daily Newspaper Published from Delhi
Published on 9th July 2011
अनिल नरेन्द्र
कुछ यूपीए घटक दलों ने मनमोहन सिंह सरकार का साथ-समर्थन इसलिए किया था कि वह देश को लूट सकें। उनका एकमात्र मकसद पैसा कमाना था और है। इनमें प्रमुख है द्रमुक। हालांकि एनसीपी भी इसी श्रेणी में आती है पर फिलहाल द्रमुक का नम्बर लगा है। 2जी स्पैक्ट्रम आवंटन घोटाले में डीएमके को अंतत तीसरा विकेट गंवाना पड़ा। केंद्रीय कपड़ा मंत्री दयानिधि मारन का मामला जेल में बन्द चल रहे ए. राजा और डीएमके सांसद व करुणानिधि की सुपुत्री कनिमोझी से भी एक कदम आगे हैं। दयानिधि मारन ने यूपीए में केंद्रीय संचार मंत्री रहते कमाल ही कर दिया। सीबीआई ने बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में स्टेटस रिपोर्ट पेश करते हुए बयान दिया कि मारन ने एयरसेल कम्पनी की हिस्सेदारी मलेशियाई कम्पनी मैक्सिस को बिकवाई। फिर उसे लाइसेंस देकर बदले में 675 करोड़ रुपये का निवेश अपने सन टीवी में करवाया। सीबीआई के वकील केके वेणुगोपाल ने जस्टिस जीएस सिंघवी और एके गांगुली की बैंच को बताया कि 2006 में टेलीकॉम मंत्री रहते मारन ने चेन्नई की कम्पनी एयरसेल का लाइसेंस आवेदन जानबूझ कर लम्बित रखा। उसे अपनी हिस्सेदारी मलेशियाई कम्पनी मैक्सिस को बेचने के लिए मजबूर किया। मैक्सिस-एयरसेल को लाइसेंस देते हुए बदले में अपनी डीटीएम कम्पनी सन टीवी के लिए बड़ा निवेश हासिल किया। मारन का फॉर्मूला सिम्पल था, इस हाथ लो, उस हाथ दो। मैक्सिस केटी आनन्द कृष्णन मारन के रिश्तेदार हैं। इसीलिए मारन ने उनके जरिये यह फायदा का सौदा किया। देखिए यह खेल मारन ने कैसे खेला ः दबाव बनाने के लिए पहले तो मारन ने एयरसेल के 2जी स्पैक्ट्रम लाइसेंस आवेदन को दो साल तक रोके रखा। फिर 2006 में एयरसेल को अपनी हिस्सेदारी मैक्सिस को बेचने के लिए मजबूर किया। बदले में मैक्सिस ने अपनी एक सहयोगी कम्पनी के जरिये मारन की सन टीवी में 675 करोड़ रुपये का निवेश किया। इसके एवज में एयरसेल की 74 फीसदी हिस्सेदारी को लेकर मैक्सिस को 23 सर्पिल के लाइसेंस दे दिए। कनिमोझी तो कुल 200 करोड़ रुपये के घोटाले में शामिल थी, दयानिधि मारन ने तो 675 करोड़ रुपये का सीधा घपला किया है।
यह दूसरा मौका है जब मारन को मंत्री पद छोड़ना पड़ा है। इससे पहले उन्हें 2007 में पद तब छोड़ना पड़ा था जब करुणानिधि परिवार में आंतरिक मतभेद का वह शिकार हुए थे। चेन्नई मध्य से लोकसभा के सदस्य मारन आम चुनावों के बाद मई 2009 में फिर से कैबिनेट में शामिल हुए। लेकिन इस बार उन्हें दूरसंचार मंत्रालय नहीं मिला जैसा वह चाहते थे बल्कि उन्हें कपड़ा मंत्रालय की जिम्मेदारी सौंपी गई। कांग्रेस ने गुरुवार को जहां दयानिधि मारन के इस्तीफे पर टिप्पणी करने से मना कर दिया वहीं यह भी कहा कि द्रविड़ मुन्नेत्र कषगम (डीएमके) पार्टी के साथ उसका गठबंधन जारी रहेगा। कांग्रेस प्रवक्ता मनीष तिवारी ने कहा कि जमीनी हकीकत की तरजीह पर राजनीतिक गठबंधन आधारित होता है। हमारा गठबंधन डीएमके के साथ वर्ष 2004 से है और इस स्थिति में कोई बदलाव नहीं है।
क्या इसे महज इत्तिफाक माना जाए कि मनमोहन सरकार से उन तमाम भ्रष्ट मंत्रियों का सफाया सुप्रीम कोर्ट के कहने पर हो रहा है या यह सब किसी तयशुदा रणनीति के तहत हो रहा है? द्रमुक के बाद अब अगला नम्बर एनसीपी के भ्रष्ट मंत्रियों का होना चाहिए।
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Thursday, 23 June 2011

अभी कुछ महीने और तिहाड़ में ही रहेंगी कनिमोझी


Vir Arjun, Hindi Daily Newspaper Published from Delhi
Published on 23nd June 2011
अनिल नरेन्द्र
`सॉरी मैडम वी हैव ट्राइड ऑवर बैस्ट।' सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में कनिमोझी के वकीलों ने जब ये शब्द कहे तो दो माह पूर्व तक तमिलनाडु के वीवीआईपी का दर्जा रखने वाली कनि की मां रजती अम्मल फूट-फूट कर रोने लगी। उन्हें बहुत उम्मीद थी कि सुप्रीम कोर्ट से कनिमोझी को जमानत मिल जाएगी। रुआंसी और आंसू पोंछती रजती ने उन्हें कोई जवाब नहीं दिया। बस हाथ जोड़कर सिर हिलाया और आगे बढ़ गई। थके मुकदमे में बालू भी उनके पीछे चल दिए। बालू ने ढाई घंटे चली पूरी कार्रवाई खड़े होकर ही सुनी थी। रजती पूर्व मुख्यमंत्री एम. करुणानिधि की तीसरी पत्नी हैं, कनिमोझी (43) उनकी इकलौती संतान है। पहली पत्नी की मृत्यु के बाद करुणानिधि ने दयालु अम्मा से विवाह किया। दयालु कलैग्नार टीवी में 60 फीसदी शेयर की मालिक है। रजती काफी दिनों तक करुणानिधि के साथ ऐसे ही रहती रही। करुणानिधि ने उनके साथ कभी विधिवत विवाह नहीं किया। उन्हें पत्नी भी 10-12 साल पहले तब माना था जब चुनाव में उन्होंने अपनी आय का शपथ पत्र दायर किया और उसमें अम्मा के नाम कुछ सम्पत्ति दिखाई। लोगों ने जब पूछा कि रजती कौन है तब उन्होंने कहा कि वह उनकी पत्नी है।
2जी स्पेक्ट्रम घोटाले में अभियुक्त द्रमुक सांसद कनिमोझी को सुप्रीम कोर्ट आना महंगा पड़ा। सुप्रीम कोर्ट ने उनकी जमानत याचिका ही खारिज नहीं की बल्कि भविष्य में जमानत देने पर भी प्रतिबंध लगा दिया। कनिमोझी अब जमानत के लिए तब ही आवेदन कर पाएगी जब उनके खिलाफ निचली अदालत में आरोप तय हो जाएंगे। आरोप तय होने में तीन माह का समय लग सकता है, लेकिन सुनवाई अदालत सिर्प इस केस के लिए बनी है इसलिए हो सकता है कि यह अवधि कुछ दिन कम हो जाए। सुप्रीम कोर्ट ने कनि की यह दलील अस्वीकार कर दी कि उन्हें धारा 437 के तहत जमानत दी जाए। कोर्ट ने कहा कि आपमें क्या खास बात है, आपकी तरह सैकड़ों विचाराधीन महिला कैदी जेल में हैं और बच्चों से दूर हैं। कनिमोझी 20 मई से दिल्ली की तिहाड़ जेल में बन्द है। जस्टिस जीएस सिंघवी और जस्टिस बीएस चौहान की खंडपीठ ने यह फैसला जमानत का विरोध कर रही सीबीआई और कनिमोझी के वकीलों की डेढ़ घंटा बहस सुनने के बाद दिया। जमानत खारिज करने का दो लाइन का फैसला सुनकर कनि के वकीलों का चेहरा फक रह गया। कनिमोझी के वकीलों ने बहुत कोशिश की कि जमानत किसी भी हालत में हो जाए। उन्होंने यहां तक कह दिया कि वह कोर्ट की कठोर से कठोर शर्तें मानने को तैयार हैं। यदि सीबीआई को डर है कि अपने राजनैतिक रसूख से गवाहों और जांच को प्रभावित कर सकती है तो उन्हें उनके घर में नजरबन्द भी रखा जा सकता है। कनिमोझी के वकीलों का तो यहां तक कहना था कि अमेरिका की तरह यहां पैरों में रेडियो एंकलेट तो नहीं लगाए जाते, लेकिन उनके घर में 24 घंटे पहरेदारी तथा इलैक्ट्रॉनिक निगरानी (कैमरे तथा वायरलेस) रखी जा सकती है पर कोर्ट ने उनकी कोई दलील नहीं मानी। बस इतनी छूट जरूर दी कि अदालत ने कहा कनिमोझी आरोप तय होने के बाद मामले की सुनवाई कर रही कोर्ट से नियमित जमानत मांग सकती हैं। वहां मामले को नए सिरे से सुना जाएगा।
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Thursday, 9 June 2011

दयानिधि मारन से कन्नी काटी प्रधानमंत्री व कांग्रेस ने

Vir Arjun, Hindi Daily Newspaper Published from Delhi
Published on 9th June 2011
अनिल नरेन्द्र
दयानिधि मारन बुरी तरह से फंसते जा रहे हैं। जैसे डीएमके के अन्य मंत्रियों व नेताओं ने यूपीए सरकार को कटघरे में खड़ा करवाया ठीक उसी तरह मारन ने अब प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के लिए एक नया सिरदर्द खड़ा कर दिया है। मनमोहन सिंह पहले से ही ए. राजा, कनिमोझी विवाद को लेकर कटघरे में खड़े हैं अब दयानिधि ने उनकी फजीहत बढ़ा दी है। 2004 से 2007 तक हुए स्पेक्ट्रम घोटाले को लेकर यूपीए पहले ही अंगुलियां जला बैठी है, क्योंकि ए. राजा और सुरेश कलमाड़ी को बचाने का अंजाम वह देख चुकी है। अब शायद ही प्रधानमंत्री दयानिधि मारन को बचाने की कोशिश करें। दयानिधि के खिलाफ गम्भीर आरोप हैं। अनिवासी भारतीय एस. शिवशंकरन को उनकी कम्पनी एयरसेल को बेचने के लिए मजबूर करने के आरोपी केंद्रीय कपड़ा मंत्री दयानिधि मारन का जाना अब लगभग तय-सा लगता है। मारन के खिलाफ आरोपों और संबंधित सुबूतों के बारे में सीबीआई ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को विस्तृत रिपोर्ट दे दी है। शिवशंकरन ने सोमवार को सीबीआई को बताया था कि किस तरह दूरसंचार मंत्री रहते हुए उन्हें एयरसेल बेचने के लिए दयानिधि मारन ने मजबूर किया था। एयरसेल मामले में दयानिधि मारन की भूमिका पर प्रधानमंत्री को विस्तृत रिपोर्ट देने की पुष्टि करते हुए सीबीआई के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि कपड़ा मंत्री के खिलाफ लगाए गए आरोप काफी गम्भीर हैं और उनकी पूरी जांच की जरूरत है। शिवशंकरन ने जांच एजेंसी को उन लोगों के नाम-पते दिए हैं, जो मारन की ज्यादतियों के चश्मदीद गवाह हैं। मारन इन्हीं लोगों के माध्यम से शिवशंकरन पर एयरसेल को बेचने के लिए दबाव बना रहे थे। इनमें एयरसेल से जुड़े वकील और चार्टर्ड एकाउंटेंट शामिल हैं। शिवशंकरन का कहना था कि दूरसंचार मंत्री रहते हुए मारन ने उनके वाणिज्यिक साम्राज्य को पूरी तरह से ध्वस्त कर दिया और उन्हें देश से भागने पर मजबूर कर दिया।

आज की तारीख में भ्रष्टाचार का मुद्दा घर-घर तक चर्चा का विषय बना हुआ है। तभी तो भ्रष्टाचार और काले धन को लेकर आज के सूरत-ए-हाल में लोकायुक्त गठन की जरूरत महसूस की जा रही है। यही कारण है कि कांग्रेस नेतृत्व आज दयानिधि मारन से फासले बढ़ा रहा है और सरकार या कांग्रेस शायद ही उन्हें अब बचा पाए। दयानिधि मारन को संकेत दे भी दिए गए हैं। वित्तमंत्री प्रणब मुखर्जी से उनकी मुलाकात के दौरान उन्हें संकेत दे दिए गए हैं। प्रधानमंत्री पहले ही सीबीआई से कह चुके हैं कि 2जी स्पेक्ट्रम घोटाले मामले में सभी आरोपों की जांच की जाए जिनमें मारन के विरुद्ध आरोप भी शामिल हैं। इन आरोपों पर सीबीआई जांच की स्थिति रिपोर्ट प्रधानमंत्री कार्यालय पहुंच चुकी है। देखना अब यह है कि द्रमुक प्रमुख करुणानिधि का अब क्या रुख होता है। दो दिन पहले करुणानिधि ने प्रधानमंत्री को कनिमोझी की गिरफ्तारी के लिए सीधे जिम्मेदार ठहराया था। अब अगर दयानिधि मारन हिरासत में लिए जाते हैं तो करुणानिधि क्या करेंगे? क्या वह यूपीए सरकार से अपने मंत्रियों को हटाने का आदेश देते हैं? समर्थन वापसी की तो वह पहले ही घोषणा कर चुके हैं।
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Tuesday, 7 June 2011

जयललिता का मारन बंधुओं व करुणानिधि को पहला तोहफा

Vir Arjun, Hindi Daily Newspaper Published from Delhi
Published on 7th June 2011
अनिल नरेन्द्र

तमिलनाडु की मुख्यमंत्री जयललिता ने सत्ता संभालते ही एम. करुणानिधि और उनके कुनबे को तोहफा दे दिया है। जया सरकार ने शुकवार को अपने पतिद्वंद्वी करुणानिधि के जन्मदिन पर उनकी सरकार द्वारा शुरू की गई कई महत्वाकांक्षी परियोजनाओं को बंद कर दिया। ये परियोजनाएं आवास एवं बीमा क्षेत्रों से जुड़ी थी। इसके साथ ही सरकार ने यहां बन रहे विधानसभा और मंत्रालय काम्पलैक्स के निर्माण के घोटालों के आरोप लगाते हुए उसकी जांच कराने की घोषणा की है। बात यहीं खत्म नहीं हुई। द्रमुक से जुड़े मारन बंधुओं पर निशाना साधते हुए जया सरकार ने राज्य के करोड़ों रुपए के केबल व्यवसाय का राष्ट्रीयकरण करने की घोषणा कर दी है। विधानसभा के नए सत्र को संबोधित करते हुए राज्यपाल सुरजीत सिंह बरनाला ने ये घोषणाएं शुकवार को की।
मारन साम्राज्य का सूरज कभी डूब नहीं सकता' कुछ इस पकार की बातें कारोबारी जगत के आला अधिकारी, कलानिधि मारन और उनके छोटे भाई मौजूदा कपड़ा मंत्री दयानिधि मारन के स्वामित्व वाले सन ग्रुप के बारे में कहते रहे हैं। लेकिन बीते तीन दिनों के घटनाकम इस बात के संकेत कर रहे हैं कि मारन बंधुओं के लिए संध्याकाल का समय करीब-करीब आ चुका है। अमेरिकी बिजनेस मैगजीन ने हाल ही में मारन बंधुओं की सम्पत्ति 4 अरब डॉलर करीब 179 अरब रुपए आंकी थी। जिन लोगों ने `सन ग्रुप' का विस्तार देखा है वे इसके विकास को आश्चर्यजनक मानते हैं। लेखक व राजनीतिक विश्लेषक जो रामास्वामी कहते हैं कि मारन बंधुओं की यह तरक्की उनके राजनीतिक संरक्षण और पभाव के कारण ही रही है। उनके लिए राजनीति ने कारोबारी दुनिया में पवेश के लिए लांच पैड का काम किया। दरअसल करुणानिधि एंड परिवार ने जितना आर्थिक लाभ राजनीति से उठाया है उतने परिवार कम ही देखने को मिलेंगे।
तमिलनाडु में केबल टीवी नेटवर्प का बाजार 1400 से 1500 करोड़ रुपए का है। इसमें मारन बंधुओं के स्वामित्व वाले `सुमंगली केबल विजन' की 65 फीसदी हिस्सेदारी 950 से 1000 करोड़ रुपए के बीच है। दयानिधि ने संचार मंत्री रहते अपने पभाव का इस्तेमाल दक्षिण भारतीय भाषा वाले केबल टीवी चैनल ऑपरेटरों को लाइसेंस देने में देरी की। वे नहीं चाहते थे कि `सन टीवी' का कोई पतिस्पर्धा खड़ा हो, इसलिए तमिलनाडु के कई टीवी चैनलों के लाइसेंस कई सालों तक लटकाए रखे। दयानिधि और कलानिधि मारन, पूर्व केन्द्राrय मंत्री व डीएमके के कद्दावर नेता रहे दिवंगत मुरासोली मारन के बेटे हैं और करुणानिधि के भांजे थे मुरासोली मारन। उनके छोटे भाई सेवलम का विवाह सेल्वी से हुआ है जो करुणानिधि-दयालु अम्माल की पुत्री हैं। 1990 में कलानिधि ने वीडियो मैगजीन `पुललाई' शुरू की थी। 1993 में दक्षिण भारत का पहला सैटलाइट चैनल सन टीवी शुरू किया। 1995 में उनकी कुल सम्पत्ति बढ़कर 45 करोड़ रुपए हो गई। सन गुप देश का सबसे बड़ा सैटलाइट टीवी नेटवर्प है। इसके तमिल, मलयालम, कनड़ और तेलगु भाषाओं में 20 चैनल हैं। वे तमिलनाडु के दूसरे बड़े अखबार `दिनाकरण' के अलावा एक दर्जन मैगजीन भी निकालते हैं।
उनके पास 45 रेडियो चैनल भी हैं। सन पिक्चर्स दक्षिण भारत का सबसे बड़ा मूवी पोडक्शन हाउस है। अब आप बताएं कि 1990 से लेकर 2011 तक यह 180 अरब रुपए के मालिक कैसे बन गए?
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Saturday, 4 June 2011

कनिमोझी, ए. राजा के बाद अब दयानिधि मारन का नंबर आ रहा है

Vir Arjun, Hindi Daily Newspaper Published from Delhi
Published on 4th June 2011
अनिल नरेन्द्र
वर्षों तक श्रीराम को गाली देने वाले एम. करुणानिधि और उनके परिवार ने तमिलनाडु और केन्द्र में मुगलों की तरह सत्ता सुख भोगा है और इतना पैसा बनाया है कि जिसका हिसाब ही कोई नहीं। पर जब श्रीराम की मार पड़ती है तो अच्छे-अच्छे धुरंधर धाराशाह हो जाते हैं। करुणानिधि के परिवार का भी दुर्दिन आरम्भ हो गया है। पूर्व संचार मंत्री ए. राजा के बाद सांसद बेटी कनिमोझी के भ्रष्टाचार के आरोपों में जेल जाने के बाद उनके परिवार का एक और सदस्य तथा केन्द्राrय कपड़ा मंत्री दयानिधि मारन का अब नम्बर आ रहा है। दयानिधि मारन के खिलाफ एक गैर सरकारी संगठन (एनजीओ) सेंटर फॉर पब्लिक लिटिगेशन ने सुपीम कोर्ट में एक याचिका दायर की है। इस याचिका में कहा गया है कि मारन द्वारा मलेशिया के मैक्सिस समूह का पक्ष लिए जाने से संबंधित दस्तावेज उसे कोर्ट में पेश करने की अनुमति दी जाए। इस समूह ने मई 2004 से मई 2007 के बीच मारन के दूरसंचार मंत्री रहने के दौरान चेन्नई की टेलीकॉम कंपनी एयरसेल को खरीद लिया था। आरोप है कि दूरसंचार मंत्री रहते शिवा गुप की कंपनी एयरसेल को यूएएस लाइसेंस देने का मामला अटका दिया था। दूरसंचार मंत्रालय के रवैए से क्षुब्ध होकर इस कंपनी के मालिक सी. शिवाशंकर एयरसेल को मैक्सिस समूह को बेचने के लिए बाध्य हो गए थे। मैक्सिस समूह के मालिक मलेशिया के बिजनेस टाइकून टी. आनंद कृष्णन हैं। आरोप है कि मैक्सिस समूह के एयरसेल के बाद मारन परिवार नियंत्रित सन टीवी में भारी निवेश करते हुए उसकी 20 पतिशत हिस्सेदारी खरीद ली। मारन के कार्यकाल में एयरसेल को 14 लाइसेंस दिए गए।
उधर, 2-जी स्पेक्ट्रम घोटाले की जांच कर रही सीबीआई ने राष्ट्रीय दूरसंचार नीति में 2001 से हुई अनियमितताओं की पड़ताल के लिए पारंभिक जांच दर्ज की है। इससे ए. राजा के पहले रहे दूरसंचार मंत्री दयानिधि मारन भी जांच के घेरे में आ गए हैं। गौरतलब है कि तहलका पत्रिका ने इस मामले का खुलासा किया था। हालांकि मारन ने इन आरोपों का खंडन करते हुए पत्रिका को कानूनी नोटिस भी भेजा है। सीबीआई के पवक्ता धारिणी मिश्रा ने कहा `सीबीआई ने 2001 से 2007 के बीच दूरसंचार नीति में हुई आपराधिक गड़बड़ियों के निर्धारण के लिए अज्ञात लोगों के खिलाफ यह जांच दर्ज की है। इसका लक्ष्य तत्कालीन अटल बिहारी वाजपेयी सरकार द्वारा पारित पहले आओ-पहले पाओ के पावधान का दूरसंचार नीति में पालन हुआ है या नहीं यह मालूम करना है।'
2006 में जब दयानिधि मारन दूरसंचार मंत्री थे, तब उन्होंने अपने परिवार के सन टीवी नेटवर्प को फायदा पहुंचाने के लिए स्पेक्ट्रम आवंटन में पद का दुरुपयोग किया था। दयानिधि मारन के कार्यकाल में दूरसंचार क्षेत्र में पत्यक्ष विदेशी निवेश की सीमा 49 फीसदी से बढ़ाकर 74 फीसदी की गई थी। एयरसेल में 74 फीसदी शेयर धारक मैक्सिस ने अपनी कंपनी एस्ट्रो के जरिए मारन बंधुओं के सन टीवी नेटवर्प में 600 करोड़ रुपए से अधिक का निवेश किया था। मारन ने दूरसंचार मंत्री रहते एयरसेल के लाइसेंस और स्पेक्ट्रम संबंधी आवेदनों को मंजूरी नहीं दी थी। इसके चलते एयरसेल के मालिक शिवाशंकर ने मारन परिवार के करीबी मैक्सिस को अपने 74 फीसदी शेयर बेच दिए थे। सीबीआई अधिकारियों का मानना है कि शिवाशंकर पर इस सौदे को लेकर भारी दबाव था।
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Friday, 27 May 2011

आंख की पुतली का हाल देख तिलमिला उठे करुणानिधि

Vir Arjun, Hindi Daily Newspaper Published from Delhi
Published on 27th May 2011
अनिल नरेन्द्र
तमिल भाषा में कनिमोझी का मतलब होता है आंख की पुतली। डीएमके सुप्रीमो एम. करुणानिधि ने अपनी इस बेटी का नाम बड़े प्यार से रखा था, क्योंकि काली पुतली वाली यह बच्ची उन्हें बहुत भाती थी। तभी तो वह जब तिहाड़ में अपनी आंख की इस पुतली बेटी से मिलने गए तो गले से कनि को लगाकर उनकी आंखें भर आईं। कनि उनके गले से लगकर रोने लगी। कनिमोझी को सहारा देने के लिए पिता करुणानिधि पूरे लाव-लश्कर के साथ तिहाड़ जेल गए। उनके साथ उनकी पत्नी, दामाद और पोता भी था। पार्टी के आठ सांसद भी जेल परिसर तक आए थे। लेकिन उन्हें जेलर के कमरे तक जाने की इजाजत नहीं मिली। अन्दर माता-पिता, बेटी, दामाद के आंसू निकल रहे थे तो बाहर कुछ और ही नजारा था। तिहाड़ की सुरक्षा में तमिलनाडु पुलिस की ड्यूटी रहती है, जो कुछ सिपाही अपने `देश' के सांसदों के साथ खड़े बतिया रहे थे। चार सिपाही और आठ सांसद रोने की मुद्रा में अलर्ट खड़े थे, जैसे ही सामने से करुणानिधि का काफिला आया, ये सांसद फूट-फूट कर रोने लगे। दो तमिल सिपाही भी अपने आंसू नहीं रोक पाए। पास के खड़े एक नेता जी बोले, ये गम के नहीं बल्कि वफादारी के आंसू हैं। ऐसे वफादारी के आंसू कभी आपने भी देखे हैं? करुणानिधि बिना सोनिया से मिले वापस चले गए।
कांग्रेस और द्रमुक के रिश्ते टूटने के कगार पर हैं। तनातनी के इस माहौल में तमिलनाडु की मुख्यमंत्री जयललिता ने और आग लगा दी है। जयललिता ने स्वर्गीय राजीव गांधी की हत्या में द्रमुक का हाथ होने का आरोप लगा दिया है। मंगलवार को चुनाव जीतने के बाद अपनी पहली ही प्रेस कांफ्रेंस में जयललिता ने एक सवाल के जवाब में कहा कि 1991 से मैं भी एलटीटीई के डर के साये में जी रही हूं। हम हमेशा से कहते रहे हैं कि राजीव गांधी की हत्या में द्रमुक परोक्ष रूप से शामिल था। जयललिता से पूछा गया था कि क्या लिट्टे के पूर्व नेता सी. पद्मानाभन उर्प केपी ने वाकई यह कहा था कि यदि मौका मिला तो तमिल लड़ाके जयललिता की हत्या कर देंगे। जयललिता ने कहा कि 2जी घोटाले में हो रही कानूनी कार्रवाई से लोगों का न्यायपालिका में विश्वास बहाल हुआ है। कनिमोझी की ओर से महिला होने का हवाला देकर अदालत से जमानत मांगने पर उन्होंने कहा, `यह तर्प बिल्कुल गलत है, राजनीति और अपराध के मामलों में महिला होने के कारण छूट नहीं मांगी जा सकती है।'
द्रमुक कांग्रेस को सबक सिखाने के लिए बेताब है पर उसे समझ नहीं आ रहा कि वह करे तो क्या करे? अपने प्रिय सहयोगी ए. राजा और अब बेटी कनिमोझी के जेल में चले जाने से करुणानिधि एकदम तमतमाए बैठे हैं। जेल में बेटी से मिलने के बाद हर बार की तरह वह सोनिया गांधी से मिलने नहीं गए। खबर यह है कि होटल ताज मान सिंह में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता व महासचिव दिग्विजय सिंह से भी उन्होंने मिलने से मना कर दिया। कांग्रेस के साथ सात वर्षों की पुरानी दोस्ती में यह पहली बार हुआ है कि करुणानिधि दिल्ली आए और कांग्रेस के किसी भी नेता से मिले बिना वापस चले गए। करुणानिधि यह अच्छी तरह जानते हैं कि इस समय उनके 18 सांसद कांग्रेस का कुछ नहीं बिगाड़ सकते लिहाजा वे सही अवसर की तलाश में हैं। वैसे भी चुनाव हारने के बाद वह कितने मोर्चों पर एक साथ लड़ेंगे?
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Sunday, 22 May 2011

कनिमोझी भी पहुंच गईं तिहाड़

Vir Arjun, Hindi Daily Newspaper Published from Delhi
 Published on 22nd May 2011
अनिल नरेन्द्र
विशेष सीबीआई न्यायाधीश ने शुक्रवार को द्रमुक सांसद और करुणानिधि की बेटी कनिमोझी और कलेंगनार टीवी के प्रबंधक निदेशक शरद कुमार को 2जी स्पेक्ट्रम घोटाले में जमानत याचिका खारिज करते हुए उन्हें फौरन गिरफ्तार करने का आदेश दिया। कनिमोझी तिहाड़ जेल में बैरक नम्बर 6 में पाक जासूसी कांड में गिरफ्तार माधुरी गुप्ता के साथ रहेंगी। उल्लेखनीय है कि 2जी स्पेक्ट्रम मामले में पूर्व दूरसंचार मंत्री ए. राजा, शाहिद बलवा, सिद्धार्थ बेहरुया, संजय चन्द्रा, एडी, एजी के दो अधिकारी पहले से ही तिहाड़ में बन्द हैं। अदालत ने निर्देश दिया कि 43 वर्षीय कनिमोझी और कुमार को शनिवार को पूर्वाह्न 10 बजे उनके समक्ष पेश किया जाए। कनिमोझी अदालत का आदेश सुनकर एकदम सदमे में आ गईं और रोने लगीं। उनके परिवार के सदस्यों एवं पति अरविन्दन ने उन्हें ढाढ्स बंधाया। अदालत के आदेश सुनाए जाने पर द्रमुक के कुछ समर्थक रोने लगे, कुछ चिल्लाने लगे। अदालत ने अपने 144 पृष्ठों के आदेश में कहा कि गवाही देने वाले अधिकतर लोग कलेंगनार टीवी के कर्मचारी हैं जिन्हें प्रभावित किया जा सकता है।
इससे पहले सीबीआई ने अपनी चार्जशीट में कनिमोझी पर आरोप लगाया कि उन्हें गैर कानूनी तरीके से कलेंगनार टीवी को करीब 200 करोड़ रुपये के लेन-देन का पता था। एक निजी कम्पनी के जरिये इस चैनल को 200 करोड़ रुपये दिए गए, जिसकी जानकारी कनिमोझी को थी। उल्लेखनीय है कि इस घोटाले में पूर्व संचार मंत्री ए. राजा न्यायिक हिरासत में हैं। यह घपला छोटा-मोटा नहीं, यह घपला एक लाख 76 हजार करोड़ रुपये का है। उधर ए. राजा अब दुनियाभर में मशहूर हो गए हैं। कहते हैं न, कि नाम कमाने का एक तरीका बदनाम होना भी है। तभी तो तिहाड़ जेल में बन्द पूर्व दूरसंचार मंत्री ए. राजा की सुध आजकल सियासी गलियारों में भले ही कोई न ले रहा हो, लेकिन प्रतिष्ठित पत्रिका `टाइम' ने उन्हें याद किया है। पत्रिका ने उन्हें `दुनिया के सबसे बदनाम नेताओं' की सूची में प्रमुखता से जगह दी है। टाइम ने सत्ता के दुरुपयोग के दुनिया के 10 बड़े मामलों में शामिल लोगों की एक सूची बनाई है। इसमें भारत का नाम रोशन करने के लिए 2जी स्पेक्ट्रम घोटाला दूसरे पायदान पर है। पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति रिचर्ड निक्सन के कार्यकाल के दौरान बहुचर्चित वॉटर गेट से जुड़े मामले को शीर्ष स्थान दिया गया है। `बदनाम नेताओं' के क्लब में मनमोहन सरकार से इस्तीफा दे चुके द्रमुक नेता ए. राजा ने लीबियाई राष्ट्रपति मुअम्मर गद्दाफी, उत्तर कोरियाई नेता किग जोंग इल और बिन्दास शैली के लिए बदनाम इटली के प्रधानमंत्री सिल्वियो बर्लुस्कोनी को भी पीछे छोड़ दिया है। टाइम ने स्पेक्ट्रम घोटाले पर टिप्पणी में कहा है, `हाल के कुछ महीनों में भारत की यूपीए गठबंधन सरकार इस बड़े घोटाले से हिल गई है। इस मामले ने सत्ता पर अटूट पकड़ रखने वाली सरकार को चुनौती पेश कर दी है।' आरोपों की वजह से पिछले साल राजा को इस्तीफा देना पड़ा।
करुणानिधि का साम्राज्य बिखर रहा है। उनको विधानसभा चुनाव में भारी शिकस्त मिली है। बेटी और विश्वासपात्र दोनों जेल में हैं। परिवार टूटने की कगार पर खड़ा है। देखते रहो आगे-आगे होता है क्या?
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Tuesday, 17 May 2011

Those who abuse the Lord will always suffer.

Anil Narendra
Karunanidhi’s Dravida Munnetra Kazhgam suffered a total washout in the recent elections to the Tamil Nadu Assembly. Of the 234 seats in the Assembly, his party could get just 31 seats while Jayalalitha’s AIADMK got huge 200 seats. With his defeat, I am particularly happy because this is the fate that should befall those abusing Lord Rama. He is the same person who had said at a Press Conference that Lord Rama was an imaginary figure and also that the Ramayana had no basis. And from which engineering college did Lord Rama get his degree? These very remarks the Ravana of this era were made on the Setu controversy. Some of the stanzas of the Ramayana come to my mind on this issue.
`राम विमुख अस हाल तुम्हारा। रहा कोई न कुल रोबन हारा'
Meaning that “Not giving due respect to Lord Rama has brought you to this pass. And due to this you have reached a stage where even in your family there is no one left even to cry for you.”
The people have done what is written in one part of the Ramayana.
“जाको प्रिय न राम वैदेही। तजिये ताहि कोटि काति वैरी सम।। यद्यपि परम स्नेही”
Meaning that“Anyone who does not respect Rama Sita, he should be totally ignored, however dear he might be to you.”
When Karunanidhi and his stooge T R Baalu suggested that Ram Setu should be destroyed, their downfall started that very moment.
“जो अपराध भगत कर करहीं, राम रोष पावक सो जरहीं”
Meaning that, “Anyone who demeans devotees, he gets burnt in the fire of anger of Lord Rama, that he invited because of his utterances. Lord Rama does not spare anyone who insults his devotees.”
Ram Setu was built not by Rama, but by his ardent devotee Lord Hanuman and his army of followers. And the idea of destroying the Setu given by Karunanidhi was an insult to the devotees of Lord Rama. Devotee of Lord Rama, Lord Ram the Protector of Devotees could never tolerate all this. That is why in Ramcharitramanas, Saint Tulsidas said:
“जाको प्रभु दारुण दुख दीन्हा, ताकि मति पहिले हर लीन्हा”
Meaning that “anyone who troubles the Almighty will have to pay for it by inviting misery upon himself. And whomsoever the Lord wishes to punish, he takes control of his mind first.”
And that is what has happened to Karunanidhi who is so unwell that one cannot say how he will be affected by the defeat at the hustings. His daughter Kanimozhi might go to jail any time. A Raja is already in jail. One of his wives, Dayalu Ammal might also get into trouble. T R Baalu is out and it is difficult to say whether he will get power again. In all, the whole family is scattered.
After the humiliating defeat of Karunanidhi, what his attitude will be towards the Manmohan Singh government could cause concern for the Central Government, because he can withdraw his ministers from the government, but the Congress Party should not be too worried by this. The shortfall in case of DMK MPs pulling out of the government can be met and the Congress Party should not be bothered by this.
In the 2G spectrum scam, the government should be open about investigating Karunanidhi and company without any fear or pressure.The supporter of Rajiv Gandhi’s assassin, the LTTE, Karunanidhi, deserved this fate.
Read this Article in Hindi: http://anilnarendrablog.blogspot.com/2011/05/blog-post_15.html

Sunday, 15 May 2011

भगवान राम को गाली देने वालों का यही हश्र होता है

Vir Arjun, Hindi Daily Newspaper Published from Delhi
प्रकाशित: 15 मई 2011
-अनिल नरेन्द्र
तमिलनाडु में एम. करुणानिधि की पार्टी द्रमुक का विधानसभा चुनाव में सफाया हो गया है। 234 सीटों की विधानसभा में करुणानिधि को सिर्प 31 सीटें ही मिली हैं जबकि अन्ना द्रमुक नेता जयललिता की पार्टी को 200 सीटें हासिल हुई हैं। करुणानिधि की हार से मुझे विशेष प्रसन्नता हुई है। भगवान राम को गाली देने वालों का यही हश्र होना चाहिए। यह वही करुणानिधि हैं जिन्होंने एक प्रेस कांफ्रेंस में सवाल किया था कि राम एक काल्पनिक व्यक्ति थे। रामायण मात्र कपोल कल्पना है। उसका कोई वजूद नहीं है। राम ने किस इंजीनियरिंग कॉलेज से डिग्री ली थी? यह टिप्पणी रावण के इस वंश ने सेतु समुद्रम परियोजना विवाद के दौरान की थी। मुझे रामायण की कुछ चौपाइयां याद आ रही हैं।
`राम विमुख अस हाल तुम्हारा। रहा कोई न कुल रोबन हारा'
अर्थात् भगवान राम से विमुख होने पर तुम्हारा ऐसा हाल हो गया है कि तुम्हारे परिवार में कोई रोने वाला भी नहीं बचा। जनता ने वही किया जो रामायण की इस चौपाई में लिखा है `जाको प्रिय न राम वैदेही। तजिये ताहि कोटि काति वैरी सम।। यद्यपि परम स्नेही' अर्थात् जिसे भगवान राम और मां सीता प्रिय न हों उसका त्याग कर देना चाहिए चाहे वह कितना भी अपना प्रिय क्यों न हो।
जब करुणानिधि और उनके चेले टीआर बालू ने रामसेतु को गिराने की वकालत की थी उसी समय से उनका पतन होना शुरू हो गया था। 
`जो अपराध भगत कर करहीं राम रोष पावक सो जरहीं' 
अर्थात् यदि कोई व्यक्ति भगवान राम के भक्तों के प्रति अपराध करता है तो वह प्रभु के क्रोध रूपी अग्नि में जलता है। इसका तात्पर्य यह है कि भगवान राम उस दुष्ट व्यक्ति को कदापि नहीं माफ करते जो उनके भक्तों का दिल दुखाता है। रामसेतु का निर्माण भगवान राम ने नहीं बल्कि उनके भक्त हनुमान और हनुमान सेना ने किया था और करुणानिधि ने रामसेतु को तोड़ने के लिए जो तिकड़म रची थी उससे भगवान राम के भक्तों का दिल दुखा। इसे भक्त वत्सल भगवान राम कभी भी बर्दाश्त नहीं कर सकते थे। इसीलिए राम चरित मानस में संत तुलसीदास ने कहा हैö`जाको प्रभु दारुण दुख दीन्हा ताकि मति पहिले ही लीन्हा' अर्थात् भगवान जिसे अत्यंत कष्ट देना चाहते हैं उसकी बुद्धि को पहले ही हर लेते हैं। वही हुआ करुणानिधि के साथ। आज करुणानिधि खुद इतने बीमार हैं कि कहा नहीं जा सकता कि इस हार का उन पर क्या असर हो। उनकी बेटी कनिमोझी किसी भी समय जेल जा सकती हैं। ए. राजा पहले से ही जेल में हैं। एक पत्नी दयालु अम्मल भी फंस सकती है। टीआर बालू बाहर हैं और सत्ता में शायद ही कभी आएं। कुल मिलाकर पूरा परिवार ही बिखर रहा है।
करुणानिधि की इस शर्मनाक हार के बाद उनका मनमोहन सरकार के प्रति क्या रुख रहता है यह कांग्रेस के लिए थोड़ी चिन्ता पैदा कर सकता है। क्योंकि अब वे केंद्र सरकार से अपने मंत्री हटा सकते हैं पर कांग्रेस को इसकी ज्यादा चिन्ता नहीं होनी चाहिए। द्रमुक सांसदों की कमी पूरी हो जाएगी। हां अब कांग्रेस Šजी स्पेक्ट्रम घोटाले में खुलकर करुणानिधि एण्ड कम्पनी की जांच-पड़ताल बिना किसी दबाव के कर सकती है। राजीव गांधी के हत्यारे लिट्टे के समर्थक करुणानिधि का यही हश्र होना चाहिए था।
Read this Article in English: http://anilnarendrablog.blogspot.com/2011/05/those-who-abuse-lord-will-always-suffer.html

Tuesday, 10 May 2011

बेचारा राजा, अब परिवार ने भी उन्हें बलि का बकरा बनाया

Vir Arjun, Hindi Daily Newspaper Published from Delhi
प्रकाशित: 10 मई 2011
-अनिल नरेन्द्र

कहते हैं कि जब अपने पर पड़ती है तो व्यक्ति अपनी जान बचाने के लिए किसी को भी कुर्बान करने को, बलि का बकरा बनाने को तैयार हो जाता है। ऐसा ही कुछ किस्सा एम. करुणानिधि की बेटी सांसद कनिमोझी के साथ हो रहा है। 25 अप्रैल को 2जी स्पेक्ट्रम घोटाले की पूरक चार्जशीट में सीबीआई ने आरोप लगाया कि कनिमोझी ने ए. राजा के साथ मिलकर साजिश रची और स्वॉन टेलीकॉम को 2जी स्पेक्ट्रम के लाइसेंस आवंटन के एवज में शाहिद बलवा ने कलैगनार टीवी को 200 करोड़ रुपये कुशेगांव रियल्टी और सिने युग के मार्पत दिए। स्वॉन टेलीकॉम के प्रमोटर शाहिद बलवा और उसका भाई आसिफ बलवा भी इस घोटाले में आरोपी हैं। कनिमोझी ने पिछले दिनों अपनी अंतरिम जमानत की याचिका दायर की। Šजी स्पेक्ट्रम घोटाले में उनकी भूमिका के लिए स्पेशल कोर्ट द्वारा सम्मन जारी किए जाने के बाद गत शुक्रवार को कोर्ट में हाजिर होते हुए 43 वर्षीय सांसद कनिमोझी ने जमानत की मांग की। उन्होंने महिला और सांसद होने के आधार पर भी जमानत की मांग की। स्पेशल जज ओपी सैनी ने कहा कि वह कनिमोझी और कलैगनार टीवी के प्रबंध निदेशक शरद कुमार की जमानत याचिका पर अपना फैसला 14 मई को सुनाएंगे। यह फैसला विधानसभा चुनावों के परिणाम आने के बाद आएगा।
सीबीआई की तरफ से विशेष लोक अभियोजक यूयू ललित ने कहा, कलैगनार टीवी का नियंत्रण भले ही शरद कुमार कर रहे हों लेकिन पर्दे के पीछे से जो व्यक्ति टीवी का सब कुछ नियंत्रण कर रहा है वो है यह महिला (कनिमोझी)। कनिमोझी की ओर से पेश हुए राम जेठमलानी ने दलील दी कि संचार मंत्री रहते हुए ए. राजा ने जो कुछ भी किया, उसके लिए उनकी मुवक्किल (कनिमोझी) को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता है। जेठमलानी के अनुसार किसी कम्पनी में किसी व्यक्ति के हिस्सेदार होने मात्र से उक्त कम्पनी में हुई कथित गड़बड़ियों के लिए उसे आरोपी नहीं बनाया जा सकता। उन्होंने कहा कि संचार मंत्री के रूप में ए. राजा द्वारा किए गए किसी भी अपराध के लिए कनिमोझी को जिम्मेदार नहीं माना जा सकता। यदि राजा ने कोई गलत काम किया है तो अदालत उनके खिलाफ कार्रवाई करे और कनिमोझी को इसमें शामिल करने की भूल न करें। सरकारी वकील यूयू ललित ने जेठमलानी की दलीलों से असहमति प्रकट करते हुए स्पष्ट कहा कि कलैगनार टीवी की घोटाले की रकम से 200 करोड़ रुपये गए हैं। इस चैनल में 20 फीसदी हिस्सेदारी कनिमोझी की है और 60 फीसदी हिस्सेदारी परिवार के दूसरी सदस्य दयालु अम्माल के हैं। दयालु अम्माल एम. करुणानिधि की पत्नी हैं।
कनिमोझी की दलीलों से करुणानिधि के कुनबे में दरारों की बदबू आ रही है। ए. राजा जो अब तक करुणानिधि के सबसे ज्यादा विश्वास पात्रों में से एक थे, को अब बलि का बकरा बनाया जा रहा है। उसके मत्थे सारे आरोप थोपे जा रहे हैं जबकि सभी जानते हैं कि बेशक राजा फ्रंट पर था पर असल लाभ तो करुणानिधि परिवार को ही मिला। खैर, मामला अदालत में है, देखें आगे क्या होता है?

Saturday, 30 April 2011

बेशक मसौदा रिपोर्ट खारिज कर दी गई पर डॉ. जोशी अपने मकसद में सफल

Vir Arjun, Hindi Daily Newspaper Published from Delhi
प्रकाशित: 30 अप्रैल 2011
-अनिल नरेन्द्र

यह तो होना ही था। 2जी स्पेक्ट्रम आवंटन मामले की जांच कर रही लोक लेखा समिति (पीएसी) की मसौदा रिपोर्ट खारिज कर दी गई। बृहस्पतिवार को पीएसी की बैठक में मसौदा रिपोर्ट पर भारी हंगामा हुआ जिस पर इसके अध्यक्ष भाजपा नेता डॉ. मुरली मनोहर जोशी ने बैठक स्थगित कर दी और विपक्षी दलों के अन्य सदस्यों के साथ बैठक से चले गए। इसके बाद मसौदा रिपोर्ट को संप्रग सदस्यों ने सपा और बसपा के सदस्यों के सहयोग से रद्द कर दिया। डॉ. जोशी द्वारा तैयार मसौदा रिपोर्ट पर विचार के लिए बुलाई गई समिति की बैठक फलस्वरूप अफरातफरी में समाप्त हो गई। जोशी जी मतदान से पहले ही बैठक से उठकर चले गए। उन्होंने कहा कि चूंकि उन्होंने बैठक स्थगित कर दी है इसलिए कोई कार्यवाही नहीं हो सकती पर संसदीय कार्यमंत्री पवन कुमार बंसल ने इस विषय पर उनसे मतभेद जताते हुए कहा कि हमारे विचार से रिपोर्ट खारिज हो गई है, यह मामला समाप्त हो गया है। अब सभी की निगाहें जेपीसी पर है। इस पीएसी का कार्यकाल 30 अप्रैल को समाप्त हो रहा है।
लोक लेखा समिति (पीएसी) संसद की महत्वपूर्ण समिति है। इसकी रिपोर्ट और टीका-टिप्पणी खासा महत्व रखती रही है। समिति के अध्यक्ष डॉ. जोशी इसी फेर में रहे हैं कि 30 अप्रैल से पहले ही जांच रिपोर्ट आ जाए जबकि कांग्रेस और डीएमके सदस्यों ने ठान रखी थी कि कोई न कोई अड़ंगेबाजी करके रिपोर्ट न आने दें। डॉ. जोशी भी कम उस्ताद नहीं हैं। उन्होंने तमाम विरोध, आपत्तियों व अड़ंगेबाजियों के कुछ हद तक अपने लक्ष्य में सफलता पा ही ली। 270 पन्नों की इस ड्राफ्ट रिपोर्ट में प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन की भी जमकर खबर ली गई है। 2जी स्पेक्ट्रम मामले में उनके कार्यालय की भूमिका को शक के घेरे में खड़ा किया गया है। कहा गया है कि प्रधानमंत्री इस घोटाले को होते हुए देखते रहे। ऐसे में वह कम जिम्मेदार नहीं हैं। ड्राफ्ट रिपोर्ट में कई जगह प्रधानमंत्री की भूमिका पर कड़ी टिप्पणियां भी की गई हैं। इसी को लेकर कांग्रेस के नेता बौखला गए। रिपोर्ट में तत्कालीन वित्त मंत्री पी. चिदम्बरम की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए हैं। कहा गया है कि उन्होंने समय रहते कदम नहीं उठाया बल्कि इसे `बन्द फाइल' मान लेने की बात कही। ताकि पीएमओ भी किसी कार्रवाई के बारे में पुनर्विचार न करे। इस तरह से चिदम्बरम को भी कटघरे में खड़ा कर दिया गया है। सुझाव तो यह भी दिया गया है कि चिदम्बरम की भूमिका की भी व्यापक जांच होनी चाहिए। इस विवादित ड्राफ्ट रिपोर्ट को लेकर सत्तारूढ़ धड़ा बेचैन हो गया है। पूरी ताकत लगाई जा रही है कि डॉ. जोशी का शो कामयाब न हो। लेकिन डॉ. जोशी के दांव ने काफी हद तक अपना मकसद पूरा कर लिया है। बेशक जोर-जबरदस्ती करके सत्तापक्ष सांसदों ने पीएसी की रिपोर्ट को रद्द कर दिया हो पर डॉ. जोशी ने प्रधानमंत्री, उनके पीएमओ और चिदम्बरम की तरफ शक की सुई घुमाकर अपनी उस्तादी का कमाल तो दिखा ही दिया है। अब कांग्रेस के लोग सालों-साल सफाई देते रहेंगे। यह समिति सांसदों की है इसलिए इसे इतनी आसानी से रद्दी की टोकरी में नहीं फेंका जा सकता। भाजपा और विपक्ष सांसद इसे उठाने का भरपूर प्रयास जरूर करेंगे।

Friday, 29 April 2011

पूरी तरह लपेटे में आ चुके हैं करुणानिधि और उनका परिवार

Vir Arjun, Hindi Daily Newspaper Published from Delhi
प्रकाशित: 29 अप्रैल 2011
-अनिल नरेन्द्र

यह कलयुग है और कलयुग में भगवान राम को गाली देने वाले भी मौजूद हैं पर भगवान राम को गाली देने वाला अंतत धरा जाता है और जब उपर वाले के प्रकोप का डंडा चलता है तो बन्दे के होश ठिकाने हो जाते हैं। यही कुछ हाल द्रमुक प्रमुख एम. करुणानिधि का भी हो रहा है। यह वही करुणानिधि हैं जिसने रामसेतु समुद्र परियोजना में सवाल पूछा था कि राम ने कौन-सी यूनिवर्सिटी से इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल की थी। भगवान राम को खुली गाली देने की कीमत करुणानिधि को चुकानी पड़ेगी। करुणानिधि 2जी स्पेक्ट्रम घोटाले प्रकरण में बुरी तरह से उलझते जा रहे हैं। इनके तमाम तेवरों के बावजूद कांग्रेस नेतृत्व इनकी ब्लैकमेलिंग में नहीं आ रहा है। यही नहीं कांग्रेस ने तो एक तरह से करुणानिधि को सीधी चुनौती दे दी है कि वे सरकार से समर्थन वापस लेने का फैसला करते हैं तो कर लें। लेकिन नई स्थितियों में उनका बचाव करना अब सम्भव नहीं है। करुणानिधि की तमाम कोशिशों के बावजूद उनके चहेते ए. राजा तिहाड़ में पहुंच चुके हैं। अब सांसद बेटी कनिमोझी 2जी स्पेक्ट्रम घोटाले की आरोपी बन गई है। सीबीआई ने पूरक चार्जशीट दाखिल कर दी है। बेटी के कटघरे में आने से करुणानिधि का पूरा परिवार फंसता नजर आ रहा है। सीबीआई ने जो ताजा चार्जशीट दाखिल की है उसमें दावा किया गया है कि बहुचर्चित फर्म डीबी रियलिटी के जरिये कलैगनर टीवी के खाते में 214 करोड़ रुपये की रकम दी गई है। कलैगनर टीवी के प्रबंधन ने कागजों में हेराफेरी की और इस रकम को कर्ज के रूप में दिखा दिया। अपनी भूमिका पाक-साफ दिखाने के लिए टीवी संस्थान ने यह रकम भी लौटा दी। सीबीआई ने दावा किया है कि यह रकम उन कम्पनियों को मिली थी जिन्हें स्पेक्ट्रम आवंटन में फायदा पहुंचाया गया था। चूंकि ए. राजा, कनिमोझी के खास प्रभाव में थे, इसलिए उन्होंने कलैगनर टीवी को एक जरिया बना लिया। उल्लेखनीय है कि कलैगनर टीवी डीएमके के प्रचार मुखौटे की भूमिका में रहता है। आरोपी तो करुणानिधि की पत्नी दयालु अम्माल को भी बनना था पर यह इसलिए फिलहाल नहीं हुआ क्योंकि वे टीवी संस्थान में महज एक साइलेंट पार्टनर थीं। कनिमोझी के साथ कलैगनर टीवी के प्रबंध निदेशक शरद कुमार को भी आरोपी बनाया गया है। इस संस्थान में उनकी भी 20 प्रतिशत की हिस्सेदारी पाई गई। डीएमके के करीबियों का कहना है कि दयालु अम्माल भले सीबीआई के शिकंजे से बच गई हों, लेकिन वे अदालती जंजाल में फंस सकती हैं। क्योंकि जिस संस्थान में उनका मालिकाना हक 60 प्रतिशत का हो, उसके कार्यकलापों की जिम्मेदारी से वे कैसे मुक्त मानी जा सकती हैं? इसके साथ ही इस मामले से करुणानिधि के परिवार में आपसी द्वंद्व बढ़ सकती है क्योंकि करुणानिधि की एक पत्नी दयालु अम्माल फिलहाल बच गई हैं जबकि उनकी दूसरी पत्नी राजथी अम्माल की बेटी कनिमोझी घोटाले के लपेटे में आ गई है। करुणानिधि के परिवार में कई वजहों से पहले से ही घमासान चल रहा है। सीबीआई की चार्जशीट परिवार के द्वंद्व को और बढ़ा सकती है, रही-सही कसर तमिलनाडु विधानसभा परिणाम आने पर शायद पूरी हो जाए। अगर डीएमके हार जाती है तो दोनों तमिलनाडु और केंद्र से सत्ता से हाथ धोना पड़ सकता है। भगवान के घर देर है अन्धेर नहीं।

Tuesday, 26 April 2011

कारपोरेट कैदियों को तिहाड़ का लंगर पसंद नहीं आया

Vir Arjun, Hindi Daily Newspaper Published from Delhi
प्रकाशित: 26 अप्रैल 2011
-अनिल नरेन्द्र

लाखों रुपये की सालाना सेलरी लेने वाले कारपोरेट जाइंट्स की आजकल तिहाड़ में जिंदगी कैसी गुजर रही होगी? प्राप्त समाचारों के अनुसार तिहाड़ में उनका हाल खस्ता है। 26 अप्रैल तक ये बड़े लोग जेल नंबर तीन के वार्ड नंबर चार में बारह फीट लम्बी और दस फीट चौड़ी कोठरी में ही दिन और रात बिताएंगे। इसके बाद दिल्ली हाई कोर्ट उनकी जमानत याचिकाओं पर अपना फैसला देगी। जेल के पहले दिन बुधवार रात को इन लोगों को चार कंबल मिले। एक दरी, कुछ चादरें भी दी गईं। लेकिन जेल में कोई बन्द नहीं था लिहाजा उन्हें जमीन पर ही सोना पड़ रहा है। खाना भी उन्हें जेल में बना खाना पड़ रहा है। हां जेल में उनके लिए राहत की बात है कि कोठरी से लगा शौचालय में एक पंखा लगा हुआ है। लेकिन वार्ड में एक ही खिड़की है जहां से थोड़ी रोशनी उनके हिस्से  में आ सकती है। इनको अपना वार्ड छोड़ने की इजाजत नहीं है। दरअसल यूनिटेक के प्रबंधक निदेशक संजय चंद्रा, स्वान  टेलीकॉम के निदेशक विनोद गोयनका और धीरु भाई अंबानी समूह के तीन आला अधिकारी गौतम दोशी, हरि नायर और सुरेन्द्र पीपारा जेल में इससे ज्यादा जगह की उम्मीद भी नहीं कर सकते। तिहाड़ पहले से ही जरूरत से ज्यादा भरी है। गुरुवार को तिहाड़ परिसर की नौ जेलों में 11,696 कैदी बन्द थे।
तिहाड़ जेल में बन्द इन कारपोरेट हस्तियों को जेल के लंगर का खाना पसंद नहीं आया। अब वे कैंटीन से खाना खरीद कर खाते हैं। इनमें से कोई भी जेल में सुबह-सुबह होने वाली प्रार्थना में भी शरीक नहीं हुआ। सूत्रों ने यह जानकारी देते हुए बताया कि अब तक किसी ने भी उन पांच-पांच लोगों के नाम भी जेल प्रशासन को नहीं दिए हैं जिनसे इन्हें मुलाकात करनी है जबकि तिहाड़ जेल प्रशासन ने कुछ समय पहले यह नियम बनाया था कि जेल में जो भी विचाराधीन कैदी आएगा उसी वक्त उससे उन पांच लोगों के नाम, पता और टेलीफोन नंबर ले लिए जाएंगे जिनसे कैदियों को मुलाकात और बाद में जेल में ही उपलब्ध सुविधा के तहत फोन पर बात करनी होगी। सुबह 5.30 बजे जेल खुल जाती है और 6 बजे सभी जेलों में प्रार्थना होती है। इसमें सभी विचाराधीन और सजायाफ्ता कैदियों को शरीक होना पड़ता है। लेकिन शुक्रवार को इनमें से कोई भी प्रार्थना में नहीं गया। सभी ने दोपहर में वार्ड में ही चहलकदमी की पर किसी से बात नहीं की। शुक्रवार को उन्होंने अखबारों की मांग की। अपने-अपने सेल में अधिकतर वक्त वे टीवी पर न्यूज देखते रहे। जेल आने के वक्त ही ये अपने साथ दो-दो जोड़ी कपड़े लाए थे। इनमें से एक भी तनाव में नहीं दिख रहा है।
कड़ी सुरक्षा वाले कैदियों के लिए विशेष यही है कि दुर्दांत अपराधियों से उन्हें बचाने के बंदोबस्त किए गए हैं। तिहाड़ जेल के एक अधिकारी ने बताया कि वसूली के लिए इन बड़े लोगों पर हमला हो सकता है। बहरहाल में पांच बड़े लोग भले ही जेल में एक साथ न रह पाएं, राजा की तरह कुछ नियमों से वे प्रोत्साहित हो सकते हैं। फरवरी में जब ए. राजा तिहाड़ पहुंचे थे तो उन्हें भी खाली संकरे स्थान में रखा गया जहां छत पर लोहे की एक झिरी से रोशनी आती थी। जाली वाले दरवाजे के कारण उनके लिए कोई एकांत नहीं था। लेकिन एक हफ्ते बाद ही राजा ने इस बन्द जगह को अपना घर बनाना शुरू कर दिया। जेल कैंटीन में डोसा, इडली, सांभर स्वादिष्ट मिलती है और यह उसी को खा रहे हैं।

Tuesday, 19 April 2011

पीएसी बनाम जेपीसी

Vir Arjun, Hindi Daily Newspaper Published from Delhi
 प्रकाशित: 19 अप्रैल 201
-अनिल नरेन्द्र
2जी स्पेक्ट्रम घोटाले की जांच कर रही संसदीय लोक लेखा समिति (पीएसी) की बैठक शुक्रवार को सत्तापक्ष और विपक्ष की जंग में बदल गई। दिनभर की खींचतान के बाद कांग्रेस नेता आखिरकार सॉलिसिटर जनरल गुलाम वाहनवती व शनिवार को कैबिनेट सचिव और पीएम के प्रधान सचिव की गवाही टलवाने में कामयाब हो गए। फिलहाल उनकी गवाही खटाई में पड़ गई है। दरअसल कांग्रेसी सांसद पूरी तैयारी करके आए थे। कांग्रेसी सदस्यों ने बड़ी ही दिलचस्प अंदाज में नए-नए तर्प गढ़कर तलब किए गए अफसरों की पेशी को टालने के प्रयास किए। डॉ. मुरली मनोहर जोशी ने संवैधानिक नियमों, समिति के अधिकारों और पूर्व समितियों का हवाला देकर उन तर्कों की काट पेश की मगर वह अहम लोगों, खासतौर पर सॉलिसिटर जनरल वाहनवती और पीएमओ के अफसरों की गवाही टालने से रोक नहीं पाए। बैठक के बीच में कांग्रेस सदस्य कई दफा बाहर आकर फोन पर गम्भीर चर्चा में व्यस्त दिखे। सबसे पहले मुद्दा जेपीसी बनाम पीएसी का। यह बहस पिछली दो बैठकों में भी उठाई गई थी। मगर कांग्रेस के केएस राव, जितेन्द्र सिंह, नवीन जिन्दल व सैफुद्दीन सोज ने एक साथ मिलकर कहा कि आखिर संसद ने जब जेपीसी गठित कर दी है तो आला अफसरों को तलब करने में यह सक्रियता क्यों? इस पर डॉ. जोशी ने स्पीकर का पत्र पढ़कर सुनाया। स्पीकर मीरा कुमार ने दोनों समितियों के अध्यक्ष चाको व जोशी से बैठक के बाद अपनी राय दी थी कि उन्हें मिलकर काम करना चाहिए। जोशी ने अपने बचाव में संसद के नियमों की किताब पढ़ी और कहा कि समिति सीएजी रिपोर्ट के मुताबिक मामले की तह तक जाएगी। कांग्रेस सदस्यों का दूसरा एतराज था, सीबीआई की चार्जशीट में आरोपी लोगों को बुलाने पर। एक सदस्य का तर्प था कि सीबीआई चार्जशीट में नामित लोगों को यहां तलब करने की क्या तुक है? मामला अदालत में चल रहा है इसलिए भी यह सब ज्यूडिस है। इस पर डॉ. जोशी ने याद दिलाया कि शुक्रवार, शनिवार को जो अधिकारी बुलाए गए हैं उनका चार्जशीट से कोई लेना-देना नहीं, फिर अड़चन कैसी? एक अन्य सदस्य अरुण कुमार ने नाराजगी जताई कि अगर पीएम के करीबी अफसर बुलाए जा सकते हैं तो इस मामले में ए. राजा को बुलाना चाहिए। तीन घंटे की मात्थापच्ची के बाद यह तय हुआ कि सदस्यों को कागजात के अध्यापन के लिए बैठक एक हफ्ते तक मुल्तवी करने में कामयाब हो गए।
कांग्रेस सदस्यों के आक्रामक विरोध ने 2जी स्पेक्ट्रम घोटाले पर तेज गति से चल रही पीएसी की जांच में ब्रेक लगा दी है। अध्यक्ष मुरली मनोहर जोशी की कोशिश अब भी यह है कि वह अपनी रिपोर्ट जल्द से जल्द दें। मौजूदा पीएसी का कार्यकाल इसी महीने खत्म हो रहा है। इसलिए जोशी ने जल्द से जल्द रिपोर्ट देने का संकेत दिया है।हालांकि भाजपा ने जोशी का कार्यकाल जारी रखने का फैसला किया है, लेकिन जोशी की कोशिश है कि जेपीसी की अगली बैठक यानि 18 मई से पहले रिपोर्ट सौंप दी जाए। पीएसी बनाम जेपीसी टकराव तो होना ही था। कांग्रेस सांसदों द्वारा आपत्तियों को उचित ठहराते हुए कांग्रेस प्रवक्ता अभिषेक सिंघवी ने कहा कि जब जेपीसी बनाने की मांग हो रही थी हम उसी वक्त कह रहे थे कि क्षेत्राधिकार और जांच में दोहराव को लेकर टकराव हो सकता है। उस वक्त कहा गया कि हम जिद्दी हैं। डॉ. जोशी की पीएसी की जांच काफी आगे तक बढ़ चुकी है और हमें लगता है कि डॉ. जोशी बहुत जल्द अपनी रिपोर्ट पेश कर ही देंगे।

Saturday, 16 April 2011

तमिलनाडु, केरल और असम में विधानसभा चुनाव


-अनिल नरेन्द्र

तमिलनाडु, केरल और पुडुचेरी में विधानसभा चुनावों में जमकर वोटिंग हुई है। तमिलनाडु में 75.21 प्रतिशत, केरल में 74.04 और पुडुचेरी में 85.21 प्रतिशत। चुनाव आयोग मतदान के प्रतिशत बढ़ने से इस बात से खुश है कि लोग अपने वोट की कीमत समझने लगे हैं, वहीं विभिन्न राजनीतिक पार्टियां अधिक मतदान को अपने लिए फायदेमंद मान रही हैं। अगर हम तीनों राज्यों में मतदान का प्रतिशत लगाएं तो यह तकरीबन 78 फीसदी रहता है और आमतौर पर यह शांत मतदान रहा। लोग शाम तक मतदान करने के लिए कतारों में खड़े थे। कांग्रेस केरल सहित अन्य राज्यों में हुए विधानसभा चुनाव के दौरान बड़ी संख्या में मतदान का रुझान पढ़ने में अलग-अलग थ्यौरी गढ़ रही है। पार्टी ने केरल में बड़ी तादाद में मतदाताओं के घर से निकलने को सत्ता विरोधी रुझान बताया है जबकि असम और तमिलनाडु के बारे में यही सवाल आने पर पार्टी बगलें झांकने लगती है। वहीं कांग्रेस ने भारी मतदान को संकेत में ही सही अन्ना के आंदोलन से जोड़कर भी पढ़ने की कोशिश की है। कांग्रेस ने कहा कि इन राज्यों में जो मतदान हुआ है उस पर जन सैलाब का यह मतलब है कि जनता का विश्वास लोकतंत्र में है। तीनों राज्यों में मतदान प्रतिशत बढ़ने से कांग्रेस कार्यकर्ताओं के हौसले बुलंद हैं। नेताओं को भ्रष्ट बताने व समाजसेवी अन्ना हजारे के बयान के संदर्भ में उनका नाम लिए बिना कांग्रेस प्रवक्ता मनीष तिवारी ने कहा कि इस लोकतांत्रिक प्रणाली के जो असली कर्णधार है वह राजनीतिक दल ही हैं जो न केवल चुनाव में बल्कि उसके बाद लोकतांत्रिक प्रक्रिया को मजबूत करते हैं। तिवारी ने कहा कि हर पांच साल में राजनीतिक दलों का जो मूल्यांकन होता है उससे दुनिया के बाकी मुल्कों में भारत की साख बनी हुई है। इसलिए जरूरी है कि जो भी कदम उठाए जाएं उसका मकसद व्यवस्था को मजबूत करना होना चाहिए।
पार्टी सूत्रों का मानना है कि तमिलनाडु में द्रमुक और कांग्रेस के गठबंधन और जयललिता की अगुवाई वाले अन्नाद्रमुक के बीच कांटे का मुकाबला है। हालांकि जमीनी रिपोर्ट से कांग्रेस आलाकमान बहुत आश्वस्त नहीं है। तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में अपनी पार्टी की जीत का दावा करने वाले द्रमुक प्रमुख एम. करुणानिधि ने राज्य में संभावित गठबंधन सरकार के गठन के संकेत दिए हैं। अपने मताधिकार का प्रयोग करने के बाद उन्होंने कहा कि उगते सूर्य (द्रमुक का चुनाव चिन्ह) की तरह जीत को लेकर भी हमारी संभावनाएं उज्जवल हैं। सरकार बनाने के लिए हमें जितनी सीटों की जरूरत है, हम उतनी जीतेंगे। सीटों के बंटवारे को लेकर कांग्रेस और द्रमुक के बीच चले दावपेंच को देखते हुए कहा जा रहा है कि कांग्रेस ने इसके माध्यम से सत्ता में अपनी भागीदारी को लेकर मजबूत आधार तैयार कर लिया है। कांग्रेस 1967 के बाद से तमिलनाडु में सत्ता में नहीं आई है।
केरल में 74.4 प्रतिशत मतदान हुआ है। भाजपा को भी उम्मीद है कि इस बार केरल में भी कमल खिल जाए। मुख्य मुकाबला वाम मोर्चा और कांग्रेस गठबंधन के बीच है। टिकट बंटवारे में तरह-तरह के आरोप  लगाए गए। देश के सबसे साक्षर और प्रगतिशील राज्य केरल में विधानसभा चुनाव की टिकटें राजनीतिक दलों के दफ्तरों की बजाय चर्चों और मदरसों में बंटी है। चाहे सत्तारूढ़ लेफ्ट डेमोकेटिक फ्रंट हो या विपक्षी यूनाइटेड डेमोकेटिक फ्रंट दोनों ने चर्चों, मदरसों, मौलवियों और पादरियों के कहने पर टिकटें  बांटी हैं। जिन धर्मगुरुओं को मनमाफिक टिकट मिली है वे खुश हैं और जिनकी लिस्ट की अनदेखी हुई है वह नाराज हैं। केरल में राजनीति से इतर धार्मिक आधार पर टिकटों का बंटवारा चोरी-छिपे नहीं बल्कि खुलेआम हुआ है। मुस्लिम धर्मगुरुओं का कहना है कि कांग्रेस ने उन्हें कम टिकट दिए हैं, जबकि सीपीएम ने उनके कहे अनुसार टिकट बांटे हैं। कांग्रेस की मुश्किल यह है कि उसके गठबंधन में शामिल मुस्लिम लीग ने 22 में से 21 उम्मीदवार मुस्लिम उतारे हैं। कम से कम 14 विधानसभा क्षेत्रों में ईसाई जीत-हार का फैसला करने की स्थिति में हैं। भाकपा महासचिव एबी वर्धन ने चुनाव से पहले एर्नाकुलम प्रेस क्लब में कहा कि प. बंगाल में वाम मोर्चा और कांग्रेस के बीच कड़ा मुकाबला होगा जबकि केरल में भाकपा नीत वाम लोकतांत्रिक मोर्चा कांग्रेस नीत संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चे से बेहतर स्थिति में है। उन्होंने कहा कि केरल में मुकाबला बेशक दिलचस्प है लेकिन एलडीएफ बेहतर स्थिति में है और वाम मोर्चा बहुमत हासिल कर लेगा। वर्धन ने कहा, एलडीएफ तथा यूडीएफ की बारी-बारी से सरकार बनने का केरल का तथाकथित रुझान वाम मोर्चे के अच्छे प्रदर्शन के बाद इस बार कायम नहीं रहेगा।
असम में पहले चरण में लगभग 72 प्रतिशत मतदान हुआ है। छिटपुट हिंसक घटनाओं को छोड़कर इस प्रदेश में 126 निर्वाचन क्षेत्रों में शांतिपूर्ण मतदान प्रजातांत्रिक व्यवस्था के लिए गौरवपूर्ण वरदान है। उल्फा के एक गुट तथा नेशनल डेमोकेटिक फ्रंट ऑफ बोडोलैंड ने चुनाव के दौरान गड़बड़ी फैलाने की चेतावनी दी हुई थी। लेकिन जनता ने उनकी परवाह नहीं की। समाजसेवी अन्ना हजारे भले ही यह मानते हों कि गरीब मतदाता शराब और धन के मोह में उलझकर वोट डालते हैं और उनके जैसा ईमानदार व्यक्ति चुनाव में कभी सफल नहीं हो सकता, लेकिन असम, बिहार, छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों के गरीब और आदिवासी करोड़ों मतदाता अपने गांव, कस्बे, परिवार और समाज के भले के लिए वोट डालते हैं। संभव है कि भोलेपन, डर और थोड़े लालच में गलत उम्मीदवारों की तरफ झुक जाते हों लेकिन उन्हें वोट की ताकत का अहसास है। यही वजह है कि कांग्रेस पार्टी बोडोलैंड पीपुल्स फ्रंट समर्थित निर्दलियों के बल पर और भारतीय जनता पार्टी जरूरत पड़ने पर असम गण परिषद के सहयोग से नई सरकार बनाने की तैयारियां कर रही हैं। पांच प्रतिशत मुस्लिम मतदाताओं की भूमिका कम नहीं है। भाजपा तो खुलकर बंगलादेश की सीमा से आए मुस्लिम मतदाताओं को लेकर गहरा आक्रोश व्यक्त करती रही है जबकि कांग्रेस बहुसंख्यक हिन्दू मतदाताओं के साथ मुस्लिमों और क्षेत्रीय भावना वाले आदिवासियों को अपनी ओर खींचने का हर संभव प्रयास करती रही है। अन्त में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने राज्यसभा में चुने जाने और प्रधानमंत्री पद पर बने रहने के लिए असम के कामरूप जिले के दिसपुर निर्वाचन क्षेत्र के मतदाता के रूप में अपना नाम तो दर्ज करवा रखा है लेकिन इस विधानसभा चुनाव में वह  स्वयं और पत्नी गुरशरण कौर का वोट डालने नहीं गए। यही नहीं, उन्होंने डाक से मतदान करने का आग्रह भी निर्वाचन आयोग से नहीं किया। एक तरफ हम वोट के अधिकार का उपयोग करने का प्रचार करते नहीं थकते वहीं दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र में प्रधानमंत्री ही मतदान नहीं करता।