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Tuesday, 24 July 2012

आचार्य बालकृष्ण की गिरफ्तारी के पीछे असल उद्देश्य क्या है?

योग बाबा रामदेव और अन्ना हजारे के भ्रष्टाचार और काले धन के खिलाफ आगामी साझा अभियान के ठीक पहले शुक्रवार को रामदेव के खास सहयोगी आचार्य बालकृष्ण को सीबीआई ने पतंजलि योगपीठ, हरिद्वार से गिरफ्तार कर लिया। बालकृष्ण के खिलाफ फर्जी पासपोर्ट मामले में कोर्ट में हाजिर होने का सम्मन जारी किया गया था। सूत्रों ने कहा कि बालकृष्ण को शुक्रवार को सीबीआई की विशेष अदालत में हाजिर होना था लेकिन वे हाजिर नहीं हुए। इसके बाद उन्हें हरिद्वार में बाबा रामदेव के पतंजलि योग पीठ आश्रम से वहां मौजूद लोगों के विरोध के बीच गिरफ्तार कर लिया गया। फर्जी पासपोर्ट, दोहरी नागरिकता और फर्जी डिग्री मामले में सीबीआई ने पिछले साल 23 जुलाई को एफआईआर दर्ज की थी। इसी महीने 10 जुलाई को बालकृष्ण के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की गई थी। अदालत ने उन्हें पेश होने के लिए 20 जुलाई तक का समय दिया था। सीबीआई ने जांच में पाया कि बालकृष्ण ने उत्तर प्रदेश के खुर्जी के संस्कृत महाविद्यालय के प्राचार्य से मिलकर फर्जी सर्टिफिकेट लिया जिससे पासपोर्ट बनवाया। दोनों के खिलाफ धोखाधड़ी सहित दूसरी धाराओं में मामले दर्ज किए गए। बालकृष्ण के खिलाफ पासपोर्ट कानून के तहत भी प्रकरण दर्ज किया गया। सम्पूर्णानन्द संस्कृत यूनिवर्सिटी से पूछताछ में पता चला कि बालकृष्ण का नाम उनके रिकार्ड में नहीं है। सीबीआई ने बालकृष्ण के सर्टिफिकेट में दिए गए नामांकन क्रमांक को संस्थान के रिकार्ड से मिलाया जिसमें यह नम्बर किसी अन्य विद्यार्थी का पाया गया। इसी यूनिवर्सिटी की फर्जी डिग्री बालकृष्ण ने बनवाई थी। बालकृष्ण की नागरिकता के बारे में भी नेपाल से जानकारी मांगी गई लेकिन वहां से कोई जवाब नहीं आया है। आचार्य के समर्थकों ने उनकी गिरफ्तारी का देहरादून और हरिद्वार में जबरदस्त विरोध किया, नारेबाजी की और उनकी कार के आगे लेट गए और पतंजलि योग पीठ के सामने हाइवे जाम कर दिया। पुलिस को स्थिति सम्भालने के लिए बल प्रयोग करना पड़ा। आचार्य बालकृष्ण की गिरफ्तारी की निन्दा करते हुए बाबा रामदेव ने कहा कि सरकार ने नौ अगस्त के आंदोलन को कुचलने के लिए साजिश के तहत आचार्य को सीबीआई के माध्यम से गिरफ्तार करवाया है। उन्होंने कहा कि आंदोलन से घबराई केंद्र सरकार ने आतंकवादियों की तर्ज पर आचार्य बालकृष्ण की गिरफ्तारी की है लेकिन इससे आंदोलन कमजोर नहीं होगा। शुक्रवार की रात सहारा ग्रेस में पत्रकारों से मुखातिब बाबा ने कहा कि पहले सीबीआई के जरिये सरकार ने नेपाल सरकार पर दबाव बनाया कि वह बालकृष्ण को नेपाली नागरिकता संबंधी प्रमाण पत्र दें। लेकिन जब नेपाल सरकार ने स्पष्ट कर दिया कि आचार्य बालकृष्ण भारत के नागरिक हैं तो फिर फर्जी उपाधि का षड्यंत्र रच कर बालकृष्ण को गिरफ्तार कर लिया। रामदेव का कहना है कि संविधान में अनपढ़ों को भी पासपोर्ट हासिल करने का अधिकार है तो आचार्य को पासपोर्ट हासिल करने के लिए फर्जी उपाधि की क्या आवश्यकता है? बालकृष्ण की गिरफ्तारी का लाभ उठाते हुए पूछताछ में रामदेव की आर्थिक व व्यापारी गतिविधियों के बारे में सीबीआई को मदद मिलेगी। इसमें जहां बदले की कार्रवाई की बू आती है वहीं असल टारगेट बाबा लगते हैं। बालकृष्ण तो महज दबाव बनाने वाले एक मोहरा हैं। अन्ना हजारे और बाबा रामदेव में बहुत फर्प है। अन्ना हजारे एक फकीर हैं जो बहुत साधारण जीवन व्यतीत करते हैं जबकि बाबा हाई प्रोफाइल उद्योगपति बन गए हैं जिनका करोड़ों का कारोबार है और अरबों का साम्राज्य। असल निशाना तो बाबा रामदेव ही हैं।

Friday, 29 June 2012

सहानुभूति में बदलने के लिए वीरभद्र ने दिया इस्तीफा

Vir Arjun, Hindi Daily Newspaper Published from Delhi
Published on 29 June 2012
अनिल नरेन्द्र
चौबीस साल पुराने भ्रष्टाचार के मामले में कोर्ट में अपने खिलाफ आरोप तय होने के बाद श्री वीरभद्र सिंह ने मंत्रिपरिषद से इस्तीफा दे दिया और यह इस्तीफा मंजूर भी हो गया। जब राजा साहब पर आरोप लगे थे तो उन्होंने यहां तक कह दिया था कि अगर आरोप सिद्ध होते हैं तो उन्हें कुर्सी छोड़ने में तनिक हिचक नहीं होगी। यूपीए सरकार में भ्रष्टाचार के आरोप में इस्तीफा देने वाले वह तीसरे मंत्री हैं। उनसे पहले ए राजा और दयानिधि मारन भ्रष्टाचार के आरोपों के चलते इस्तीफा दे चुके हैं। पांच बार हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे 78 वर्षीय वीरभद्र सिंह को इस्तीफा इसलिए देना पड़ा क्योंकि उनके और उनकी पत्नी के खिलाफ हिमाचल प्रदेश की एक अदालत ने 23 साल पुराने भ्रष्टाचार के एक मामले में भ्रष्टाचार और आपराधिक कदाचार का आरोप तय किया था। हालांकि कांग्रेस का यही स्टैंड था कि अदालत ने सिर्प अभी उन पर आरोप तय किए हैं कोई सजा नहीं सुनाई पर वीरभद्र सिंह ने अपने आपको और अपनी पार्टी को और फजीहत से बचाने के लिए त्यागपत्र देना बेहतर समझा। वैसे इसके पीछे हिमाचल प्रदेश की राजनीति भी काम कर रही है। इस्तीफा देने के पीछे एक मकसद पद की लालसा न होने के संदेश देने से ज्यादा इसे अपने पहाड़ी राज्य में सहानुभूति में बदलने की रणनीति भी है। वीरभद्र सिंह प्रदेश कांग्रेस में अपने तमाम समर्थकों को एकजुट रखने के लिए यही संदेश देना चाहते हैं कि उनके खिलाफ साजिश हुई है। अभी भी पार्टी के 23 में से 21 विधायक जिनमें विद्या स्टोक्स भी शामिल हैं। वे शिमला में हुए उनके 77वें जन्म दिन और राजनीति में उनके 50 साल के कार्यक्रम में आई थीं, उनके साथ हैं। इस्तीफा देकर वीरभद्र सिंह ने आगामी विधानसभा चुनावों में फुलटाइम राजनीति करने का भी रास्ता खोल लिया है। वीरभद्र सिंह ने कोर्ट की तरफ से मामले तय होने को अपने खिलाफ प्रदेश की भाजपा सरकार का षड्यंत्र बताया है। उनका यह भी कहना है कि जिस आडियो सीडी के आधार पर उनके खिलाफ मामले तय किए गए हैं उसे सही साबित करने के लिए उनकी आवाज का नमूना तक नहीं लिया गया है। दूसरे यह मामला पहले से ही हाई कोर्ट में है और उनके खिलाफ कोई फैसला नहीं आया है। यह तो कोई नहीं मानेगा कि अन्ना हजारे की टोली की राजनीतिक ताकत इतनी प्रबल है कि वे जब चाहें किसी मंत्री की कुर्सी छीन सकते हैं। बावजूद इसके अगर यह टोली भ्रष्टाचार के खिलाफ सरकार पर लगातार हमलावर रुख अपनाए हुए है तो उसका एक नैतिक और राजनीतिक प्रभाव तो जरूर जनता और सरकार के स्तर पर पैदा हो रहा है। बहरहाल वीरभद्र के इस्तीफे से यूपीए-2 सरकार का यह संकट फिर से सिर पर आ गया है कि वह भ्रष्टाचार में लगातार फंसते जाने के बजाय उससे लड़ती हुई कैसे दिखे? जिस दिन वीरभद्र सिंह ने दिल्ली में अपने इस्तीफे का ऐलान किया उसी दिन इस सरकार के एक और मंत्री विलासराव देशमुख मुंबई में आदर्श मामले में जांच आयोग के सामने अपने बचाव में दलीलें दे रहे थे। हिमाचल प्रदेश में यह चुनावी वर्ष है। अब वीरभद्र पर आरोप लगने से और उनके त्यागपत्र से आनंद शर्मा अकेले कांग्रेस के नेता बचते हैं जो अगले विधानसभा चुनाव में भाजपा को टक्कर दे सकते हैं पर उनकी जमीनी पकड़ इतनी नहीं है।
Anil Narendra, Corruption, Daily Pratap, Himachal Pradesh, Vir Arjun, Virbhadr Singh

Friday, 18 May 2012

मध्य प्रदेश के यह भ्रष्ट अफसर

Vir Arjun, Hindi Daily Newspaper Published from Delhi
Published on 18 May 2012
अनिल नरेन्द्र
इस देश में लगता है कि बाबुओं ने भ्रष्टाचार के सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। मध्य प्रदेश में भ्रष्ट अफसरों और कारोबारियों की तिजोरियों से अकूत सम्पदा निकल रही है। पिछले एक साल के आंकड़ों पर नजर डालें तो 1200 करोड़ रुपये से अधिक की सम्पत्ति उजागर हो चुकी है यानि हर माह सौ करोड़ रुपये भ्रष्टों की जेब से निकले हैं। आयकर, लोकायुक्त सहित अन्य एजेंसियां द्वारा डाले गए छापों में यह रकम उजागर हुई है। आयकर व लोकायुक्त अधिकारियों ने कहा कि यदि उन्हें और अधिकार दे दिए जाएं तो वे उस चल-अचल सम्पत्ति को और भी पकड़ सकते हैं जो भ्रष्ट तरीके से अर्जित की गई है अथवा जिसमें कालेधन का इस्तेमाल किया गया है। वर्ष 2011-12 में विभिन्न एजेंसियों की छापामार कार्रवाई में इंदौर, भोपाल, जबलपुर व ग्वालियर में की गई 17 छापामार कार्रवाइयों में इन्वेस्टीगेशन विंग ने 482 करोड़ रुपये सरेंडर कराए हैं। सुरेश चन्द बंसल ग्रुप, सागर ग्रुप, सिगनेट ग्रुप, मोखा बिल्डरöडॉ. जामदार, अम्बिका साल्वेक्स आदि समूहों पर कार्रवाई हुई। नकद व अचल सम्पत्तियां 45 करोड़ की जब्त की गई। मध्य प्रदेश में 182 सर्वे किए गए। भोपाल में 87 व इंदौर में 95 सर्वे में क्रमश 56 करोड़ व 723 करोड़ रुपये सरेंडर हुए। ये सर्वे व्यापारियों, संस्थाओं और बिजनेस समूहों पर किए गए। यही इस देश का सबसे बड़ा दुर्भाग्य है कि जो पैसे विकास योजनाओं पर लगना चाहिए था वह इन भ्रष्ट अफसरों की जेबों में चला जाता है। जितने पैसे इन अफसरों ने लूटे उसमें तो प्रदेश में गांवों व कस्बों तक 7 मीटर चौड़ाई की 3000 किलोमीटर सड़क बनाई जा सकती थी या फुटपाथों पर रहने वाले अथवा गरीबों के लिए 1.20 लाख घर बन सकते हैं। प्राइमरी शिक्षा के लिए आठ हजार स्कूल भवन बनाए जा सकते थे। सर्व सुविधायुक्त व अत्याधुनिक 5 हॉस्पिटल बन सकते थे। प्रदेश में कम से कम एक अच्छा अस्पताल बन सकता था।
इस देश में लगता है कि बाबुओं ने भ्रष्टाचार के सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। मध्य प्रदेश में भ्रष्ट अफसरों और कारोबारियों की तिजोरियों से अकूत सम्पदा निकल रही है। पिछले एक साल के आंकड़ों पर नजर डालें तो 1200 करोड़ रुपये से अधिक की सम्पत्ति उजागर हो चुकी है यानि हर माह सौ करोड़ रुपये भ्रष्टों की जेब से निकले हैं। आयकर, लोकायुक्त सहित अन्य एजेंसियां द्वारा डाले गए छापों में यह रकम उजागर हुई है। आयकर व लोकायुक्त अधिकारियों ने कहा कि यदि उन्हें और अधिकार दे दिए जाएं तो वे उस चल-अचल सम्पत्ति को और भी पकड़ सकते हैं जो भ्रष्ट तरीके से अर्जित की गई है अथवा जिसमें कालेधन का इस्तेमाल किया गया है। वर्ष 2011-12 में विभिन्न एजेंसियों की छापामार कार्रवाई में इंदौर, भोपाल, जबलपुर व ग्वालियर में की गई 17 छापामार कार्रवाइयों में इन्वेस्टीगेशन विंग ने 482 करोड़ रुपये सरेंडर कराए हैं। सुरेश चन्द बंसल ग्रुप, सागर ग्रुप, सिगनेट ग्रुप, मोखा बिल्डरöडॉ. जामदार, अम्बिका साल्वेक्स आदि समूहों पर कार्रवाई हुई। नकद व अचल सम्पत्तियां 45 करोड़ की जब्त की गई। मध्य प्रदेश में 182 सर्वे किए गए। भोपाल में 87 व इंदौर में 95 सर्वे में क्रमश 56 करोड़ व 723 करोड़ रुपये सरेंडर हुए। ये सर्वे व्यापारियों, संस्थाओं और बिजनेस समूहों पर किए गए। यही इस देश का सबसे बड़ा दुर्भाग्य है कि जो पैसे विकास योजनाओं पर लगना चाहिए था वह इन भ्रष्ट अफसरों की जेबों में चला जाता है। जितने पैसे इन अफसरों ने लूटे उसमें तो प्रदेश में गांवों व कस्बों तक 7 मीटर चौड़ाई की 3000 किलोमीटर सड़क बनाई जा सकती थी या फुटपाथों पर रहने वाले अथवा गरीबों के लिए 1.20 लाख घर बन सकते हैं। प्राइमरी शिक्षा के लिए आठ हजार स्कूल भवन बनाए जा सकते थे। सर्व सुविधायुक्त व अत्याधुनिक 5 हॉस्पिटल बन सकते थे। प्रदेश में कम से कम एक अच्छा अस्पताल बन सकता था।

Thursday, 3 May 2012

सवाल जजों की जवाबदेही का

Vir Arjun, Hindi Daily Newspaper Published from Delhi
Published on 3 May 2012
अनिल नरेन्द्र
केंद्रीय सूचना आयोग ने कानून मंत्रालय को निर्देश दिया है कि न्यायाधीशों के खिलाफ शिकायतों के साथ उच्चतम न्यायालय तथा उच्च न्यायालयों में भेजे गए पत्रों का खुलासा किया जाए। इस कदम के बाद उन न्यायाधीशों के नाम सामने आ सकते हैं जिनके खिलाफ शिकायतें हुई हैं। अंग्रेजी के अखबार हिन्दुस्तान टाइम्स ने अपनी एक एक्सलूसिव रिपोर्ट में कहा है कि पिछले एक साल में कम से कम 75 ऐसी शिकायतें सिटिंग जजों के खिलाफ भारत सरकार ने मुख्य न्यायाधीश, चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया को भेजी हैं जिन पर उन्हें इस पर पर्याप्त कार्रवाई करने को कहा गया है और यह सभी जज सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट में सिटिंग जज हैं। डिपार्टमेंट ने सुप्रीम कोर्ट के जजों के खिलाफ 15 शिकायतें, विभिन्न हाई कोर्टों के व मुख्य न्यायाधीशों और विभिन्न हाई कोर्ट के 51 सिटिंग जजों के खिलाफ शिकायतों को फारवर्ड किया है। अधिकतर शिकायतें पब्लिक, वकीलों और समाजसेवी संस्थाओं के एक्टिविस्टों ने भेजी हैं। यह जानकारी पहली बार एक आरटीआई से मिली है जो दिल्ली के सुभाष अग्रवाल ने मांगी थी। मंत्रालय ने पहले दावा किया था कि वह इसलिए शिकायतों की प्रति नहीं दे सकता क्योंकि इन शिकायतों को भारत के प्रधान न्यायाधीश तथा संबंधित मामलों में उच्च न्यायालयों के मुख्य न्यायाधीशों को भेजा गया है। मंत्रालय ने यह भी कहा कि मंत्रालय इन शिकायतों का कोई रिकॉर्ड नहीं रखते, आरटीआई कार्यकर्ता सुभाष अग्रवाल की याचिका पर सुनवाई करते हुए केंद्रीय सूचना आयोग ने पाया कि पत्रों की उनकी मांग जायज है। आयोग ने आदेश दिया कि एक साल पहले की तारीख से इन पत्रों को दिया जाए। आयुक्त सुषमा सिंह ने मंत्रालय को इस तरह के रिकॉर्ड रखने का निर्देश भी दिया कि आवेदकों के अनुरोध पर इन्हें दिया जा सके।
जजों की जवाबदेही पर हाल ही में एक मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट गुलाब तुलसियानी को रिश्वतखोरी के मामले में तीन साल कैद की सजा सुनाई गई है। स्पेशल जज वीके महेश्वरी ने तुलसियानी को सजा सुनाते हुए कहा कि जूडिशियल ऑफिस पर लोगों को भरोसा है। जज का आचरण भी काफी अच्छा होना चाहिए। सोसाइटी जज में तमाम गुण देखना चाहती है और जजों में ये तमाम गुण होने चाहिए। अदालत ने कहा कि जस्टिस स्ट्रीम को साफ रखने की जरूरत है। इसके लिए जज को उत्कृष्ट आचरण दिखाना होगा। सीबीआई के मुताबिक मौजूदा मामले में दोषी करार दिए गए गुलाब तुलसियानी दरअसल 1986 में पटियाला हाउस कोर्ट में मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट थे। इस मामले में शिकायती से फैक्टरी चालान निपटाने के एवज में 2000 रुपये रिश्वत की मांग की थी। इस बारे में की गई शिकायत के बाद सीबीआई ने तुलसियानी के घर से रिश्वत की रकम बरामद की थी। तुलसियानी ने शिकायती से अपने चैम्बर में रिश्वत की मांग की थी। इस पर सीबीआई ने शिकायती की जेब में एक टेप रिकॉर्डर रख दिया था और साथ ही नोटों पर केमिकल लगा दिए थे। 7 जून 1986 को शिकायती आरोपी के घर पहुंचा और वहां रकम आरोपी के हवाले कर दी और इस दौरान लेनदेन की बात रिकॉर्ड कर ली। तुलसियानी अब रिटायर्ड हो चुके हैं और वह इस समय 74 साल के हैं। उनकी पत्नी भी बीमार है। तमाम परिस्थितियों को देखते हुए अदालत ने आरोपी को तीन साल की सजा सुनाई और 50,000 रुपये का जुर्माना किया है।
Anil Narendra, Corruption, Daily Pratap, Judiciary, Vir Arjun

Wednesday, 4 April 2012

महंगाई मुंह फाड़े जात है...

Vir Arjun, Hindi Daily Newspaper Published from Delhi
Published on 4 April 2012
अनिल नरेन्द्र
पेट्रोल की कीमतों में बढ़ोतरी पर फैसला बेशक कुछ दिनों के लिए टल जाने से भले ही लोगों के लिए थोड़ी राहत मिल गई हो लेकिन नए कारोबारी साल की शुरुआत तकरीबन सभी चीजों के दाम बढ़ने से हो रही है। बजट में बढ़े एक्साइज ड्यूटी और सर्विस टैक्स बढ़ने से खाना-पीना, घूमना-फिरना सब कुछ महंगा हेने जा रहा है। आम आदमी को डस रही महंगाई डायन का डंक और तेज हो गया है। सरकार के बजट में वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने उत्पाद शुल्क में वृद्धि और सेवा कर की दर व दायरा, दोनों बढ़ाकर आम जनता की पीठ पर 45 हजार करोड़ रुपये के टैक्स का बोझ लाद दिया है। उत्पाद शुल्क और सेवा कर की वृद्धि रविवार से लागू हो गई है। उत्पाद शुल्क की दर को 10 से 12 फीसदी करने का असर बाजार में उपलब्ध तमाम उत्पादों पर होगा। सीमेंट, ब्रांडेड रेडीमेड गार्मेंट से लेकर सोना और रत्नाभूषण, सभी चीजों की कीमतों में वृद्धि होगी। उत्पाद शुल्क के साथ सेवा कर भी उपभोक्ताओं पर भारी पड़ रहा है। अब इसके दायरे में उन क्षेत्रों की सरकारी सेवाएं भी जुड़ रही हैं, जहां वो निजी क्षेत्र से प्रतिस्पर्धा में हैं। इसके तहत ट्रेनों में एसी-1 और एसी-2 टायर में यात्रा करने वाले यात्रियों को रविवार से ज्यादा किराया देना पड़ेगा। प्लेटफार्म टिकटों के लिए भी 3 रुपये की बजाय 5 रुपये देने होंगे। बिजली, जमीन, फ्लैट व मोटरसाइकिल-कार के लिए चुकाने होंगे अधिक पैसे। सोना प्लेटिनम खरीदना महंगा हो जाएगा। शराब महंगी होगी। चेक-ड्राफ्ट व पे-आर्डर की वैधता 6 महीने से घटकर 3 महीने रह जाएगी। पोस्ट ऑफिस डिपॉजिट, पीपीएफ, एनएमसी में ज्यादा ब्याज मिलेगा। लाइफ इंश्योरेंस के साथ मोटर इंश्योरेंस में भी वृद्धि होगी। महंगाई की मार झेल रहे आम आदमी को अब मोटर बीमा की बढ़ी हुई दरों का बोझ भी उठाना होगा। भारतीय बीमा विनियम विकास प्राधिकरण ने विभिन्न श्रेणियों में थर्ड पार्टी मोटर प्रीमियम चार्ज 5 से 20 फीसदी तक बढ़ाया है। थर्ड पार्टी प्रीमियम की बढ़ी हुई दरों के प्रीमियम के साथ उपभोक्ताओं को 2 फीसदी बढ़ा हुआ सेवा कर भी चुकाना होगा। नई दरें शुक्रवार से प्रभावी हो गई हैं। महिलाएं भी इससे अछूती नहीं हैं। उनके सौंदर्य प्रसाधन के उत्पाद सहित ब्यूटी पार्लर का खर्च भी महंगा हुआ है। देश के नामचीन संगठन एसोचेम ने भी महंगाई के बारे में सर्वेक्षण कराया है। इससे ज्यादातर महिलाओं ने कहा कि घरेलू बजट को काबू में रखने के लिए जद्दोजहद करनी पड़ रही है। बढ़ते खर्च पर लगाम लगाना मुश्किल हो रहा है। 70 फीसदी महिलाओं का मानना है कि ज्यादा सेवा कर के कारण फोन सुविधा समेत सभी आवश्यक वस्तुएं महंगी होंगी। इतना ही नहीं, उत्पाद शुल्क में बढ़ोतरी से आम आदमी की रोजमर्रा की जिन्दगी प्रभावित होगी। आमदनी इस अनुपात में नहीं बढ़ेगी जिस अनुपात में खर्च बढ़ जाएगा। महंगाई आने वाले दिनों में और बढ़ेगी। अगर पेट्रोल, रसोई गैस इत्यादि के दाम बढ़ते हैं तो उनका सीधा प्रभाव आम आदमी पर पड़ेगा। पहले से ही महंगाई की मार से त्रस्त आम आदमी की कमर टूट जाएगी पर इस सरकार को आम आदमी की चिन्ता कहां? डॉ. मनमोहन सिंह जो माने हुए अर्थशास्त्राr हैं, की नीतियों ने गरीब आदमी का तो बेड़ा गर्प कर दिया है। दूसरी ओर घोटाले पर घोटाले रुकने का नाम ही नहीं ले रहे। यह पैसा कहां से आ रहा है? गरीब जनता की जेब में डाके से ही तो आ रहा है।
Anil Narendra, Corruption, Daily Pratap, Inflation, Petrol Price, Price Rise, Scams, Vir Arjun

Wednesday, 28 March 2012

टीम अन्ना ने एक बार फिर जोरदार अंगड़ाई दिखाई

Vir Arjun, Hindi Daily Newspaper Published from Delhi
Published on 28 March 2012
अनिल नरेन्द्र
अन्ना हजारे ने रविवार को नई दिल्ली के जन्तर-मन्तर पर एक दिन का उपवास रखकर जन लोकपाल आंदोलन को फिर जिन्दा करने का प्रयास किया। भ्रष्टाचार और आपराधिक मामलों का सामना कर रहे राजनेताओं के खिलाफ अगस्त तक एफआईआर दर्ज नहीं होने पर जेल भरो आंदोलन शुरू करने की धमकी दी। साथ ही केंद्र सरकार को चेतावनी दी कि 2014 तक लोकपाल बिल लाओ या कुर्सी छोड़ने को तैयार रहो। रविवार को जन्तर-मन्तर पर वही पुराना माहौल नजर आया जो पिछले साल अप्रैल और अगस्त में रामलीला मैदान पर देखने को मिला था। टीम अन्ना दिल्ली में फिर भारी जन समर्थन पाने में सफल रही। भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ने वाले लोगों की सुरक्षा को लेकर एक दिवसीय धरने के दौरान टीम अन्ना ने मजबूत जन लोकपाल की मांग दोहराई। इस दौरान टीम अन्ना ने भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ रहे लोगों की सुरक्षा को लेकर राजनेताओं पर तल्ख टिप्पणियां कीं। संसद की अवमानना का आरोप झेल रहे अरविन्द केजरीवाल पर लगता है कि सांसदों का कानूनी नोटिस का कोई खास असर नहीं हुआ है। `बीहड़ों में तो बागी पाए जाते हैं, डकैत तो पार्लियामेंट में बनते हैं।' हाल ही में आई अभिनेता इरफान खान और निर्देशक हिमांशु धूलिया की फिल्म पान सिंह तोमर का यह डायलाग अरविन्द केजरीवाल को इतना पसंद आया कि उन्होंने फिल्म को तीन बार देखा। लेकिन जब उन्होंने इस बात को सच्चाई के साथ कहा तो नेताओं को बुरा लग गया और सुप्रीम कोर्ट का सहारा लेकर उन्हें विशेषाधिकार के हनन का नोटिस थमा दिया गया। जब चोर हैं तो चोर कहने से क्यों डरते हैं जबकि सत्य तो यह है कि जनता द्वारा चुनकर संसद भवन के अन्दर पहुंचने वाले करीब 50 फीसदी सांसद ऐसे हैं जिन पर आपराधिक मामले चल रहे हैं, यह कहना था केजरीवाल का। विधानसभा में ताल ठोंकने वाले हजारों विधायक अपराध की सीढ़ी चढ़कर नेतागिरी का चोला ओढ़ने में कामयाब हैं। अरविन्द केजरीवाल के अनुसार मीडिया साइट्स और अखबारों के माध्यम से इस बात का स्पष्टीकरण हो चुका है कि संसद भवन में गरिमा और नैतिकता की बात करने वाले करीब 162 सांसदों पर आपराधिक मामले दर्ज हैं। 34 कैबिनेट मंत्रियों में से 14 के ऊपर भ्रष्टाचार के गम्भीर आरोप हैं। केजरीवाल के अनुसार जिन मंत्रियों पर भ्रष्टाचार के गम्भीर आरोप हैं वह हैंöपी. चिदम्बरम (2जी स्पैक्ट्रम घोटाला), अजीत सिंह (विकीलीक्स के अनुसार इन्होंने 10 करोड़ रुपये प्रति सांसद बांटे), फारुख अब्दुल्ला पर जेके क्रिकेट एसोसिएशन घपले का आरोप है, जीके वासन ने 2 लाख एकड़ जमीन तमिलनाडु में महज 44 करोड़ रुपये में कुछ चहेती कम्पनियों को बेच दी। कमलनाथ ने सांसदो के वोट खरीदने के लिए पैसा बांटा। कपिल सिब्बल पर 2जी घोटाले में शामिल होने का आरोप है। शरद पवार का नाम तेलगी स्कैम में उछला। श्रीप्रकाश जायसवाल पर 10 लाख करोड़ कोला स्कैंडल में शामिल होने का शक है। आदर्श हाउसिंग सोसाइटी स्कैम में सुशील कुमार शिंदे का नाम भी आया है। विलासराव देशमुख का भी इसी स्कैम में नाम उछला है। एमके अलागिरी ने 20 करोड़ रुपये की भूमि महज 85 लाख रुपये में खरीदी। वीरभद्र सिंह पर एफआईएएस अफसर को घूस देने का मामला चल रहा है। एसएम कृष्णा का नाम माइनिंग स्कैम में आ चुका है और प्रफुल्ल पटेल पर एयर इंडिया को डुबाने का आरोप है। केजरीवाल ने आगे कहा कि 14 सांसद ऐसे हैं जिन पर हत्या का केस चल रहा है। वहीं 20 सांसदों पर हत्या के प्रयास का मामला कोर्ट में विचाराधीन है। 11 सांसदों पर ठगी और जमीन हड़पने आदि में शामिल कोर्ट में अभी भी मामले चल रहे हैं। 13 सांसद ऐसे हैं जो अपहरण कर फिरौती मांगने के मामले में वांछित चल रहे हैं। देश के सभी राज्यों में कुल मिलाकर 4120 विधायक चुने जाते हैं। इनमें करीब 1176 विधायक ऐसे हैं जिन पर आपराधिक मामले थानों में दर्ज हैं। 513 विधायकों पर अपहरण, हत्या, हत्या के प्रयास और रंगदारी मांगने का केस फाइलों में धूल चाट रहा है। केजरीवाल ने कहा कि एक चपरासी की नौकरी पाने के लिए लोगों को चरित्र प्रमाण पत्र देना पड़ता है। उसके खिलाफ एक भी केस दर्ज होता है तो उसे नौकरी नहीं दी जा सकती। मुंबई में अन्ना का आंदोलन थोड़ा कमजोर दिखाई पड़ा तो सरकार ने यह मान लिया कि टीम अन्ना अब सरकार के लिए ज्यादा खतरा नहीं होगी पर जिस तरीके से जन्तर-मन्तर पर जनता आई लगता है कि उससे एक बार फिर सरकार में बेचैनी दिखेगी और केजरीवाल के अत्यंत गम्भीर बयान की प्रतिक्रिया अवश्य होगी।
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Tuesday, 13 March 2012

एक और ईमानदार अफसर खनन माफिया का शिकार हुआ

Vir Arjun, Hindi Daily Newspaper Published from Delhi
Published on 13 March 2012
अनिल नरेन्द्र
मुरैना जिले में एक युवा आईपीएस अफसर नरेन्द्र कुमार की निर्मम हत्या से एक बार फिर स्पष्ट हो गया है कि अवैध खनन माफिया से टकराना कितना भारी जोखिम का काम है। खनन माफिया से टकराने की कीमत नरेन्द्र कुमार जैसे ईमानदार अफसर को अपनी जान गंवा कर चुकानी पड़ी है। मध्य प्रदेश के बानमोर में जांबाज पुलिस अधिकारी नरेन्द्र कुमार सिंह की हत्या से जुड़ी यह घटना बताती है कि भ्रष्ट और आपराधिक तत्वों की व्यवस्था के भीतर कितनी गहरी पैठ है कि वे अपना हित साधने के लिए किसी भी हद तक जा सकते हैं। इस युवा अफसर का कुसूर सिर्प इतना था कि उसने इस इलाके में हो रहे अंधाधुंध अवैध खनन पर ऐतराज किया था, मगर बलुआ पत्थर से लदी एक ट्रैक्टर-ट्रॉली के ड्राइवर को यह नागवार गुजरा और उन्हें रौंद दिया गया, वह भी पुलिस चौकी से महज 500 मीटर दूर। 2009 बैच के आईपीएस अधिकारी नरेन्द्र कुमार सिंह की पोस्टिंग 16 जनवरी को मुरैना के बानमोर में एसडीओपी के रूप में हुई थी। उन्होंने एक महीने में अवैध खनन के 20 से ज्यादा मामले दर्ज किए थे। वे खनन माफिया की आंखों की किरकिरी बने हुए थे। इसी वजह से हत्या की साजिश की अटकलें भी लगाई जा रही हैं। नरेन्द्र कुमार गुरुवार को आधिकारिक जीप में पेट्रोलिंग पर निकले थे। उन्होंने बोल्डरों से भरा एक ट्रैक्टर एबी रोड पर देखा, उसका पीछा किया। उनके कहने पर ड्राइवर मनोज गुर्जर ने ट्रैक्टर रोका। जैसे ही नरेन्द्र ट्रैक्टर के पास पहुंचे मनोज ने ट्रैक्टर स्टार्ट कर आगे दौड़ा दिया। नरेन्द्र ने किसी तरह ट्रैक्टर का स्टीयरिंग थाम लिया। मनोज ने वाहन कच्चे रास्ते पर उतार दिया। नरेन्द्र गिरे और एक पहिये की चपेट में आ गए। कुछ दूर जाकर ट्रॉली भी पलट गई। गम्भीर रूप से घायल नरेन्द्र को ग्वालियर अस्पताल लाया गया जहां उन्हें मृत घोषित कर दिया गया। नरेन्द्र का नाम उस फेहरिस्त में जुड़ा एक और नाम है, जिन्होंने अपने फर्ज को तो निष्ठा तथा निर्भीकता से अंजाम दिया पर व्यवस्था-माफिया गठजोड़ के आगे वह शहीद हो गए। दुर्भाग्य से पिछले महीनों में ऐसे दर्जनों मामले सामने आए हैं, जिनमें वरिष्ठ से कनिष्ठ सरकारी कर्मचारी के यहां आयकर छापे में करोड़ों की अवैध सम्पत्ति का पर्दाफाश हुआ है वहीं ईमानदार सरकारी कर्मियों की रहस्यमय मौतें हो रही हैं। इसकी सबसे जघन्य उदाहरण तो उत्तर प्रदेश का एनएचआरएम घोटाला है, जिसमें अब तक नौ अधिकारी-कर्मचारियों की जानें जा चुकी हैं। 2003 को बिहार में इंजीनियर सत्येन्द्र दूबे की हत्या से शुरू हुआ, इस सिलसिले में नया नाम आईपीएस नरेन्द्र कुमार का जुड़ गया है। इसी दौरान भ्रष्ट तंत्र की पोल खोलने वाले कई आरटीआई कार्यकर्ताओं की भी हत्याएं हुई हैं। साफ है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ लोहा लेना लगातार मुश्किल होता जा रहा है। शिवराज सिंह चौहान सरकार भले ही किसी साजिश से इंकार कर रही है, मगर जैसा कि दिवंगत अधिकारी के पिता ने आरोप लगाया है, उन्हें स्थानीय स्तर पर पुलिस और अन्य विभागों का सहयोग नहीं मिल रहा था। हाल ही में नरेन्द्र सिंह की गर्भवती आईएएस पत्नी का तबादला भी राजनीतिक दबाव में किया गया था। यह इसलिए भी चिन्ता की बात है, क्योंकि खनन माफिया ने जिस तरह अपना जाल बिछाया है, उसे भेद पाना किसी भी अधिकारी के लिए बहुत मुश्किल है। इससे इंकार नहीं किया जा सकता है कि यह राजनीतिक संरक्षण के बिना सम्भव नहीं है। मध्य प्रदेश सरकार आज कठघरे में खड़ी है। न्यायिक जांच तो ठीक है पर ईमानदार अफसरों की सुरक्षा की जिम्मेदारी आखिर किसकी है। कितने और नरेन्द्र सिंहों की कुर्बानी देनी पड़ेगी?
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Wednesday, 29 February 2012

केजरी...बवाल

Vir Arjun, Hindi Daily Newspaper Published from Delhi
Published on 29th February  2012
अनिल नरेन्द्र
टीम अन्ना के बड़बोले सदस्य अरविन्द केजरीवाल ने तो सारी हदें पार कर दी हैं। ग्रेटर नोएडा में एक चुनावी रैली को सम्बोधित करते हुए कहा कि संसद में चोर, लुटेरे और बलात्कारी बैठे हैं। इनसे उन्हें कोई उम्मीद नहीं है। केजरीवाल ने कहा कि संसद में 163 सांसद ऐसे हैं जिनके खिलाफ जघन्य अपराध के मुकदमें चल रहे हैं। केजरीवाल के मुताबिक संसद देश की बड़ी समस्या बनती जा रही है और जब तक इसका चरित्र नहीं बदला जाएगा, देश का उद्धार नहीं हो सकता। उन्होंने राजद के लालू प्रसाद यादव और सपा के मुलायम सिंह यादव पर जमकर निशाना साधा और कहा कि ऐसे लोग संसद में कभी भी लोकपाल विधेयक को पारित नहीं होने देंगे। केजरीवाल के इस तल्ख रवैये के खिलाफ सभी दलों ने एक स्वर में विरोध जताया। लेकिन केजरीवाल को शायद इसका कोई फर्प नहीं पड़ा। अगले दिन उन्होंने ट्विटर पर फिर लिख दिया कि संसद और सरकार मुजरिमों के हाथ बंधक है। केजरीवाल ने मीडिया से कह दिया है कि उन्होंने चुनावी सभा में कुछ भी गलत नहीं कहा था। ऐसे में माफी मांगने की क्या जरूरत है? उन्होंने दोहराया कि अगर संसद में सैकड़ों अपराधी बैठे हैं तो इस सच के बारे में बोलना गुनाह कैसे हो सकता है? उन्होंने कहा कि संसद में चोर-गिरहकट जैसे मामूली अपराधी नहीं हैं। वहां तो 15 ऐसे सांसद हैं जिन पर कत्ल का मुकदमा चल रहा है। 23 ऐसे सांसद हैं जिन पर हत्या के प्रयास के मामले चल रहे हैं और 13 सांसद हैं जिन पर अपहरण के मुकदमें लम्बित हैं, 11 पर धोखाधड़ी के मामले हैं। अरविन्द केजरीवाल के इस बयान से राजनीतिक दलों का भड़कना समझ आता है। केजरीवाल ने सारी हदें पार कर दी हैं। कुछ सांसद आपराधिक पृष्ठभूमि के हो सकते हैं पर यह कहना कि संसद ही चोरों-लुटेरों का डेरा है, गलत है। आखिर यह संसद पहुंचे कैसे? जनता ने इन्हें चुनकर भेजा है। कसूर जनता का ज्यादा है या उन कानूनों का जो ऐसी प्रवृत्ति के उम्मीदवारों को चुनाव लड़ने से नहीं रोकते। फिर संसद में साफ-सुथरी छवि वाले सांसदों का बहुमत भी है। हर एक को एक ही थाली का चट्टा-बट्टा कहना गलत है, मर्यादाओं से बाहर है। जाहिर है कि जैसे ही संसद सत्र चलेगा पहला काम सांसद अरविन्द केजरीवाल को कठघरे में खड़ा करेंगे और उन्हें सजा मिलना तय है। कांग्रेस प्रवक्ता राशिद अल्वी ने कहा कि केजरीवाल का बयान टिप्पणी लायक नहीं है पर इस तरह के बयान लोकतंत्र और संसद का ही नहीं, जनता का भी अपमान है। सपा के महासचिव मोहन सिंह का कहना है कि केजरीवाल के मुंह से ऐसे शब्दों का प्रयोग निन्दनीय है। बाहरी इशारों पर अपने एनजीओ के लिए पैसा बटोरने के लिए वे संसद को बदनाम कर रहे हैं। इनकी खबर ली जानी चाहिए। क्योंकि केजरीवाल तो लोकतांत्रिक व्यवस्था के ही दुश्मन बन गए हैं। राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव ने कल कहा कि केजरीवाल तो विदेशी एजेंट लगता है। उनकी पार्टी लोकसभा में केजरीवाल के खिलाफ विशेषाधिकार हनन का मामला उठाएगी। भाजपा के प्रकाश जावडेकर ने भी केजरीवाल के बयान की कटु आलोचना की और इसे निन्दनीय तथा लोगों की लोकतंत्र के प्रति आस्था कमजोर करने वाला बताया जबकि टीम अन्ना के प्रमुख सदस्य कुमार विश्वास को समझ नहीं आ रहा है कि केजरीवाल के बयान पर हंगामा क्यों बरपा है?
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Sunday, 19 February 2012

यूपी के हैल्थ मिशन घोटाले ने ली सातवीं बलि

Vir Arjun, Hindi Daily Newspaper Published from Delhi
Published on 19th February  2012
अनिल नरेन्द्र
उत्तर प्रदेश में हुआ 5700 करोड़ का नेशनल रूरल हैल्थ मिशन (एनआरएचएम) घोटाला एक के बाद एक जिन्दगी निगल रहा है। स्वास्थ्य विभाग के सात फरवरी से लापता कैशियर महेन्द्र शर्मा (50) का खून से लथपथ शव बुधवार रात लखीमपुर खीरी जिले से बरामद हुआ। बमुश्किल 24 घंटे बीते कि गुरुवार रात दिल्ली के व्यवसायी सरदार रणजीत सिंह (50) ने लखनऊ के एक होटल में नशीली गोलियां खाकर खुदकुशी कर ली। बुधवार को ही सीबीआई ने एनआरएचएम घोटाले के संबंध में उनसे लम्बी बातचीत की थी। उनके शव के पास दो पेज का सुसाइड नोट बरामद हुआ। इस 5700 करोड़ रुपये के घोटाले में पहले कई लोगों की जान जा चुकी है। 20 अक्तूबर 2010 को लखनऊ के परिवार कल्याण विभाग के सीएमओ डॉ. विनोद आर्य की दिन-दिहाड़े हत्या कर दी गई। उसी विभाग के सीएमओ डॉ. बीपी सिंह की दो अप्रैल 2011 को हत्या कर दी गई। डॉ. आर्य की हत्या के बाद डॉ. सिंह उसी विभाग के फरवरी 2011 में सीएमओ बने थे। इन हत्याओं के आरोप में गिरफ्तार किए गए डिप्टी सीएमओ डॉ. सचान जून 2011 में संदिग्ध अवस्था में लखनऊ जेल में मृत पाए गए। सुनील कुमार वर्मा जो एनआरएचएम के प्रोजेक्ट मैनेजर थे, ने जनवरी 2011 में लखनऊ स्थित अपने निवास में खुद को गोली मारकर आत्महत्या कर ली। बनारस में डिप्टी सीएमओ शैलेश यादव की पिछले महीने सड़क दुर्घटना में मौत हो गई। इस घोटाले में राज्य सरकार के दो मंत्रियों अनन्त कुमार मिश्र और बाबू सिंह कुशवाहा के नाम आने पर उन्हें पद से हटना पड़ा। एनआरएचएम घोटाले की जांच जिस तेजी से आगे बढ़ रही है, ठीक उसी तरह मरने वालों की संख्या में इजाफा हो रहा है। सीबीआई का शिकंजा जब खीरी के अफसरों पर कसने लगा तो उनके `मन-मुताबिक' कार्य न करने पर पसगंवा सीएमसी के वरिष्ठ लिपिक महेन्द्र शर्मा को जान से हाथ धोना पड़ा है। आरोपों के घेरे में विभाग के मुखिया समेत कई चिकित्सा अधिकारी भी हैं। इसके अलावा लिपिक संघ के अध्यक्ष पर भी परिजनों ने निशाना साधते हुए सुलह-समझौता कराने के लिए दबाव बनाने का आरोप लगाया है। परिजनों ने पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग की है ताकि साजिश उजागर हो सके। एनआरएचएम घोटाले से जुड़ी छठी मौत को सीबीआई गम्भीरता से ले रही है। सीबीआई ने स्पष्ट कर दिया है कि स्वास्थ्य विभाग के कैशियर महेन्द्र शर्मा की `हत्या' की उत्तर प्रदेश पुलिस जांच कर रही है और हमारी उस पर नजर है। जरूरत पड़ने पर वह इसे अपने हाथ में ले सकती है। उधर माया मंत्रिमंडल से हटाए मंत्री बाबू सिंह कुशवाहा ने कहा कि हत्याओं के पीछे मायावती, उनके मंत्री नसीमुद्दीन, कैबिनेट सचिव शशांक शेखर, गृह सचिव पुंवर फतेह बहादुर व अन्य आईएएस अफसरों की साठगांठ है। मैंने इस साजिश के बारे में मायावती को बताया तो उन्होंने मुझे धमकाया और जुबान बन्द रखने को कहा। पता नहीं इस घोटाले को लेकर अभी कितनी जानें और जाएंगी? अब तक हुईं नौ मौतों में से पांच की हत्या की गई, एक ने खुदकुशी की और तीन सन्देहास्पद हालात में मारे गए हैं।
Anil Narendra, CBI, Corruption, Daily Pratap, Dr. Sachan, NRHM, Uttar Pradesh, Vir Arjun

Saturday, 18 February 2012

...और अब एक सरकारी डाक्टर दम्पति से मिले 35 करोड़

Vir Arjun, Hindi Daily Newspaper Published from Delhi
Published on 18th February  2012
अनिल नरेन्द्र
सरकारी महकमों में भ्रष्टाचार का बोलबाला चौंकाने वाला है। कुछ सरकारी अधिकारियों ने तो अवैध सम्पत्ति बनाने की होड़ में सारी हदें पार कर ली हैं। ऐसा एक उदाहरण हमें पिछले दिनों मध्य प्रदेश से मिला। मध्य प्रदेश लोकायुक्त टीम ने गत दिनों एक सरकारी डाक्टर दम्पति के उज्जैन व नागदा स्थित घर पर छापा मारा। जिले के स्वास्थ्य विभाग में कार्यरत डॉ. विनोद एवं डॉ. विद्या लहरी के पास आय से अधिक करोड़ों की सम्पत्ति मिली है। पांच मकान, एक पेट्रोल पम्प, वेयर हाउस, 150 बीघा जमीन, पोहा फैक्टरी का खुलासा हुआ है। एक अनुमान के अनुसार उनकी सम्पत्ति 35 करोड़ रुपये की आंकी जा रही है। लोकायुक्त एसपी अरुण मित्रा ने बताया कि इन्दिरा नगर निवासी डॉ. विनोद लहरी व उनकी पत्नी विद्या लहरी 22 सालों से शासकीय सेवा में दोनों दो वर्ष से निलम्बित होने के कारण ज्वाइंट डायरेक्टर कार्यालय उज्जैन में पदस्थ हैं। इन्हें अब तक की इस सरकारी नौकरी में करीब 80 लाख रुपये वेतन मिला है। डाक्टर दम्पति की इतनी आय होती है कि वे हाथों से नोट नहीं गिन पाते थे। उनके घर में नोट गिनने की मशीन भी मिली। लोकायुक्त का दूसरा दल जब नागदा में डॉ. लहरी के हॉस्पिटल रोड स्थित मकान पर तलाशी के लिए गया तो मकान देखकर चौंक पड़ा क्योंकि वहां मकान नहीं, महल बना हुआ है। काफी समय से बन्द पड़े इस महल के अन्दर आधुनिक नर्सिंग होम और एक स्वीमिंग पूल भी मिला है। दम्पति पर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत प्रकरण दर्ज किया गया है, सम्पत्ति के मूल्यांकन के बाद उसकी कीमत का सही अनुमान लग सकेगा। इधर सूत्रों के मुताबिक लोकायुक्त सम्पत्ति की कीमत करीब 35 करोड़ से अधिक है। मजेदार बात यह भी है कि दोनों डाक्टर जून 2010 से निलम्बित हैं। नागदा सेवाकाल में शिकायतों के चलते ये निलम्बित हुए थे। सवाल है कि सरकार अब इस डाक्टर दम्पति के खिलाफ क्या कार्रवाई करेगी? इन मामलों में बिहार ने अच्छी पहल की है। हाल ही में पटना की निगरानी अदालत के विशेष न्यायाधीश रमेश चन्द्र मिश्र ने एक फरवरी को बिहार के पूर्व डीजीपी नारायण मिश्र की आय से करीब एक करोड़ 40 लाख रुपये से अधिक की सम्पत्ति जब्त करने के आदेश दिए। बिहार में भ्रष्टाचार के खिलाफ जारी अभियान में यह एक महान उपलब्धि है। एक तरह जहां 2जी स्पैक्ट्रम लाइसेंस को रद्द करवाने के लिए लोगों को सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाना पड़ता है वहीं बिहार राज्य सरकार ने एक नया कानून बनवाकर अपने सर्वोच्च पुलिस अधिकारी की सम्पत्ति भी जब्त करवाने में सफलता पा ली है। इससे पहले भी पटना की निगरानी अदालत बिहार कैडर के आईएएस अफसर एसएस वर्मा सहित कई लोक सेवकों की सम्पत्ति जब्त कर चुका है। वर्मा के पटना स्थित निजी आवास में अब सरकारी स्कूल चल रहा है। निगरानी अदालत पटना कोषागार के पूर्व अधिकारी गिरीश कुमार, गया नगर निगम के पूर्व अफसर योगेन्द्र सिंह, कैमूर के वन प्रमंडल अधिकारी भोला प्रसाद जैसे कई अन्य विवादास्पद अफसरों की भी सम्पत्ति जब्त करने के आदेश दे चुकी है। सवाल सिर्प राजनीतिक इच्छाशक्ति का है और बिहार ने रास्ता दिखा दिया है। मध्य प्रदेश को भी बिहार से सीख लेनी चाहिए।
Anil Narendra, Black Money, Corruption, Daily Pratap, Lokayukta, Madhya Pradesh, Vir Arjun

Friday, 17 February 2012

लालू उवाच : घूस खाया तो ऊ पैसा कहां है?

Vir Arjun, Hindi Daily Newspaper Published from Delhi
Published on 17th February  2012
अनिल नरेन्द्र
बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री व पूर्व रेलमंत्री लालू प्रसाद यादव मंगलवार को सीबीआई की विशेष अदालत के समक्ष पेश हुए। उन पर 950 करोड़ रुपये के चारा घोटाले का आरोप है। सुनवाई के दौरान लालू उसी अंदाज में पेश आए जिस तरह वे संसद में जिरह करते वक्त दिखते हैं। उन्होंने अपने खास अंदाज में पौने दो घंटे तक सीबीआई विशेष जज पीके सिंह की कोर्ट में बयान दर्ज कराया। इस दौरान लालू जी ने खुद पर लगाए आरोपों को पूरी तरह नकारते हुए उल्टा सीबीआई के खिलाफ ही कार्रवाई करने की मांग कर डाली। लालू ने कहा, `चारा घोटालेबाजों ने घूस में हमको करोड़ों रुपया दिया, तो ऊ पइसा कहां है। भई, मेरे पास तो नहीं है, सीबीआई दावा कर रही है कि मेरा पइसा है, तो लाकर मुझे दे। श्याम बिहारी सिन्हा तो स्वर्ग में हैं। उनको बुलाया जाए, तभी न बताएंगे, हमको कितना पइसा घूस में दिए। लालू प्रसाद के पेट में कोई बात नहीं पचता है। हमको घूस मिला होता, तो कोर्ट में भी सच-सच बता देते। दरअसल हमको सत्ता से बेदखल करने के लिए इ सब षड्यंत्र किया गया। न्यायपालिका और भगवान पर आस्था जताते हुए लालू कहते हैं कि उपर वाला सब कुछ देख रखा है। मेरे पर अईसा आरोप लगाया है कि धरती फट जाए और हम उसी में समां जाएं। जानते हैं हुजूर, सीबीआई वाला लोग मेरा खैनी, कंघा, गोइठा, भैंसें सब का खरचा मेरी सम्पत्ति में जोड़ लिया। ई कइसा न्याय है हुजूर, मुद्दई भी हम और मुदालय भी हम ही बन गए। हम हीं ने जांच की अनुशंसा की, कागज पत्तर उपलब्ध कराया और हमीं को फंसा दिया गया। हम षड्यंत्र करते तो सारा कागज में आग नहीं लगा देते। जब जज महोदय ने लालू से प्रश्न किया तो लालू बोले ः हुजूर जो प्रश्न हमको दिया गया ऊ अंग्रेजी में है। हमरा अंग्रेजी कमजोर है। जब पढ़ने का टाइम था, तब तो हम गाय-गोरू चराते थे। हिन्दी में लिखने से बात ठीक से समझ में आएगी। कोर्ट ने कहा कि आपको हिन्दी में ही दिया जाएगा ताकि सही बात सामने आ सके। लालू प्रसाद ने कहा कि सर मैंने भी पटना लॉ कॉलेज से कानून की डिग्री लिया है। जज साहब ने कहा मैं भी वहीं का स्टूडेंट रहा हूं। आपसे जूनियर हूं। आपको अपनी बात रखने का पूरा मौका दिया जाएगा। लालू बोले ः हुजूर ई लोग कहता है कि हम स्विस बैंक में पइसा रखे हैं। स्विस जाने का हमको छूट है? एनडीए वाला लोग यूएन विश्वास को बोला गवर्नर बना देंगे और हमको फंसा देंगे। जज ने पूछा आप पर चारा घोटालेबाजों से हवाई टिकट और होटल में ठहरने का खर्च लेने के आरोप हैं। लालू ने कहा बिहार सरकार का अपना हेलीकाप्टर है। टीए, डीए भी मिलता था, हम क्यों खरचा लेते? मुख्यमंत्री और वित्तमंत्री की हैसियत से मैंने क्या किया यह फाइल में लिखा हुआ है। सीबीआई के कहने से कुछ नहीं होगा। लालू ने कोर्ट को बताया कि भारत के इतिहास में यह पहला मौका है, जब मेरी गिरफ्तारी के लिए सेना को बुलाने की चिट्ठी लिखा गया था। जबकि मैं खुद सरेंडर करने की बात कह दी थी। सेना ने आने से इंकार कर दिया था। लालू ने जज से ही पूछ डाला हुजूर सीबीआई को दंडित करने का कोई प्रावधान है ही नहीं। जिसको तिसको फंसा देते हैं। कहीं का रोड़ा, कहीं का पत्थर जोड़ के हमको फंसा दिया। ई लोग अंदाज पर गटई पकड़ रहा है।
CBI, Corruption, Fodder Scam, Lalu Prasad Yadav

Wednesday, 8 February 2012

...और अब प्रफुल्ल पटेल पर घूस लेने का आरोप

Vir Arjun, Hindi Daily Newspaper Published from Delhi
Published on 8th February  2012
अनिल नरेन्द्र
प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह की दूसरी पारी समस्याओं से घिरी लगती है। एक समस्या समाप्त नहीं होती कि दूसरी सामने आकर खड़ी हो जाती है। अगर पी. चिदम्बरम मामले में थोड़ी राहत मिली तो लम्बी चैन की सांस लेने का ज्यादा वक्त नहीं मिला। इसी कड़ी में अब बारी है केंद्रीय मंत्री प्रफुल्ल पटेल की। यह प्रकरण क्या गुल खिलाएगा? कनाडा के एक बड़े अंग्रेजी अखबार `ग्लोब एण्ड द मेल' ने प्रफुल्ल पटेल को लेकर एक सनसनीखेज न्यूज छापी है। इसमें आरोप लगाया गया है कि चार साल पहले तत्कालीन नागरिक उड्डयन मंत्री के रूप में पटेल ने करोड़ों रुपये रिश्वत के रूप में लिए थे। इसके बाद भी वह काम नहीं किया गया जिसके लिए मोटी रकम ली गई थी। कनाडा की पुलिस ने ओटावा की एक अदालत में प्रफुल्ल पटेल को रिश्वत देने के आरोप में भारतीय मूल के कनाडाई नागरिक के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है। अखबार के मुताबिक कनाडा में भारतीय मूल के एक व्यापारी नजीर कारीगर ने पूर्व नागरिक उड्डयन मंत्री प्रफुल्ल पटेल पर करीब 1.2 करोड़ की रिश्वत लेने का आरोप लगाया है। उसने एयर इंडिया से संबंधित अनुबंध प्राप्त करने के लिए पटेल को यह रकम दी थी। यह रकम उस समय दी गई थी जब वह भारत के नागरिक उड्डयन मंत्री थे। मुंबई के पूर्व पुलिस कमिश्नर हसन गफूर के दोस्त बताए जा रहे कारीगर का कहना है कि उसने मंत्री के करीबी लक्ष्मण ढोबले के जरिये उन तक रिश्वत पहुंचाई थी। कनाडा का संघीय न्याय विभाग कारीगर के खिलाफ करप्शन ऑफ फॉरेन पब्लिक ऑफिशियल एक्ट के उल्लंघन को लेकर मुकदमा चलाएगा। इस एक्ट के तहत विदेश में रिश्वत देने की मनाही है। माना जा रहा है कि मुकदमे में प्रफुल्ल नप सकते हैं। मामले की सितम्बर में सुनवाई होगी। एयर इंडिया में एक सिक्यूरिटी कम्प्यूटरीकृत सिस्टम की आपूर्ति के लिए ग्लोबल टेंडर आमंत्रित किए थे। यह टेंडर 100 मिलियन डालर का था। इसे कनाडा की कम्पनी क्राइप्टो मैट्रिक्स हासिल करना चाहती थी। नजीर कारीगर भारत में इस कम्पनी के मार्केटिंग इंचार्ज थे। उन्होंने अपने पुराने मित्रों के जरिये घूस देकर टेंडर लेने की तैयारी की थी। नजीर ने पटेल को करोड़ों रुपये का `सुविधा शुल्क' दिया था। दावा किया गया है कि नजीर ने पटेल को ढाई लाख डालर दिए थे। अब कम्पनी ने नजीर के खिलाफ दावा ठोंक दिया है। मनमोहन सरकार सालों से 2जी स्पैक्ट्रम घोटाले के चलते बेचैन है। इस घोटाले के `नायक' तत्कालीन संचार मंत्री ए. राजा थे। इस मामले में नई-नई फजीहत सामने आ रही हैं। इसी बीच पटेल पर लगा आरोप नेतृत्व को डराने लगा है। इधर अब भारी उद्योग मंत्री प्रफुल्ल पटेल ने ढाई लाख रिश्वत के आरोप को सिरे से खारिज करते हुए प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से इस मामले की जांच करने का अनुरोध किया है। पटेल ने कारीगर के आरोप को निराधार और हास्यास्पद बताया और कहा कि जब ऐसा कोई समझौता हुआ ही नहीं तो रिश्वत का प्रश्न ही नहीं उठता है। पटेल ने पीएम से कहा है कि जांच इसलिए कराई जाए ताकि उनकी भूमिका साफ हो और कहा है कि दस्तावेजों की जांच करने से पता चल जाएगा कि मंत्रालय या उनके द्वारा कोई भी ठेका देने में हस्तक्षेप नहीं किया गया था। सच क्या है, इसका जांच से ही पता चल सकता है।
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Friday, 3 February 2012

भ्रष्ट जनसेवकों के खिलाफ कार्रवाई का रास्ता खुला

Vir Arjun, Hindi Daily Newspaper Published from Delhi
Published on 3rd February  2012
अनिल नरेन्द्र
सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में साफ कर दिया है कि भ्रष्टाचार के आरोप में घिरे मंत्री, सांसद, विधायक और आला अधिकारी अब कार्रवाई की मंजूरी लम्बित होने की आड़ में ज्यादा दिन तक नहीं बच पाएंगे। सुप्रीम कोर्ट ने दूरगामी असर वाला यह फैसला जनता पार्टी अध्यक्ष डॉ. सुब्रह्मण्यम स्वामी की एक याचिका पर दिया जिसमें बताया गया था कि किस तरह से प्रधानमंत्री कार्यालय ने ए. राजा के खिलाफ भ्रष्टाचार का मुकदमा महीनों लटकाए रखा और कोई जवाब नहीं दिया। लोक सेवकों पर मुकदमा दर्ज करने के लिए समयसीमा तय करने से संबंधित डॉ. स्वामी की इस याचिका को स्वीकार कर सुप्रीम कोर्ट ने जहां केंद्र सरकार को झटका दिया है वहीं उसके इस रुख का दूरगामी महत्व यह है कि इसमें आम आदमी को किसी भी जनसेवक के खिलाफ प्रधानमंत्री या अदालत के पास जाने का रास्ता खुल गया है। शीर्ष अदालत ने साफ-साफ कहा है कि भ्रष्टाचार निरोधक कानून के तहत किसी जनसेवक के खिलाफ शिकायत दर्ज करना आम आदमी का संवैधानिक अधिकार है। दरअसल प्रधानमंत्री कार्यालय ने सुप्रीम कोर्ट में दायर शपथ पत्र में कहा था कि स्वामी की चिट्ठी सही नहीं थी। चूंकि स्वामी को लम्बे समय बाद प्रधानमंत्री कार्यालय से मिले जवाब पर एतराज था, इसलिए माननीय अदालत ने यह भी कहा है कि अगर चार महीने के भीतर आरोपित व्यक्ति के खिलाफ मुकदमा चलाने की अनुमति नहीं मिलती तो मान लिया जाना चाहिए कि संबंधित प्राधिकरण ने अनुमति दे दी है। यह मामला नवम्बर 2008 का है जब 2जी स्पेक्ट्रम मामले में तत्कालीन दूरसंचार मंत्री की भूमिका को देखते हुए डॉ. सुब्रह्मण्यम स्वामी ने प्रधानमंत्री को  पत्र  लिखकर  ए. राजा  के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने के बारे में कहा था। उन्हें प्रधानमंत्री कार्यालय से इसका जवाब करीब 16 महीने बाद मार्च 2010 को मिला था जिसमें कहा गया था कि उनकी अर्जी समय पूर्व है यानि तब सरकार मामले की तह में जाने की इच्छुक नहीं थी। सिर्प यही नहीं कि 2जी घोटाले से संबंधित अहम मुकदमों को स्वामी अदालत में ले गए हैं, यह भी स्वामी की पहल के बाद ए. राजा को मंत्री पद छोड़ना पड़ा और उनकी गिरफ्तारी हुई। सुप्रीम कोर्ट की इस फैसले से मंत्रियों व आला अफसरों की एक बड़ी सुरक्षा दीवार जरूर टूट गई है जिसकी आड़ में आमतौर पर भ्रष्ट जनसेवक भ्रष्टाचार का मामला होते हुए भी बच निकलते थे। अब तक होता यह था कि किसी सरकारी अधिकारी या जनसेवक के खिलाफ भ्रष्टाचार का मामला दर्ज करने से पहले सरकार से अनुमति लेनी पड़ती थी और अकसर ऐसी इजाजत की अर्जियों पर या तो कोई फैसला नहीं होता था या इजाजत नहीं दी जाती थी। अगर इजाजत न देने की कोई ठोस वजह न हो तो आसान तरीका यह था कि कोई फैसला न लेना हो। ताजा फैसले ने दो बड़े मानदंड स्थापित कर दिए हैं। पहला यह कि भ्रष्टाचार का मामला चलाने की अर्जी को सरकार अनिश्चितकाल तक अब नहीं टाल सकती और दूसरा हमारे लोकतंत्र में हर नागरिक को यह हक है कि वह सरकार पर भ्रष्टाचार के मामलों में कार्रवाई के लिए दबाव डाले। यह एक दूरगामी प्रभाव डालने वाला महत्वपूर्ण फैसला है।
Anil Narendra, Corruption, Daily Pratap, P. Chidambaram, Subramaniam Swamy, Supreme Court, Vir Arjun

Saturday, 28 January 2012

...और अन्ना ने कहा कि भ्रष्टाचारी को थप्पड़ मारो

Vir Arjun, Hindi Daily Newspaper Published from Delhi
Published on 27th January  2012
अनिल नरेन्द्र
कुछ माह पहले नासिक की एक सभा में अन्ना हजारे ने कहा था कि वह गांधी जी के विचारों में भरोसा करते हैं, लेकिन लोगों को गांधी के रास्ते में चलकर न समझाया जा सके तो शिवाजी का मार्ग अपनाने में संकोच नहीं करना चाहिए। जन लोकपाल मुद्दे पर सरकार से बार-बार मिले धोखे के बाद अब अन्ना खुद भी शिवाजी के रास्ते पर चलने की तैयारी करते दिख रहे हैं। तभी तो उन्होंने हिंसा का समर्थन करते हुए कहा है कि जब भ्रष्टाचार बर्दाश्त करने में आम आदमी की क्षमता जवाब दे जाती है तो उसके पास थप्पड़ मारने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचता। अन्ना ने मंगलवार रात अपने गांव रालेगण सिद्धि में भ्रष्टाचार के मुद्दे पर बनी फिल्म `गली-गली चोर है' के बाद यह विवादित टिप्पणी की। यह पहली बार नहीं जब अन्ना ने थप्पड़ पर टिप्पणी की हो। कुछ सप्ताह पहले दिल्ली में कृषि मंत्री शरद पवार को एक व्यक्ति द्वारा थप्पड़ मारे जाने की सूचना जब अन्ना को दी गई थी तो उन्होंने विनोदभाव से पूछा था, `सिर्प एक ही थप्पड़।' अन्ना के इस बयान की काफी आलोचना हुई थी और उनके विरोधियों द्वारा उन्हें छद्म गांधीवाद और हिंसा का समर्थक करार दिया गया था। अन्ना के ताजा बयान की राजनीतिक दलों में प्रतिक्रिया होनी लाजिमी थी। कांग्रेस महासचिव की टिप्पणी थी ः यह हिंसक बयान संघ की संगत का नतीजा है। उनके इस बयान के बाद मेरे मन में उनके प्रति सम्मान घटा है। मैं उन्हें एक गांधीवादी के तौर पर देखता हूं लेकिन वह जिस तरह से हिंसा की बात करते रहे हैं उससे उनका सम्मान कम हुआ है। भाजपा के पूर्व अध्यक्ष राजनाथ सिंह कहते हैं कि मैं उनसे सहमत नहीं हूं। एक स्वस्थ लोकतांत्रिक व्यवस्था में मर्यादाओं का अतिक्रमण करने की इजाजत नहीं दी जा सकती है। भ्रष्टाचार के खिलाफ अन्ना के आंदोलन का समर्थन करता हूं लेकिन आंदोलन में मर्यादाओं का अतिक्रमण नहीं होना चाहिए। समाजवादी पार्टी के महासचिव आजम खान का कहना था कि अन्ना का लोकतंत्र में भरोसा नहीं है। जब कमांडर ही हिंसा की बात करता है तो टीम क्या करेगी? अन्ना अपने रास्ते से भटक गए हैं। भ्रष्टाचार के मुद्दे पर टीम अन्ना की अत्याधिक सक्रियता और राजनीतिक दलों पर की जा रही टीका-टिप्पणी अब लोगों के गले कम उतर रही है। आमजन के अलावा राजनीतिक दलों को भी टीम अन्ना का रवैया रास नहीं आ रहा है। कुछ माह पहले तक दिल्ली में अपने अनशन के दौरान देशभर में समर्थन मिलने से उत्साहित टीम अन्ना की अत्याधिक सक्रियता और आए दिन की अवांछित टिप्पणियों से टीम अन्ना को लेकर अब ज्यादा गम्भीर नजर नहीं आ रही है। राजनीतिक दलों को बार-बार चिट्ठी लिखने और तमाम सवालों पर कैफियत तलब करने की रणनीति की अब प्रतिक्रिया होने लगी है। यह इस बात का संकेत है कि आने वाले दिनों में कहीं ऐसा न हो कि लोकपाल जैसे मुद्दे पर टीम अन्ना अलग-थलग पड़ जाए। पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव में पता चल जाएगा कि जनता में अन्ना के आंदोलन का क्या असर हुआ है? अगर ऐसे परिणाम आते हैं जिनसे यह लगता है कि अन्ना की बातों का ज्यादा असर जनता पर नहीं पड़ा तो अन्ना का आगे का रास्ता मुश्किल हो जाएगा और अगर यह लगा कि भ्रष्टाचार एक मुद्दा बना है तो निश्चित तौर पर लोकपाल बनाने का रास्ता आसान हो जाएगा पर हिंसात्मक बात करना अन्ना को शोभा नहीं देती।
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Friday, 20 January 2012

36 सालों की नौकरी, 22 लाख वेतन और 29 करोड़ की सम्पत्ति?

Vir Arjun, Hindi Daily Newspaper Published from Delhi
Published on 20th January  2012
अनिल नरेन्द्र
कुछ लोगों का कहना है कि हमारे देश में राजनीतिज्ञ तो ब्लैकमनी के लिए जरूरत से ज्यादा बदनाम हैं, असल तो अवैध कमाई नौकरशाहों के पास है। मध्य पदेश में पिछले कुछ समय से नौकरशाह बिरादरी पर छापे पड़ रहे हैं। इन छापों के परिणामों से तो यही लगता है कि लोग जो सोचते हैं सही ही लगता है। लोअर ब्यूरोकेसी ने इतनी लूट-खसोट मचा रखी है जिनका अनुमान लगाना मुश्किल है। मंगलवार को उज्जैन में लोकायुक्त टीम ने पीएचआई (लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग) के एक सहायक इंजीनियर के घर छापा मारा। तलाशी में सहायक इंजीनियर रमेश कुमार पिता पुंदन लाल द्विवेदी के घर से तलाशी में कृषि, भूमि, मकान, सोने-चांदी के जेवरात व लग्जरी वाहन सहित करीब 20 करोड़ की सम्पत्ति के पमाण मिले। लोकायुक्त एसपी अरुण मिश्रा ने बताया कि द्विवेदी की 1976 में उपयंत्री पद पर नौकरी लगी थी। उसे 2010 तक कुल 22 लाख रुपए वेतन मिला है। कोर्ट के एक फैसले के कारण उसने डेढ़ वर्ष से वेतन नहीं लिया है। द्विवेदी के घर तलाशी लेने गई टीम को जब तबेले में से घर में जाना पड़ा तो वह चौंक गए। लगा कि वह गलत घर में तो नहीं आ गए हैं। बाद में 20 करोड़ की सम्पत्ति का जब ब्यौरा मिला और तबेले की छानबीन हुई तब जाकर उन्हें लगा कि वह सही जगह आए हैं। लोकायुक्त की तलाशी में द्विवेदी के घर पर एक कार चालक व दो नौकर रखे होने का भी रिकार्ड मिला है। इन तीन कर्मचारियों को द्विवेदी करीब 15 हजार रुपए माह वेतन देता था जबकि उसे स्वयं को 24 हजार रुपए वेतन पतिमाह मिलता है। छापे में क्या-क्या मिला इस पर गौर फरमाएं ः 86 बीघा जमीन कीमत 17 करोड़ रुपए, 9 मकान (इंदौर-उज्जैन) 1.50 करोड़ रुपए, 3 लग्जरी कार (21 लाख रुपए), 2 डम्पर, टैक्ट्रर-25 लाख रुपए, 2 बाइक-1लाख रुपए, 13 तोला सोना -3.64 लाख, और 2.5 किलो चांदी कीमत 85 हजार रुपए। पत्नी साधना, पुत्र पियंक, पीयूष व बहू मेधा के नाम से बैंकों में 16 खातों में 4 लाख रुपए। द्विवेदी के 9 लाख की बीमा पॉलिसी भी मिली।
अभी कुछ समय पहले ही इंदौर में मध्य पदेश की अपराध जांच ब्यूरो (ईओडब्ल्यू) ने परिवहन विभाग के क्लर्प की 40 करोड़ रुपए से ज्यादा की बेहिसाब सम्पत्ति का खुलासा किया था। क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय (आरटीओ) में क्लर्प के रूप में पदस्थ रमेश उर्फ रमण के खिलाफ कथित भ्रष्टाचार से बेहिसाब दौलत बनाने की शिकायत मिली थी। इस शिकायत पर उसके तीन स्थानीय ठिकानों पर एक साथ छापे मारे गए। सूत्रों ने बताया कि क्लर्प की बेहिसाब सम्पत्ति में अलग-अलग जगहों पर कुछ 49 बीघा जमीन, चार भूखण्ड, आलीशान बंगला, एक होटल और एक मकान शामिल है। छापों के दौरान उसके ठिकाने पर जेवरात की शक्ल में लगभग एक किलो सोना और तकरीबन साढ़े चार किलो चांदी मिली। इसके अलावा पांच बैंक खातों और बीमा योजनाओं में निवेश के दस्तावेज भी बरामद किए गए। चार महंगे वाहन और दो दुपहिए भी क्लर्प की बेहिसाब मिल्कीयत की सूची में है। रमेश वर्ष 1996 में सरकारी सेवा में आया था और फिलहाल उसका वेतन करीब 16 हजार रुपए पतिमाह है। 16 हजार रुपए वेतन पाने वाले ने 40 करोड़ की सम्पत्ति कैसे बना ली? इसी के साथ सवाल यह भी उठता है कि पकड़ी गई ऐसी संपत्ति का क्या किया जाए? एक हल तो बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने दिखाया है। एक भ्रष्ट कर्मचारी गिरीश कुमार के पटना के आलीशान बंगले में अब नीतीश सरकार ने किशोरियों का आवासीय स्कूल खोल दिया है। पिछले कई दिनों से यह बंगला बंद था। पार्प रोड स्थित इस 28 कमरों वाले बंगले को पिछड़ी जाति की छात्राओं के प्लस-टू के आवासीय स्कूल को हस्तांतरित किया गया है। यहां वर्ग 6 से 10 तक की 140 छात्राएं रहेंगी और सभी कक्षाएं इसी भवन में होंगी। गिरीश का मकान आय से अधिक सम्पत्ति मामले में सरकार ने जब्त किया था। गिरीश कुमार ने वर्ष 1992 से 2004 के बीच आय से 96 लाख रुपए की अधिक सम्पत्ति अर्जित की थी। कोर्ट ने 15 नवंबर को जिलाधिकारी को गिरीश की संपत्ति जब्त करने का आदेश लिया था। डेढ़ कट्टा जमीन जो उसकी पत्नी के नाम थी, को जब्त कर लिया गया और इस स्कूल की पहली घंटी नए साल (2012) में 2 जनवरी को बजी। पिछड़े तबके की छात्राएं जब नए स्कूल के कमरों में पहुंची तो चौंक गई। 10वीं की छात्रा सोनी ने कहा, `कितनी बड़ी आलमारी है?' शिक्षिका नीरा आर्य ने टोका ः यह आलमारी नहीं वार्डरोब है। पहली बार यह शब्द सुन रही सोनी ने उलट सवाल दागा ये वार्डरोब क्या होता है?
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Friday, 2 December 2011

संसद गतिरोध तोड़ने में बीच का रास्ता निकालने में सरकार असफल


Vir Arjun, Hindi Daily Newspaper Published from Delhi
Published on 2nd December 2011
अनिल नरेन्द्र
रिटेल एफडीआई पर छिड़ी रार से निकलने के रास्ते को लेकर मनमोहन सरकार पसोपेश में फंस गई है। सरकार की ओर से फेंके गए सारे पासे बेअसर साबित हो रहे हैं। कांग्रेस के अन्दर शुरू हुए खुले विरोध ने भी सरकार की दुविधा बढ़ा दी है। पहले महंगाई, भ्रष्टाचार और अब एफडीआई के मुद्दे पर घिरी मनमोहन सरकार और कांग्रेस को संकट से निकालने के लिए एक तरफ कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी खुलकर मैदान में आ गई हैं, वहीं दूसरी तरफ एफडीआई को लेकर विपक्ष के हमलों की धार को पुंद करने के लिए उत्तर प्रदेश के सांसद और सोनिया के करीबी संजय सिंह ने इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री और सोनिया गांधी से पुनर्विचार करके किसानों, व्यापारियों और उपभोक्ताओं के हितों के सुरक्षा कवच के साथ एफडीआई लाने का अनुरोध किया है। जहां कैबिनेट की बैठक में एके एंटनी और जयराम रमेश समेत कुछ मंत्रियों की असहमति जगजाहिर हो चुकी है, वहीं अब सुल्तानपुर के सांसद संजय सिंह ने सरकार और पार्टी को इस पर पुनर्विचार करने की अपील करके उत्तर प्रदेश में पार्टी के डैमेज कंट्रोल की पहल कर दी है। सूत्रों का कहना है कि यूपी अधिसंख्य नेताओं और सांसदों की राय है कि राहुल गांधी के दौरे के बाद कांग्रेस के पक्ष में बने माहौल को एफडीआई के फैसले से नुक्सान हो सकता है। इसलिए संजय सिंह ने पहल करके कांग्रेस के खिलाफ बसपा, सपा और भाजपा द्वारा पैदा किए जा रहे जन असंतोष को कम करने की कोशिश की है। सम्भव है कि संजय सिंह ने सोनिया गांधी की पहल पर ही यह बयान दिया हो ताकि मनमोहन सिंह को समझ आए कि उनकी जिद पार्टी पर भारी पड़ सकती है। सूत्रों का कहना है कि वित्तमंत्री और कांग्रेस के संकट मोचक प्रणब मुखर्जी भाजपा की शरण में गए थे। उन्होंने भाजपा के वरिष्ठतम नेता लाल कृष्ण आडवाणी से गुप्त मुलाकात करके कोई बीच का रास्ता निकालने और गतिरोध तोड़ने की अपील की थी पर इसमें उन्हें कोई सफलता नहीं मिली। भाजपा ने बुधवार को आरोप लगाया कि सरकार ने यह निर्णय अमेरिका, फ्रांस और ब्रिटेन जैसे देशों के दबाव में किया है। उसने यह भी आरोप लगाया है कि वैश्विक रिटेल कम्पनियों ने इसके लिए काफी लाबिंग की है और पैसा दिया है। भाजपा ने कहा कि सरकार संसद की कार्यवाही चलाने का मार्ग प्रशस्त करने के लिए अपने निर्णय को वापस ले या फिर कार्य स्थगित प्रस्ताव के तहत इस विषय पर चर्चा कराकर संसद की भावना को स्वीकार करे। भाजपा के वरिष्ठ नेता डॉ. मुरली मनोहर जोशी ने कहा कि मल्टी ब्रांड खुदरा में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश ः एफडीआई की अनुमति दिए जाने का सभी विपक्षी दलों और सरकार में शामिल कुछ पार्टियों तक ने विरोध किया है। लेकिन सरकार ने देशहित के खिलाफ एकतरफा ढंग से संसद सत्र के दौरान यह निर्णय किया है। उन्होंने कहा कि सरकार को दो सुझाव दिए गए हैंöया तो वह इस निर्णय को वापस लेकर संसद में कल से महंगाई, कालाधन पर चर्चा शुरू करवाए अथवा खुदरा क्षेत्र में एफडीआई पर कार्यस्थगन प्रस्ताव के तहत बहस कराए। इन्हीं स्थितियों में संसद चल सकती है। इसमें बीच का अब कोई रास्ता नहीं है।
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Saturday, 22 October 2011

न तो मैं महंगाई के लिए जिम्मेदार हूं और न ही इसे कम कर सकता हूं


Vir Arjun, Hindi Daily Newspaper Published from Delhi
Published on 22nd October 2011
अनिल नरेन्द्र
श्री मनमोहन सिंह की यह यूपीए सरकार कमाल की सरकार है। इस सरकार में किसी भी मंत्री के जो विचार हों वह उन्हें कह देता है और इसके लिए वह किसी को भी जवाबदेही नहीं है। प्रधानमंत्री ऐसे बयानों को गठबंधन की मजबूरी कहकर टाल देते हैं पर इनसे पता चलता है कि मनमोहन सिंह के मंत्रिमंडल में उनकी कितनी इज्जत है और वह कितने शक्तिशाली हैं। उपचुनावों में मिली करार हार के बाद अब कांग्रेस के सहयोगी दलों ने प्रधानमंत्री और कांग्रेस की नीतियों को हार के लिए जिम्मेदार ठहराना आरम्भ कर दिया है। महाराष्ट्र की खड़कवासला विधानसभा सीट पर मिली हार से बौखला गए केंद्रीय कृषि मंत्री शरद पवार ने सीधा प्रधानमंत्री पर ही हमला बोल दिया। पवार ने एक मराठी दैनिक की ओर से मुंबई में आयोजित एक समारोह में कहा कि पिछले दिनों विभिन्न घोटालों के संदर्भ में सरकार ने मजबूत नेतृत्व का प्रदर्शन नहीं किया। पवार ने कहा कि 2जी स्पेक्ट्रम घोटाले के संदर्भ में जनता यह सवाल पूछ रही थी कि प्रधानमंत्री पूरे मामले में हस्तक्षेप क्यों नहीं कर रहे हैं? उन्होंने कहा कि ऐसे समय जबकि नेतृत्व क्षमता प्रदर्शित करने का समय था, केंद्र सरकार की ओर से कुछ नहीं किया गया। उन्होंने आगे कहा कि विभिन्न घोटालों के कारण जनमत केंद्र सरकार के खिलाफ गया तथा इससे सरकार की साख को धक्का लगा। सरकार की निक्रियता का परिणाम यह हुआ कि न्यायपालिका ने अति सक्रियता दिखाते हुए विभिन्न कदम उठाए। अन्ना हजारे और योग गुरु बाबा रामदेव के भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन की ओर संकेत करते हुए उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में निर्वाचित प्रतिनिधियों को सशक्त रूप से अपनी भूमिका निभानी चाहिए। यदि वह ऐसा नहीं करते तो अन्य ताकतों को सामने आने का मौका मिलेगा जो लोकतांत्रिक प्रणाली के लिए अच्छी बात नहीं है। शरद पवार यहीं नहीं रुके। बुधवार को नई दिल्ली में आर्थिक सम्पादकों के सम्मेलन में बोलते हुए पवार का कहना था कि न तो मैं महंगाई के लिए जिम्मेदार हूं और न ही इसे कम करना मेरा काम है। मैं कृषि मंत्री यानि एक किसान हूं और मेरा काम अनाज पैदा करना है। मेरे मंत्रालय की यह भी कोशिश रहती है कि किसान को उसकी मेहनत का पूरा मूल्य मिले।
हमें शरद पवार की बातें सुनकर ज्यादा हैरानी नहीं हुई। यह पहले भी कांग्रेस नेतृत्व पर सीधे हमले कर चुके हैं। अगर ऐसे बयानों का विपक्षी दल फायदा उठाएं तो हैरत नहीं होनी चाहिए। भाजपा पवार के बयान से खुश है। पार्टी का कहना है कि यूपीए डूबता जहाज है और अब इससे भागने की सभी घटक दल कोशिश में जुट गए हैं। उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के प्रधानमंत्री के साथ बंगलादेश जाने से इंकार के बाद अब ऐसा लगता है कि प्रमुख गठबंधन सहयोगी एवं कृषि मंत्री शरद पवार संप्रग छोड़ने की तैयारी में हैं। सवाल यह है कि जब एक वरिष्ठ मंत्री अपने ही प्रधानमंत्री और सरकार की नीतियों पर इस तरह के सवाल उठाता है तो सामूहिक जिम्मेदारी कहां गई? जिम्मेदारी की बात करें तो श्री पवार तो साफ कहते हैं कि महंगाई कम करना मेरा काम नहीं। अगर यह काम शरद पवार का नहीं तो किसका है और अगर वह अपनी सरकार की नीतियों से इतने ही नाखुश हैं और असहमत हैं तो उन्हें इस सरकार में रहने का कोई औचित्य समझ नहीं आता। क्यों नहीं शरद पवार मनमोहन सिंह सरकार से त्यागपत्र दे देते। हमें प्रधानमंत्री पर भी दया आती है। जो पीएम अपने वरिष्ठ मंत्रियों पर लगाम नहीं लगा सकता वह पूरे देश को कैसे चला सकता है? जैसे देश चल रहा है वह सबके सामने ही है।
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Friday, 7 October 2011

एक बार फिर अन्ना हजारे और कांग्रेस आमने-सामने

Vir Arjun, Hindi Daily Newspaper Published from Delhi
Published on 7th October 2011
अनिल नरेन्द्र
समाजसेवी अन्ना हजारे ने सख्त शब्दों में कांग्रेस को चेतावनी दी है। रालेगण सिद्धि से बोलते हुए अन्ना ने कहा कि यदि केंद्र संसद के शीतकालीन सत्र में जन लोकपाल विधेयक पारित करने में विफल रहा तो सत्तारूढ़ पार्टी को चुनाव होने जा रहे उन पांच राज्यों में जबरदस्त हार का सामना करना पड़ेगा। हजारे ने हिसार उपचुनाव को अपने इस अभियान का पहला कदम करार देते हुए कहा कि वह हरियाणा के हिसार लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र में मतदाताओं से अपील करेंगे कि वे कांग्रेस प्रत्याशी को वोट नहीं दें, क्योंकि पार्टी जानबूझकर जन लोकपाल विधेयक संसद में नहीं ला रही है। हिसार में 13 अक्तूबर को उपचुनाव होना है। पुणे से 50 किलोमीटर दूर अपने गांव में संवाददाताओं को संबोधित करते हुए अन्ना ने कहा कि हम लोगों से यह नहीं कहने जा रहे कि उन्हें किसे वोट देना चाहिए। हम लोगों से कांग्रेस को छोड़कर किसी अन्य पार्टी को वोट देने और साफ छवि एवं अच्छे चरित्र वाला उम्मीदवार चुनने को कहेंगे। अन्ना हजारे ने यह भी घोषणा की कि वह उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव शुरू होने से तीन दिन पहले लखनऊ में चार दिन का अनशन भी करेंगे। उधर टीम अन्ना ने सरकार एवं संसद पर जन लोकपाल विधेयक के पक्ष में दबाव बढ़ाने के उद्देश्य से गांधी जयंती के अवसर पर देशभर में विधेयक पर जनमत संग्रह अभियान की शुरुआत कर दी। इस जनमत संग्रह में केवल दो सवाल पूछे जा रहे हैं। पहला, कि क्या उनके निर्वाचन क्षेत्र के सांसद और उनकी पार्टी को संसद में अन्ना के जन लोकपाल विधेयक का समर्थन करना चाहिए या नहीं और दूसरा, यह कि अगर उनके क्षेत्र के सांसद ने संसद में अन्ना के जन लोकपाल विधेयक का समर्थन नहीं किया तो क्या आप अगले चुनाव में उस सांसद या उसकी पार्टी को अपना वोट देंगे या नहीं। इस अभियान की शुरुआत के लिए उत्तर प्रदेश के प्रमुख नेताओं के निर्वाचन क्षेत्रों को चुना गया है जिनमें कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी, कांग्रेस महासचिव राहुल गांधी, भाजपा नेता राजनाथ सिंह, डॉ. मुरली मनोहर जोशी तथा सपा के मुलायम सिंह यादव शामिल हैं। गांधी जयंती पर जिन क्षेत्रों में जनमत संग्रह की शुरुआत की गई उनमें गाजियाबाद, कौशाम्बी, हमीरपुर, मैनपुरी, रायबरेली, अमेठी, वाराणसी, लखनऊ और अम्बेडकर नगर शामिल हैं।
कांग्रेस में अन्ना की चेतावनी का असर कितना पड़ा है यह कहना तो मुश्किल है पर इतना जरूर है कि पार्टी ने अन्ना पर जवाबी हमला करना शुरू कर दिया है। संसदीय कार्य मंत्री पवन बंसल ने कहा कि आप किसी की गर्दन पर पिस्तौल रखकर कोई चीज नहीं हासिल कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि संसद की स्थायी समिति इस पर विचार कर रही है और इस पर सदस्यों का विचार भी प्राप्त कर रही है। बंसल ने कहा कि विधेयक को आगामी शीतकालीन सत्र में पेश करने के लिए गंभीर प्रयास किए जाएंगे। लेकिन यह इस बात पर निर्भर है कि समिति कितना काम करने में सक्षम है। समिति में सभी पार्टियों से सदस्य हैं और उन्हें विभिन्न लोगों से विचार मिल रहे हैं जो इसके समक्ष आना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि यदि समिति तय समय में अपनी रिपोर्ट देने में सक्षम होगी तो अगले सत्र में विधेयक पेश करने में कोई समस्या नहीं होनी चाहिए। कांग्रेस महासचिव राहुल गांधी ने अन्ना की घोषणा में जवाब दिया कि यदि आप भ्रष्टाचार से लड़ना चाहते हैं तो आपको राजनीति में उतरना पड़ेगा। लोकतांत्रिक तरीके से ही व्यवस्था को दुरुस्त किया जा सकता है। महासचिव और मीडिया विभाग के अध्यक्ष जनार्दन द्विवेदी ने कहा कि उन्हें देश के सामूहिक विवेक, जिसका प्रतिनिधित्व संसद करती है पर पूरी आस्था रखनी चाहिए और ऐसा कोई काम नहीं करना चाहिए जिससे उनके मुद्दे का कोई राजनीतिक स्वार्थ के लिए दुरुपयोग करे। द्विवेदी ने कहा कि संसद से जो लोकपाल विधेयक सामने आएगा वह असरदार होगा और इसे लेकर उन्हें पहले कोई धारणा नहीं बनाना चाहिए। अन्ना हजारे परिपक्व और अनुभवी व्यक्ति हैं। मैं समझता हूं कि उन्हें लोकतंत्र और उसकी प्रक्रियाओं पर भरोसा है।
अन्ना की चेतावनी और कार्यवाही से उत्तर प्रदेश और हरियाणा में असर होना स्वाभाविक है। इससे कांग्रेस की परेशानी निश्चित रूप से बढ़ेगी तो जरूर। प्रदेशाध्यक्ष डॉ. रीता बहुगुणा ने कहा कि मुझे अन्ना के बयान का तो मालूम नहीं, लेकिन समझ में नहीं आता कि सबका निशाना कांग्रेस की तरफ ही क्यों है? चुनाव तो चुनाव हैं, देखा जाएगा। टीम अन्ना के प्रमुख अरविन्द केजरीवाल के गृह क्षेत्र हिसार में भी अन्ना की घोषणा का पूरा असर दिखने लगा है। शहर के बंगलों से लेकर गांव-ढाणियों के चौबारों पर अन्ना की घोषणा पर मंथन चल निकला है। इन सबके बीच सवाल बड़ा है कि ईमानदार, अच्छा प्रत्याशी किसे चुनें? ग्रामीणों का कहना है कि यहां तो मामला कठिन है पर देना है, ऐसे में कम बुरा छांटना पड़ेगा। अन्ना 9 या 10 अक्तूबर को हिसार आएंगे। प्रत्याशियों पर नजर डालें तो सभी पर कुछ न कुछ आरोप हैं। हालांकि अन्ना ने कांग्रेस को बायकाट करने को कहा है, लेकिन हिसार के लोगों ने प्रत्याशी जय प्रकाश को भी पलड़े में रख लिया है। वे कहते हैं कि यह प्रत्याशी तीन बार सांसद बन चुका है लेकिन हर बार अलग-अलग दल का सहारा लिया। अन्य आरोप भी लगते रहे हैं। दूसरे प्रत्याशी हजकां-भाजपा के कुलदीप बिश्नोई के बारे में कहते हैं कि इनकी पार्टी के पांच विधायकों (अब कांग्रेस में) ने ही आरोप लगा दिए थे कि यह उनके बेचने का सौदा कर रहे थे। तीसरे प्रत्याशी इनेलो से अजय सिंह चौटाला हैं, इनके बारे में दूसरे दल आय से अधिक सम्पत्ति के मामले में दोषी करार होने की बात कहते हैं पर अपना मानना है कि मुख्य मुकाबला अजय चौटाला और कुलदीप बिश्नोई में है। जय प्रकाश तीसरे नम्बर पर चल रहे हैं।
भाजपा को अन्ना हजारे का कांग्रेस विरोध तो रास आ रहा है लेकिन गुजरात में अपनी ही सरकार के खिलाफ अन्ना के तेवरों ने उसे बंगले झांकने को भी मजबूर किया है। पार्टी ने हालांकि अन्ना और अपने बीच किसी तरह का तालमेल होने से साफ इंकार किया है। पार्टी प्रवक्ता निर्मला सीतारमण ने कहा कि अन्ना और भाजपा दोनों ही कांग्रेस के खिलाफ इसलिए हैं क्योंकि कांग्रेस पूरी तरह से भ्रष्ट हो चुकी है। अन्ना के आंदोलन को भाजपा भले ही राजनीतिक रूप से भुनाने की कोशिश करें, लेकिन अन्ना लगातार यह कह रहे हैं कि भाजपा और आरएसएस से उनके आंदोलन का कुछ लेना-देना नहीं है। अब उन्होंने गुजरात में आईपीएस अधिकारी संजीव भट्ट की गिरफ्तारी का विरोध कर इसे साफ भी कर दिया है। आने वाले दिनों में अन्ना हजारे और कांग्रेस के बीच वाप्युद्ध और तेज हो सकता है। अन्ना की अपील का पहला टेस्ट हिसार लोकसभा उपचुनाव हो सकता है।
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Wednesday, 28 September 2011

अब क्या होगा आगे ः नजरें सुप्रीम कोर्ट पर



Vir Arjun, Hindi Daily Newspaper Published from Delhi
Published on 28th September 2011
अनिल नरेन्द्र
देश के लिए कितने दुःख की बात है कि अमेरिका में प्रधानमंत्री और वित्त मंत्री से 2जी घोटाले पर प्रश्न पूछे जा रहे हैं। सारी दुनिया में घोटालों की इस सरकार ने पूरे देश की इज्जत मिट्टी में मिला दी है। पता नहीं दुनिया भारत के बारे में क्या सोचती होगी? इधर देश में इस सरकार की मुश्किलें बढ़ती ही जा रही हैं। 2जी घोटाले में रोज नई परतें खुलती जा रही हैं और जैसे-जैसे नए रहस्योद्घाटन हो रहे हैं, पता चल रहा है कि इस घोटाले की ऊपर से नीचे तक सबको खबर थी पर किसी ने भी इसे रोकने की कोशिश नहीं की। बेशक प्रधानमंत्री, वित्त मंत्री वर्तमान और भूतपूर्व खुद घोटाले में शामिल न भी रहे हों पर इससे तो अब वह भी इंकार नहीं कर सकते कि सब कुछ उनकी जानकारी और कुछ हद तक स्वीकृति से हुआ। प्रधानमंत्री बेशक तत्कालीन वित्त मंत्री पी. चिदम्बरम को क्लीन चिट दे रहे हों और कह रहे हों कि उन्हें गृहमंत्री पर पूरा भरोसा है पर इससे अब बात बनने वाली नहीं। 2जी घोटाले पर पूरी तरह घिर चुकी सरकार के संकटमोचकों के उपाय अब खत्म होने लग हैं। सरकार के शीर्ष नेतृत्व को अब इस घोटाले के जाल से बचाने के लिए यह सिद्ध करना जरूरी है कि पूर्व संचार मंत्री ए. राजा के फैसले से देश के खजाने को किसी तरह का नुकसान नहीं हुआ। बीते सप्ताह अदालत के सामने पेश टीआरएआई की रिपोर्ट इसी कोशिश का हिस्सा थी जो औंधे मुंह गिर पड़ी। घोटाले की जांच कर रही संयुक्त समिति भी इसी निष्कर्ष की दिशा में कोशिश कर रही है। राजा के फैसलों में सरकार के शीर्ष नेतृत्व की सहमति को साबित करने वाले तमाम दस्तावेजी सुबूत देश व अदालत के सामने हैं। ए. राजा के निर्णयों से राजस्व के नुकसान का पहलू यदि कानूनी तौर पर साबित हो जाता है तो फिर प्रधानमंत्री व तत्कालीन वित्त मंत्री इस हानि की परोक्ष जिम्मेदारी से शायद ही बच सकें। लाइसेंस लेने वाली एक कम्पनी एस टेल की एक चिट्ठी सरकार के लिए मुसीबत बनेगी। प्रधानमंत्री को मालूम था कि कम्पनियां 2जी स्पेक्ट्रम की ऊंची कीमत देने को तैयार हैं। नवम्बर 2007 में सीधी मनमोहन सिंह को लिखी चिट्ठी में एस टेल ने स्पेक्ट्रम के लिए 6000 करोड़ रुपये का राजस्व देने की पेशकश की थी। कम्पनी ने बाद में इसे बढ़ाकर 13752 करोड़ रुपये तक कर दिया। बाजार से इन संकेतों के बावजूद राजा ने स्पेक्ट्रम को कम कीमत पर बेचा और पीएमओ इस फैसले में राजा के साथ खड़ा रहा। स्पेक्ट्रम में कुल कितना घाटा हुआ या घपला हुआ इस नुकसान की गणना में कैग ने एस टेल की चिट्ठी में प्रस्तावित कीमत को ही प्रमुख मुद्दा बनाया है। राजा के फैसले से प्रधानमंत्री और तब के वित्त मंत्री की अनभिज्ञता का तर्प बिखर गया है। राजा के फैसलों से भ्रष्टाचार तो स्पष्ट है अलबत्ता इस फैसले से राजस्व के नुकसान का तर्प अभी विवादों में है। कैग 1,76,000 करोड़ रुपये का नुकसान का निष्कर्ष दे चुकी है जिसे सरकार ने नकार दिया है। सूत्र बताते हैं कि ताजा जानकारी के बाद यह साबित करने की अंतिम कोशिश होगी कि 2001 की कीमतों पर 2008 में स्पेक्ट्रम बेचने से खजाने को कोई नुकसान नहीं हुआ था। यही अंतिम रास्ता है जिससे भ्रष्टाचार का ठीकरा ए. राजा के सिर फूटेगा और सरकार के शीर्ष नेतृत्व देश का नुकसान कराने की तोहमत से बच सकेगा। वैसे सीबीआई ने राजा पर भ्रष्टाचार का जो मामला बनाया है उसमें यह दर्ज है कि संचार मंत्री के फैसलों से देश को करीब 30,000 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। सीबीआई को पूर्व संचार मंत्री व अन्याय पर अभियोग के लिए यह साबित करना होगा कि राजा के फैसलों से खजाने को भारी चपत लगी है। अब सबकी नजरें सुप्रीम कोर्ट पर लगी हैं। देखना यह है कि सुप्रीम कोर्ट गृहमंत्री पी. चिदम्बरम की स्पेक्ट्रम में भूमिका की जांच को लेकर क्या निर्णय लेती है। यूपीए और कांग्रेस एक अभूतपूर्व संकट में फंसी हुई है जिसका फिलहाल तो कोई तोड़ नहीं निकल पा रहा है। कांग्रेस केवल इस बात से चिंतित नहीं है कि चिदम्बरम पर हमला किया जा रहा है बल्कि उसकी असली चिंता भाजपा की प्रधानमंत्री को लपेटने की योजना से है। यदि भाजपा एक बार चिदम्बरम के खिलाफ जांच शुरू करवाने में सफल हो गई तो इस जांच की आंच अपने आप प्रधानमंत्री तक पहुंच जाएगी। मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की सुनवाई है। देखें अदालत में क्या होता है?2G, A Raja, Anil Narendra, CAG, Corruption, Daily Pratap, Manmohan Singh, P. Chidambaram, Pranab Mukherjee, Prime Minister, Scams, Supreme Court, Vir Arjun

Sunday, 25 September 2011

राक्षसों को मारने के लिए लक्ष्मण रेखा पार करनी पड़ती है


Vir Arjun, Hindi Daily Newspaper Published from Delhi
Published on 25th September 2011
अनिल नरेन्द्र
ऐसा लग रहा है कि 2जी स्पेक्ट्रम घोटाला मनमोहन सिंह सरकार पर भारी पड़ रहा है। जहां एक ओर सरकार के अन्दर वरिष्ठतम मंत्रियों की खींचतान बढ़ती जा रही है वहीं सरकार और सीबीआई में भी मतभेद उभरकर सामने आ रहे हैं। केंद्र सरकार में नम्बर दो की हैसियत रखने वाले प्रणब मुखर्जी जो इस समय वित्त मंत्री हैं, के तत्कालीन वित्त मंत्री पी. चिदम्बरम जो वर्तमान में गृहमंत्री हैं, के बीच शीत युद्ध अब उजागर हो चुका है। एक वरिष्ठ कांग्रेसी नेता के इस घमासान से पार्टी और सरकार में जिस तरह से असहज स्थिति बनी है वह कांग्रेस पार्टी और मनमोहन सरकार के लिए खतरे की घंटी से कम नहीं। पार्टी इस बार मसले को पहले से कहीं ज्यादा गम्भीर मान रही है क्योंकि 2जी मामला सरकार के गले की फांस बन गया है। पार्टी सूत्रों का कहना है कि अगर सुप्रीम कोर्ट वित्त मंत्रालय के नोट का संज्ञान लेता है तो स्थिति सरकार के लिए अत्यंत गम्भीर बन सकती है। कांग्रेस के एक महासचिव के मुताबिक इस बार सरकार के नम्बर दो मंत्री के महकमे की ओर से विवादित तथ्य सामने आए हैं। लिहाजा यह आसानी से नहीं निपटाया जा सकेगा। पार्टी का मानना है कि प्रणब और चिदम्बरम की आपसी खींचतान से सरकार की पहले से ही खराब छवि और ज्यादा खराब हो रही है।
उधर 2जी स्पेक्ट्रम घोटाले की जांच पर सुप्रीम कोर्ट की निगरानी को लेकर अदालत केंद्र और सीबीआई में मतभेद भी सामने आ गए हैं। केंद्र ने बृहस्पतिवार को सुप्रीम कोर्ट में जांच पर निगरानी जारी रखने का विरोध किया था, वहीं सीबीआई ने दलील दी कि निगरानी जारी रहनी चाहिए। केंद्र सरकार ने यहां तक कह दिया कि वह (सुप्रीम कोर्ट) 2जी घोटाले के मामले में गृहमंत्री पर सुनवाई नहीं कर सकती। उसने कोर्ट से कहा कि वह इस मामले में आदेश पारित कर लक्ष्मण रेखा पार न करे। यह सरकार द्वारा सुप्रीम कोर्ट के अधिकारों को चुनौती देना था पर सुप्रीम कोर्ट ने दो टूक कहा कि आप लक्ष्मण रेखा की बात कर रहे हैं, यदि सीता ने लक्ष्मण रेखा पार नहीं की होती तो रावण मारा नहीं जाता। लक्ष्मण रेखा राक्षसों को मारने के लिए ही पार की जाती है, ऐसा लोग कहते हैं। जस्टिस जीएस सिंघवी और जस्टिस एके गांगुली की बैंच ने यही नहीं कहा बल्कि सरकार और सीबीआई के मामले में हो रही जांच में टालमटोल करने पर भी फटकार लगाई। इसके बाद सीबीआई के वकील ने कहा कि अदालत जांच का आदेश देती है तो वह उसका पालन करेगी। उसने यहां तक आश्वासन दिया कि वह सुब्रह्मण्यम स्वामी की भूमिका के बारे में अदालत में दाखिल दस्तावेजों की भी जांच को तैयार है। दरअसल अदालत ने परोक्ष रूप से संकेत दिया कि शीर्ष पदों पर बैठे आरोपियों को सजा दिलवाने के लिए वह पुराने फैसलों को नजरअंदाज कर जांच जारी रख सकती है। इससे पहले न्यायमूर्ति जीएस सिंघवी और न्यायमूर्ति एके गांगुली की पीठ के समक्ष केंद्र की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता पीपी राव ने शीर्ष अदालत के पुराने फैसलों का हवाला देकर निगरानी की तय लक्ष्मण रेखा होने की दलील दी थी। पीठ ने राव से ही पूछ लिया कि आखिर क्यों अदालत की ओर से जांच की निगरानी का चलन शुरू हुआ? विनीत नारायण के मामले तक हमने यह नहीं सुना था। यह चलन इसलिए शुरू हुआ क्योंकि दुर्भावना का स्वरूप बड़ा होता गया और पारम्परिक तरीके कमजोर पड़ गए। जहां एक ओर तो सरकार इस घोटाले में अदालत की निगरानी जारी रखने पर एतराज कर रही है वहीं दूसरी ओर सीबीआई की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता केके वेणुगोपाल ने कहा कि जांच अदालत की निगरानी में ही जारी रहनी चाहिए। इस पर पीठ ने केंद्र से पूछा कि सॉलिसिटर जनरल ने पहले अदालत की ओर से निगरानी पर सहमति जताई थी, अब यदि सरकार अपना बयान वापस ले रही है तो बताए? जवाब में राव ने कहा कि वह सॉलिसिटर जनरल के बयान को वापस नहीं ले रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट में हुई कार्रवाई से जहां सुप्रीम कोर्ट और केंद्र सरकार के मतभेद उभर कर सामने आए हैं वहीं सरकार और सीबीआई के भी मतभेद सामने आ गए हैं।
वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी और गृहमंत्री पी. चिदम्बरम के बीच युद्ध अब खुलकर सामने आ चुका है। 2जी स्पेक्ट्रम मामले में सीबीआई द्वारा चार्जशीट दायर करने के एक सप्ताह पहले ही वित्त मंत्रालय के उस नोट का बाहर आना जिसमें यह कहा गया हो कि तत्कालीन वित्त मंत्री पी. चिदम्बरम स्पेक्ट्रम के मूल्य को लेकर ए. राजा से सहमत थे, आने वाली घटनाओं की ओर संकेत है और यह भी कि वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी के दफ्तर में जासूसी प्रकरण के बाद किस तरह से प्रणब और चिदम्बरम के बीच कटु युद्ध छिड़ा हुआ है। सभी की नजरें अब प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह द्वारा अमेरिका से लौटने पर टिकी हुई हैं। देखें प्रधानमंत्री और कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी इस नए झंझट से कैसे निपटते हैं?
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