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Tuesday, 5 September 2023
मोदी ने फिर चला मास्टरस्ट्रोक?
इस सम्पादकीय और पूर्व के अन्य संपादकीय देखने के लिए अपने इंटरनेट/ब्राउजर की एड्रेस बार में टाइप करें पूूज्://हग्त्हाह्ंत्दु.ंत्दुेज्दू.म्दस् वेंद्र सरकार ने मानसून सत्र के तीन हफ्ते बाद ही गुरुवार को अचानक पांच दिन का विशेष संसद सत्र बुलाने का ऐलान कर सबको चौंका दिया।
संसदीय कार्यंमंत्री प्राह्लाद जोशी ने सोशल मीडिया पर पोस्ट में बताया, 18 से 22 सितंबर तक दोनों सदनों का विशेष सत्र रहेगा। यह 17वीं लोकसभा का 13वां और राज्यसभा का 261वां सत्र होगा। इसमे पांच बैठवें होंगी।
इस सत्र को सरकार की ओर से किसी मास्टरस्ट्रोक की तैयारी माना जा रहा है। हालांकि, जोशी ने सत्र का कोईं एजेंडा नहीं बताया। जानकारी के साथ पुराने संसद भवन की फोटो शेयर की है। माना तो यह भी जा रहा है कि सत्र पुराने संसद भवन से शुरू और नए संसद भवन में ़अंत हो सकता है। हालांकि, राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में 9 और 10 सितंबर को जी-20 शिखर सम्मेलन के वुछ दिनों बाद होने वाले सत्र के एजेंडे पर कोईं भी आधिकारिक बयान नहीं आया है। सूत्रों के मुताबिक, विशेष सत्र में संसदीय संचालन को नए संसद भवन में भी स्थानांतरित किया जा सकता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 28 मईं को इसका उद्घाटन किया था।
फिलहाल नए संसद भवन को सत्रों की मेजबानी के लिए तैयार करने के लिए अंतिम रूप दिया जा रहा है। चूंकि सत्र का कोईं एजेंडा स्पष्ट नहीं है, इसलिए अटकलें तेज हो गईं हैं कि लोकसभा चुनावों से पहले मोदी सरकार वुछ विशेष विधेयकों को पारित करने पर विचार कर रही है। इससे पहले संसद का विशेष सत्र 30 जून 2017 की मध्य रात्रि को जीएसटी लागू करने के लिए बुलाया गया था। किसी दूरगामी राजनीतिक महत्व के एजेंडे को लेकर ही संसद के विशेष सत्र होते रहे हैं। ऐसे भी इस बार निम्नलिखित बड़ी संभावनाओं पर चर्चा जोरों पर है। पहला: महिलाओं के लिए संसद में एक तिहाईं अतिरिक्त सीट देना, दूसरा: नए संसद भवन में शिफ्ट करना, तीसरा: यूनिफार्म सिविल कोड बिल पेश हो सकता है। चौथा: लोकसभाविधानसभा चुनाव साथ कराने का बिल आ सकता है। पांच: आरक्षण पर प्रावधान संभव। ओबीसी की वेंद्रीय सूची के 34वें वगाकरण, आरक्षण के ससम्मान वितरण के अध्ययन के लिए 2017 में बने रोहिणी आयोग ने 1 अगस्त को राष्ट्रपति को रिपोर्ट दी है। ज्यादातर भाजपा नेताओं ने संकेत दिए हैं कि विशेष सत्र के पवित्र दिनों में ही एजेंडे की पहेली का भेद छिपा है। सत्र के पांच दिनों में से चार दिन मां गौरी को समर्पित हैं। दावा तो यह भी है कि सत्र अमृत काल के खास क्षण चंद्रयान-3 और जी-20 शिखर सम्मेलन के जश्न तक ही सीमित होगा। बाकी तो 18 सितंबर के बाद ही पता चलेगा।
— अनिल नरेद्र
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