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Thursday, 13 February 2025

मिल्कीपुर में भाजपा की जीत



भाजपा की जीत उत्तर प्रादेश उपचुनाव में भाजपा को मिली जीत के कईं संदेश हैं।

पहली बात तो यह है कि यहां पिछड़ी जातियों के ज्यादातर मतदाताओं ने भाजपा को वोट दिया। इस सीट पर भाजपा के चंद्रभानू पासवान ने 61,719 वोट के अंतर से अपने निकटतम प्रातिद्वंद्वी सपा के अजीत प्रासाद को हराया। चंद्रभानू को 1,46,397 वोट मिले जबकि सपा उम्मीदवार को 84,000 से अधिक वोट हासिल हुए। पारंपरिक तौर पर ऐसा माना जाता है कि मुस्लिम वोटरों का प्राभाव समाजवादी पाटा की तरफ रहता है लेकिन इस उपचुनाव में सपा को लोकसभा चुनाव की तरह मुस्लिम मतदाताओं का साथ नहीं मिला। सपा के लिए प्राचार करने वाले अयोध्या के पूर्व विधायक पवन पांडे भी पाटा के लिए ज्यादा कारगर साबित नहीं हुए। माना जाता है कि पवन पांडे का ब्राrाण समुदाय में अच्छा आधार है। 2024 के लोकसभा चुनाव में सपा के पीडीए का पैजाबाद लोकसभा क्षेत्र में जो जादू चला था वो मिल्कीपुर उपचुनाव में नहीं चल सका। मगर जातीय आंकड़ों की बात करें तो मिल्कीपुर विधानसभा क्षेत्र में वुल मतदाताओं में से 30 प्रातिशत दलित समुदाय है।

वहीं यादव और मुस्लिम समुदाय लगभग बराबर संख्या में है। इसके अलावा ब्राrाण, ठावुर, बनिया समेत अगड़ी जाति के वोटरों की संख्या अच्छी खासी है। बाकी के वोटरो में धोबी, वुम्हार, लोधी, लोहार समेत अन्य जाति पिछड़े वर्ग से आते हैं। भाजपा के लिए सबसे बड़ी चुनौती यादवों को अपनी तरफ मोड़ना था। भाजपा ने चुपचाप इस मिशन पर काम किया, पाटा के कार्यंकर्ताओं ने समुदाय के प्राधान, समुदाय के पूर्व प्राधानों से संपर्व किया और उन लोगों से संपर्व किया, जिन्होंने छोटेछोटे चुनाव लड़े थे लेकिन उन्हें सफलता नहीं मिली थी। यादवों को एकजुट करने में आरएसएस पदाधिकारी ने अहम भूमिका निभाईं और वो इसके लिए पिछले छह महीने से काम कर रहे थे। उधर एक स्थानीय नेता का कहना था कि समाजवादी पाटा ने ब्राrाणों के बीच कोईं ठीक काम नहीं किया। मिल्कीपुर में दलित मतदाताओं की संख्या सबसे ज्यादा है। इनमें से बड़ी संख्या में लोगों की पहली पसंद इस चुनाव में भाजपा रही। इस निर्वाचन क्षेत्र में दो प्रामुख दलित समुदाय है, पासी और कोरी। भाजपा ने इन दोनों प्रामुख समूहों के बीच पाटा की पैठ बनाने में अहम भूमिका निभाईं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पारम्परिक तौर पर सपा को मुस्लिम वोट मिलता है लेकिन इस बार ऐसा नहीं हुआ। उनका वोट टर्न आउट कम रहा। इनका यह भी कहना है कि उपचुनाव में सत्ताधारी पाटा को हटाना आसान नहीं होता क्योंकि सारी सरकारी मशीनरी उनके साथ होती है। वरिष्ठ पत्रकार हालांकि यह भी कहते हैं कि मिल्कीपुर में मिला जनादेश भाजपा को मिला जनादेश का मुकाबला अयोध्या में भाजपा की हार से पुख्ता नहीं होता। दिल्ली विधानसभा चुनाव और मिल्कीपुर उपचुनाव के नतीजों पर सपा प्रामुख अखिलेश यादव ने भाजपा पर चुनाव में ईंमानदारी न बरतने का आरोप लगाते हुए कहा पीडीए की पहली शक्ति का सामना भाजपा वोट के बल पर नहीं कर सकती है। इसलिए वो चुनावी तंत्र का दुरुपयोग करके जीतने की कोशिश करती है। ऐसी चुनावी धांधली करने के लिए जिस स्तर पर अधिकारियों को हेरापेरी करनी होती है वो एक विधानसभा में तो भले किसी तरह संभव है, लेकिन 403 विधानसभाओं में से चार सौ बीस नहीं चलेगी। उन्होंने आगे कहा जो लोग ये कह रहे हैं कि मिल्कीपुर जीतकर अयोध्या का बदला ले लिया, अयोध्या का बदला कोईं नहीं ले सकता। इसमें कोईं संदेह नहीं कि उत्तर प्रादेश से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मिल्कीपुर को अपनी प्रातिष्ठा का प्राश्न बना लिया था।


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