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Saturday, 8 February 2025

हमें हथकड़ियां, पैरों में बेड़ियां पहनाई गईं



अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अवैध प्रवासियों को खदेड़ने की सबसे बड़ी कार्रवाई शुरू कर दी है। अमेरिका से अवैध प्रवासी भारतीयों के पहले ग्रुप को डिपोर्ट कर दिया गया है। भारतीय समयानुसार मंगलवार तड़के अमेरिकी सैन्य विमान सी-17 ग्लोब मास्टर इन्हें लेकर सैन एटोनिया से रवाना होने के बाद लगभग 40 घंटे की उड़ान के बाद अमृतसर हवाई अड्डे पर उतरा। कड़े पहरे में 104 भारतीयों को सी-17 अमेरिकी विमान में चढ़ते देखना जितना शर्मसार करने वाला था, उतना ही दर्दनाक और अमेरिकी निष्ठुरता को प्रतिबंधित करने वाला था। हालांकि यह पहला मौका नहीं है जब अवैध प्रवासी भारतीय वापस भेजे गए हों लेकिन इस बार कई ऐसी बातें हैं जो इसे अतीत की ऐसी घटनाओं से अलग करती हैं। अवैध प्रवासियों की उचित तरीकों से पहचान कर उन्हें उनके देशों में वापस भेजा जाना एक स्वाभाविक प्रािढया रहा है। भारत का इस मामले में शुरू से सहयोगात्मक रुख रहा है। पर सवाल वापसी के तरीकों का है। अमेरिकी विमान से बुधवार को लाए गए 104 निर्वासितों में शामिल जसपाल सिंह ने दावा किया कि पूरी यात्रा (लगभग 40 घंटे)। उन्हें निर्वासित प्रवासियों को हथकड़ी और पैरों में बेड़ियां बांधी गईं तथा अमृतसर हवाई अड्डे पर उतरने के बाद ही उन्हें हटाया गया। अवैध प्रवासियों के खिलाफ कार्रवाई के तहत डोनाल्ड ट्रंप सरकार द्वारा भेजा गया यह भारतीयों का पहला जत्था है। निर्वासित लोगों में 19 महिलाएं, 13 नाबालिग शामिल हैं, जिसमें एक चार वर्षीय लड़का, पांच व सात साल की दो लड़कियां शामिल हैं। इस 36-40 घंटे की उड़ान में अप्रवासियों को न तो कुछ खाने को दिया गया, न ही पानी की सुविधा। टॉयलेट जाने के लिए एक सैनिक साथ जाता था और टॉयलेट का दरवाजा खुला रखने का आदेश था। सवाल उठता है कि क्या यह अप्रवासी कोई आतंकवादी है या कोई अपराधी? इतना अमानवीय व्यवहार कैसे किया जा सकता है। हमसे तो छोटा सा देश कोलंबिया बेहतर रहा जहां मुश्किल से 5 करोड़ लोगों की आबादी है ने अमेरिकी सैन्य विमान जिसमें कोलंबिया के वे अप्रवासी वापस भेजे गए थे को अपने हवाई अड्डे पर उतरने की इजाजत नहीं थी। उन्होंने अपने दो विमान अमेरिका भेजे और अपने नागरिकों को पूरे सम्मान के साथ वापस लाया। हवाई अड्डे पर खुद कोलंबिया के राष्ट्रपति मौजूद थे अपने नागरिकों के स्वागत करने के लिए। अमेरिकी राष्ट्रपति के रूप में पदभार संभालने के बाद अमेरिका की एजेंसियों ने अवैध प्रवासियों के खिलाफ जो अभियान चलाया हुआ है, उसे कठोर कहने वाले भी हैं, लेकिन ट्रंप की यही शैली है। अलबत्ता भारत के नजरिए से यह जरूर एवं गंभीर मुद्दा है। अवैध रूप से विदेश जाने के लिए लोग अक्सर लाखों रुपए खर्च कर डंकी रूट या दूसरे खतरनाक रास्तों का उपयोग करते हैं, जो न केवल उनमें जीवन के लिए जोखिम भरा है, बल्कि मानव तस्करी जैसे अपराधों को भी बढ़ावा देता है। सवाल उन परिस्थितियों पर भी उठने चाहिए, जिनसे बचने के लिए देश के युवा इतना जोखिम उठाने को तैयार हो जाते हैं। जो वापस आ रहे हैं, उनके सहारे उन माफियाओं तक तो पकड़ बनाई जा सकती है, जो लोगों को अवैध ढंग से दूसरे देशों में भेजने के काम में लिप्त हैं। इसमें कोई दो राय नहीं कि अवैध प्रदेश या घुसपैठ किसी देश को मान्य नहीं हो सकता। भारत खुद इनका सबसे बड़ा शिकार है। लाखों बांग्लादेशी घुसपैठियों के साथ-साथ हजारों रोहिंग्या यहां वर्षों से रह रहे हैं। भारत सरकार को और अवैध प्रवासियों को वापस लाने की प्रािढया तय करनी होगी और अमेरिका के अमानवीय व्यवहार पर आपत्ति दर्ज करानी चाहिए।

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