Tuesday, 25 March 2025

एक्स ने केंद्र सरकार पर किया केस

एक तऱफ एलन मस्क की कंपनियां स्टारलिंक और टेस्ला भारत में प्रवेश करने की ओर क़दम बढ़ा रही हैं। वहीं दूसरी तऱफ उनकी कंपनी एक्स ने कर्नाटक हाई कोर्ट में भारत सरकार के ख़िल़ाफ एक याचिका दायर की है। 5 मार्च को दायर अपनी याचिका में एक्स ने कहा है कि भारत सरकार ग़ैर-क़ानूनी तऱीके से वेबसाइट से कंटेंट हटाने का आदेश दे रही है। उन्होंने कहा कि ‘अनगिनत’ सरकारी अ़फसरों को अब ये अधिकार मिल गया है कि वो कंटेंट हटाने का आदेश दे सकें। एक्स ने कोर्ट से इस पर रोक लगाने की माँग की है। साथ ही यह भी कहा कि सरकार ने एक वेबसाइट बनाई है ‘सहयोग पोर्टल’, जिससे सरकार की अलग-अलग एजेंसियां कंटेंट हटाने का आदेश दे सकती हैं। एक्स का कहना है कि ये वेबसाइट भी क़ानून के ख़िल़ाफ है और इस वेबसाइट से जुड़ने से एक्स ने मना कर दिया है। अपनी याचिका में उन्होंने ये मांग की है कि इससे न जुड़ने से एक्स के ख़िल़ाफ कोई कार्रवाई न हो। क़ानून के विशेषज्ञों का मानना है कि ये एक अहम केस है, जिससे सरकार की इंटरनेट पर कंटेंट हटाने कि शक्ति के अहम मुद्दों पर फ़ैसला होगा। एक्स ने सूचना प्रोद्योगिकी (आईटी) अधिनियम की केंद्र की व्याख्या विशेष रूप से उसके द्वारा धारा 79(3बी) के उपयोग पर चिंता जताई जिसके बारे में एक्स ने दलील दी है कि यह सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का उल्लघंन है और डिजिटल मंच पर अभिव्यfिक्ति की स्वतंत्रता को कमतर करता है। बाद में आरोप लगाया गया है कि सरकार धारा 69ए में उल्लिखित कानूनी प्रक्रिया को दरकिनार करते हुए एक समांतर सामग्री अवरोधक तंत्र बनाने के लिए उक्त धारा का इस्तेमाल कर रही है। एक्स ने दावा किया कि यह दृfिष्टकोण श्रेया सिंघल मामले में सुप्रीम कोर्ट के 2015 के फैसले के विरोधाभासी है जिसमें यह स्थापित किया गया था कि सामग्री को केवल उचित न्याय प्रक्रिया या धारा 69ए के तहत कानूनी रूप से परिभाfिषित किया जा सकता है। अपनी याचिका में एक्स ने यह भी कहा है कि प्रक्रिया का पालन किए बिना मनमाने ढंग से सेंसरशिप लगाने की कोशिश की जा रही है। कंटेंट ब्लाक का अधिकार नहीं है। कंपनी ने कहा सरकार कंटेंट ब्लाक के लिए समांतर सिस्टम का इस्तेमाल कर रही है। अमेरिकी अरबपति एलन मस्क की कंपनी की दलील है कि आईटी अधिनियम धारा 79(3) कानून सरकार को स्वतंत्र रूप से कंटेट ब्लॉक करने की इजाजत नहीं देती। सरकार निर्धारित प्रक्रिया का पालन करने के बदले धारा 79(3बी) का गैरकानूनी तरीके से इस्तेमाल कर रही है। यह आनलाइन अfिभिव्यfिक्ति की स्वतत्रंता को कमजोर करता है। मुकदमा दायर करने की एक वजह यह भी है कि कंपनी किसी गैर कानूनी कंटेट को रोकने के लिए सरकार की तरफ से बनाए सहयोग पोर्टल का हिस्सा नहीं बनना चाहती है। कंटेंट हटाने से जुड़े कई और मुद्दे हैं जो अदालतों के सामने हैं। जैसे सुप्रीम कोर्ट में भी एक याचिका लंबित है जिसमें याचिकाकर्ताओं का ये कहना है कि धारा 69ए के अंतर्गत नियमों में दी गई प्रक्रिया का उल्लघंन करके सरकार कंटेंट हटाने का आदेश देती है। देखते हैं कि कर्नाटक हाईकोर्ट में यह केस कैसे आगे बढ़ता है।

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