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Friday, 3 June 2011

भुल्लर तो बहाना है असल निशाना विधानसभा चुनाव हैं

Vir Arjun, Hindi Daily Newspaper Published from Delhi
Published on 3rd June 2011
अनिल नरेन्द्र
यह अत्यन्त दुर्भाग्यपूर्ण है कि हमारे देश में सुरक्षा, कानून व्यवस्था, सभी का वोट बैंक पालिटिक्स को कबाड़ा कर रहा है। हम यह भूल जाते हैं कि एक आतंकवादी सिर्प आतंकवादी होता है, जिसका एक मात्र मकसद होता है अपने उद्देश्य को पाप्त करना। इसके लिए वह न तो सामने वाले का धर्म देखता है, न शख्सियत। एक आतंकवादी का कोई धर्म नहीं उसका धर्म है तो बंदूक व बारूद। ताजा विवाद देवेन्द्र सिंह भुल्लर को लेकर है। राष्ट्रपति की ओर से देवेन्द्र पाल सिंह भुल्लर की रहम याचिका खारिज किए जाने के बाद कुछ सियासी दलों को आगामी पंजाब विधानसभा चुनावों के लिए अपनी-अपनी राजनीति चमकाने का मौका मिल गया है। पंजाब में चुनाव अगले साल फरवरी में होना है। हालांकि पिछले डेढ़ दशक में पंजाब में कोई बड़ी आतंकवादी वारदात नहीं हुई है लेकिन उग्रवाद और 1984 के फसाद से जुड़े मुद्दे चुनाव के दौरान हमेशा सिर उठा लेते हैं। विलायत, खासकर कुछ यूरोपीय देशों और अमेरिका में बसे खालिस्तानी विचार धारा के पोषक हमेशा ऐसे मुद्दों की तलाश में रहते हैं जिससे पंजाब में फिर उग्रवाद का दौर आरम्भ किया जा सके। इनकी मदद को हमेशा आईएसआई जैसे संगठन तैयार बैठे रहते हैं। बेशक पंजाब की जनता ने उग्रवाद को सिरे से नकार दिया और अमन-चैन भंग नहीं होने दिया पर फिर भी कुछ मजहवी मसले पंजाबियों के वर्ग के लिए एक दुखती रग की तरह जरूर रहे हैं। भुल्लर पर हुए अपत्याशित फैसले ने जो वर्षों बाद अचानक ही आ गया, ने एक बहस पैदा कर दी है जिसका असर आगे दिख सकता है। जाहिर है कि अगले कुछ महीनों में यह मसला और गरमा सकता है, क्योंकि कुछ राजनीतिक दल चुनाव अभियान के लिए इसे भुनाने के लिए तैयार हैं।
फांसी की सजा का इंतजार कर रहे भुल्लर की रहम याचिका खारिज होने के बाद सिखों के विभिन्न पथिक समूह भी साथ हो गए हैं। इस तरह के दर्जन भर संगठनों ने बैठक कर दया याचिका खारिज करने के फैसले की कड़ी निंदा करते हुए केन्द्र सरकार को गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी तक दे डाली है। इन संगठनों का कहना है कि इलेक्ट्रिक इंजीनियर और गुरु नानक देव इंजीनियरिंग कालेज का पूर्व अध्यापक भुल्लर सिर्प खालिस्तानी विचारक थे। उसने सकिय रूप से किसी भी आतंकी घटना में भाग नहीं लिया। दिल्ली बम कांड में भी उसके खिलाफ कोई गवाह नहीं था। बाद में अदालत में वह अपने बयान से पीछे हट गया था। दिल्ली बम कांड के फौरन बाद भुल्लर जर्मनी भाग गया था। लेकिन वहां पनाह नहीं मिली और उसका पत्यर्पण कर भारत लाया गया। उसकी सजा बदलने के पक्ष में यह कारण भी दिया जा रहा है कि दिल्ली उच्च न्यायालय के फैसले को कायम रखने के समय सुपीम कोर्ट की पीठ भी एकमत नहीं थी। तीन न्यायाधीशों में एक ने उसे आरोपों से मुक्त कर दिया है और विधि विशेषज्ञ कहते हैं कि उसकी सजा को आजीवन कैद में बदलने के लिए यह वैध कारण हो सकता है।
बम विस्फोट के दोषी खालिस्तान लिबरेशन फोर्स के आतंकी देवेन्द्र सिंह भुल्लर की दया याचिका खारिज होने के बाद वैसे अब उसके लिए संविधान में कोई रास्ता नहीं बचा है। राष्ट्रपति से दया याचिका खारिज होने के बाद भारतीय संविधान में दोषी साबित व्यक्ति की सजा के खिलाफ अपील करने के अधिकार समाप्त हो जाते हैं। देखना अब यह है कि केन्द्र सरकार इस ज्वलंत मुद्दे पर क्या करती है?
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एक और बहादुर कलम का सिपाही आतंक की बलि चढ़ा

Vir Arjun, Hindi Daily Newspaper Published from Delhi
Published on 3rd June 2011
अनिल नरेन्द्र
एक और कलम का सिपाही आतंकवाद की बलि चढ़ गया। पाकिस्तान का एक बहादुर पत्रकार सैयद सलीम शहजाद हफ्ते भर से लापता था। मंगलवार को पंजाब पांत से उसका शव बरामद हुआ। शव की हालत देखकर स्पष्ट हो रहा है कि हत्या से पहले उन्हें बुरी तरह से पताड़ित किया गया। लापता होने से दो दिन पहले शहजाद ने एक लेख में पाकिस्तान की नौसेना के कुछ अफसरों और आतंकी संगठन अलकायदा की साठगांठ का जिक किया था। सैयद सलीम शहजाद 40 वर्ष के थे। वह अपने पीछे बीवी अनिला, दो लड़के फहाद (14) और सैयद (8) व एक बेटी अमीना (12) को छोड़कर आतंकवाद की बलि चढ़ गए। शहजाद एशिया टाइम्स (आनलाइन) अखबार हांगकांग के पाकिस्तान ब्यूरो चीफ थे। शहजाद ने दो पुस्तकें इनसाइड अलकायदा एंड तालिबान द बियौंड बिन लादेन एंड 9/11 भी लिखी थी। शहजाद ने कुछ समय के लिए टाइम्स ऑफ इंडिया के लिए भी रिपोर्टिंग की थी।
सैयद सलीम शहजाद का शव मंगलवार सुबह लाहौर से करीब दो सौ किलोमीटर झेलम कस्बे के सराय आलमगीर इलाके में एक नगर से मिला। पास ही में उनकी कार भी लावारिस हालत में खड़ी मिली। शव पर टार्चर के निशान साफ थे। इतालवी न्यूज एजेंसी के लिए भी काम करने वाले शहजाद अकसर अपनी रिपोर्टिंग में पाकिस्तान व अफगानिस्तान के आतंकवादियों और पाकिस्तानी पतिष्ठानों के साथ उनके सम्पर्कों के बारे में लिखते रहते थे। लापता होने से दो दिन पहले शहजाद ने एक लेख में पाकिस्तान की नौसेना के कुछ अफसरों और आतंकी संगठन अलकायदा की साठगांठ का जिक किया था। शहजाद आईएसआई की हिट लिस्ट पर काफी समय से थे और उन्हें जान से मारने की धमकी भी आईएसआई दे चुका था। जियो टीवी ने एक ब्लैक एंड व्हाइट तस्वीर दिखाई जिसमें शहजाद के चेहरे पर पताड़ना की झलक साफ नजर आ रही थी। 27 मई को शहजाद ने एक लेख जिसका शीर्षक था अलकायदा हैड वार्नड आफ पाकिस्तान स्ट्राइक एशिया टाइम्स ऑन लाइन में लिखा था। इस लेख में उन्होंने बताया था कि पीएनएस मेहरान नेवल बेस पर 22 मई को अलकायदा का जो हमला हुआ वह तब हुआ जब अलकायदा और नेवी के अफसरों के बीच बातचीत के दौर टूटने के बाद हुआ था। अलकायदा चाहता था कि पाकिस्तानी नेवी अफसर उनके कुछ समर्थक जो पाक नौसेना के कब्जे में हैं को रिहा किया जाए। अलकायदा आतंकी सम्पर्कों के चलते गिरफ्तार किए गए नौसेना कर्मियों की रिहाई चाहता था। रविवार शाम को इस्लामाबाद स्थित अपने घर से निकलने के बाद लापता हो गए थे। वह नौसेना के मेहरान नेवल बेस पर आतंकी हमले से संबंधित एक टीवी कार्यकम में हिस्सा लेने के लिए `दुनिया' न्यूज चैनल के दफ्तर जा रहे थे। पाकिस्तानी मीडिया में ऐसी खबरें आई थीं कि मुल्क की खुफिया एजेंसी आईएसआई ने उन्हें अगवा कर लिया है। कई अंतर्राष्ट्रीय पत्रकार संगठनों व मानवाधिकार संगठनों ने पाक सरकार से शहजाद का पता लगाने की अपील भी की थी। शहजाद की हत्या की जिम्मेदारी अभी तक किसी आतंकी संगठन ने नहीं ली है। शहजाद की मौत से पता चलता है कि पाकिस्तान में कलम के सिपाही अपनी जान हथेली पर लेकर जी रहे हैं। हम श्री सैयद सलीम शहजाद को सलाम करते हैं और उनके परिवार वालों को कहना चाहते हैं कि दुख की इस बेला में वह अकेले नहीं हैं।
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Thursday, 2 June 2011

2-जी स्पेक्ट्रम घोटाले के 14वें आरोपी करीम मोरानी भी पहुंचे तिहाड़


Vir Arjun, Hindi Daily Newspaper Published from Delhi
Published on 2nd June 2011
अनिल नरेन्द्र
बॉलीवुड फिल्मों के निर्माता और किंग खान उर्प शाहरुख खान के मित्र करीम मोरानी आखिर धरे ही गए। सीबीआई विशेष अदालत के जज ओपी सैनी ने मोरानी की जमानत याचिका रद्द कर दी और जेल भेजने का आदेश सुना दिया। जमानत की सुनवाई के दौरान आरोपी द्वारा एक महीने से भी कम समय में सात अर्जी लगाए जाने पर कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया। जज ने कहा ऐसा लगता है कि जानबूझकर कानूनी टाल-मटोल का रास्ता अपनाया गया। उन्होंने कहा कि मोरानी 6 मई से लेकर 23 मई तक चिकित्सा के नाम पर हाजिर नहीं हुए जबकि 11 मई को सौंपे गए रिपार्ट में उनकी स्थित स्थिर और सामान्य बताई गई थी। आरोपी को जेल भेजने के साथ ही आरोप पत्र में शामिल सभी 14 आरोपी तिहाड़ जेल पहुंच गए। ये हैं 2-जी स्पेक्ट्रम घोटाले के 14 आरोपी ः ए. राजा सांसद-डीएमके, पूर्व केन्द्राrय संचार मंत्री सिद्धार्थ बेहुरा, पूर्व दूरसंचार सचिव आरके भदोलिया, निजी सचिव ए. राजा, विनोद गोयनका-स्वान टेलीकॉम पमोटर एवं निदेशक डीबी ग्रुप पा. लि., हरि नायर सीनियर वाइस पेसिडेंट, रिलायंस, आसिफ बलवा निदेशक, पुंसेगांव पूट्स एवं वेजिटेबल पा. लि., राजीव अग्रवाल निदेशक पुंसेगांव पूट्स एवं वेजिटेबल पा. लि., संजय चंद्रा निदेशक यूनिटेक वायरलेस (तमिलनाडु) पा.लि., कनिमोझी सांसद डीएमके, स्टाक होल्डर (20 पतिशत, कलेंगनार टीवी पा. लि.), शरद कुमार निदेशक एवं स्टाक होल्डर (20 पतिशत कलेंगनार टीवी पा. लि.) और करीम मोरानी निदेशक सिनेयुग मीडिया पा. लि.।
आरोप के अनुसार डीबी रियलिटी से 200 करोड़ पुंसेगांव पूट्स एवं वेजिटेबल पा. लि. और वहां से सिनेयुग मीडिया पा. लि. के जरिए कलेंगनार टीवी पा. लि. को मिले। पैसा स्वान टेलीकॉम को स्पेक्ट्रम आवंटन के बदले में दिया गया था। सीबीआई के मुताबिक सौदेबाजी में सबसे बड़ी भूमिका करीम मोरानी की रही है जिन्होंने छह करोड़ का फायदा उठाया। सुनवाई के दौरान सीबीआई ने कहा कि मोरानी को जानकारी थी कि यह दूषित पैसा है। उन्होंने लोन लेकर कलेंगनार को लोन दिया जबकि सिनेयुग गैर वित्तीय कंपनी भी नहीं है। डीबी रियलिटी के एकाउंटेंट सतीश अग्रवाल ने बताया कि पुंसेगांव को दो सौ करोड़ 23 दिसम्बर 2008 से लेकर 11 अगस्त 2009 के बीच बिना कोई समझौते के ही दे दिया गया। उसके बाद यही पैसा वहां से सिनेयुग में चला गया।
सीबीआई अदालत में एक तरफ मोरानी की जमानत पर बहस हो रही थी तो दूसरी तरफ फिल्मी हिरोइनों की मौजूदगी से अदालत में हलचल मच गई। आने वाली फिल्म `आलवेज कभी-कभी' की नायिका जोया मोरानी उस समय भावुक हो गई जब उसके पिता को जेल भेज देने का आदेश सुनाया गया। कोर्ट रूम में वह कभी अपनी मां का मुंह ताकती रही, कभी अपनी बहन का तो कभी पिता को निहार रही थी। जब पुलिस मोरानी को लॉक-अप में ले जाने लगे तो जोया जमीन पर बैठकर बुहत देर तक रोती रही। आखिरकार एक महिला ने आकर जब ढांढस बंधाया तब जाकर संभली। कोर्ट में एक और नायिका भी आई हुई थीं, अभिनेत्री खुशबू। खुशबू कनिमोझी और ए. राजा से मिलने आई थी। अब सब आरोपियों की तिहाड़ में महफिल लगेगी।
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गरीब को ही मार दो, गरीबी अपने आप मिट जाएगी


Vir Arjun, Hindi Daily Newspaper Published from Delhi
Published on 2nd June 2011
अनिल नरेन्द्र
हमें लगता है कि यूपीए की मनमोहन सिंह सरकार ने यह नीति बनाई है कि गरीब को ही मार दो, महंगाई अपने आप दूर हो जाएगी। यदि ऐसा न होता तो कमरतोड़ महंगाई पर कुछ तो नियंत्रण लगाने का पयास यह सरकार करती? उलटा अब फिर पेट्रोल के दाम, डीजल व केरोसिन तेल के दाम बढ़ाने की तैयारी चल रही है। यह हाल तब है जबकि अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत पति बैरल घटी है। पेट्रोलियम मंत्री जयपाल रेड्डी ने मंगलवार को देहरादून में कहा कि विदेशी कच्चे तेल के मुकाबले घरेलू बाजार में पेट्रोल की कीमतें अभी भी कम हैं और तेल बेचने वाली कम्पनियों को अभी नुकसान हो रहा है। तेल बेचने वाली कंपनियों को पेट्रोल के हर लीटर पर चार रुपए से ऊपर का नुकसान बता रहे हैं जयपाल रेड्डी। उसी दिन इंडियन आयल कंपनी के अध्यक्ष आरएस बुटाला ने पेस कांपेंस की और बताया कि कम कीमत पर उत्पादन बेचने की वजह से कम्पनी का शुद्ध लाभ 2009-10 की तुलना में घटा है। कंपनी को 2009-10 में 10,221 करोड़ रुपए का लाभ हुआ था जो घटकर समाप्त वित्त वर्ष की अंतिम तिमाही में 3905 करोड़ 16 लाख रुपए रहा। यानि की यह शुद्ध लाभ की बात कर रहे हैं जबकि मंत्री जी कंपनी में घाटे की बात कर रहे हैं। वैश्विक बाजार में अन्य मुद्राओं की तुलना में डॉलर की मजबूती की वजह से कच्चे तेल के दाम 99 डॉलर पति लीटर आ गए। उल्लेखनीय है कि पिछले माह के शुरुआत में कच्चे तेल की कीमतें 34 माह की सर्वाधिक ऊंचाई 115 डॉलर पति बैरल पहुंच गई थी। पाठकों को यह जानकर हैरानी होगी कि पाकिस्तान में इस समय पेट्रोल के दाम कुल 17 रुपए पति लीटर है जबकि इंडोनेशिया जैसे देशों में पेट्रोल की कीमत इससे भी कम है।
इन तेल कंपनियों ने देश के गरीब, मध्य वर्ग, कर्मचारी वर्ग के नाक में दम कर रखा है। हम मांग करते हैं कि इन बड़ी-बड़ी तेल कंपनियों की वित्तीय जांच कराई जाए? आखिर इनके खर्चों का हिसाब क्या है? इनकी अय्याशी की वजह से जनता क्यों पिसे? दरअसल यह नवरत्न ही देश को लूट रही हैं। आज तक सरकार ने यह कभी नहीं बताया कि निजी कमर्शियल क्षेत्र में पेट्रोल की डीजल की कितनी खपत होती है। हमारा अनुमान है कि तेल की कुल खपत में सरकारी व इन नवरत्न कंपनियां, रेलवे, एयर लाइंस इनमें 70 से 80 पतिशत खपत होती है। सरकार अपने कोटे में दस पतिशत कमी क्यों नहीं करती। बार-बार कीमतें बढ़ाकर महंगाई को बढ़ाने से बाज आए। जनता को यह भी अधिकारिक रूप से बताया कि आजकल बिक रहे दिल्ली में 63.37 पैसे पति लीटर पेट्रोल में सरकारी कर कितने हैं? सरकार को कोस्ट क्या आती है जिसे वह 63 रुपए पर बेचती है?
अर्थशास्त्री डा. मनमोहन सिंह से देश को बहुत उम्मीदें थीं पर उन्होंने सब पर पानी फेर दिया। मनमोहन सिंह से तो जयादा संवेदनशील हमारा सुपीम कोर्ट है जिसने हाल ही में एक फैसले में कहा कि मुक्त बाजार समस्याओं का हल नहीं है। सुपीम कोर्ट ने आधुनिक अर्थव्यवस्था के नीतिगत स्तम्भों, उदारीकरण, निजीकरण और वैश्विकरण की जबर्दस्त आलोचना करते हुए कहा कि मुक्त बाजारों की कार्यपणाली पर पुनर्विचार करने की जरूरत है। न्यायाधीश सुदर्शन रेड्डी की पीठ ने साफ कहा कि सरकार मुक्त बाजार के नाम पर अपने उस संवैधानिक दायित्व से नहीं बच सकती जिसके तहत उसे जन कल्याण के लिए काम करना जरूरी है। `बिना नियमन वाली मुक्त व्यवस्था में बाजार व्यापक तौर पर विफलता की ओर जाएंगे।
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Wednesday, 1 June 2011

Pakistan’s Existence in Danger

Anil Narendra
Pakistan’s very existence has now become a big question mark. Taliban has said that Pakistan’s nuclear arsenal is no longer their target. Taliban’s target, now is not only to capture the nuclear bombs but also Pakistan. As we all are aware after the death of Osama Bin Laden, Taliban has un-leashed the campaign of terrorists in Pakistan. Taliban’s spokesman Ahsaan Ullah had the guts to say that our objective is now to capture power in Pakistan. A reporter of the Wall Street Journal spoke to Ahsaan over phone wherein Ahsaan told him that Pakistan is the only Muslim Country which has the atomic bomb and hence we want to capture it.
 Taliban’s threat cannot be taken lightly. Few days back when the Naval Base Mehran was attacked by a handful of Al-Qaeda militants, they were successful in their objective to a very large extent. This was also because a section of the Pakistani military sympathizers of Al-Qaeda provided these militants with vital information of the airbase. The place where the Al-Qaeda militants struck was hardly 24 km away from the Nuclear Arsenal Depot. P.N.S. Mehran is one of the most important and well guarded naval airbases of Pakistan. Without the active support of a section of the Pakistani Army and Defense Establishment, success in this attack could not be guaranteed. The way these militants fought for hours with the Pakistani commandos goes to prove that not only were they fully equipped for the job but were well armed with prior strategic information about the base. 
There is virtually a civil war kind of situation going on in Pakistan today and in these circumstances we can not afford to talk the Taliban’s threat lightly. I can not imagine the catastrophic situation wherein Taliban succeeds in their attempt. Behind the facade of political leadership the real force is the Pakistan’s army and the way Al-Qaeda and Taliban element are succeeding in their strike day after day proves that even the Pakistan Army is unable to contain these terrorists elements. The writ of the Government of Asif Ali Zardari and Yusuf Raza Gilani hardly extends beyond the metros of Pakistan. The situation is so grave that even Indian Prime Minister Man Mohan Singh who is well known for his peaceful co-existence thesis is now asking for caution vis-à-vis Pakistan. India cannot prevent the Talibani’s from taking over Pakistan but the United States is definitely in a position to do so. The US can ensure that Al-Qaeda and Taliban do not succeed in their extremely dangerous plan. The least the Americans can do for the time being is to take control of this nuclear arsenal of Pakistan. This will at least prevent a very grave danger, the rest can be looked into later on.
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आईपीएल की वजह से छिड़ी क्लब बनाम देश बहस


Vir Arjun, Hindi Daily Newspaper Published from Delhi
Published on 1st June 2011
अनिल नरेन्द्र
आईपीएल ने किकेट का रूप ही बदल दिया है। इसका इतना मनोरंजन फारमेट बना दिया है कि सारी दुनिया में यह जितना, लोकपिय हुआ है शायद ही कोई और खेल इतनी रफ्तार से फैला हो। इस फारमेट में सभी कुछ है, खेल, मनोरंजन, ग्लैमर और पैसा। इसने तो खिलाड़ियों की मानसिकता तक बदल दी है। एक नया विवाद शुरू हो गया है, क्लब बनाम देश। अब कई खिलाड़ी आईपीएल खेलना ज्यादा पसंद करते हैं बनिस्पत अपने देश के लिए। यह एक कटु सत्य है। पिछले दिनों हमने देखा कि किस तरह 27 साल की उम्र में श्रीलंकाई तेज गेंदबाज लसिथ मलिंगा ने घोषणा कर दी कि वह अब टेस्ट मैचों से संन्यास ले रहे हैं। वे केवल वनडे और टी-20 में खेलेंगे। टेस्ट से हटने का कारण उन्होंने दाएं घुटने की चोट को बताया, लेकिन यह समझा जा रहा है कि आईपीएल को महत्व देते हुए उन्होंने अपने देश के लिए खेलने से मनाकर दिया। इससे पहले वेस्टइंडीज के किस गेल ने भी इंडीज बोर्ड को पाकिस्तान के खिलाफ जारी वन डे सीरीज खेलने से मना कर दिया और रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु का रुख किया तथा अपने दमदार पदर्शन करके आईपीएल के गोल्डन प्लेयर का खिताब जीता। गेल ने कहा कि उन्हें मलाल है कि उन्हें अपने देश से पर्याप्त प्यार और सम्मान नहीं मिला। गेल ने कहा कि उन्हें टी-20 पतियोगिता में जो प्यार व सम्मान मिला, वह स्वदेश में उनसे दूर रहा। असल कारण है पैसा, आईपीएल में इतना पैसा आ गया है कि खिलाड़ी अब अपने देश की बजाय आईपीएल में खेलना पसंद करने लगे हैं।
आईपीएल के दौरान `क्लब बनाम देश पर शुरू हुई बहस में पूर्व कप्तान कपिल देव और सुनील गावस्कर आमने-सामने आ गए हैं। पूर्व आल राउंडर कपिल का मानना है कि इस संबंध में अंतिम फैसला करने का हक खिलाड़ी को होना चाहिए, क्योंकि वह अपने बारे में निर्णय करने के लिए स्वतंत्र है। वहीं सुनील गावस्कर कहते हैं कि भले ही खिलाड़ियों का हक हो, लेकिन यदि कोई खिलाड़ी देश पर क्लब को तरजीह देता है, तो उसे भविष्य में भी राष्ट्रीय टीम में नहीं चुनना चाहिए। अगर खिलाड़ी को चुनाव करने का हक है तो हमें भी यह अधिकार है कि टीम चयन में उसके नाम पर विचार न करें। दूसरी ओर 1983 विश्व कप विजेता टीम के कप्तान कपिल देव का कहना है कि कोई व्यक्ति देश के लिए खेलना चाहता है तो यह तय करने का उसे अधिकार होना चाहिए। मुझे अपने देश के लिए खेलना पसंद था और मैं खेला भी। लेकिन अब स्थितियां बदल गई हैं। आप इन दिनों किसी के जीवन को नियमित नहीं कर सकते। कोई भी व्यक्ति जो करना चाहता है, उसे वह करने की आजादी होनी चाहिए।
क्लब बनाम देश की बहस लसिथ मलिंगा के टेस्ट से संन्यास लेने के साथ शुरू हुई लेकिन इसने जोर पकड़ा गौतम गंभीर की चोट के बाद। दरअसल गंभीर, सहवाग, सचिन, धोनी और जहीर ने आईपीएल में लगभग सभी मैच खेले। लेकिन अगले महीने जब राष्ट्रीय टीम वेस्टइंडीज दौरे पर जाएगी, तब ये आराम करेंगे। धोनी, जहीर टेस्ट खेलने जाएंगे। पूर्व किकेटरों से लेकर किकेट पमियों में तब से यह बहस जारी है कि आराम का सही समय क्या है?
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पाकिस्तान का तो अस्तित्व ही खतरे में आ गया है

Vir Arjun, Hindi Daily Newspaper Published from Delhi
Published on  1st June 2011
अनिल नरेन्द्र
पाकिस्तान का तो वजूद ही खतरे में आ गया है। तालिबान ने कह दिया है कि पाकिस्तान के परमाणु आयुधों पर हमले की उसकी कोई योजना नहीं है। उसका तो लक्ष्य पाकिस्तान के परमाणु हथियार सहित पाकिस्तान पर कब्जा करना है। तालिबान ने ओसामा बिन लादेन के मारे जाने का बदला लेने के लिए पाक में हिंसक अभियान छेड़ रखा है। तालिबान पवक्ता एहसानुल्ला एहसान ने कहा कि तालिबान का अब लक्ष्य पाकिस्तान और उसके परमाणु हथियारों पर कब्जा करने का है। पाकिस्तान के कराची स्थित नौसेना के पमुख अड्डे पर तालिबान ने पूरे समन्वय के साथ हमला किया था। द वाल स्ट्रीट जनरल की रिपोर्ट के अनुसार उन्होंने इस मुद्दे पर तालिबान पवक्ता से टेलीफोन पर बात की। फोन पर एहसान ने कहा कि पाकिस्तान परमाणु क्षमता वाला अकेला मुस्लिम देश है और तालिबान का इरादा हथियारों को नष्ट करने का नहीं बल्कि पूरे देश और परमाणु हथियारों पर कब्जा करने का है।
तालिबान की धमकी को हल्के से नहीं लिया जा सकता। पिछले दिनों जब कराची के नौ सैनिक अड्डे मेहरान पर मुट्ठी भर आतंकियों को सफलता इसलिए भी मिली क्योंकि पाकिस्तानी सेना में तालिबान समर्थक अधिकारी बैठे हुए हैं। पाकिस्तानी नौसेना के साथ, असैनिक विश्लेषक आइशा सिद्दीकी ने डान अखबार के साथ एक बातचीत में कहा नौसेना संवदेनशील है क्योंकि नौ सेना और वायुसेना दोनों में उग्रवादियों की घुसपैठ है। वह कहती हैं ः नौसेना में आतंकवादियों की घुसपैठ एक पुरानी दास्तान है। आइशा की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब रक्षा विशेषज्ञों का आंकलन है कि पाकिस्तानी नौसेना, वायु सेना और थल सेना तीनों में तालिबान की घुसपैठ हो चुकी है। मेहरान हवाई बेस पर इनकी मदद से ही तालिबान ने सफल हमला किया। जिस जगह हमला हुआ था उससे मुश्किल से 24 किलोमीटर दूर परमाणु हथियारों का डिपो था। पीएनएस मेहरान पाक के सबसे अहम नेवल एयरबेसों में से एक है। बिना भीतरी शख्स की मदद के आतंकवादियों को नेवल बेस में एयरकाफ्ट की मौजूदगी का पता नहीं लग सकता था। जिस तरह से वे घंटों डटे रहे। उससे मालूम होता है कि वे पुख्ता जानकारी के साथ आए थे।
आज जब पाकिस्तान में गृह युद्ध जैसे हालात बन गए हैं, तालिबान की धमकी एक डरावनी हकीकत में न बदल जाए? पर्दे के पीछे से पाक में असल सत्ता चला रही पाक सेना आतंकियों के मुकाबले पस्त दिख रही है। आम पाकिस्तानी न तो अब पाक फौज पर विश्वास करता है और न ही पाक राजनीतिज्ञों पर। आसिफ अली जरदारी और यूसुफ रजा गिलानी की सरकार बस इस्लामाबाद सहित मुट्ठीभर बड़े शहरों तक ही सीमित रह गई है। हालात कितने भयावह हो चुके हैं इसका अंदाजा पधानमंत्री मनमोहन सिंह की चेतावनी से लगाया जा सकता है। हमेशा बातचीत से समस्याओं को सुलझाने की पहल करने वाले मनमोहन सिंह को भी पड़ोसी देश को संभलकर चलने की चेतावनी देनी पड़ी है। पाकिस्तान को तालिबानी हाथों में जाने से फिलहाल केवल अमेरिका ही रोक सकता है। अमेरिका की दोनों पाकिस्तान और अफगानिस्तान में मौजूदगी है। इससे पहले कि तालिबान के हाथ पाक एटमी हथियार लगे, अमेरिका को अविलम्ब इन पाक परमाणु हथियारों को अपने कब्जे में ले लेना चाहिए। ऐसा करने के बाद कम से कम एक बहुत भारी खतरा तो टलेगा, बाकी देखा जाएगा।
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