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Saturday, 25 January 2025
ट्रंप के खिलाफ अमेरिका में बगावत
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पद ग्राहण करते ही आनन- फानन में अनेक पैसले लिए और ऐलान कर डाला उससे स्वाभाविक ही अमेरिका में और दुनिया भर में तरह-तरह के प्राश्न उठने लगे हैं और प्रातिव््िराया भी सामने आने लगी है। अमेरिका में ट्रंप के खिलाफ एक तरह से बगावती स्वर सुनाईं देने लगे हैं। डोनाल्ड ट्रंप के कार्यंकारी आदेशों का देश भर में विरोध शुरू हो गया है। सबसे ज्यादा विरोध ट्रंप के उस आदेश का हो रहा है जिसमें कहा गया है कि अमेरिका में जन्मे व्यक्ति को स्वत: नागरिकता नहीं मिलेगी, यदि उनकी मां अवैध रूप से देश में रह रही हो और पिता नागरिक या वैध स्थाईं निवासी न हों। राष्ट्रपति ट्रंप के द्वारा इस पैसले पर हस्ताक्षर करने के 24 घंटे से भी कम समय में अमेरिका के ही 22 से ज्यादा डेमोव््रोट राज्य खुलकर ट्रंप के विरोध में उतर आए।
उनका तर्व है कि ट्रंप के पास संवैधानिक अधिकारों को छीनने का कोईं अधिकार नहीं है, इनमें से 4 मामलों की सुनवाईं हो रही है।
सबसे बड़ी परेशानी उन महिलाओं को हो रही है जो अमेरिका में शरणाथा या अवैध प्रावासी के रूप में रह रही हैं। उनका कहना है कि उनके बच्चों के भविष्य का क्या होगा? उनका कहना है कि राष्ट्रपति ट्रंप ही बताएं कि उनकी कोख में पल रहे मासूम बच्चे का क्या कसूर है? भारतीय-अमेरिकी सांसदों ने अमेरिका में पैदा हुए किसी भी व्यक्ति के लिए स्वत: नागरिकता के नियम के परिवर्तन संबंधी डोनाल्ड ट्रंप के शासकीय आदेश का विरोध करते हुए कहा कि इस कदम से न केवल विश्व भर से आए अवैध अप्रावासी प्राभावित होंगे, बल्कि भारत से आए छात्र और पेशेवर भी प्राभावित होंगे। जैसा मैंने कहा कि अब डेमोव््रोटिक पाटा के प्राभाव वाले वहां के 22 राज्यों ने इस पैसले को अदालत में चुनौती दी है। भारतीय मूल के सांसदों ने भी इसका विरोध किया है। इसके अलावा ट्रंप प्राशासन के अधीन काम करने वाली कईं संस्थाओं ने इसे अदालत में चुनौती दी है। जाहिर है, ट्रंप प्राशासन के लिए इस पैसले पर आगे कदम बढ़ाना आसान नहीं रह गया है। जन्म के साथ नागरिकता का कानून अमेरिका संविधान में वर्णित है, इसलिए उसे बदलने पर विरोध की आशंका पहले से ही जताईं जाने लगी थी। हालांकि, अमेरिकी राष्ट्रपति को किसी कानून को लागू करने या बदलने को लेकर असीमित अधिकार प्राप्त हैं, पर वहां की कानून व्यवस्था ऐसी है कि राष्ट्रपति भी उससे ऊपर नहीं हैं।
——अनिल नरेन्द्र
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