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Friday, 12 May 2023
एर्दोगान को विपक्षी चुनौती
2003 में पहली बार तुर्विये का नेतृत्व करने के बाद से राष्ट्रपति एर्दोगान की शक्तियों में नाटकीय रूप से वृद्धि हुईं है। राष्ट्रपति रजैब तैब एर्दोगान लगभग 20 सालों से भी ज्यादा समय से सत्ता में हैं और अब उनके शासन को सबसे बड़ी चुनौती है तुर्विये के छह विपक्षी दलों ने 14 मईं को राष्ट्रपति और संसदीय चुनावों के लिए एकजुट होकर विपक्षी नेता कमाल किलिदारोग्लू को अपने विपक्षी गठबंधन का उम्मीदवार चुना है। राष्ट्रपति एर्दोगान के शासन में तुर्विये निरवुंश हो गया है और विपक्षी इसमें तब्दीली लाने की कोशिश कर रहे हैं। तुर्विये में बढ़ती महंगाईं और दोहरे भूवंप से 50 हजार से ज्यादा मौतों के बाद राष्ट्रपति एर्दोगान कमजोर पड़ते दिख रहे हैं। चुनाव में एर्दोगान की चुनौती सालों से तुर्विये तक तुर्विये में वोटर्स का ध्रुवीकरण हुआ है। लेकिन 69 वषाय एर्दोगान दबाव में हैं। ओपिनियन पोल से पता चलता है कि राष्ट्रपति पद के लिए उनके मुख्य प्रातिद्वंद्वी के पास अच्छी बढ़त है। एर्दोगान जिस पाटा से संबंध रखते हैं वो साल 2002 से सत्ता में हैं और खुद 2003 से (तब प्राधानमंत्री) सत्ता के शीर्ष पर बने रहे हैं।
60 लाख नए युवा वोटरों ने एर्दोगान के अलावा किसी और नेता को सत्ता में नहीं देखा है। शुरुआत में एर्दोगान प्राधानमंत्री थे। फिर साल 2016 में राष्ट्रपति बन गए। अब वह एक विशाल भवन में बैठकर पूरा देश चलाते हैं।
तुर्विये की बढ़ती आबादी ने उन्हें महंगाईं के लिए दोषी ठहराया है, क्योंकि वो परंपरागत तरीके से ब्याज की दरों को बढ़ाने से इंकार करते रहे हैं।
आधिकारिक मुद्रास्फीति की दर 50 प्रातिशत से ऊपर है। लेकिन शिक्षाविदों का कहना है कि यह वास्तव में 100 प्रातिशत से ज्यादा है। राष्ट्रपति एर्दोगान की सरकार की दो भूवंपों के बाद हालातों से निपटने के तरीके के लिए आलोचना की जा रही है। इस साल छह फरवरी को आए दोहरे भूवंप से हुईं तबाही के बाद मलबे में दबे लोगों की खोजबीन और लोगों के बचाव के तरीके को लेकर एर्दोगान और उनकी सत्तारूढ़ पाटा की आलोचना हुईं थी।
इसके साथ ही उनकी सरकार तुर्विये में सालों तक वंस्ट्रक्शन की सही व्यवस्था को अपनाने और लागू करने में भी विफल रही है। भूवंप से प्राभावित 11 प्रांतों में लाखों तुर्विये नागरिक बेघर हो गए। चूंकि कईं इलाकों में एर्दोगान की पाटा के गढ़ के तौर पर देखा जाता है इसलिए देश का पूवा इलाका जीत और हार तय कर सकता है। उनकी एक पाटा की राजनीति इस्लाम की तरफ झुकी है। लेकिन उन्होंने अति राष्ट्रवादी पाटा एमएचपी के साथ गठबंधन किया है। 26 मार्च 2023 को इस्तांबुल, तुर्विये में एक सार्वजनिक कार्यंव््राम के दौरान विपक्षी दल रिपब्लिकन पीपुल्स पाटा (सीएचपी) के नेता किलिदारोग्लू तुर्विये में ओपिनियन पोल हमेशा विश्वसनीय नहीं होते, लेकिन कमाल किलिदारोग्लू के पहले राउंड में सीधे चुनाव जीतने की उम्मीदों को तब झटका लगा जब वाम झुकाव वाली पाटा के एक पूर्व सहयोगी मुहर्रम इंस ने राष्ट्रपति पद के उम्मीदवारों में शामिल होने का पैसला किया। 14 मईं को वोट पड़ने हैं, देखें, एर्दोगान अपनी सत्ता को बरकरार रखेंगे या नहीं?
——अनिल नरेन्द्र
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