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Thursday, 5 September 2024

अब नमाज ब्रेक विवाद में फंसे हिमंत सरमा


असम के बड़बोले मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा एक बार फिर विवादों में फंसते नजर आ रहे हैं। वह अक्सर विवादास्पद बयान देते रहते हैं। ताजा मामला असम में विधानसभा के कामकाज से जुड़े एक फैसले को लेकर है। उनके इस बयान से जहां विपक्ष नेता हावी हुए हैं वहीं एनडीए के कुछ घटक दल भी इनके खिलाफ खुलकर सामने आ चुके हैं। दरअसल हिमंत बिस्वा सरमा ने राज्य विधानसभा में मुस्लिम विधायकी को नमाज के लिए मिलने वाले दो घंटे के ब्रेक को खत्म कर दिया है। इस फैसले की जहां विपक्षी पार्टियां आलोचना कर रही हैं, वहीं भाजपा के नेतृत्व वाली एनडीए में भी इस फैसले के खिलाफ आवाज उठ रही है। राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के दो प्रमुख सहयोगी दलों जद (यू) और लोक जनशक्ति पार्टी ने इसकी आलोचना की है। बता दें कि मुस्लिम विधायकों को नमाज के मद्देनजर दो घंटे की ब्रेक देने की 1937 से चली आ रही परम्परा को बिस्वा ने समाप्त कर दी है। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा का कहना है कि हिन्दू और मुस्लिम विधायकों के साथ बैठकर यह फैसला किया है लेकिन एनडीए के घटक दलों ने संविधान में दी गई धार्मिक आजादी का उल्लघंन बताते हुए इसकी आलोचना की। आरजेडी नेता और बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने शुक्रवार को कहा था कि असम के मुख्यमंत्री सस्ती लोकप्रियता हासिल करने के लिए ऐसा करते हैं, उन्होंने एक्स पर अपने वीडियो के साथ कुछ ऐसे शब्द लिखे जिसको लेकर भाजपा का आरोप है कि यह एक नस्लीय टिप्पणी है। उन्होंने अपनी पोस्ट में यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की तुलना असम के मुख्यमंत्री हिमंत सरमा से करते हुए चीन का जिक्र किया है। बता दें कि तेजस्वी के बयान पर भाजपा और मणिपुर के मुख्यमंत्री बीरेन सिंह अपनी आपत्ति जता चुके हैं। लेकिन अब खुद हिमंत का बयान आ चुका है। उन्होंने पत्रकारों से शनिवार को कहा, कौन क्या बयान देता है। उससे हमारा काम थोड़े ही रूकेगा। हमारा काम तो आगे ही जाता है। तेजस्वी ने अपने बयान में कहा कि हिमंत योगी आदित्यनाथ का चाइनीज वर्जन हैं। वह केवल ध्रुवीकरण की राजनीति कर रहे हैं। वहीं नीतीश कुमार की पार्टी नेता नीरज कुमार ने इस फैसले पर सवाल उठाते हुए कहा कि हिमंता बिस्वा सरमा को गरीबी उन्मूलन और बाढ़ की रोकथाम जैसे मुद्दों पर ध्यान देना चाहिए। असम के मुख्यमंत्री की ओर से लिया गया फैसला देश के संविधान के मूल सिद्धांतों के खिलाफ है। हर धार्मिक आस्था को अपनी परम्पराओं को सुरक्षित रखने का अधिकार है। मैं असम के सीएम सरमा से पूछना चाहता हूं कि आप रमजान के दौरान शुक्रवार की छुट्टियों पर प्रतिबंध लगा रहे हैं और बाबा कहते हैं कि इससे कार्य क्षमता बढ़ेगी। हिन्दू परम्परा का एक महत्वपूर्ण हिस्सा मां कामाख्या मंदिर हैö क्या आप वहां बलि प्रथा पर प्रतिबंध लगा सकते हैं? वरिष्ठ जद (यू) नेता केसी त्यागी ने कहा कि संविधान की प्रस्तावना में विचार, अभिव्यक्ति, विश्वास, धर्म और उपासना की स्वतंत्रता का प्रावधान है। किसी को भी ऐसा कुछ नहीं करना चाहिए जिससे संविधान की भावना और लोगों की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचे। चिराग पासवान ने भी इस फैसले पर आपत्ति जताई है।

-अनिल नरेन्द्र

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