Saturday, 15 July 2017

धर्म संकट में फंसे नीतीश कुमार

केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की छापेमारी के बाद बिहार में सत्तारूढ़ महागठबंधन के बड़े घटक दल राष्ट्रीय जनता दल (राजद) और जनता दल (जदयू) में उपमुख्यमंत्री तेजस्वी प्रसाद यादव के खिलाफ बने माहौल में उनके इस्तीफे को लेकर सुशासन बाबू यानि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार धर्म संकट में फंस गए हैं। इस मसले पर भाजपा की ओर से लगातार बनाए जा रहे दबाव का असर साफ दिखा, जब मंगलवार को जद (एकी) की बैठक के बाद भ्रष्टाचार के आरोपियों को लेकर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के सख्त बयान सामने आए। सीबीआई के कठघरे में खड़े तेजस्वी यादव को लेकर जदयू ने जिस तरह उन्हें तथ्यों के साथ सामने आने का अल्टीमेटम दिया उससे तो यही लगता है कि नीतीश कुमार निर्णायक फैसला लेने की तैयारी कर रहे हैं। हालांकि तेजस्वी ने यह कहकर अपना बचाव करने की कोशिश की है कि उनके खिलाफ साजिश रची गई है और उनके खिलाफ जो मामला है वह उस वक्त का है जब वह बच्चे थे, उनकी दाढ़ी के बाल तक नहीं आए थे और दरअसल उनसे डरी भाजपा उनके खिलाफ साजिश रच रही है, लेकिन ऐसी दलीलें शायद ही ठहर पाएं। नीतीश कुमार ने तेजस्वी को सीधे इस्तीफा देने को तो हालांकि अभी तक नहीं कहा लेकिन आरोपों के घेरे में आए लोगों को तथ्यों के साथ जनता के बीच जाने और खुद को बेदाग साबित करने की सलाह जरूर दी। पिछले कुछ समय से लालू प्रसाद यादव और उनके परिवार के कई सदस्यों के नाम अखबारों की सुर्खियों में आ रहे हैं। सियासी हलकों में नीतीश कुमार जिस छवि के लिए जाने जाते हैं उसमें यह कयास लगाया गया है कि अब वे शायद राजद से नाता तोड़ने के मूड में हैं। पार्टी की एक बड़ी बैठक बुलाकर नीतीश ने आरजेडी को यह कड़ा संदेश भिजवाया कि इस मामले में कोई समझौता संभव नहीं है। आरजेडी भले ही बाद में इस अल्टीमेटम के लिए नीतीश कुमार के भाजपा समर्थक रवैये को जिम्मेदार ठहराए, लेकिन यह हकीकत है कि नीतीश की राजनीति किसी जातीय समीकरण पर नहीं टिकी है। उनकी अकेली राजनीतिक पूंजी साफ छवि की है जो भ्रष्टाचार पर जीरो टालरेंस की वकालत करते रहे हैं। ऐसे में अगर वह तेजस्वी यादव के खिलाफ दायर एफआईआर को नजरंदाज करते दिखते हैं तो उनकी राजनीति का आधार ही खतरे में पड़ सकता है। दूसरी तरफ लालू प्रसाद के लिए मुश्किलें बढ़ गई हैं। अपनी राजनीतिक विरासत तेजस्वी को सौंपने के संकेत वह पहले ही दे चुके हैं। नीतीश बुरे फंसे हैं, इधर कुआं है तो उधर खाई। अगर वह इस मामले में गठबंधन तोड़ते हैं तो सत्ता से बेदखल होने का खतरा है। देखें कि सियासत में यह दो महान खिलाड़ी वर्तमान स्थिति से कैसे निपटते हैं?

-अनिल नरेन्द्र

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