Friday, 21 July 2017

गौरक्षा के नाम पर यह गुंडागर्दी रुकनी चाहिए

गौरक्षा के नाम पर कानून हाथ में लेने वालों पर देश में हो रही हिंसा की कड़े शब्दों में निन्दा होनी चाहिए। गौरक्षा होनी चाहिए पर इस तरीके से नहीं जिस तरीके से कुछ अराजक तत्व कर रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी दो टूक कहा कि गौरक्षा के नाम पर हो रही हिंसा को कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने सभी राज्यों की सरकारों से भी कहा है कि कानून हाथ में लेने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करें। इससे पहले भी प्रधानमंत्री कई बार यह राय जाहिर कर चुके हैं। किन्तु इसका कोई खास असर होता नहीं दिख रहा है। बार-बार चेतावनी दर्शाता है कि स्थिति कितनी गंभीर है। प्रधानमंत्री की चेतावनी के बावजूद देश में कुछ लोग गौरक्षा के नाम पर मार-पिटाई कर रहे हैं। गौरक्षा को राजनीतिक व सांप्रदायिक रंग देकर राजनीतिक लाभ उठाने की होड़-सी शुरू हो गई है। इससे न तो भारतीय जनता पार्टी को कोई लाभ होगा और न ही हिन्दुत्व को बढ़ावा मिलेगा। उल्टा इससे माहौल खराब हो रहा है। देश में गौमाता की रक्षा की भावना होनी चाहिए पर कानूनी दायरे में। अगर कानून अपने हाथ में लेकर गौरक्षा की जाती है तो देश की कानून व्यवस्था पर इसका दुप्रभाव पड़ता है। प्रधानमंत्री ने याद दिलाया कि गाय की रक्षा के लिए कानून है और किसी को कानून अपने हाथ में लेने का हक नहीं है। यह भी देखना जरूरी है कि कहीं कुछ तत्व इस बहाने अपनी व्यक्तिगत दुश्मनी तो नहीं निकाल रहे? कोई ट्रक से गायों और बछड़ों को सामान्य व्यापार के तहत ले जा रहा है तो उसकी घेरकर पिटाई होती है तो कहीं किसी मांस व्यापारी के साथ बदसलूकी होती है। यह सब एक डरावना दृश्य प्रस्तुत करता है। सर्वदलीय बैठक के बाद जो कुछ संसदीय कार्यमंत्री अनंत कुमार ने कहा उसके अनुसार पहली बार इस विषय पर राज्यों को एडवाइजरी भी जारी की गई है। इसमें राज्यों से कार्रवाई करने की वही बाते हैं जो प्रधानमंत्री अपने वक्तव्यों में पहले कह चुके हैं। निश्चय ही कानून व्यवस्था राज्यों का विषय है और ऐसे मामलों में कानून हाथ में लेने वालों के खिलाफ कार्रवाई राज्यों के स्तर पर ही हो सकती है। तो क्या राज्यों के स्तर पर कार्रवाई में कोताही बरती जा रही है? गायों की रक्षा करना कानूनी एजेंसियों का काम है और उन्हें अपनी ड्यूटी पर कोताही नहीं करनी चाहिए। पुलिस व प्रशासन को दरअसल इस बात का डर होता है कि सरकार की गाज उन पर ही उल्टा न गिर जाए? इसलिए वह ऐसे मामलों को रफा-दफा करने में ज्यादा दिलचस्पी रखते हैं। भारतीय जनता पार्टी और भाजपा सरकारों को स्पष्ट दिशानिर्देश देने चाहिए कि वह इस प्रकार की गुंडागर्दी को कतई बर्दाश्त नहीं करेंगे और न ही वह वोट बैंक के चलते ऐसी गतिविधियों का समर्थन करते हैं।

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