Wednesday, 19 July 2017

क्या लोकसभा और विधानसभाएं आधी संख्या में काम कर सकती हैं

कोलकाता हाई कोर्ट ने न्यायाधीशों की नियुक्ति में हो रही देरी पर केंद्र सरकार को कड़ी फटकार लगाते हुए चेतावनी दी है कि इस बाबत अगर जरूरी कदम नहीं उठाया गया तो उपयुक्त कार्रवाई की जाएगी। अदालत ने इस परिप्रेक्ष्य में सवाल किया कि क्या लोकसभा व विधानसभाओं के आधी   संख्या पर काम करने के बारे में सोचा जा सकता है? जस्टिस डीपी डे की पीठ ने कहा कि इस कोर्ट के लिए अनुमोदित न्यायाधीशों की संख्या 72 है जबकि वर्तमान में 34 न्यायाधीश हैं, जो कि अनुमोदित संख्या के 50 फीसदी से भी कम है। माननीय न्यायाधीशों ने सही सवाल उठाया है। संसद में इन सांसदों की उपस्थिति का कितना बुरा हाल है यह किसी से छिपा नहीं। संसद सत्र के दौरान सांसदों की अनुपस्थिति रहने की प्रवृत्ति पुरानी है। यहां तक कि कई मंत्री भी उपस्थित रहना जरूरी नहीं समझते। इसके चलते सदन में पूछे जाने वाले सवाल अनुत्तरित रह जाते हैं। कई बार तो कोरम भी पूरा न हो पाने पर चलते सदन की कार्रवाई में बाधा उपस्थित होती है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने संसदीय दल की बैठक में कई बार इन जनप्रतिनिधियों को आड़े हाथ लेते हुए सदन में उपस्थित होने की कड़ी नसहीत तक दी है। उन्होंने तो यहां तक कहा कि वे किसी भी सांसद को अचानक बुला सकते हैं। अगर वे देश के बाहर हैं तब भी किसी अधिकारी के मार्फत किसी भी सांसद से बात कर सकते हैं। यह ठीक है कि जनप्रतिनिधयों, मंत्रियों के जिम्मे बहुत सारे काम होते हैं, पर इस आधार पर उन्हें सदन की कार्यवाही से बाहर रहने की छूट नहीं मिल सकती। जनप्रतिनिधियों का काम सदन को अपने क्षेत्र की समस्याओं से अवगत कराना, उनके हल के लिए उपाय, सुझाव और दूसरे सांसदों की तरफ से उठाए गए प्रश्नों, समस्याओं आदि के संबंध में सरकार की तरफ से की गई कार्यवाही आदि को जानना, समझना, उस पर टिप्पणी करना भी है। मगर बहुत सारे सांसद सदन में चर्चा में शामिल होना तो दूर, अपने क्षेत्र  की समस्याओं को भी सदन के समक्ष रखना जरूरी नहीं समझते। सत्ता पक्ष के प्रतिनिधि अक्सर इसलिए चुप्पी साधे रखते हैं कि कहीं उनके सवालों से सरकार के सामने असहज स्थिति पैदा न हो जाए या फिर उनकी कोई बात उनके वरिष्ठ नेताओं को नागवार गुजरे। कोलकाता हाई कोर्ट ने सही प्रश्न उठाया है जब संसद में आप सभी सांसदों की उपस्थिति चाहते हैं तो अदालतों में पूरी संख्या में जजों की क्यों नहीं? उम्मीद की जाती है कि जजों की नियुक्ति जल्द से जल्द की जाएगी और इस समस्या का समाधान होगा।


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