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Tuesday, 18 June 2024

मोदी जी की बढ़ती चुनौतियां


 मोदी जी तीसरी बार प्रधानमंत्री तो बन गए जोड़-तोड़ के पर उनकी चुनौतियां खत्म होने का नाम ही नहीं ले रही हैं। आनन-फानन में मोदी जी ने बगैर भाजपा संसदीय बोर्ड की औपचारिक बैठक बुलाई जिसमें पार्टी के नेता को चुनना होता है। एनडीए की बैठक बुलाकर अपने आपको पीएम घोषित करवा लिया। पर इससे मोदी जी की चुनौतियां कम नहीं हुईं। आज वह कई मोर्चों पर घिरे हुए हैं। आज हम सिर्फ दो मोर्चों की बात करेंगे। पहला भाजपा के अंदर से आ रही चुनौतियां और दूसरा भाजपा और संघ के रिश्तों की। भाजपा के अंदर इस समय घमासान मचा हुआ है। टिकटों के बंटवारे को लेकर असंतोष से अंदरखाते एक-दूसरे को हरवाने का दौर चल रहा है। यह किसी से अब छिपा नहीं कि मोदी जी की सबसे बड़ी हार उत्तर प्रदेश में हुई है। कहां तो 75 सीटें जीतने की बात हो रही थी कहां पार्टी 240 सीटों पर अटक गई जो बहुमत से 32 सीटें कम हैं। उत्तर प्रदेश में हार के कारण भाजपा केन्द्र में मोदी-03 सरकार नहीं बना सकी। अब यह विवाद चर्म पर है कि उत्तर प्रदेश में हार का जिम्मेदार कौन है? एक तरफ अमित शाह हैं तो दूसरी तरफ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ। अमित शाह योगी को हार का जिम्मेदार ठहरा रहे हैं जबकि योगी कह रहे हैं कि टिकटों के बंटवारे से लेकर पूरा अभियान तो आपने दिल्ली से चलाया तो इसमें मैं कैसे जिम्मेदार हुआ? अगर कोई जिम्मेदार है तो वह आप हैं, दिल्ली है। दरअसल मोदी-शाह बहुत दिनों से योगी को पद से हटाना चाहते हैं क्योंकि वह समझते हैं कि मोदी-शाह की जोड़ी का विकल्प अगर पार्टी के अंदर अब बचा है तो वह योगी हैं। योगी हटने को तैयार नहीं। अब तो योगी का पलड़ा और भी भारी हो गया है क्योंकि खबर आई है कि सर संघ चालक मोहन भागवत ने गोरखपुर में योगी से मुलाकात की है और उनकी पीठ पर हाथ रख दिया है। आने वाले दिनों में देखें यह महाभारत क्या रंग लाता है। दूसरा मोर्चा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने खोल दिया है। लोकसभा चुनाव के बाद सबसे ज्यादा चर्चा आरएसएस के बयानों की है। भाजपा के प्रदर्शन पर पहला मुखर प्रश्न संघ से जुड़ी पत्रिका आर्गनाइजर ने उठाया। उसके बाद सरसंघ चालक मोहन भागवत ने इशारों में कई चेतावनियां दे डाली। मैंने भागवत जी के बयान का पहले भी जिक्र किया था, इसलिए यहां दोहराऊंगा नहीं और अब संघ की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य व वरिष्ठ नेता इंद्रेश कुमार ने तीखे सवाल उठा दिए हैं। आरएसएस की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य इंद्रेश कुमार ने 2024 के लोकसभा चुनाव को लेकर कहा कि राम सबके साथ न्याय करते हैं। भाजपा को लेकर उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि जो पूर्ण हक मिलना चाहिए, जो शक्ति मिलनी चाहिए, वो भगवान ने अहंकार के कारण रोक दी। उन्होंने कहा, जो अहंकारी हो गए हैं, उन्हें 240 पर रोक दिया, जिनकी राम में आस्था नहीं थी, उन सबको मिलाकर 234 पर रोक दिया। यह प्रभु का न्याय है। इंद्रेश कुमार गुरुवार को जयपुर के पास कानोता में रामरथ अयोध्या यात्रा दर्शन पूजन समारोह में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि राम सबके साथ न्याय करते हैं। 2024 के लोकसभा चुनाव को ही देख लीजिए। जिन्होंने राम की भक्ति की, लेकिन धीरे-धीरे अहंकार आ गया। उस पार्टी को सबसे बड़ी पार्टी घोषित कर दिया। उनको जो पूर्ण हक मिलना चाहिए, जो शक्ति मिलनी चाहिए, वो भगवान ने अहंकार के कारण रोक दी। उन्होंने कहा कि जिन्होंने राम का विरोध किया, उन्हें बिल्कुल भी शक्ति नहीं दी। इन में से किसी को भी शक्ति नहीं दी। सब मिलकर (इंडिया ब्लाक) भी नंबर-1 नहीं बने, नंबर 2 पर खड़े हैं। इसलिए प्रमुख का न्याय विचित्र नहीं है, सत्य है, बड़ा आनन्ददायक है जिस पार्टी ने भक्ति की, अहंकार आया, उस पार्टी को 240 पर रोक दिया, पर सबसे बड़ी बना पार्टी दिया। जिन्हें राम के प्रति आस्था नहीं थी, उन सबको मिलकर 234 पर रोक दिया। उन्होंने कहा कि तुम्हारी अनास्था की यही दंड है, तुम सफल नहीं हो सकते। अयोध्या (फैजाबाद) से भाजपा प्रत्याशी लल्लू सिंह की हार पर इंद्रेश कुमार ने कहा कि जो राम की भक्ति करे, फिर अहंकार करे, जो राम का विरोध करे उसका अकल्याण अपने आप हो गया। लल्लू सिंह ने जनता पर जुल्म किए थे, तो राम जी ने कहा कि पांच साल आराम करो। अगली बार देख लेंगे। गौरतलब है कि इससे पहले सरसंघ चालक मोहन भागवत ने भी 10 जून को नागपुर में संघ के कार्यकर्ता विकास वर्ग के समापन में भाजपा के शीर्ष नेतृत्व को निशाने पर लिया था। भागवत ने कहा था कि जो मर्यादा का पालन करते हुए कार्य करता है, गर्व करता है, किन्तु लिप्त नहीं होता, अहंकार नहीं करता, वही सही अर्थों में सेवक कहलाने का अधिकारी है, उन्होंने कहा कि जब चुनाव होता है तो मुकाबला जरूर होता है। इस दौरान दूसरों को पीछे धकेलना भी होता है, लेकिन इसकी एक सीमा होती है। यह मुकाबला झूठ पर आधारित नहीं होना चाहिए। अब देखना यह है कि मोदी जी संघ के सामने झुकते हैं या अपने चिरअंदाज में अकड़े रहते हैं।

-अनिल नरेन्द्र


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