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Friday, 7 June 2024

मोदी जी यह आपकी नैतिक हार है


2024 का लोकसभा चुनाव ऐतिहासिक चुनाव रहा। यह स्वर्ण अक्षरों में लिखा जाएगा। इसने तानाशाही पर अंवुश लगाया, संविधान को बचाया, भय का वातावरण समाप्त किया, सरकारी एजेंसियों के दुरुपयोग पर अंवुश लगाया, न्यायालयों को खुली हवा में सांस लेने का अवसर दिया। आज अगर मोदी जी का यह हाल है तो इसके लिए वह खुद जिम्मेदार हैं। उनका अहंकार चरम पर पहुंच गया था। मैं बायोलॉजिकल नहीं हूं, मैं अकेला सब पर भारी, एक-एक को देख लूंगा। मंगलसूत्र छीन लेंगे, चैन छीन लेंगे, ज्यादा बच्चे पैदा करने वालों को आपकी संपत्ति बांट देंगे, आतंकवादियों को दे देंगे। न जाने ऐसे कितने निम्न स्तर के जुमले मोदी जी ने इस चुनाव में कहे। आपने अयोध्या में आधे-अधूरे राम मंदिर में भगवान राम की प्राण प्रातिष्ठा की जो शास्नें के विरुद्ध थी। चारों शंकराचार्यो ने इसका विरोध किया पर आपने सबको नजरअंदाज कर दिया। हम राम को लाएं है राम हमें लाएंगे। राम ने आपको आईंना दिखा दिया। राम मंदिर की प्राण प्रातिष्ठा के बाद मोदी जी को उम्मीद थी कि इसका लाभ उन्हें और भाजपा को मिलेगा। नतीजा यह हुआ कि भाजपा न केवल पैजाबाद (अयोध्या) से हार गईं बल्कि राम मंदिर के इर्द गिर्द की सभी लोकसभा सीटों पर हार गईं। अयोध्या मंडल में आपका रिपोर्ट कार्ड जीरो रहा। अबकी बार 400 पार का नारा आपने बड़े जोरों शोरों से दिया था। उसका परिणाम यह निकला कि दलितों, पिछड़ों, गरीबों, आदिवासियों व अत्यन्त पिछड़ों को यह विश्वास हो गया कि आपको चार सौ सीटें इसलिए चाहिए कि आप संविधान बदल सके और आरक्षण खत्म कर दें। आप अग्निवीर योजना लाए और युवाओं को चार साल में रिटायर कर दिया। फिर आपके एक सांसद पुरुषोत्तम रुपाला ने क्षत्रियों, राजपूतों के खिलाफ ऐसा बयान दिया जिसका असर गुजरात से लेकर हरियाणा, राजस्थान तक हुआ। आप दूसरे दलों को तोड़कर नेताओं को लाए । दलबदलू भाजपा में आए 56 में से 22 ही जीत सके। आपने वर्षो से भाजपा की तपस्या कर रहे कार्यंकर्ताओं और नेताओं को नजरअंदाज कर इन दल बदलुओं को प्राथमिकता दी। नतीजा सामने है। आप अपने मंत्रिमंडल के सदस्यों तक को नहीं बचा सके। मोदी सरकार के चार वैबिनेट मंत्रियों सहित 18 मंत्री चुनाव हार गए। अमेठी से स्मृति ईंरानी को भी उनका अहंकार, बदतमीजी ले डूबी। आपने राष्ट्रीय स्वयं संघ को भी ठेंगा दिखा दिया। बीच चुनाव में आपके राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने कह दिया कि भाजपा को संघ की अब जरूरत नहीं है। वाजपेयी की सरकार के समय हम (भाजपा) सक्षम नहीं थी।

पर अब हम बहुत बड़े हो गए हैं, हमें संघ की जरूरत नहीं। इसका परिणाम हुआ कि संघ के कार्यंकर्ता जो आपकी रीढ़ होते थे घर बैठ गए और आपके वोटरों को घर से बाहर नहीं निकाल सके। संघ में इस बात की भी नाराजगी थी कि उनकी कोईं सुन नहीं रहा। कार्यंकर्ताओं की न सुनने की शिकायत सिर्प संघ को ही नहीं थी, भाजपा कार्यंकर्ताओं में भी थी। इसी वजह से मतदान प्रातिशत भी कम हुआ।

मोदी जी ने आपने तमाम चुनाव में कोईं राष्ट्रीय मुद्दा नहीं दर्शाया। आप विरासत के नैरेटिव पर ही पंस गए। आपने यह बताने की कोशिश नहीं की आपकी दस साल की उपलब्धियां क्या है? दूसरी ओर तीन विपक्षी युवाओं ने आपकी हवा खराब कर दी। राहुल गांधी, अखिलेश यादव और तेजस्वी यादव आपकी पिच पर नहीं खेले। वह अपने मुद्दों पर टिके रहे। राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा और भारत न्याय यात्रा ने तमाम विपक्ष को संजीवनी दी। कांग्रोस ने जो घोषणा पत्र बनाया, उसकी काट मोदी जी आप नहीं कर सके। जनता के बीच महंगाईं, बेरोजगारी, सामाजिक न्याय, संविधान बचाओ घर कर गया। विपक्ष ने पूरी लोकसभा का नैरेटिव सेट कर दिया और आप उसकी काट नहीं कर सके। आप मोदी की गारंटी ही करते रहे। एक जगह भी आपने यह नहीं कहा कि भाजपा की गारंटी। दरअसल आप अपनी ही पाटा से बहुत ऊपर उठ गए। आप अपने आपको भगवान मानने लगे।

आपके वफादार कभी तो आपको विष्णु का अवतार बताते, तो कभी भगवान जगननाथ आपके शिष्य हैं बताते रहे। आपकी अपनी लोकप््िरायता का यह हाल है कि दो चुनावों में वाराणसी से लगातार भारी अंतर से जीतते रहे आप इस बार सिर्प 1,52,513 वोटों से ही जीत सके। 2019 में आप 4,79,505 वोटों से 2014 में 3,71,784 वोटों से जीते थे। आपके प्रातिद्वंद्वी अजय राय बेशक हार गए पर उन्होंने भी 4,61,457 वोट पाए। लगातार दो लोकसभा चुनाव में हार के बाद इस चुनाव में कांग्रोस बेहतर प्रादर्शन करने में सफल रही। पाटा 99 सीटों पर जीती। राहुल, अखिलेश यादव, तेजस्वी यादव, ममता बनजा, एके स्टालिन एक परिपक्व नेता के तौर पर इस चुनाव में उभरे हैं। अब देशवासी खुली सांस ले सकते हैं, न तो ईंडी का डर होगा, न सीबीआईं और न ही आयकर विभाग का। जजों को भी भय के वातावरण से छुटकारा मिलेगा। सो वुल मिलाकर मोदी जी यह आपकी नैतिक हार है जिसे आपको स्वीकार करना चाहिए। बेशक जोड़-तोड़ जिसमें आप माहिर हैं सरकार तो बना लें पर आपकी अहंकारी राजनीति श्री राम ने समाप्त कर दी है। जय श्रीराम।

—— अनिल नरेन्द्र

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