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Thursday, 23 May 2024
पंजाब में पहली बार 4 दलों में टक्कर
सरहदी सूबे पंजाब में पहली बार चार प्रमुख सियासी दलों के बीच कांटे की टक्कर है। इसके अलावा एक अघोषित पार्टी किसान भी है, जिन्होंने चुनाव को गर्माया हुआ है। खासकर भाजपा को खासा परेशान कर रखा है। सरहद से लगती खडूर साहिब सीट पर असम की डिब्रूगढ़ जेल में बंद खालिस्तानी सिख समर्थक अमृतपाल सिंह ने आजाद उम्मीदवार ताल ठोकर तनाव बढ़ा दिया है। इसी मिजाज के सिमरनजीत सिंह मान ने भी 1989 में जेल में रहते हुए इस क्षेत्र में चुनाव लड़कर 93.92 प्रतिशत वोटों के साथ एकतरफा जीत दर्ज की थी। इस जीत को अमृतपाल से जोड़कर प्रचारित किया जा रहा है।
इस पंथक सीट पर अमृतपाल के नामांकन करने से ज्यादा बैचेनी पंथक जनाधार वाले अकाली दल में है। सुखबीर बादल को बयान देना पड़ा कि अमृतपाल सिंह की रिहाईं के लिए नहीं, बल्कि खुद की रिहाईं के लिए लड़ रहा है। उनका इशारा साफ है कि बंदी सिंह की रिहाईं की लड़ाईं अकाली दल लड़ रहा है। मौजूदा समीकरणों में वुल 13 लोकसभा सीटों में से 5 से 6 सीटों पर कांग्रेस और 4 से 5 सीटों पर आम आदमी पार्टी मजबूत दिखती है। भाजपा को अपनी परंपरागत सीटें गुरदासपुर और होशियारपुर में भी कड़ी चुनौती मिल रही है। इन दोनों सीटों के अलावा लुधियाना, पटियाला में कांग्रेस से आप चेहरों और फरीदकोट से डेरे के वोटों के सहारे भाजपा मुकाबले में है, लेकिन जीत से अभी दूर है। अकाली दल बठिंडा सीट को प्रतिष्ठा का सवाल बनाकर लड़ रही है। गहमा-गहमी इस कदर है कि कौन कितने वोट ले रहा है, इससे ज्यादा जोर आजमाइश इसे लेकर है कि कौन किसके कितने वोट काट रहा है। नतीजे भी इसी पर टिके हुए है।
अकेले चुनाव लड़ रही जाटों की पर्टियां, आप, कांग्रेस, अकाली दल और भाजपा के चेहरों की तलाश में खासी मुशक्कत करनी पड़ी।
अभी तक चुनावी हवा में मतदाताओं के रुख में बड़ा बदलाव दिख रहा है। पिछले विधानसभा चुनाव में बदलाव के नाम पर एक पार्टी (आप) के पास इकट्ठा वोट लोकसभा चुनाव में अपनी-अपनी पार्टियों की ओर लौटता दिख रहा है। इसका ज्यादा फायदा कांग्रेस को हो रहा है।
कांग्रेस और अकालियों से नाराज होकर वोट आम आदमी पार्टी को चला गया था। वह उसके पास लौटता दिख रहा है। आप सरकार को प्री बिजली का लाभ मिल रहा है लेकिन स्थानीय एंटी एंकम्बेंसी का नुकसान भी हो रहा है। उसके ज्यादातर विधायकों से नाराजगी है, इसलिए लोकसभा चुनाव लड़ रहे हैं। उनके 5 मंत्री भी पंसे हुए हैं।
आप को हिंदू चेहरे की कमी खल रही थी। अरविंद केजरीवाल को अंतरिम जमानत मिलने से उसकी भरपाईं होती दिख रही है। उन्होंने पंजाब में प्रचार शुरू कर दिया है। 2019 में 8 सांसदों वाली कांग्रेस मजबूत चेहरों और वैडर के कारण आगे दिख रही है। भाजपा हिंदू और अकाली गांवों में अपने पंथक वोटों के सहारे हैं। लेकिन इनके सामने संकट यह है कि एक भी सीट ऐसी नहीं है जो पूरी शहरी या गांवों की हों। अब तक ये हिंदू-सिख सांझा के नाम पर लड़ते थे।
अलग होने से एक-दूसरे को नुकसान पहुंचा रहे हैं। फिलहाल पहले, दूसरे, तीसरे स्थान के लिए लगातार हवा कर रुख बदल रहा है। 10 सीटों पर चतुष्कोणीय व तीन सीटों पर बसपा का प्रभाव होने से पंचकोणीय मुकाबला होने जा रहा है। मतदान 1 जून को है।
——अनिल नरेन्
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