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Tuesday, 1 May 2012

यूं हुआ ओसामा बिन लादेन का अंत

Vir Arjun, Hindi Daily Newspaper Published from Delhi
Published on 1 May 2012
अनिल नरेन्द्र
अमेरिका की प्रतिष्ठित पत्रिका टाइम ने पहली बार ओसामा बिन लादेन संबंधित एक गोपनीय मेमो प्रकाशित किया है जिसमें राष्ट्रपति बराक ओबामा ने लादेन को गिरफ्तार करने का आदेश दिया था। हालांकि इस पूरे ऑपरेशन की सारी कार्रवाई पहले भी आ चुकी है पर टाइम की रिपोर्ट एक तरह से अधिकृत रिपोर्ट मानी जा सकती है। गोपनीय मेमो में ओबामा ने नौसेना के सील कमांडो की एक टीम को लादेन के एबटाबाद के ठिकाने पर पकड़ने के आदेश दिए थे। इस मेमो पर सीआईए के तत्कालीन प्रमुख लियोन पेनेटा ने भी साइन किए हैं। ओसामा के ठिकाने पर न मिलने की स्थिति में वापस आने का आदेश था। ओसामा बिन लादेन की मौत को एक साल हो जाएगा। मेमो में कहा गया हैöसमय, अभियान संचालन, निर्णय और हमले के नियंत्रण से संबंधित सभी चीजों की कमान एडमिरल मैकरबैन के हाथों में होगी। ओबामा पर फैसला लिए जाने से पहले व्हाइट हाउस में महीनों चले गोपनीय एवं मुश्किल चर्चाओं पर टाइम ने विस्तार से लिखा है। यह एक ऐसा फैसला था, जिसके लिए ओबामा राष्ट्रपति पद का दांव लगा रहे थे। दुनिया के मोस्ट वांटेड व्यक्ति को पाकिस्तान में अमेरिकी कमांडो भेजकर पकड़ने का फैसला इतना आसान नहीं था। ओसामा के साथ अंतिम मुठभेड़ पर टाइम पत्रिका ने कहाöअंधेरी रात थी और बिजली भी गुल थी। घुप अंधेरा था। इसने ओसामा का भ्रम बढ़ा दिया। उसने उस गेट को खोला जो उसके कमरे तक पहुंचने के सभी रास्तों को बन्द करता था और जिसे केवल अन्दर से खोला जा सकता था। उसने यह देखने के लिए सिर बाहर निकाला कि वहां क्या हो रहा है? तत्काल वह सील कमांडो की नजरों में आ गया और वे सीढ़ियों पर चढ़ गए। ओसामा ने एक बड़ी गलती और कर दी, वह दरवाजा बन्द करना भूल गया। इससे कमांडो सीधे उसके बेडरूम में जा धमके। कमांडो ने लादेन के सीने और बाईं आंख में दो गोलियां दागकर उसे मौके पर ही खत्म कर दिया। रिपोर्ट में कहा गया, यह एक वीभत्स दृश्य था। उसके भेजे के चिथड़े उड़ गए थे और छत से चिपक गए थे। उसका कुछ हिस्सा आंखों से बाहर निकल आया। बेड के नजदीक की जगह भी ओसामा के खून से सराबोर हो गई। एक दशक से भागते-भागते वह बेहद थका लग रहा था। बचकर निकलने की उसने कोई योजना नहीं बनाई थी। उसके घर से कोई गुप्त मार्ग बाहर नहीं जाता था। लादेन मारे जाने से पहले पाकिस्तान में कई हमलों की योजना बना रहा था। एबटाबाद परिसर से मिले दस्तावेजों में एक बात सामने आई है। मीडिया में छपी रिपोर्टों से पता चलता है कि लादेन ने अल जवाहिरी और शीर्ष आतंकियों के साथ मिलकर पाकिस्तान पर कई हमले की योजना बनाई थी। उधर अमेरिका की एक संघीय अदालत ने लादेन के लगभग एक वर्ष पहले पाकिस्तान में मारे जाने के वीडियो और तस्वीरें जारी करने का अनुरोध ठुकरा दिया है। एबटाबाद में मारे जाने के बाद लादेन के शव को समुद्र में दफना दिया गया था। लेकिन सुरक्षा कारणों से इस अभियान से जुड़ा वीडियो और तस्वीरें सार्वजनिक नहीं की थीं। ओसामा बिन लादेन की बरसी से चन्द दिन पहले पाकिस्तान ने उसकी तीन विधवाओं सहित 14 परिजनों को देश से निकालकर सऊदी अरब रवाना कर दिया है। कड़ी सुरक्षा के बीच लादेन के परिवार को मध्य रात्रि में रावलपिण्डी के मकलाला सैनिक एयरबेस में ले जाया गया, जहां से विशेष विमान से उन्हें सऊदी अरब भेजा गया। लादेन पिछले साल दो मई को मारा गया था।
Abbotabad, Anil Narendra, Daily Pratap, Obama, Osama Bin Ladin, Pakistan, Vir Arjun

Saturday, 7 April 2012

नौटंकीबाज पाकिस्तान

Vir Arjun, Hindi Daily Newspaper Published from Delhi
Published on 7 April 2012
अनिल नरेन्द्र
जब मैंने यह खबर पढ़ी कि पाकिस्तान की एक अदालत ने अलकायदा के पूर्व सरगना ओसामा बिन लादेन के परिवार के 14 सदस्यों को 9 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया क्योंकि उन पर आरोप है कि वह गैर कानूनी तरीके से पाक आए और रहे तो मुझे हंसी आ गई। पाकिस्तान को नौटंकी करने की आदत-सी बन गई है। बिन लादेन की तीन बीवियों और दो बेटियों को औपचारिक रूप से 3 मार्च को गिरफ्तार किया गया था। तीन बीवियों में से सबसे छोटी अमाल अबदल फतेह यमन की और बाकी दो सऊदी अरब की निवासी हैं। पिछले साल 2 मई को एबटाबाद में अमेरिकी कमांडोज ने लादेन को मार दिया था, इन्हें वहीं से पकड़ा गया था। अब यह किसी से छिपा नहीं कि ओसामा बिन लादेन वर्षों से पाकिस्तान में रह रहा था और उसका सीधा सम्पर्प पाक खुफिया एजेंसी आईएसआई के साथ बना हुआ था। ब्रिटेन के अखबार द टेलीग्रॉफ ने दोबारा सक्रिय हुई खोजी इंटरनेट वेबसाइट विकीलीक्स द्वारा प्रकाशित किए गए 50 लाख नए दस्तावेज से इसकी पुष्टि की है। इन दस्तावेजों में बताया गया है कि आईएसआई के कम से कम 12 अधिकारियों को लादेन के एबटाबाद स्थित सुरक्षित ठिकाने में छिपे होने की जानकारी थी। खबर तो यह भी आई है कि अपनी मौत से पहले ओसामा एबटाबाद के जिस मकान में रह रहा था, उसे बनवाने के लिए आईएसआई ने खासतौर पर एक आर्पिटेक्ट नियुक्त किया था। अमेरिकी अखबार वाशिंगटन पोस्ट ने खुफिया सूत्र के हवाले से लिखा है कि लादेन के इस ठिकाने पर लश्कर-ए-तोयबा के लोग भी आते-जाते रहते थे। रिपोर्ट में लिखा है कि पाकिस्तान की सैन्य अकादमी के पास बने लादेन के एबटाबाद स्थित ठिकाने के असली दस्तावेज तो गायब हो गए हैं लेकिन इसके आर्पिटेक्ट को आईएसआई ने नियमित तौर पर नियुक्त किया था। आर्पिटेक्ट को यह कहकर नियुक्त किया गया था कि एक उच्चपदस्थ अतिविशिष्ट व्यक्ति इस मकान में रहने आ रहा है। यही नहीं, ओसामा बिन लादेन एबटाबाद में अपने चार बच्चों के साथ रहता था और उसके इनमें से दो बच्चों का जन्म एबटाबाद के सरकारी अस्पताल में हुआ था और फिर भी पाकिस्तान यह दावा करे कि उसे ओसामा के पाकिस्तान में रहने की जानकारी नहीं यह हास्यास्पद नहीं तो और क्या है? यह किसको बेवकूफ बना रहे हैं? आज तक पाकिस्तान ने किसी भी बात को कबूला है? यह तो दाऊद इब्राहिम को भी नहीं जानते। बार-बार यही कहते हैं कि दाऊद पाकिस्तान में नहीं जबकि सारी दुनिया जानती है कि दाऊद कराची के क्लिफटन एरिया में वर्षों से रहता है और वहीं से अपनी गतिविधियां चला रहा है। अब लादेन की बीवी और बच्चों को जेल में यह कहकर डालना कि वह अवैध तरीके से पाकिस्तान में रह रहे थे, यह नौटंकी नहीं तो और क्या है? पर अब पाकिस्तान की नौटंकी एक्सपोज हो चुकी है, सारी दुनिया उसे जान चुकी है इसलिए शायद ही कोई अब यह माने कि पाक सेना, आईएसआई और पाक सरकार को यह मालूम नहीं था कि एबटाबाद में कौन रह रहा है।
Abbotabad, Anil Narendra, Daily Pratap, Osama Bin Ladin, Pakistan, Terrorist, Vir Arjun

Saturday, 21 May 2011

ISI Chief Lt Gen Shuja Pasha’s threat to India

- Anil Narendra
After Osama bin Laden episode and Pak exposure before the world, Pakistan has been greatly agitated and every other day, it is issuing confused statements. The other day, it was Prime Minister, Yousuf Raza Gilani who threatened America in the National Assembly to stop drone attacks, otherwise NATO convoys will not be allowed to pass through his country. And now, the Chief of the notorious Pak agency, ISI, Ahmed Shuja Pasha while briefing the members of Pak Senate and National Assembly on Pak military preparedness has threatened India. He has said that if India dares to carry out any Abbotabad type attack on US lines, Pakistan will also raid Indian targets. Pasha said that all preparations in this regard have been completed. He even claimed that ISI has identified Indian targets for such raids. It has, even rehearse as to how it can destroy selected targets in India.
It cannot be denied that in the wake of Osama episode, Pak military establishment can go to any extent to divert its people’s attention and as such India will have to be on alert and state of readiness and also it should not take Pasha’s statement seriously. ISI is directly controlled by the Pak Army. After the elimination of Osama bin Laden, who had been living in Abbotabad in the vicinity of Pak Military Academy and the Headquarters of three regiments of the Pak Army, by the Navy SEALS in a secret mission, Pakistan has been the target of world’s scorn. This has raised a number of questions about its entire military and intelligence establishment. US action on the internal front of Pakistan is seen as a violation of its sovereignty. The national leadership, whether it is the President Asif Ali Zardari or even the Prime Minister, is unable to provide satisfactory answers to the people of the country. To counter this, first, efforts were made to take ISI under the control of the Internal Affairs Ministry of the civilian government, but Pak Army opposed the move, then Pasha was tried to be sidelined. Pasha had already got an inkling of this move, as such during in camera hearing before the National Assembly on May 13, he tried to assure the politicians that in case of US type action by India in the future, there will be immediate retaliatory attacks and for such attacks, Indian targets have already been identified. In fact, the Indian Chief of Staff, General VK Singh had recently said that India, too is capable of taking US type of action to destroy terrorists’ sanctuaries on the other side of the border. His statement has led to confusion in whole of the Pakistan. Not only ISI Chief, the Pakistan as a whole is confused and in this confusion it is likely to take any uncalled for action. As such, we will also have to maintain full preparedness.

Thursday, 19 May 2011

आईएसआई प्रमुख ले. जनरल पॉशा की भारत को धमकी

Vir Arjun, Hindi Daily Newspaper Published from Delhi
Published on 19 May 2011
अनिल नरेन्द्र
ओसामा बिन लादेन प्रकरण और सारी दुनिया में बेनकाब हेने के बाद पाकिस्तान बौखला गया है। बौखलाहट में वह आए दिन कोई न कोई उल्टा-सीधा बयान दे रहा है। कभी पाकिस्तानी संसद में प्रधानमंत्री यूसुफ रजा गिलानी अमेरिका को धमकी देते हैं कि जब तक अमेरिका ने ड्रोन हमले बन्द नहीं किए तब तक नॉटो के काफिलों को अपने देश से गुजरने नहीं दिया जाएगा। अब पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी कुख्यात आईएसआई के प्रमुख अहमद शुजा पॉशा ने पाक की सीनेट और नेशनल असेम्बली के सदस्यों को सैन्य तैयारियों की जानकारी देते हुए भारत को धमकी दे डाली। भारत ने अमेरिकी तर्ज पर एबटाबाद जैसे किसी हमलों को अंजाम दिया तो पाकिस्तान भी उसके ठिकानों पर धावा बोल देगा। इसके लिए पाकिस्तान ने बाकायदा तैयारी कर ली है, पॉशा ने कहा। पॉशा ने यह भी कहा कि आईएसआई ने हमले के लिए भारतीय लक्ष्यों की पहचान भी कर ली है। इतना ही नहीं, भारत स्थित ठिकानों को कैसे तबाह करना है, इसका भी रिहर्सल किया जा चुका है।
इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता कि ओसामा प्रकरण के बाद बौखलाया पाक सैनिक तंत्र अपनी जनता का ध्यान बंटाने के लिए कुछ भी कर सकता है और भारत को हमेशा तैयार रहना होगा पर पॉशा के बयान को ज्यादा गम्भीरता से भी नहीं लिया जाना चाहिए। खुफिया एजेंसी आईएसआई की कमान सीधी पाक फौज के हाथ में होती है। एबटाबाद में मिलिट्री अकादमी व फौज के तीन रेजीमेंटों के मुख्यालय के पास रह रहे दुनिया के सबसे कुख्यात आतंकी बिन लादेन के खिलाफ 2 मई को गुपचुप कार्रवाई कर अमेरिकी नेवी सील कमांडो ने जब उसका सफाया कर दिया है तब से समूची दुनिया में पाकिस्तान की थू-थू हो रही है। इससे उसका समूचा फौजी और खुफिया तंत्र सवालों के घेरे में आ गया है। पाकिस्तान के अंदरुनी मोर्चे पर अमेरिकी कार्रवाई को देश की सप्रभुता पर हमले के रूप में लिया जा रहा है। देश का राजनीतिक नेतृत्व चाहे वह राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी हों या फिर प्रधानमंत्री यूसुफ रजा गिलानी ही हों पर देश की आवाम को कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे पा रहे। इससे निपटने के लिए पहले तो आईएसआई को सिविलियन सरकार के गृह मंत्रालय के तहत लेने की चाल चली गई पर जब पाकिस्तानी फौज इसके लिए तैयार नहीं हुई तो पॉशा को बरतरफ करने की कोशिश हुई। पॉशा को इसका अहसास पहले हो गया था, लिहाजा 13 मई को जब संसद के कमरे में उनकी `इन कैमरा' पेशी हुई तो उन्होंने राजनीतिज्ञों को भविष्य के लिए आश्वस्त होने की गरज से कहा कि भारत यदि अमेरिका की तरह कोई कार्रवाई करता है तो उस पर तत्काल हमले किए जाएंगे और इसके लिए भारतीय ठिकानों की पहचान भी कर ली गई है। दरअसल भारतीय सेना प्रमुख जनरल वीके सिंह ने हाल में कहा था कि भारत भी सरहद पार आतंकियों की पनाहगाहों को नेस्तनाबूद करने के लिए अमेरिका जैसी कार्रवाई करने की क्षमता रखता है। इससे पूरे पाकिस्तान में हड़कम्प है। आईएसआई चीफ पॉशा ही नहीं, पूरा पाकिस्तान इस समय बौखला गया है और बौखलाहट में अपनी जनता का ध्यान हटाने के लिए कोई बड़ी हिमाकत भी कर सकता है। इसलिए हमें भी अपनी तैयारी पूरी रखनी होगी।

Friday, 13 May 2011

26/11 मुंबई हमलों पर आईएसआई की भूमिका पर अमेरिकी मुहर

Vir Arjun, Hindi Daily Newspaper Published from Delhi
प्रकाशित: 13 मई 2011
-अनिल नरेन्द्र
26/11 मुंबई हमलों पर आईएसआई की भूमिका पर अब अमेरिका ने भी मुहर लगा दी है। अमेरिका के शिकागो की एक अदालत में 25 अप्रैल को दाखिल दूसरी चार्जशीट में साजिद मीर, मजहर इकबाल और अबू कहाफा के साथ मेजर इकबाल का नाम बतौर आरोपी लिया गया है। इसके अलावा लश्कर-ए-तोयबा `मेम्बर डी' पहचान वाले एक व्यक्ति को भी आरोपी बनाया गया है। अमेरिका ने भारत को इससे जुड़ा एक डोजियर भी सौंपा है। डोजियर ने भारत के इस दावे पर मुहर लगा दी है कि मुंबई हमलों में पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी का हाथ था। जिन पांच आतंकवादियों का नाम चार्जशीट में शामिल है उनमें आईएसआई के मेजर इकबाल का नाम भी शामिल है। इनके खिलाफ मामले की सुनवाई 16 मई को शिकागो अदालत में शुरू होगी। शिकागो की अदालत में दायर चार्जशीट में जिन आतंकियों के नाम आए हैं, ये सभी पाकिस्तानी नागरिक हैं। इनमें से साजिद, मजहर, अबू और इकबाल की शिनाख्त पहले भी की गई थी। लेकिन इनका नाम पहले चार्जशीट में नहीं था। पाकिस्तानी मूल के संदिग्ध आतंकी डेविड कोलमैन हेडली और तहव्वुर राणा को भी मुंबई हमले के मामले में आरोपी बनाया गया है। अमेरिकी आयोजकों के मुताबिक, साजिद मीर लश्कर से जुड़ा था और आतंकवादी संगठन और दूसरे संगठनों के बीच के संबंधों की निगरानी करता था। उसने हेडली के सहयोगी की भूमिका निभाई थी। मुंबई हमले से जुड़ी अपनी भूमिका को हेडली पहले से ही स्वीकार कर चुका है। अबू कहाफा का ताल्लुक भी लश्कर से है। वह लश्कर के प्रशिक्षण शिविर में आतंकवादियों को हमलों के लिए आधुनिक तकनीक के गुर सिखाता था। दूसरी ओर मजहर इकबाल और `सदस्य डी' इस पाकिस्तानी आतंकी संगठन के स्वयंभू कमांडर थे। वकीलों का कहना है कि इकबाल नामक शख्स ने मुंबई हमले की साजिश रचने और आर्थिक मदद देने में अहम भूमिका निभाई। साजिद, कहाफा और मजहर ने हेडली, सदस्य डी और अन्य के साथ मिलकर मुंबई हमलों की पूरी साजिश रची थी। 26 नवम्बर 2008 को मुंबई पर हुए आतंकवादी हमले में 166 लोगों की जान गई थी जिनमें कई विदेशी भी थे।

मुंबई हमलों में पाक के शामिल होने का एक और सबूत भी सामने आया है। कराची के एक घर से एक ऐसा डिब्बा मिला है, जिसमें जीपीएस (ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम) रखा था। इस घर को मुंबई हमले के दौरान आतंकियों ने कंट्रोल रूम के तौर पर इस्तेमाल किया था। एक अधिकारी ने कहा कि पाक के साथ होने वाली द्विपक्षीय वार्ता में भी भारत इस मुद्दे को उठाएगा। जिस `कुबेर' नाम की नाव से हमलावर मुंबई पहुंचे थे, उन्होंने जीपीएस का उपयोग किया था। इसका पैकिंग कॉर्टून कराची में मिला है। यह पैकिंग कॉर्टून स्वयं पाक एजेंसी ने जब्त किया है। जीपीएस का नम्बर, उसका मॉडल और पैकिंग की तिथि उस जीपीएस से मिलती है जो कुबेर नामक नौका से मिला था। इस नए तथ्य से भारत का जकीउर रहमान लखवी सहित सात लश्कर आतंकियों के खिलाफ मुंबई हमले में चलाए जा रहे अभियोग को भी मजबूती मिलेगी। शिकागो में चल रहा केस जल्द और तथ्य उजागर करेगा और पाक सरकार, सेना व आईएसआई को बेनकाब करने में मदद देगा।

Thursday, 12 May 2011

यूसुफ रजा गिलानी ने अमेरिका को खरी-खोटी सुनाईं

Vir Arjun, Hindi Daily Newspaper Published from Delhi
प्रकाशित: 12 मई 2011
-अनिल नरेन्द्र
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री यूसुफ रजा गिलानी ने सोमवार को अमेरिका के `किल ओसामा' ऑपरेशन के मसले पर संसद में सफाई देते हुए उल्टे अमेरिका को कटघरे में खड़ा कर दिया। उन्होंने साफ पूछा कि ओसामा किसकी देन है? ओसामा न तो हमारी देन है और न ही हमने ओसामा को बढ़ावा ही दिया। यह आपने (अमेरिका) ने किया है। गिलानी ने ओसामा बिन लादेन के दुर्दांत आतंकी बनने पर सवाल उठाते हुए कहा कि आखिर ओसामा को तैयार किसने किया? 90 के दशक में तालिबान और अलकायदा के उभरने पर सवाल उठाते हुए गिलानी ने कहा कि ओसामा बिन लादेन के लिए अकेले पाकिस्तान को दोष नहीं दिया जा सकता। अमेरिका पर परोक्ष हमला बोलते हुए गिलानी ने कहा कि अलकायदा सरगना को इतना बड़ा आतंकी किसने बनाया यह भी जानना जरूरी है। उन्होंने कहा कि हमें अन्य देशों की नीतियों और गलतियों का जिम्मेदार नहीं माना जा सकता। अलकायदा का जन्म स्थान पाकिस्तान नहीं है। हमें इतिहास से सीख लेते हुए चीजों को सामने रखना होगा। गिलानी नेशनल असेम्बली (संसद) को संबोधित कर रहे थे। गिलानी ने कहा कि हमने लादेन को पाकिस्तान या अफगानिस्तान में आमंत्रित नहीं किया। गिलानी ने आईएसआई की सराहना करते हुए कहा कि आईएसआई हमारी राष्ट्रीय सम्पदा है। मुझे आतंक विरोधी गतिविधियों के लिए आईएसआई की भूमिका पर गर्व है। गिलानी ने यह भी कहा कि अमेरिका हमारी आईएसआई की मदद के बिना आतंकी सरगना लादेन तक पहुंच नहीं सकता था। गिलानी ने पाक में लादेन के पाए जाने के बाद पाक सेना और आईएसआई की आलोचनाओं को खारिज कर दिया। गिलानी ने अमेरिका की दोहरी चाल का हवाला देते हुए कहा कि 80 के दशक में अफगानिस्तान में सोवियत सेना के खिलाफ जेहादियों को तैयार करने में अमेरिका ने मुख्य भूमिका निभाई थी। उन्होंने कहा कि पाक निश्चित तौर पर पूरे प्रकरण की तह में जाएगा। उन्होंने यहां तक कह दिया कि अमेरिकी नीति का दुष्परिणाम पाकिस्तान आज भी भुगत रहा है। गिलानी ने अन्त में यह चेतावनी दे डाली कि अब किसी ने ऐसा दुस्साहस किया तो मुंहतोड़ जवाब देंगे।
निश्चित रूप से पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ने अमेरिका को खरी-खरी सुनाई हैं। यह सत्य है कि ओसामा बिन लादेन अमेरिका की देन है पर पुराना इतिहास दोहरा कर पाकिस्तान अपनी जिम्मेवारियों से नहीं बच सकता। दरअसल पाकिस्तान इसलिए भी अमेरिका से पंगा लेने का जोखिम उठा रहा है, क्योंकि वह अमेरिका की मजबूरियों से परिचित है। अमेरिका सब कुछ होने के बावजूद पाकिस्तान के तलवे चाटेगा उन्हें अरबों डालर देगा। पाकिस्तान आज भी अमेरिका की वॉर ऑन टेरर में सबसे बड़ा सहयोगी है। फिर चीन पूरी तरह से पाकिस्तान के साथ है। ऑपरेशन किल ओसामा के बाद जब सारी दुनिया पाक को कोस रही थी तो चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता जियांग यू ने कहा, `पाकिस्तान आतंकवाद निरोधक प्रयासों में आगे है। अंतर्राष्ट्रीय समुदाय को आतंकवाद के विरुद्ध पाकिस्तान की ओर से दिए जाने वाले सहयोग को समझना चाहिए और उसका समर्थन करना चाहिए।' आज भी अमेरिका को पाकिस्तान की ज्यादा जरूरत है बनिस्पत पाक को अमेरिका की। वैसे अमेरिका को इतनी खरी-खोटी सुनाने के लिए गिलानी की हिम्मत की दाद देनी होगी।

Sunday, 8 May 2011

भारत के लिए तो लादेन से ज्यादा लश्कर खतरनाक है

Vir Arjun, Hindi Daily Newspaper Published from Delhi
प्रकाशित: 07 मई 2011
-अनिल नरेन्द्र
ओसामा बिन लादेन के मरने से बेशक अमेरिका ने थोड़ी राहत महसूस की हो पर जहां तक भारत का सवाल है, हमें लादेन के मरने से कोई फर्क पड़ने वाला नहीं। हमारे लिए तो लश्कर-ए-तोयबा अलकायदा से ज्यादा बड़ा खतरा है। बिन लादेन से पाकिस्तान का आतंकी ढांचा भी प्रभावित नहीं होगा। आज भी पाकिस्तान में लश्कर, जैश-ए-मोहम्मद, हिजबुल मुजाहिद्दीन, हरकत उल अंसार जैसे दर्जनों आतंकी संगठनों के शिविर जारी हैं। इस समय पाकिस्तान में लगभग 37 आतंकी शिविर मौजूद हैं। जम्मू-कश्मीर में सक्रिय हार्ड कोर आतंकियों की संख्या लगभग 2300 है। इसके अलावा लगभग 900 से अधिक भाड़े के विदेशी आतंकी भी मौजूद हैं। जम्मू-कश्मीर में इस समय पाकिस्तान, पाक अधिकृत कश्मीर, अफगानिस्तान, मिस्र, सूडान, यमन, बहरीन, बंगलादेश, ईरान और इराकी मूल के विदेशी आतंकी मौजूद हैं।
दरअसल भारतीय खुफिया एजेंसियों की नजर में ओसामा के अलकायदा और लश्कर-ए-तोयबा के बीच कोई अन्तर नहीं है। लश्कर पर भारतीय डोजियर कहता है कि इस आतंकी संगठन के अलकायदा और तालिबान से गहरे रिश्ते हैं। इस्लामिक मुल्क पाकिस्तान में ईद समेत धार्मिक समारोहों में मारे जाने वाले जानवरों की खालों से करोड़ों रुपये कमाने के अलावा चन्दे व सदस्यता शुल्क, आदि से अपने विस्तार की आर्थिक जरूरतों को पूरा करते हैं। सूत्रों के मुताबिक पाकिस्तान के मनशेरा में पवनोढेरी में मौजूद लश्कर का प्रशिक्षण केंद्र एक बार में 500 लोगों को प्रशिक्षण देता है। मुजफ्फराबाद, लाहौर, पेशावर, इस्लामाबाद, रावलपिण्डी, कराची, मुल्तान, क्वेटा, गुजरांवाला, सियालकोट, गिलगित समेत कई बड़े शहरों में लश्कर के 2000 से ज्यादा भर्ती केंद्र और दफ्तर हैं। उनके पास आधुनिक हथियारों के साथ ही उन्नत संचार यंत्र भी हैं। खुफिया सूत्रों के मुताबिक घाटी में फिरौती और संचार के लिए लश्कर के आतंकी वाइस इंटरनेट प्रोटोकॉल का इस्तेमाल करते हैं जिसके कारण मोबाइल फोन पर नम्बर तक नहीं आता।
संयुक्त राष्ट्र प्रतिबंध के बावजूद जमात-उद-दावा और लश्कर समेत 19 अलग-अलग नामों से चल रहे इस आतंकी संगठन का कारोबार इसकी ताकत का अहसास कराता है। संयुक्त राष्ट्र में लश्कर के 2005 और पाकिस्तान में 2002 से प्रतिबंध होने के बावजूद इसका मुखिया हाफिज सईद ओसामा बिन लादेन की मौत पर शोक सभाएं आयोजित करने से बाज नहीं आया। भारत में सिमी, इंडियन मुजाहिद्दीन जैसे आतंकी संगठनों के सहारे आतंकवाद को आउटसोर्सिंग का मॉडल भी लश्कर विकसित कर चुका है। बंगलादेश में जमात उल मुजाहिद्दीन और हरकत उल जिहाद अल इस्लामी (हूजी) के तार भी लश्कर से सीधे जुड़े हुए हैं। मुंबई आतंकी हमले ने अमेरिका को भी अब यह मानने पर मजबूर कर दिया है कि लश्कर का विस्तार और पश्चिमी देशों को निशाना बनाने की उनकी हसरतें खतरे का सबब हैं। लश्कर आतंकियों ने मुंबई हमले में इजरायलियों के लिए महत्वपूर्ण खसड़ हाउस और पश्चिमी पर्यटकों के पसंदीदा होटल ताज होटल को निशाना बनाकर इसकी बानगी भी दे दी है। भारत को आतंकवाद के खिलाफ अपनी ही लड़ाई लड़नी होगी। हां, हम अमेरिका पर यह दबाव जरूर डाल सकते हैं कि वह पाकिस्तान में मौजूद टेरर फैक्टरियों को नष्ट करे या हमारी मदद करे।

लादेन का खात्मा करने वाले गुमनाम नेवी सील्स

Vir Arjun, Hindi Daily Newspaper Published from Delhi
प्रकाशित: 07 मई 2011
-अनिल नरेन्द्र
अमेरिका के प्रतिष्ठित नेवी सील दस्ते जिसने दुनिया के मोस्ट वांटेड टेरेरिस्ट ओसामा बिन लादेन को मार गिराया, में कौन-कौन शामिल थे, उनके नाम क्या थे, यह शायद ही कभी पता चले। यह गुमनाम सीलों आज अमेरिका सहित पूरी सभ्य दुनिया के हीरो हैं पर इनकी ट्रेनिंग देखिए, इनके बारे में कोई व्यक्तिगत डीटेल जैसे कि नाम, पता कभी नहीं दिया जाएगा। बस इन्हें टीम-6 के नाम से ही पुकारा जाएगा। बिन लादेन ऑपरेशन में कुल 79 सैनिक थे। इनमें से लगभग 12 नेवी सील एबटाबाद की उस हवेली में घुसे जहां बिन लादेन रह रहा था। निश्चित रूप से यह अमेरिकी सेना में सबसे घातक जत्था है। इनकी ट्रेनिंग इतनी सख्त होती है कि मुश्किल से 80 प्रतिशत ही पूरी कर पाते हैं। यह समुद्र, जमीन और आसमान तीनों पर हमला करने के लिए ट्रेंड होते हैं। ऑपरेशन बिन लादेन के लिए इन सीलों ने एक अत्याधुनिक हेलीकॉप्टर का इस्तेमाल किया। इस प्रकार का हेलीकॉप्टर पहले कभी नहीं देखा गया है। इसके बारे में जानकारी तब मिली जब विशेषज्ञों को एबटाबाद ऑपरेशन के दौरान तबाह हुए हेलीकॉप्टर के मलबे के निरीक्षण से मिली। इस ऑपरेशन के दौरान अमेरिकी दस्ते नेवी सील्स का एक हेलीकॉप्टर खराब होकर गिर गया था और ऑपरेशन की समाप्ति के बाद सील्स ने उसको तबाह खुद ही कर दिया था ताकि उसके अन्दर कम्प्यूटर पर डाटा इत्यादि सूचनाएं बाहर न आ सकें और न ही हेलीकॉप्टर के अन्दर क्या-क्या यंत्र लगे हैं, इसकी भी जानकारी बाहर आए। इस हेलीकॉप्टर का नाम यूएम-60 ब्लैक हॉक हेलीकॉप्टर है। इसमें कई बदलाव किए गए हैं ताकि उसकी आवाज कम से कम हो जाए और राडार भी इसे नहीं पकड़ सके। पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी के एक वरिष्ठ पाकिस्तानी अधिकारी ने यह स्वीकार किया कि राडार ने तो हेलीकॉप्टर को न केवल पकड़ ही सका बल्कि अफगानिस्तान से पाकिस्तान के अन्दर आते वक्त ही उनको देखा गया।
ओसामा बिन लादेन के खात्मे के लिए अमेरिका के जिस शख्स ने सबसे ज्यादा मेहनत की वह अमेरिकी सरकार में आतंकियों का शिकार करने में सर्वाधिक अनुभव रखने वाले अधिकारियों में से एक वाइस एडमिरल विलियम एच. मकरैवन हैं। जब रविवार को अमेरिकी हेलीकॉप्टर लादेन के खात्मे के लिए पाकिस्तानी सीमा में घुसे थे, उस वक्त अफगानिस्तान के बगराम एयर फील्ड स्थित ज्वाइंट ऑपरेशन सेंटर की कमान टेक्सास से वाइस एडमिरल मवरैवन ही सम्भाल रहे थे। इन्होंने ही दो माह पहले ही ओसामा बिन लादेन मिशन के लिए नेवी सील्स की विशेष यूनिट बनाई थी। उन्होंने इस अतिगोपनीय अभियान के लिए हफ्तेभर गहन ट्रेनिंग दी। अभियान के दो ही नतीजे होते सफल होता तो अलकायदा का सफाया और विफल होता तो पाकिस्तान के साथ अमेरिकी गठबंधन खतरे में पड़ जाता। जब पता चला कि एबटाबाद में बिन लादेन का घर ऊंची-ऊंची दीवारों से घिरा है और अमेरिकी राष्ट्रपति ने उसमें घुसने की इजाजत दे दी तो सीआईए प्रमुख लियोन पेनेटा ने यह काम मवरैवन को सौंपा। वाइस एडमिरल मवरैवन किसी भी मिशन की सफलता के लिए छह मुख्य सूत्र मानते हैं अचरज में डालना, गति, सुरक्षा, सरलता, उद्देश्य और दोहराव। ओसामा अभियान की जोखिम को देखते हुए उन्होंने इसमें एक और सूत्र जोड़ा शुद्धता या सूक्षमता। उनके द्वारा उच्च मानदंडों को महत्व देना ही मिशन ओसामा की सफलता का कारण बना।

Saturday, 7 May 2011

For India, Lashkar is more dangerous than Laden

Anil Narendra
US might have felt relieved with the death of Osama bin Laden, but so far India is concerned, we are least affected by his death. For us, Lashkar-e-Toiba is more dangerous than Al Qaeda. Even the terrorist infrastructure in Pakistan is not going to be affected by the killing of bin Laden. A number of terror camps of dozens of outfits like Lashkar, Jaish-e-Mohammed, Hizb-ul- Mujahideen, Harkat-ul-Ansar are still operating in Pakistan. At present, about 37 terror camps are active in Pakistan. About 2,300 hardcore terrorists are operating in Jammu and Kashmir. Besides, about 900 foreign mercenaries are also present there. Foreign mercenaries from Pakistan, PoK, Afghanistan, Egypt, Sudan, Yemen, Bahrain, Bangladesh, Iran and Iraq are also present in J&K.
In fact, Indian Intelligence Agencies see no difference between Al Qaeda of Osama and Lashkar-e-Toiba. Indian dossier on Lashkar says that this terror outfit has close relations with Al Qaeda and Taliban. These terror organizations in Islamic Pakistan nation, fulfill their expansion needs out of the revenue received from the sale of hides of slaughtered animals on Eid and other religious celebrations, besides from donations and levies collected from people. According to sources, the Lashkar training camp at Pawanodheri in Manshera of Pakistan has the capacity to train 500 persons at a time. Lashkar also has more than 2,000 recruiting centers and offices spread in a number of big cities including Muzaffarabad, Lahore, Peshawar, Islamabad, Rawalpindi, Karachi, Multan, Quetta, Gujaranwala, Sialkot, Gilgit. Beside modern weapons, they have advanced communication equipment. According to intelligence sources, terrorists of Lashkar use voice internet protocol for ransom and communication in the Valley.
In spite of UN sanctions, the power of this terror outfit, working under different 19 names including Jamat-ud-Dawa and Lashkar-e-Toiba can be gauged from the operations of the organization. Even though the Lashkar has been banned by UN since 2005 and by Pakistan since 2002, its chief Hafiz Saeed did not refrain from organizing condolence meetings on the death of Osama bin Laden. In India, with the support of outfits like Indian Mujahideen SIMI has developed a model for outsourcing terrorism. In Bangladesh, Jamaat-ul-Mujahideen and Harkat-ul-Jihad al-Islami (HuJI) has direct links with Lashkar. Mumbai terror attack has, now forced US to acknowledge the fact that expansion of Lashkar and targeting Western countries are a cause of serious concern. Lashkar terrorists have proved this point by targeting Khasad House, an important place for Israelis and Hotel Taj, a preferred stay-destination for Western tourists in Mumbai. India must fight its fight against terrorism on its own. We, however, can pressurize US in destroying terror factories in Pakistan or help us in destroying them.

Thursday, 5 May 2011

क्या जवाहिरी और मुल्ला उमर भी पाक सेना के संरक्षण में हैं

Vir Arjun, Hindi Daily Newspaper Published from Delhi
प्रकाशित: 05 मई 2011
-अनिल नरेन्द्र

अमेरिका ने पाकिस्तान के इस दावे को मानने से इंकार कर दिया है कि वह अपनी धरती पर ओसामा बिन लादेन की मौजूदगी से अनजान था। अमेरिका के डिप्टी नेशनल सिक्यूरिटी एडवाइजर जॉन ब्रेनन ने मंगलवार को कहा कि लादेन जिस देश में लम्बे समय से छुपा था, वहां उसका कोई सपोर्ट सिस्टम ने हो, यह बात कुछ हजम नहीं होती। मैं यह आंकलन नहीं लगाना चाहता कि सपोर्ट सिस्टम किस तरह का हो सकता है, लेकिन अमेरिका मानता है कि वह पाकिस्तान  में छह साल से ज्यादा समय से रह रहा था। लादेन का पाकिस्तान की राजधानी के इतने नजदीक पाया जाना सवाल खड़ा करता है। सीआईए प्रमुख  लियोन पैनेटा ने साफ कहा कि अमेरिकी अधिकारियों को शक था कि पाकिस्तान के साथ काम करने से ऑपरेशन को लीक कर देते। अमेरिका के प्रमुख सांसदों ने पाकिस्तान पर अमेरिका से डबल गेम खेलने का आरोप लगाया है और उन्होंने पाक के लिए अमेरिकी सहायता पर कटौती चाही है। सीनेटर सूसन कालिंस ने कहा कि इस्लामाबाद से सिर्प 120 किलोमीटर दूर लादेन का मारा जाना यह दिखाता है कि पाक हमारा सुनिश्चित सहयोगी नहीं है। उधर पाकिस्तान का कहना है कि लादेन के खिलाफ अमेरिकी ऑपरेशन हमारी जानकारी के बिना अवैध था। उसका यह भी कहना है कि लादेन के खिलाफ ऑपरेशन में सफलता हमारे सहयोग से मिली। मंगलवार रात को जारी पाक सरकार के बयान में कहा गया है कि एबटाबाद और आसपास का इलाका खुफिया एजेंसियों की नजरों में 2003 से था, तभी 2004 में अलकायदा का अहम टारगेट पकड़ा गया। लादेन के परिसर के बारे में आईएसआई ने 2009 में सीआईए को सूचना दी थी। यह बात अलग है कि सीआईए की टेक्नोलॉजी एडवांस थी सो उसने हमसे मिले सुरागों के आधार पर लादेन तक पहुंचने में सफलता पाई। पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय का कहना है कि सरकार को अमेरिकी ऑपरेशन की जानकारी नहीं थी। अमेरिकी हेलीकॉप्टर पाकिस्तानी रॉडार की नजरों से बचकर पाकिस्तानी एयरस्पेस में आए थे। सूचना मिलने पर पाकिस्तानी जेटों ने भी उड़ान भरी थी। पाक राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने कहा है कि रविवार को ऑपरेशन में पाक शामिल नहीं था, लेकिन उसके सहयोग से ही लादेन का खात्मा हो सका। उन्होंने कहा कि लादेन की मौजूदगी का पाक अधिकारियों को पता नहीं था। अमेरिका में पाक के राजदूत हुसैन हक्कानी ने माना है कि हमारे देश में लादेन का सपोर्ट सिस्टम था, लेकिन उन्होंने जोर देकर कहा कि सरकार ने लादेन को बचाने में कोई भूमिका नहीं निभाई थी।
लादेन के पाकिस्तान में ही छुपे होने के बाद यह बात भी साफ हो गई है कि अलकायदा की दूसरी पंक्ति के नेता अल जवाहिरी और तालिबानी नेता मुल्ला उमर भी पाकिस्तानी सेना की शरण में छिपे हैं। ओसामा के मारे जाने के बाद पाकिस्तान पर अब इन नेताओं को भी जिन्दा या मुर्दा पकड़ने का अमेरिकी दबाव बढ़ेगा। इन नेताओं की गिरफ्तारी या मौत के बाद ही आतंकवाद की रीढ़ तोड़ी जा सकती है। इसके साथ ही अफगानिस्तान में अमेरिकी नेतृत्व वाली अंतर्राष्ट्रीय सेना का मुकाबला कर रहे तालिबान लड़ाकों को भी पाकिस्तानी सेना की मदद बन्द करवानी होगी। ओसामा के मारे जाने के बाद अब आतंकवाद और पाकिस्तानी सांठगांठ पूरी तरह उजागर हो गई। भारत यह बात वर्षों से कहता आ रहा है पर अमेरिका की दोहरी नीति के कारण अमेरिकनों को समझ नहीं आई।

जेरोनिमो ईकेआईए सुनने को थे बेकरार ओबामा

Vir Arjun, Hindi Daily Newspaper Published from Delhi
प्रकाशित: 05 मई 2011
अनिल नरेन्द्र
एक बार जब यह सुनिश्चित हो गया कि एबटाबाद के एक घर में ओसामा बिन लादेन छिपा हुआ है तो अमेरिकी सुरक्षा विभाग ने राष्ट्रपति बराक ओबामा को दो विकल्प दिए। पहला कि इमारत परिसर को बमों से उड़ा दिया जाए, दूसरा कि जमीनी हमला करके उसे तबाह कर अन्दर सभी लोगों को मार दिया जाए या गिरफ्तार किया जाए। बराक ओबामा ने दूसरा  विकल्प चुना। उन्होंने कहा कि जमीनी हमला करो ताकि हम सब और सारी दुनिया में यह निश्चित रूप से निर्णायक रूप से तय हो जाए कि ओसामा बिन लादेन ही छिपा है और हमला उसी पर किया गया है। इस काम के लिए प्रतिष्ठित नेवी सील की एक विशेष टीम चुनी गई। अफगानिस्तान के अमेरिकी बैस से हेलीकॉप्टरों ने उड़ान भरी। भारतीय समयानुसार रात दो बजे चार हेलीकॉप्टरों ने हवेली की घेराबंदी शुरू कर दी और यह सारी कार्रवाई राष्ट्रपति ओबामा, विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन और टॉप कमांडर व्हाइट हाउस के बेसमेंट में सिचुएशन रूम में बन्द होकर खुफिया वीडियो क्रीन पर देख रहे थे। यूएस नेवी सील्स के जवानों के हेलमेट पर कैमरे लगे थे। ओबामा बेसब्री के साथ लादेन के मारे जाने से संबंधित कोड मैसेज मिलने का इंतजार कर रहे थे। यह मैसेज था, जेरोनिमो ईकेआईए। सीआईए के डायरेक्टर लियोन ई. पैनेटा ने कहा कि हमें जेरोनिमो दिखाई दिया है। इसके कुछ ही मिनट बाद उन्होंने कहा कि जेरोनिमो ईकेआईएस यानि एनिमी किल्ड इन एक्शन। लादेन की बाईं आंख पर गोली मारी जा चुकी थी। ओबामा ने कहा वी गाट हिम।
दरअसल राष्ट्रपति ओबामा ने राष्ट्रपति का पद्भार सम्भालते ही सीआईए के डायरेक्टर लियोन पैनेटा को आदेश दिया था कि मुझे 30 दिन के अन्दर एक ऐसा प्लान चाहिए जिसमें ओसामा लादेन को या तो जिन्दा पकड़ा जाए या फिर मुर्दा। सीआईए ने अगस्त 2010 में प्लान तैयार कर लिया था। आतंक का दूसरा नाम बन चुका बिन लादेन कहां रहता है, यह जानकारी अमेरिकी खुफिया अधिकारियों को एक कार का पीछा करते हुए मिली। सफेद रंग की सुजुकी कार को पिछले साल जुलाई में पेशावर के निकट देखा गया था। कार में बैठा था अलकायदा प्रमुख लादेन का सबसे विश्वस्त संदेशवाहक, जिसका अमेरिकी खुफिया अधिकारी कई महीनों से पीछा कर रहे थे। समाचार चैनल सीएनएन के मुताबिक संदेशवाहक का नाम अबू अहमद था और वह कुवैती नागरिक था। उसकी जानकारी हालांकि अमेरिकी खुफिया अधिकारियों को 2007 में ही मिल चुकी थी। न्यूयार्प टाइम्स के मुताबिक सीआईए के लिए काम करने वाले पाकिस्तानी जासूस ने पिछले साल जुलाई में पेशावर के निकट अहमद की सफेद कार देखी थी और उसका पीछा किया था। कई सप्ताह तक कार का पीछा करने पर जासूस को एबटाबाद के एक बंगले का पता चला। यह बंगला अभी चार दिवारियों से घिरा हुआ था। यह स्थान इस्लामाबाद से 120 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। जब कमांडो कार्रवाई हुई उस समय अहमद भी एबटाबाद की इस इमारत में मौजूद था और मारा गया। बिन लादेन सबसे छोटी पत्नी और बेटे सहित दो संदेशवाहकों के साथ रह रहा था। इस हवेली की 18 फीट ऊंची दीवारें थीं जिसमें आने-जाने के लिए कम रास्ते थे और सड़क कच्ची थी। 4.4 करोड़ रुपये कीमत की हवेली थी लेकिन उसमें फोन या इंटरनेट नहीं था। मोबाइल तक भी नहीं था। इस तरह हुआ ओसामा बिन लादेन का अन्त।

Wednesday, 4 May 2011

दुनिया का सबसे मोस्ट वांटेड ओसामा बिन लादेन मारा गया

Vir Arjun, Hindi Daily Newspaper Published from Delhi

प्रकाशित: 04 मई 2011
-अनिल नरेन्द्र
पूरी दुनिया को इस्लाम के रंग में रंगने का खूंरेजी ख्वाब देखने वाले और अंतर्राष्ट्रीय आतंकवाद का पर्याय बन चुके मोस्ट वांटेड आतंकवादी ओसामा बिन लादेन को अमेरिका ने मौत के घाट उतारकर अमेरिका ने यह साबित कर दिया कि वह अपने इरादों के प्रति अटल है और अपने शत्रुओं का सफाया करने के लिए किसी भी हद तक जा सकता है। रविवार की देर रात अमेरिकी सैनिकों ने एक अत्यंत गोपनीय ऑपरेशन में उसे एक ऐसी इमारत के अन्दर मार गिराया जो पाकिस्तान की मिलिट्री अकादमी से कुछ ही दूर स्थित है। पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद से 60 किलोमीटर दूर एबटाबाद शहर में स्थानीय समयानुसार रात डेढ़ बजे अमेरिकी सेना के विशेष बल को लेकर चार हेलीकॉप्टर उस इमारत के कम्पाउंड में उतरे जहां ओसामा के छिपे होने की सूचना थी। सोमवार को टीवी पर जो फुटेज दिखाए गए, उनमें खेतों के बीच एक कम्पाउंड दिख रहा था, जो 12 फीट ऊंची दीवारों से घिरा हुआ था। किलेनुमा इस इमारत के परिसर में हेलीकॉप्टरों के उतरने के बाद उन पर ओसामा के गार्डों ने फायरिंग की। अमेरिकी सैनिकों की जवाबी कार्रवाई में 54 वर्षीय ओसामा की मौत हो गई। उसके बेटे और एक महिला के मारे जाने की भी खबर है। इस अभियान में एक हेलीकॉप्टर को क्षति पहुंची। मालूम हो कि अमेरिका ने ओसामा पर ढाई करोड़ डालर (लगभग 111 करोड़ रुपये) का इनाम घोषित किया था। अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने राष्ट्र के नाम संबोधन में ओसामा के मारे जाने की पुष्टि की। लादेन के मारे जाने के  बाद उसकी दो पत्नियों तथा चार बच्चों को हिरासत में ले लिया गया है। अमेरिका का कहना है कि इस्लामी रीति-रिवाज के साथ ओसामा बिन लादेन के शव को समुद्र में दफन किया गया है। समझा जाता है कि उसके अपने देश सऊदी अरब द्वारा शव लेने से इंकार करने पर ऐसा किया गया। हालांकि उसे समुद्र में दफनाने पर इस्लामी विद्वानों ने सवाल उठाए हैं। उसे समुद्र में दफनाने के पीछे अमेरिका की मंशा उसकी कब्रगाह को आस्था का केंद्र बनने से रोकने की रही है। लादेन की पहचान की पुष्टि के लिए अमेरिका ने उसके शव का डीएनए परीक्षण कराया है। यह डीएनए टेस्ट लादेन की बहन के डीएनए से मिलने से किया गया, जिसमें शव लादेन का होने की 99.9 फीसदी पुष्टि हो गई है। बहन का डीएनए सैम्पल 9/11 के हमलों के बाद लिया गया था। लादेन के बारे में किसी भी तरह का शक दूर करने के लिए चेहरे का मिलान करने वाली अत्याधुनिक फेशियल रिकाग्निशन तकनीक का भी सहारा लिया गया। सन 2001 में 9/11 के हमले के बाद अमेरिका लगभग दस साल से अलकायदा सरगना को जिन्दा या मुर्दा पकड़ने की कोशिश में था। जब अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने लादेन के मारे जाने की खबर की पुष्टि की तो सारे अमेरिका में जश्न का माहौल बन गया। रात के अंधेरे होने के बावजूद व्हाइट हाउस के बाहर खुशी से झूमती भीड़ एकत्र हो गई।
हालांकि अमेरिका ने लादेन ऑपरेशन को काफी खुफिया रखा और आईएसआई और अलकायदा को इसकी हवा नहीं लगने दी पर इस कार्रवाई से कुछ ही दिन पहले अलकायदा की धमकी का महत्व बढ़ जाता है। क्या यह सम्भव है कि ओसामा के सम्भावित अमेरिकी कार्रवाई का आभास हो गया था? इस कार्रवाई के कुछ ही दिन पहले चर्चित विकीलीक्स की ओर से जारी गोपनीय दस्तावेज में कहा गया, अलकायदा के एक वरिष्ठ स्वयंभू कमांडर ने दावा किया है कि उसके संगठन ने यूरोप में एक परमाणु बम छिपा रखा है। अगर लादेन को पकड़ा गया या मारा गया तो वह इसमें विस्फोट कर देंगे? गुआतांनामो कारागार में 780 पकड़े गए लोगों की पृष्ठभूमि और पूछताछ के दौरान उनकी ओर से दिए बयान के आधार पर यह गोपनीय दस्तावेज तैयार किए गए हैं। ओसामा के मारे जाने से दुनिया में हो रही आतंकवादी गतिविधियों पर शायद ही कोई लम्बा-चौड़ा असर पड़े। क्योंकि आज सारी दुनिया में इतने अलकायदा टाइप के सेल स्थापित हो चुके हैं जो स्वतंत्र रूप से काम कर रहे हैं कि इनकी गतिविधियों पर कोई असर न पड़े। फिर इससे भी इंकार नहीं किया जा सकता कि पिछले एक दशक में अलकायदा ने विचारधारा का रूप ले लिया है। आतंकवाद को खाद-पानी देने वाली इस विचारधारा  का अन्त नहीं दिखता। इसलिए और भी नहीं, क्योंकि अलकायदा ने अमेरिका के नेतृत्व में छेड़े गए आतंकवाद विरोधी अभियान को इस्लाम पर हमले का रूप दे दिया है।
अमेरिकी विशेष बल के हाथों इस्लामाबाद के करीब एबटाबाद में एक शानदार बंगले में ओसामा की मौत और इससे पहले अनेक अलकायदा नेताओं की पाकिस्तानी शहरों में हुई गिरफ्तारी से यह स्पष्ट हो जाता है कि आतंकवादियों की सुरक्षित पनाहगाह अफगान-पाक सीमा या भारत सीमा पर नहीं बल्कि पाकिस्तान के बीचोबीच है। इससे एक और मूलभूत सच्चाई रेखांकित होती है कि पाकिस्तान में सेना का वर्चस्व समाप्त किए बिना तथा वहां कट्टरपंथ को समाप्त किए बगैर अंतर्राष्ट्रीय आतंकवाद के खिलाफ जंग नहीं जीती  जा सकती। 9/11 हमले के बाद पाकिस्तान से पकड़े गए अन्य आतंकवादी नेताओं में अलकायदा के तीसरे नम्बर का नेता शालिद शेक मुहम्मद, नेटवर्प व्यवस्था का प्रमुख अबु जुबैदिया, आसुर जजीरी शामिल है। इन तमाम गिरफ्तारियों में एक समान कड़ी यह है कि ये सब पाकिस्तानी शहरों में पकड़े गए हैं। इस आलोक में यह हैरानी की बात नहीं है कि बिन लादेन कबाइली इलाकों के बजाय पाकिस्तान की राजधानी के निकट शहर में मारा गया। अगर हैरानी है तो इस बात की कि लादेन इस्लामाबाद के बगल में एबटाबाद में रह रहा था। यहां पाकिस्तानी सेना का बड़ा आधार शिविर, सैन्य अकादमी, सैन्य अस्पताल और अनेक वरिष्ठ सैन्य व खुफिया अधिकारी व पूर्व अधिकारियों के आवास हैं। अमेरिका को लादेन को पकड़ने में दस साल इसलिए भी लगे, क्योंकि लादेन को पाकिस्तानी रक्षा प्रतिष्ठान के कुछ तत्वों का संरक्षण प्राप्त था। याद रहे कि ओसामा डायलासिस पर था और डायलसिस हर स्थान पर नहीं हो सकता। कटु सत्य तो यह है कि अमेरिका बेशक जितना प्रयास करे जब तक पाकिस्तानी सेना और आईएसआई नहीं सुधरती तब तक न तो आतंकवाद ही खत्म होगा और न ही पाकिस्तान का राष्ट्र निर्माण सम्भव है। बहरहाल अमेरिका को यह खुशी व संतोष जरूर होगा कि उसने 9/11 का बदला ले लिया है।