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Friday, 20 July 2012

भारत-पाक क्रिकेट मैचों का विवादास्पद फैसला

केंद्र सरकार ने भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) को पाकिस्तान के साथ तीन एक दिवसीय व दो टी-20 मैच आयोजित करने की हरी झंडी दे दी है। भारत और पाकिस्तान के बीच क्रिकेट संबंध बहाल करने का फैसला सोमवार को बीसीसीआई की कार्यकारी समिति ने लिया। बोर्ड ने एक बयान में बताया कि पाकिस्तानी क्रिकेट टीम को दिसम्बर 2012 से जनवरी 2013 के बीच तीन एक दिवसीय व दो टी-20 मैचों की सीरीज खेलने के लिए आमंत्रित करने का निर्णय लिया गया है। कोलकाता, चेन्नई और दिल्ली में एक दिवसीय जबकि बेंगलुरु और अहमदाबाद में टी-20 के मुकाबले होंगे। बोर्ड के वरिष्ठ सदस्य राजीव शुक्ला के मुताबिक पी. चिदम्बरम ने गृह मंत्रालय की तरफ से इस सीरीज पर किसी तरह की आपत्ति न होने की बात कही है। हालांकि मंत्रालय ने इस निर्णय के प्रति कोई खास उत्साह नहीं दिखाया है। इतना ही नहीं, विदेश मंत्रालय से भी हरी झंडी मिलने की जानकारी है। केंद्र सरकार व बीसीसीआई का यह फैसला चकित और साथ ही सवाल खड़ा करने वाला जरूर है। देश की जनता के मन में यह सवाल उठना स्वाभाविक ही है कि आखिर इस बीच ऐसा क्या सकारात्मक हुआ है जिससे भारत सरकार ने पाकिस्तान की क्रिकेट टीम को देश में खेलने की अनुमति प्रदान कर दी? अभी-अभी तो नए सिरे से यह सामने आया है कि मुंबई हमले में पाकिस्तान की सरकारी एजेंसियों की भागीदारी थी। चौंकाने वाली बात यह है कि कसाब, डेविड हेडली और अबू जिंदाल के खुलासों के बाद भी पाक सरकार ने 26/11 के गुनहगारों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की। इस फैसले का सुनील गावस्कर ने भी खुलकर विरोध किया है। गावस्कर ने कहा कि मुंबई का होने के नाते मुझे लगता है कि जब मुंबई हमले की जांच में पाकिस्तान से सहयोग नहीं मिल रहा है तो आयोजन में जल्दबाजी क्यों की गई? भाजपा प्रवक्ता शहनवाज हुसैन की टिप्पणी दिलचस्प थी। वे कहते हैं कि पाकिस्तानी क्रिकेट टीम विश्व कप मैच के लिए पहले भी भारत आ चुकी है। अब मुंबई हमले के गुनहगार आतंकियों की टीम को भी भारत बुलाया जाना चाहिए। सपा नेता अबू आजमी का कहना था कि मुंबई हमले के जिम्मेदार देश के साथ हम कैसे खेल संबंध रख सकते हैं। मैंने इसी कॉलम में आईपीएल मैचों के दौरान सुझाव दिया था कि जब पाकिस्तानी अम्पायर आ सकते हैं, अजहर महमूद लंदन के जरिए आ सकते हैं तो पाकिस्तानी खिलाड़ियों के आईपीएल खेलने पर पाबंदी क्यों? आईपीएल में पाक खिलाड़ियों का खेलना समझ आता है, क्योंकि वह भारत सरकार का टूर्नामेंट नहीं है पर भारत-पाक श्रृंखला वह भी भारत सरकार के आमंत्रण पर खेली जाए तो वह और बात बन जाती है। आज भारत सहित सभी सभ्य दुनिया का पाकिस्तानी आतंक पर अंकुश लगाने का दबाव बढ़ रहा है। ऐसे समय पाकिस्तान द्वारा आतंकवाद पर नकारात्मक रुख दिखाने के बावजूद उन्हें अपने देश में बुलाना क्या उचित होगा? हमें नहीं मालूम कि इस फैसले के पीछे केंद्र सरकार की क्या सोच है पर संदेश यही जाता है कि पाकिस्तान के प्रति उसकी नीति पहले की तरह ढुलमुल बनी हुई है। बेशक भारत सरकार की नीति ढुलमुल हो पर पाकिस्तान का रवैया आतंक के प्रति वही पुराना है, उसमें कोई परिवर्तन नहीं आया। इससे अधिक निराशाजनक और कुछ नहीं हो सकता कि पाकिस्तान की क्रिकेट टीम को भारत आकर खेलने की अनुमति देने के 24 घंटे के अन्दर वहीं की एक अदालत ने मुंबई हमले की जांच के लिए गठित एक आयोग की रिपोर्ट को अवैध बताते हुए सिरे से खारिज कर दिया। इससे यह पुराना सवाल नए सिरे से उठना स्वाभाविक है कि क्या पाकिस्तान मुंबई हमले की साजिश रचने वालों को दंडित करने के लिए तनिक भी इच्छुक है? यह सवाल इसलिए और भी गंभीर हो जाता है, क्योंकि मुंबई हमले की साजिश रचने के सात आरोपियों के खिलाफ सुनवाई शुरू होने का नाम ही नहीं ले रही है।

Wednesday, 6 June 2012

सचिन तेंदुलकर ने आरम्भ की अपनी राजनीतिक पारी


Vir Arjun, Hindi Daily Newspaper Published from Delhi
Published on 6 June 2012
अनिल नरेन्द्र
क्रिकेट के भगवान कहे जाने वाले सचिन तेंदुलकर ने अपनी राजनीति की पारी आरम्भ कर दी है। सोमवार को सचिन माननीय संसद सदस्य बन गए। काफी लम्बे समय से सचिन का इंतजार हो रहा था कि वे आकर संसद की सदस्यता की शपथ लें। लेकिन आईपीएल क्रिकेट में व्यस्त होने की वजह से सचिन दिल्ली नहीं आ पा रहे थे। अंतत उन्होंने शपथ लेने का समय निकाल ही लिया। सोमवार को सचिन ने राज्यसभा चेयरमैन हामिद अंसारी के कैबिन में शपथ लेते वक्त सचिन के साथ पत्नी अंजलि भी मौजूद थीं। शपथ लेने के बाद सचिन ने कहा कि फिलहाल मैं क्रिकेट पर पूरा ध्यान दूंगा। जब उनसे यह पूछा गया कि क्या वह संसद के लिए समय निकाल पाएंगे तो उनका कहना था कि मैंने किसी से नहीं कहा था कि मुझे राज्यसभा का सदस्य बना दीजिए। मैं मनोनीत सदस्य हूं, यह सम्मान है। लेकिन हकीकत है कि मैं आज क्रिकेट के कारण ही यहां हूं। सचिन ने यह भी कहा कि मुझे खुशी होगी अगर मैं एक ऐसे शख्स के तौर पर जाना जाऊं जिसने सिर्प क्रिकेट की जगह बाकी सभी खेलों के लिए भी योगदान दिया। उधर अन्ना हजारे ने उम्मीद जताई कि सचिन लोकपाल बिल पर समर्थन देने के अलावा भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाएंगे। सचिन को राज्यसभा में लाने के पीछे कांग्रेस की रणनीति शायद यही रही होगी कि इससे युवाओं के बीच यह राजनीतिक संदेश जाए कि कांग्रेस तेंदुलकर जैसे खिलाड़ियों को सम्मान देकर पूरी युवा पीढ़ी से कहना चाहती है कि वे आगे बढ़े, तो कांग्रेस इसके लिए हर पहल करने को तैयार है।
इधर तमाम क्रिकेट प्रेमियों के लिए एक और खुश खबरी है। आईसीसी क्रिकेट कमेटी ने सिफारिश की है कि वन-डे और ट्वंटी-ट्वंटी के समान टेस्ट मैच भी रात को आयोजित हों। सिफारिश के अनुसार नाइट टेस्ट मैच दो देशों की आपसी सहमति पर निर्भर होगा। समिति ने डकवर्थ लुइस नियम को सर्वश्रेष्ठ विकल्प मानते हुए इसे बरकरार रखने का फैसला किया है। साथ ही खेल के अन्य क्षेत्रों में मामूली बदलाव किए हैं। वन-डे मैच में एक ओवर में शार्ट पिच गेंद यानि बाउंसर की संख्या एक से बढ़ाकर दो की जा रही है। अम्पायर फैसला समीक्षा प्रणाली (डीआरएस) यथावत रहेगी। एक ऐसा सेंसर तैयार किया गया है जो मैचों के दौरान पहना जा सकता है और वह बताएगा कि गेंद फेंकने के दौरान गेंदबाजों की कोहनी सीधी होती है या नहीं? पॉवर प्ले पहले 10 ओवर तक सीमित रहेगा और पांच ओवर का बल्लेबाजी पॉवर प्ले 40वें ओवर तक पूरा कर लेना होगा। गैर-पॉवर प्ले वाले ओवरों में केवल चार खिलाड़ियों को 30 गज के घेरे के बाहर रहने की अनुमति होगी। टेस्ट में आधिकारिक ड्रिंक्स ब्रेक के अलावा ड्रिंक्स को मैदान में लाने की अनुमति नहीं होगी। साथ ही टीमें रेफरल में भी समय बर्बाद नहीं कर सकेंगी। 2014 से प्रत्येक दो साल बाद 16 टीमों का ट्वंटी-ट्वंटी वर्ल्ड कप आयोजित किया जाएगा। यह जानकारी आईसीसी के महाप्रबंधक (क्रिकेट) डेव रिचर्ड्सन ने दी। आईसीसी ने वर्षा प्रभावित वन-डे मैचों में विजेता का निर्धारण करने के लिए लागू होने वाला डकवर्थ लुइस नियम के स्थान पर एक भारतीय इंजीनियर द्वारा तैयार वीजेडी नियम पर विचार किया तो लेकिन उसने डकवर्थ लुइस नियम को जारी रखने का फैसला किया। आईआईटी चेन्नई के छात्र रहे बी. जयदेवन ने पिछले 12 सालों से चल रहे डकवर्थ लुइस नियम में कई खामियां उजागर करते हुए एक वैकल्पिक नियम बनाया है पर आईसीसी ने उसे फिलहाल स्वीकार नहीं किया। सचिन को अपनी नई पारी शुरू करने पर ढेर सारी बधाई।

Wednesday, 30 May 2012

आईपीएल-5 रोमांचक रहा पर शक के दायरे में ही आया

Vir Arjun, Hindi Daily Newspaper Published from Delhi
Published on 30 May 2012
अनिल नरेन्द्र
आईपीएल-5 शानदार तरीके से समाप्त हुआ। रविवार को खेला गया फाइनल मैच बहुत ही रोमांचक था। अगर यह कहें कि आईपीएल-5 का समापन मैच इससे अच्छा नहीं हो सकता था तो शायद गलत न होगा। शाहरुख खान की टीम कोलकाता नाइट राइडर्स आखिरकार पांचवीं कोशिश में पास हो गई। रविवार को खेले गए फाइनल में केकेआर ने पिछले दो बार के चैंपियन चेन्नई सुपरकिंग्स को पांच विकेट से हरा दिया। मैच का फैसला आखिरी ओवर की चौथी गेंद पर हुआ। विजेता टीम को 10 करोड़ और उपविजेता को 7.50 करोड़ रुपये की इनामी राशि मिली। किस्मत ने केकेआर का निश्चित रूप से साथ दिया। कम से कम दो किस्से ऐसे हुए जिससे केकेआर की जीत सम्भव हो सकी। पहला तब हुआ जब कैलिस ने एक शाट मारा। बाउंड्री पर खड़े माइक हसी ने कैच लपक तो लिया पर वह बाउंड्री लाइन क्रॉस कर गए। जिस बॉल पर कैलिस को आउट होना था वह छक्के में बदल गई। दूसरा किस्सा तब हुआ जब हिलफेन हास ने शाकीब अल हसन को गेंद फेंकी। शाकीब ने शाट मारा और और कैच हो गए पर कैच होने से पहले वह दो रन भाग चुके थे। एम्पायर ने इस बॉल को कमर से ऊपर होने के कारण वाइट करार दिया। वाइट होने के कारण हिलफेन हास को दोबारा बॉल करनी पड़ी और इस बार शाकीब ने चौका मार दिया। इस तरह एक ही बॉल से केकेआर को 7 रन मिल गए और उस समय केकेआर को 7 बॉलों में 16 रनों की दरकार थी। इन 7 रनों ने आखिरी ओवर का लक्ष्य आसान कर दिया। मनोज तिवारी ने दो चौके लगा दिए और केकेआर चैंपियन बन गया। केकेआर की यह पहली जीत थी। मालिक शाहरुख खान की खुशी का ठिकाना देखने लायक थी। शानदार टूर्नामेंट का शानदार क्लाइमैक्स रहा पर आईपीएल-5 विवादों से नहीं बच सका। सबसे बड़ा विवाद तो दिल्ली डेयर डेविल्स की परफार्मेंस को लेकर था। विवादित क्रिकेट लीग बनकर उभरी आईपीएल में गड़बड़ी का शक भी होने लगा है। क्या आईपीएल के रिजल्ट पहले से ही तय थे? शक करने के कई कारण दिखाई देते हैं। क्वालीफायर-1 और क्वालीफायर-2 में दिल्ली डेयर डेविल्स के अजीबो-गरीब फैसलों और आईपीएल की वेबसाइट में क्वालीफायर-2 के रिजल्ट के पहले ही दोनों फाइनलिस्टों के नाम आने के बाद शक होना लाजिमी है। 22 मई को केकेआर के खिलाफ पहले क्वालीफायर में भी सहवाग की कप्तानी में ऐसे फैसले देखने को मिले जिससे लगा कि दिल्ली हारने के लिए ही उतरी है। स्पिन ट्रैक होने के बावजूद सहवाग ने उस मैच में सिर्प एक स्पिनर को खिलाया जबकि केकेआर की ओर से तीन स्पिनर उतरे। यही नहीं लक्ष्य का पीछा करने उतरी दिल्ली ने टेलर और इरफान पठान से पहले अपेक्षाकृत धीमी बल्लेबाजी करने वाले वेणुगोपाल राव और पवन नेगी को बल्लेबाजी के लिए उतारा। इन दोनों की धीमी बल्लेबाजी की वजह से बाद में टेलर और इरफान के लिए लक्ष्य पाना बहुत मुश्किल हो गया। यह सिलसिला यहीं नहीं थमा। क्वालीफायर-2 में तो सहवाग ने बीसीसीआई अध्यक्ष एन. श्रीनिवासन की टीम चेन्नई सुपरकिंग्स के फाइनल में जाने के सारे रास्ते खोल दिए। शुक्रवार को हुए इस मैच में सहवाग ने चेन्नई की पिच पर टास जीतने के बावजूद पहले गेंदबाजी की। यही नहीं पूरे टूर्नामेंट में टाप फार्म में रहे दक्षिण अफ्रीकी तेज गेंदबाज मोर्नी मोर्केल को इस मैच में नहीं खिलाया गया और इनकी जगह कैरेबियाई आलराउंडर आद्रेरसल को शामिल कर लिया। सहवाग के इस निर्णय पर धोनी ने भी आश्चर्य जाहिर किया। यही नहीं पूरे टूर्नामेंट में बढ़िया प्रदर्शन करने वाले स्पिनर शाहबाज नदीम की जगह इस मैच में सन्नी गुप्ता को शामिल किया और उनसे पहला ही ओवर करवा डाला। गुप्ता ने तीन ओवर में 47 रन दिए और एक भी सफलता उनके हाथों में नहीं लगी। यही नहीं सहवाग ने इस टूर्नामेंट में पहली बार गेंदबाजी में हाथ आजमाए और एक ही ओवर में 21 रन दिए। सबसे आश्चर्य की बात यह रही कि 223 रन की विशाल लक्ष्य का पीछा करने उतरी दिल्ली के ओपनिंग बल्लेबाजों में वीरेन्द्र सहवाग नदारद थे। उन्होंने वार्नर के साथ ओपनिंग में माहेला जयवर्द्धने को उतारा। उनमें न तो कांफिडेंस नजर आई और उनकी बाडी लैंग्वेज ने सारी कहानी कह डाली। वह सिर्प एक रन बनाकर चलते बने। माहेला जयवर्द्धने अच्छा खेल रहे थे पर एक बॉल पर जब वह बीट हुए तो वह खड़े तमाशा देखते रहे। उन्होंने वापस बैट रखने की कोई कोशिश नहीं की जबकि वह सम्भव है कि स्टम्प होने से बच सकते थे। दिल्ली डेयर डेविल्स ने अपने दिल्ली के फैंस को न केवल नाराज किया बल्कि सहवाग के आचरण से शक भी पैदा किया पर कुल मिलाकर आईपीएल-5 सफल रहा और सब ने इसका खूब मजा लिया। ऐसा नहीं कि टूर्नामेंट से कुछ अच्छा नहीं उभरा। कई युवा खिलाड़ी उभरे। बोर्ड ने यह भी फैसला किया कि आईपीएल नियमों की समीक्षा होगी और अगले सत्र में सभी घरेलू खिलाड़ियों की भी नीलामी होगी।
Anil Narendra, Cricket Match, Daily Pratap, IPL, Kolkata, Shah Rukh Khan, Vir Arjun

Wednesday, 23 May 2012

क्लाइमैक्स पर पहुंचता आईपीएल

Vir Arjun, Hindi Daily Newspaper Published from Delhi
Published on 23 May 2012
अनिल नरेन्द्र
आईपीएल (इंडियन प्रीमियर लीग) अपने क्लाइमैक्स में पहुंच गया है। मंगलवार से नाकआउट स्टेज आरम्भ हो गई है। अपने-अपने विचार हो सकते हैं। मुझे तो यह कहने में कोई संकोच नहीं कि मैंने आईपीएल मैचों का पूरा मजा लिया है। पिछले लगभग डेढ़ महीने से जब से आईपीएल शुरू हुआ है मैंने तकरीबन सारे मैच देखने का प्रयास किया है। मजबूरी की वजह से इक्का-दुक्का रह गए हों तो और बात है पर हर शाम मैंने मैचों का रोमांच लिया है। मेरी राय में यह एंटरटेनमेंट का बहुत अच्छा साधन रहा। औरतों को भी मजबूरी में सीरियल छोड़कर मैच देखने पड़े। हमने इन मैचों में देखा कि किसी सपाट पिच पर 180 के लक्ष्य का बचाव किया जा सकता है। 160 के स्कोर पर भी चुनौती पेश की जा सकती है और 140 के लक्ष्य को आसानी से पाया जा सकता है। कुछ टीमें लक्ष्य का पीछा करते हुए मैच को आखिरी बॉल तक ले गए और कई मैचों में आखिरी बॉल पर हार-जीत का फैसला हुआ। इससे ज्यादा किसी भी मैच में और क्या रोमांच हो सकता है? हमने टूर्नामेंट में देखा कि यदि आखिरी दो ओवर में जीत के लिए 25 रन की भी जरूरत रही तो बल्लेबाजों ने उसे हासिल कर लिया। टी-20 में गेंदबाजों की भूमिका भी साफ हुई। क्रिस गेल जिस टीम (रॉयल चैलेंजर बेंगलुरु) में हों और वह नाकआउट से बाहर हो जाए तो दर्शाता है कि डेल स्टेन जैसा बॉलर कितना कहर ढा सकता है। वैसे फाइनल स्टेज पर पहुंचने वाली चार टीमों ने डेक्कन चार्जर्स का दिल से शुक्रिया अदा किया होगा कि उन्होंने क्रिस गेल को फाइनल स्टेज से बाहर कर दिया। क्योंकि क्रिस गेल रहते तो वह किसी भी टीम के अकेले अपने दमखम पर नाक में दम कर देते। इससे यह भी साबित हुआ कि अकेले बल्लेबाजों से टीम नहीं जीतती, उसकी बॉलिंग और फील्डिंग भी उतनी ही जरूरी है। बैलेंस्ड टीम होनी चाहिए। दिल्ली डेयर डेविल्स मुझे सबसे ज्यादा बैलेंस्ड टीम लगती है। जिगरी दोस्त वीरेन्द्र सहवाग और गौतम गम्भीर आमने-सामने होंगे। दिल्ली को सुनील नारायण की काट निकालनी होगी। एक तरफ वीरू और मोर्पल होंगे तो दूसरी तरफ गौतम और सुनील नारायण। अगर किस्मत की बात करें तो मेरी राय में सबसे धनी किस्मत के हैं महेन्द्र सिंह धोनी। डेक्कन की बेंगलुरु पर जीत ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि महेन्द्र सिंह धोनी और चेन्नई सुपरकिंग्स सचमुच भाग्य के धनी हैं। पिछली दो बार की चैंपियन चेन्नई को 2010 की तरह इस बार भी आईपीएल से लगभग बाहर माना जा रहा था। पूरी तरह से वह दूसरी टीमों के परिणाम पर निर्भर थे और तीनों परिणाम उनके अनुकूल रहे। चेन्नई ने 17 अंक के साथ लीग चरण का समापन किया था और किंग्स इलेवन पंजाब, राजस्थान रॉयल्स और बेंगलुरु उससे आगे निकलने की स्थिति में थे। चेन्नई तभी प्ले ऑफ में पहुंच पाता जबकि पंजाब और राजस्थान दोनों अपना एक-एक मैच हार जाते। दोनों के तब 14-14 अंक थे और उन्हें दो मैच खेलने थे। पंजाब और राजस्थान दोनों हार गए। अब सबकी निगाहें चार्जर्स और बेंगलुरु मैच पर टिकी थी। बेंगलुरु मैच जीतने पर प्ले ऑफ में पहुंच जाता और चेन्नई बाहर हो जाता पर क्रिस गेल और विराट कोहली जैसे दिग्गजों की टीम बेंगलुरु मैच हार गई और धोनी पहुंच गए प्ले ऑफ स्टेज पर। है न किस्मत के धनी? आईपीएल जैसे बड़े टूर्नामेंट में थोड़े विवाद तो जरूर होंगे। कहा जा रहा है कि इसमें ब्लैक मनी का खुला इस्तेमाल हुआ है। हुआ होगा, उसे रोकने की कोशिश भी होनी चाहिए पर इसकी वजह से आईपीएल बन्द कर दिया जाए, हम सहमत नहीं हैं। रेव पार्टियों में इक्का-दुक्का क्रिकेटर का शामिल होना, स्पॉट फिक्सिंग के आरोप, महिला पर लड़ाई यह सब चलता है। हमें इस टूर्नामेंट के पाजिटिव बातों पर ज्यादा ध्यान देना चाहिए। दो महीने बाद वर्ल्ड टी-20 टूर्नामेंट हेने जा रहा है। कितने भारतीय युवा खिलाड़ी आईपीएल में उभरकर आए हैं। इनमें अजिक्म रहाणे जैसे भारतीय टीम-20 में शामिल किए जा सकते हैं और भी कुछ युवा खिलाड़ी हैं जिन्हें मौका दिया जा सकता है। यह तभी सम्भव हुआ जब यह आईपीएल में अपनी फार्म और हुनर दिखा सके। फिर दर्जनों उन खिलाड़ियों, कोचों, फिजियों व अन्य लोगों को मौका मिल रहा है जो वैसे तो खेलने के लिए फिट हैं पर उम्र की वजह से नेशनल टीमों से बाहर हैं। होटलों, एयरलाइनों, ट्रांसपोर्ट उद्योग को भी कितना लाभ हुआ है। बेहतर चीजों का तजुर्बा करने का मौका मिला है। भारतीय खिलाड़ियों को विदेशी खिलाड़ियों के साथ खेलने, सीखने का मौका मिलता है। कुल मिलाकर यह एक अच्छा फार्मेट है जो जारी रहना चाहिए। देखें कौन-सी टीम खिताब जीतती है? वही जीतेगी जो मैच के दिन बेहतरीन खेल खेलेगी।
Anil Narendra, Cricket Match, Daily Pratap, IPL, T20, Vir Arjun

Thursday, 17 May 2012

आईपीएल-5 में स्पॉट फिक्सिंग स्टिंग ऑपरेशन

Vir Arjun, Hindi Daily Newspaper Published from Delhi
Published on 17 May 2012
अनिल नरेन्द्र
क्रिकेट में फिक्सिंग का भूत फिर बाहर निकल आया है। इंडिया टीवी ने एक स्टिंग ऑपरेशन कर आईपीएल के कुछ खिलाड़ियों द्वारा गलत तरीके से पैसे के लिए स्पॉट फिक्सिंग का खुलासा किया। चैनल ने दावा किया कि उसने यह स्टिंग ऑपरेशन एक साल तक किया है। इस स्टिंग ऑपरेशन में चैनल के रिपोर्टरों ने और आईपीएल टीमों के एजेंट बनकर खिलाड़ियों से मुलाकात की थी। जिसमें कई काम शामिल थे, जो भारतीय क्रिकेट बोर्ड के नियमों का उल्लंघन है। आइए देखें, इस टेप में एक खिलाड़ी से बातचीत क्या है। जैसा कि टीवी चैनल ने दावा किया है। रिपोर्टर ः मैच फिक्सिंग के लिए किस तरह के उदाहरण दिए गए हैं? खिलाड़ी ः यह कहा जाता है कि एक आध मैच फिक्स करके काफी कमाई कर सकते हो। रिपोर्टर ः एक नो बॉल या बाउंसर से काम चल जाता है? खिलाड़ी ः ओके। रिपोर्टर ः आपके लिए यह कोई समस्या नहीं है? खिलाड़ी ः नहीं कोई समस्या नहीं। रिपोर्टर ः 10, 15, 20 मैच या पांच मैच, आदि जितने मैच चाहो? खिलाड़ी ः ठीक है कोई समस्या नहीं है। रिपोर्टर ः टेस्ट, लीग या रणजी? खिलाड़ी ः हम...। रिपोर्टर ः क्या आप इससे सहमत हैं? खिलाड़ी ः हां ठीक है। रिपोर्टर ः यह आसान भी है। हम आपको पूरा मैच फिक्स करने को नहीं कह रहे? खिलाड़ी ः हूं...। रिपोर्टर ः हम सिर्प स्पॉट फिक्सिंग के लिए कह रहे हैं? खिलाड़ी ः हूं। रिपोर्टर ः मैं इसके लिए आपको 5000 दे रहा हूं, आप कितना चाहते हैं? खिलाड़ी ः उस टूर्नामेंट के लिए 40,000। इसके अलावा चैनल ने यह भी दावा किया कि मनीष पांडे, मोहनीश मिश्रा, मनविन्दर बिसला ने तय स्लैब से अधिक पैसे लिए। ऐसा करना बीसीसीआई के नियमों का उल्लंघन है। टीपी सुधींद्र ने नो बॉल फेंकने के लिए पैसे लिए। कुछ खिलाड़ी टूर्नामेंट के दौरान भी टीम बदलने को राजी मिले। बीसीसीआई ने अनकैंड (नीलामी में शामिल नहीं) खिलाड़ियों के लिए स्लैब निर्धारित किया हुआ है। वे इससे अधिक पैसे नहीं ले सकते। फ्रेंचाइजी भी उन्हें ऐसी पेशकश नहीं कर सकते, ऐसा करना नियम का उल्लंघन है। मध्य प्रदेश के गेंदबाज सुधींद्र ने जानबूझ कर नो बॉल फेंकने के लिए राजी हो गए। इसके लिए उन्होंने 50 हजार रुपये मांगे. सुधींद्र आईपीएल-5 में डेक्कन चार्जर्स के लिए खेलते हैं। चैनल के मुताबिक इवेंट में खेले गए एक घरेलू मैच में जानबूझ कर नो बॉल फेंकने के लिए 40 हजार रुपये लिए थे। शलभ श्रीवास्तव टीम बदलने और स्पॉट फिक्सिंग के लिए राजी दिखे। उन्होंने नो बॉल फेंकने के लिए 10 लाख रुपये की मांग की। शलभ ने बताया कि मनीष पांडे को सहारा पुणे वारियर्स में बनाए रखने के लिए 50 लाख की कार दी है। शलभ के मुताबिक कोलकाता से खेलने के लिए मनविन्दर बिसला ने 75 लाख रुपये ब्लैक में लिए हैं। बीसीसीआई ने कड़ा रुख अपनाते हुए जांच पूरी होने तक कथित पांच आरोपी क्रिकेटरों को तुरन्त प्रभाव से निलंबित कर दिया है। मोहनीश मिश्रा, शलभ श्रीवास्तव, टीपी सुधीन्द्र, अमित यादव और अभिनव बाली हैं जिन्हें जांच पूरी होने तक निलंबित किया गया है। हमारा मानना है कि यह स्टिंग ऑपरेशन अगर कुछ साबित करता है तो बस इतना कि कुछ छुटभैया खिलाड़ी केवल स्पॉट फिक्सिंग कर रहे थे। इससे पूरे मैच पर कोई असर नहीं पड़ेगा। रही बात एक टीम से दूसरी टीम में बदलने के लिए अतिरिक्त पैसों की मांग करना बेशक नियमों का उल्लंघन हो पर गम्भीर अपराध नहीं। ब्लैक में पैसा लेना भी इतना बड़ा अपराध नहीं। आईपीएल क्रिकेट से ज्यादा पैसों का खेल है। खिलाड़ी भी चाहते हैं कि वह ज्यादा से ज्यादा कमा सकें। फ्रेंचाइजी भी कुछ चुनिन्दा खिलाड़ियों को टीम में बरकरार रखने के लिए तरह-तरह के प्रलोभन देते हैं। अगर पुणे वारियर्स ने ब्लैक में पैसे दिए हैं तो उसका कोई खास फायदा हुआ हो ऐसा नहीं दिखता। वह डेक्कन चार्जर्स के साथ प्वाइंट टेबल में सबसे नीचे है। टीवी चैनल सनसनी फैलाने के लिए मशहूर है। यह स्टिंग ऑपरेशन भी उसी सनसनी अभियान का एक हिस्सा है जिसमें ज्यादा गम्भीरता नजर नहीं आती। आईपीएल-5 को बिना वजह बदनाम करने का प्रयास है और दर्शकों में ख्वामख्वाह शक पैदा करने का एक प्रयास।
क्रिकेट में फिक्सिंग का भूत फिर बाहर निकल आया है। इंडिया टीवी ने एक स्टिंग ऑपरेशन कर आईपीएल के कुछ खिलाड़ियों द्वारा गलत तरीके से पैसे के लिए स्पॉट फिक्सिंग का खुलासा किया। चैनल ने दावा किया कि उसने यह स्टिंग ऑपरेशन एक साल तक किया है। इस स्टिंग ऑपरेशन में चैनल के रिपोर्टरों ने और आईपीएल टीमों के एजेंट बनकर खिलाड़ियों से मुलाकात की थी। जिसमें कई काम शामिल थे, जो भारतीय क्रिकेट बोर्ड के नियमों का उल्लंघन है। आइए देखें, इस टेप में एक खिलाड़ी से बातचीत क्या है। जैसा कि टीवी चैनल ने दावा किया है। रिपोर्टर ः मैच फिक्सिंग के लिए किस तरह के उदाहरण दिए गए हैं? खिलाड़ी ः यह कहा जाता है कि एक आध मैच फिक्स करके काफी कमाई कर सकते हो। रिपोर्टर ः एक नो बॉल या बाउंसर से काम चल जाता है? खिलाड़ी ः ओके। रिपोर्टर ः आपके लिए यह कोई समस्या नहीं है? खिलाड़ी ः नहीं कोई समस्या नहीं। रिपोर्टर ः 10, 15, 20 मैच या पांच मैच, आदि जितने मैच चाहो? खिलाड़ी ः ठीक है कोई समस्या नहीं है। रिपोर्टर ः टेस्ट, लीग या रणजी? खिलाड़ी ः हम...। रिपोर्टर ः क्या आप इससे सहमत हैं? खिलाड़ी ः हां ठीक है। रिपोर्टर ः यह आसान भी है। हम आपको पूरा मैच फिक्स करने को नहीं कह रहे? खिलाड़ी ः हूं...। रिपोर्टर ः हम सिर्प स्पॉट फिक्सिंग के लिए कह रहे हैं? खिलाड़ी ः हूं। रिपोर्टर ः मैं इसके लिए आपको 5000 दे रहा हूं, आप कितना चाहते हैं? खिलाड़ी ः उस टूर्नामेंट के लिए 40,000। इसके अलावा चैनल ने यह भी दावा किया कि मनीष पांडे, मोहनीश मिश्रा, मनविन्दर बिसला ने तय स्लैब से अधिक पैसे लिए। ऐसा करना बीसीसीआई के नियमों का उल्लंघन है। टीपी सुधींद्र ने नो बॉल फेंकने के लिए पैसे लिए। कुछ खिलाड़ी टूर्नामेंट के दौरान भी टीम बदलने को राजी मिले। बीसीसीआई ने अनकैंड (नीलामी में शामिल नहीं) खिलाड़ियों के लिए स्लैब निर्धारित किया हुआ है। वे इससे अधिक पैसे नहीं ले सकते। फ्रेंचाइजी भी उन्हें ऐसी पेशकश नहीं कर सकते, ऐसा करना नियम का उल्लंघन है। मध्य प्रदेश के गेंदबाज सुधींद्र ने जानबूझ कर नो बॉल फेंकने के लिए राजी हो गए। इसके लिए उन्होंने 50 हजार रुपये मांगे. सुधींद्र आईपीएल-5 में डेक्कन चार्जर्स के लिए खेलते हैं। चैनल के मुताबिक इवेंट में खेले गए एक घरेलू मैच में जानबूझ कर नो बॉल फेंकने के लिए 40 हजार रुपये लिए थे। शलभ श्रीवास्तव टीम बदलने और स्पॉट फिक्सिंग के लिए राजी दिखे। उन्होंने नो बॉल फेंकने के लिए 10 लाख रुपये की मांग की। शलभ ने बताया कि मनीष पांडे को सहारा पुणे वारियर्स में बनाए रखने के लिए 50 लाख की कार दी है। शलभ के मुताबिक कोलकाता से खेलने के लिए मनविन्दर बिसला ने 75 लाख रुपये ब्लैक में लिए हैं। बीसीसीआई ने कड़ा रुख अपनाते हुए जांच पूरी होने तक कथित पांच आरोपी क्रिकेटरों को तुरन्त प्रभाव से निलंबित कर दिया है। मोहनीश मिश्रा, शलभ श्रीवास्तव, टीपी सुधीन्द्र, अमित यादव और अभिनव बाली हैं जिन्हें जांच पूरी होने तक निलंबित किया गया है। हमारा मानना है कि यह स्टिंग ऑपरेशन अगर कुछ साबित करता है तो बस इतना कि कुछ छुटभैया खिलाड़ी केवल स्पॉट फिक्सिंग कर रहे थे। इससे पूरे मैच पर कोई असर नहीं पड़ेगा। रही बात एक टीम से दूसरी टीम में बदलने के लिए अतिरिक्त पैसों की मांग करना बेशक नियमों का उल्लंघन हो पर गम्भीर अपराध नहीं। ब्लैक में पैसा लेना भी इतना बड़ा अपराध नहीं। आईपीएल क्रिकेट से ज्यादा पैसों का खेल है। खिलाड़ी भी चाहते हैं कि वह ज्यादा से ज्यादा कमा सकें। फ्रेंचाइजी भी कुछ चुनिन्दा खिलाड़ियों को टीम में बरकरार रखने के लिए तरह-तरह के प्रलोभन देते हैं। अगर पुणे वारियर्स ने ब्लैक में पैसे दिए हैं तो उसका कोई खास फायदा हुआ हो ऐसा नहीं दिखता। वह डेक्कन चार्जर्स के साथ प्वाइंट टेबल में सबसे नीचे है। टीवी चैनल सनसनी फैलाने के लिए मशहूर है। यह स्टिंग ऑपरेशन भी उसी सनसनी अभियान का एक हिस्सा है जिसमें ज्यादा गम्भीरता नजर नहीं आती। आईपीएल-5 को बिना वजह बदनाम करने का प्रयास है और दर्शकों में ख्वामख्वाह शक पैदा करने का एक प्रयास।
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Thursday, 22 March 2012

विराट कोहली इस समय दुनिया के अव्वल वनडे बल्लेबाज हैं

Vir Arjun, Hindi Daily Newspaper Published from Delhi
Published on 22 March 2012
अनिल नरेन्द्र
एशिया कप क्रिकेट के महत्वपूर्ण मैच में बंगलादेश ने श्रीलंका को हराकर पहली बार फाइनल में प्रवेश कर लिया। अब बंगलादेश और पाकिस्तान के बीच फाइनल होगा। भारत बाहर हो गया। पाकिस्तान के खिलाफ इतना अच्छा खेलने के बाद भी टीम इंडिया के बाहर होने का सभी को दुःख है। एक सवाल जो किया जा रहा है कि क्या श्रीलंका जानबूझ कर बंगलादेश से हारा ताकि फाइनल में भारत प्रवेश न कर सके? जिस श्रीलंका के एक गेंदबाज ने भारत के साथ एक वर्ष पहले हुए मुकाबले में अंतिम गेंद पर जब भारत को जीत के लिए एक रन चाहिए था और वीरेन्द्र सहवाग 99 पर नाबाद थे, की सेंचुरी रोकने के लिए जानबूझ कर नो बॉल डाल दी हो तो उस श्रीलंका से सच्ची खेल भावना की उम्मीद नहीं की जा सकती। पूरे देश में यही चर्चा थी कि इस नूराकुश्ती की मार भारत पर ही पड़ेगी। श्रीलंका ने बल्लेबाजी, गेंदबाजी और फील्डिंग में महज खानापूर्ति करते हुए जीत बंगलादेश को परोस दी। वजह एक थी कि जिस भारत ने श्रीलंका को धूल चटा रखी है, वह फाइनल में न पहुंच सके। बंगलादेश की जीत के साथ ही पांच बार का चैंपियन भारत फाइनल की होड़ से बाहर हो गया। हालांकि भारत और बंगलादेश के एक बराबर आठ अंक रहे लेकिन मेजबान टीम ने चूंकि भारत को हराया था इसलिए उसे फाइनल का टिकट मिल गया। बेशक टीम इंडिया फाइनल में नहीं आ सकी पर इस सीरीज में भारत की कम से कम दो बहुत बड़ी उपलब्धियां रहीं। पहली सचिन का सौवां सैकड़ा और दूसरा विराट कोहली जो एक अत्यंत महत्वपूर्ण बैट्समैन के रूप में उभरे। इस 23 वर्षीय पश्चिमी दिल्ली के युवा खिलाड़ी ने अब दुनिया के महान बल्लेबाजों की सूची में प्रवेश कर लिया है। जब वह बल्लेबाजी करता है तो विपक्ष के बड़े से बड़ा स्कोर बौना बन जाता है। तीन हफ्ते में दो बार अकेले अपने दमखम से विराट ने टीम इंडिया को जीत का सेहरा पहनाया है। रविवार को कोहली का 148 गेंदों में 183 व इनकी वजह से टीम इंडिया ने एक रिकॉर्ड कायम कर दिया रन चेस में। बुरा न मानो कोहली है यह एमएमएस पूरे मीरपुर में गूंजता रहा। पिछले साल विराट कोहली ने वनडे का सबसे ज्यादा स्कोर बनाया था। उससे पहले सात वह दूसरे नम्बर के हाइस्ट स्कोरर रहे। इसलिए यह कहना शायद गलत नहीं होगा कि इस समय विराट कोहली दुनिया के सबसे अव्वल वनडे बल्लेबाज बन गए हैं। हालांकि विराट कोहली की इस शानदार फार्म पर सबको नाज है पर उन्हें अपने व्यवहार में सुधार लाना चाहिए। गुस्सा, अहंकार अच्छे-अच्छे को धूल चटा देता है। कुछ ज्योतिषियों का कहना है कि उन्हें गुस्सा इसलिए आता है कि वह 18 नम्बर की जर्सी पहनते हैं। इसका योग होता है 9। यह अच्छा योग नहीं है। इनके अनुसार विराट को ऐसी जर्सी पहननी चाहिए जिसका योग 5 होना चाहिए। जैसे 14, 32। विराट का जन्म का नम्बर 5 है। वह 23 वर्ष के हैं जिसका योग भी 5 है, यह साल 2012 है जिसका नम्बर भी 5 बनता है। इसी वजह से यह साल उनके लिए विशेष है। उनके गुस्से व अहंकार के कारण उन्हें टीम इंडिया का एंग्री यंगमैन भी कहा जा रहा है।
एशिया कप क्रिकेट के महत्वपूर्ण मैच में बंगलादेश ने श्रीलंका को हराकर पहली बार फाइनल में प्रवेश कर लिया। अब बंगलादेश और पाकिस्तान के बीच फाइनल होगा। भारत बाहर हो गया। पाकिस्तान के खिलाफ इतना अच्छा खेलने के बाद भी टीम इंडिया के बाहर होने का सभी को दुःख है। एक सवाल जो किया जा रहा है कि क्या श्रीलंका जानबूझ कर बंगलादेश से हारा ताकि फाइनल में भारत प्रवेश न कर सके? जिस श्रीलंका के एक गेंदबाज ने भारत के साथ एक वर्ष पहले हुए मुकाबले में अंतिम गेंद पर जब भारत को जीत के लिए एक रन चाहिए था और वीरेन्द्र सहवाग 99 पर नाबाद थे, की सेंचुरी रोकने के लिए जानबूझ कर नो बॉल डाल दी हो तो उस श्रीलंका से सच्ची खेल भावना की उम्मीद नहीं की जा सकती। पूरे देश में यही चर्चा थी कि इस नूराकुश्ती की मार भारत पर ही पड़ेगी। श्रीलंका ने बल्लेबाजी, गेंदबाजी और फील्डिंग में महज खानापूर्ति करते हुए जीत बंगलादेश को परोस दी। वजह एक थी कि जिस भारत ने श्रीलंका को धूल चटा रखी है, वह फाइनल में न पहुंच सके। बंगलादेश की जीत के साथ ही पांच बार का चैंपियन भारत फाइनल की होड़ से बाहर हो गया। हालांकि भारत और बंगलादेश के एक बराबर आठ अंक रहे लेकिन मेजबान टीम ने चूंकि भारत को हराया था इसलिए उसे फाइनल का टिकट मिल गया। बेशक टीम इंडिया फाइनल में नहीं आ सकी पर इस सीरीज में भारत की कम से कम दो बहुत बड़ी उपलब्धियां रहीं। पहली सचिन का सौवां सैकड़ा और दूसरा विराट कोहली जो एक अत्यंत महत्वपूर्ण बैट्समैन के रूप में उभरे। इस 23 वर्षीय पश्चिमी दिल्ली के युवा खिलाड़ी ने अब दुनिया के महान बल्लेबाजों की सूची में प्रवेश कर लिया है। जब वह बल्लेबाजी करता है तो विपक्ष के बड़े से बड़ा स्कोर बौना बन जाता है। तीन हफ्ते में दो बार अकेले अपने दमखम से विराट ने टीम इंडिया को जीत का सेहरा पहनाया है। रविवार को कोहली का 148 गेंदों में 183 व इनकी वजह से टीम इंडिया ने एक रिकॉर्ड कायम कर दिया रन चेस में। बुरा न मानो कोहली है यह एमएमएस पूरे मीरपुर में गूंजता रहा। पिछले साल विराट कोहली ने वनडे का सबसे ज्यादा स्कोर बनाया था। उससे पहले सात वह दूसरे नम्बर के हाइस्ट स्कोरर रहे। इसलिए यह कहना शायद गलत नहीं होगा कि इस समय विराट कोहली दुनिया के सबसे अव्वल वनडे बल्लेबाज बन गए हैं। हालांकि विराट कोहली की इस शानदार फार्म पर सबको नाज है पर उन्हें अपने व्यवहार में सुधार लाना चाहिए। गुस्सा, अहंकार अच्छे-अच्छे को धूल चटा देता है। कुछ ज्योतिषियों का कहना है कि उन्हें गुस्सा इसलिए आता है कि वह 18 नम्बर की जर्सी पहनते हैं। इसका योग होता है 9। यह अच्छा योग नहीं है। इनके अनुसार विराट को ऐसी जर्सी पहननी चाहिए जिसका योग 5 होना चाहिए। जैसे 14, 32। विराट का जन्म का नम्बर 5 है। वह 23 वर्ष के हैं जिसका योग भी 5 है, यह साल 2012 है जिसका नम्बर भी 5 बनता है। इसी वजह से यह साल उनके लिए विशेष है। उनके गुस्से व अहंकार के कारण उन्हें टीम इंडिया का एंग्री यंगमैन भी कहा जा रहा है।
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Tuesday, 20 March 2012

सचिन का कभी न टूटने वाला सैकड़ों का रिकॉर्ड

Vir Arjun, Hindi Daily Newspaper Published from Delhi
Published on 20 March 2012
अनिल नरेन्द्र
शुक्रवार का दिन इसलिए एक ऐतिहासिक दिन बन गया इसलिए नहीं कि उस दिन प्रणब मुखर्जी ने बजट पेश किया था बल्कि इसलिए कि उस दिन सचिन तेंदुलकर ने अपना महान शतक पूरा किया। पता नहीं इन बजटों के सचिन के शतकों से क्या संबंध है, क्योंकि उन्होंने पहले भी रेल बजट के दिन दोहरा शतक पूरा किया था। दिन की शुरुआत संसद में प्रणब मुखर्जी ने जनता को कठोर बजट का दर्द देने के साथ की। लेकिन शाम ढलते-ढलते सचिन के शतक ने इस दर्द को दूर कर दिया। बजट भाषण खत्म होने के बाद सभी अपने टीवी क्रीनों पर चिपक गए। सचिन के बल्ले से निकलने वाले एक-एक रन पर उनके फैंस की दिल की धड़कन तेज होती गई। मीरपुर के शेर-ए-बंगला स्टेडियम में जैसे ही सचिन का सौवां शतक पूरा हुआ देश झूम उठा। इस मैच में भले ही भारत हार गया हो लेकिन यह दिन दोनों देशों के लिए अपने-अपने कारणों से ऐतिहासिक बन गया। खेल में हार-जीत तो चलती रहती है। बेशक उस दिन बंगलादेश ने कमाल का खेल दिखाते हुए टीम इंडिया को हरा दिया पर शायद ही कोई क्रिकेट प्रेमी ऐसा हो जो यह चाहता हो कि सचिन 95-96 रन बनाकर आउट हो जाते और भारत मैच जीत जाता? इस मैच को अंतत सचिन के सौवें सैकड़ों के लिए याद किया जाएगा न कि बंगलादेश की जीत के लिए। राजनेता, राजनेता ही होते हैं। उस दिन भी वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी पीछे नहीं रहे। कहे कि पिछले साल जब भारतीय टीम ने 28 साल बाद क्रिकेट का वर्ल्ड कप जीता था तब भी मैं ही वित्त मंत्री था और आज जब सचिन ने सौवां शतक पूरा किया तब भी मैं ही वित्त मंत्री हूं। मतलब वित्त मंत्री होना टीम इंडिया के लिए लक्की साबित हुआ। अब देखना यह है कि वही लक फैक्टर मनमोहन सिंह को कितना नसीब होता है जिन्हें फिलहाल इसकी सख्त जरूरत है। कहा जाता है कि रिकॉर्ड बनते हैं टूटते हैं लेकिन कुछ रिकॉर्ड ऐसे होते हैं, जहां तक पहुंचना खासा मुश्किल होता है। सचिन के महाशतक का रिकॉर्ड भी कुछ ऐसा ही है। असल में इस तक पहुंचने के लिए किसी भी खिलाड़ी को लगातार दो दशक तक (कम से कम) अच्छा प्रदर्शन करने की जरूरत होगी और मौजूदा समय में ऐसा कोई खिलाड़ी नजर नहीं आ रहा है। सचिन के बाद रिकी पोंटिंग हैं जिन्होंने शयाद 71 सैकड़े बनाए हैं और अब वह रिटायरमेंट के करीब हैं। सचिन पर इस सौवें शतक का कितना बोझ रहा होगा, उनकी इस टिप्पणी से ही अन्दाजा लगाया जा सकता है जब यह शतक लगाने के बाद सचिन ने कहाöमुझे अब तक सौवें शतक का विश्वास नहीं हो रहा, लेकिन निश्चित तौर पर मेरे सिर पर से 50 किलो का बोझ हट गया है। सचिन को नया हेयर स्टाइल शूट किया है। सचिन ने अपने अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट कैरियर के दौरान कई बार हेयर स्टाइल और अपने लुक को बदला है लेकिन उनका नया हेयर स्टाइल शायद उनके सौवें अंतर्राष्ट्रीय महाशतक के लिए लक्की साबित हुआ। अब जब सचिन ने यह ऐतिहासिक कीर्तिमान पार कर लिया है मुझे लगता है कि वह खुलकर खेलेंगे, बिना किसी दबाव के और टैंशन के। वैसे उनके शुभचिन्तक भी उन्हें टैंशन फ्री नहीं रखना चाहते। एक साल चार दिन के इंतजार के बाद सौ सेंचुरी पूरी करते ही सचिन पर नया प्रेशर बनने लगा है। अब उन पर इंटरनेशनल वनडे मैचों में सेंचुरी की हाफ सेंचुरी लगाने का प्रेशर आएगा। बंगलादेश के खिलाफ बनाई गई सेंचुरी वनडे मैचों में उनकी 49वीं सेंचुरी है। इससे उनके फैंस की यह इच्छा स्वाभाविक ही है कि वह उनसे वनडे की 50वीं सेंचुरी भी पूरा करें और इस तरह टेस्ट के साथ-साथ वनडे में भी 50-50 सेंचुरी का रिकॉर्ड पूरा करें। सचिन को हम तहे दिल से बधाई देते हैं। अभी लम्बा सफर तय करना है सचिन को।
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Saturday, 25 February 2012

टीम इंडिया में दरारें

Vir Arjun, Hindi Daily Newspaper Published from Delhi
Published on 25th February  2012
अनिल नरेन्द्र
आस्ट्रेलिया के दौरे पर गई टीम इंडिया न केवल हार ही रही है पर बिखर भी रही है। बेशक बीसीसीआई और टीम के प्रवक्ता यह कहें कि टीम इंडिया के अन्दर कोई मतभेद नहीं हैं पर टीम में खिलाड़ियों के आपसी मतभेद सतह पर आ गए हैं। महेन्द्र सिंह धोनी और वीरेन्द्र सहवाग के मतभेद बढ़ते जा रहे हैं जिससे टीम की परफार्मेंस पर असर पड़ रहा है। टीम ने जीतने की बजाय हारने में कंसिस्टेंसी बना रखी है। मुश्किल से एक मैच जीतते हैं फिर हार का सिलसिला शुरू हो जाता है। अब खबर आई है कि मंगलवार को श्रीलंका के खिलाफ मैच से पहले एकदाश को लेकर दोनों खिलाड़ियों में मतभेद थे। न्यूज चैनल टाइम्स नाऊ के अनुसार दोनों खिलाड़ियों ने अलग-अलग टीम तय की थी, लेकिन आखिरकार वीरू की सूची वाले खिलाड़ी ही मैदान पर उतरे। उल्लेखनीय है कि टीम इंडिया में आपसी मतभेदों की खबरें पिछले कुछ दिनों से आ रही हैं। चैनल के अनुसार धोनी की एकादश में रोहित शर्मा का नाम था। वे रोहित को श्रीलंका के खिलाफ उतारना चाहते थे। दूसरी तरफ सहवाग तीनों सीनियर्स (सचिन, गम्भीर और खुद सहवाग) को टीम में खेलाना चाहते थे। कुछ समय पहले कप्तान महेन्द्र सिंह धोनी के खास मित्रों व पूर्व क्रिकेटरों ने बातों ही बातों में बताया था कि किस तरह टीम में गुटबाजी है। उन्होंने यह भी दावा किया था कि अकसर उनकी टीम इंडिया के कप्तान से बात होती रहती है। अब लगता है कि टीम इंडिया में दरारें पड़ गई हैं। रही-सही कसर इस नई रोटेशन पॉलिसी ने पूरी कर दी है। जब तक गैरी कर्स्टन टीम के कोच थे, वे पूरी टीम को साथ जोड़कर रखते थे। चूंकि वह खुद एकदम युवा थे लिहाजा सीनियर और जूनियर खिलाड़ियों के बीच जबरदस्त कड़ी का काम करते थे। अगर कोई मतभेद की स्थिति आती भी तो तुरन्त उसे सम्भाल लेते थे। अब लगता है ऐसा नहीं है और दुर्भाग्य से न यह काम अब कप्तान महेन्द्र सिंह धोनी ही कर पा रहे हैं। नए कोच फ्लैचर गैरी की तरह टीम को एकजुट रखने में असफल रहे हैं। फ्लैचर खुद 64 साल के हैं। अनुभवी तो हैं लेकिन वह करीब 10 महीने से टीम से जुड़े हैं और यह समय टीम इंडिया का पिछले दो दशकों का सबसे ज्यादा खराब समय है। किसी भी पहलू से वह टीम के काम आते नहीं दिख रहे हैं। न तो वह टीम के लिए प्रेरणादायी साबित हो रहे हैं और न ही बड़े प्रशासक। इसलिए टीम अजीबोगरीब प्रयोगों से गुजर रही है। रणनीति नहीं बना पा रही है और सभी खिलाड़ी एक अलग मानसिक स्थिति से गुजर रहे हैं। रोटेशन नीति पर छिड़े विवाद से लगता है कि टीम में व्यक्तिगत अहम को बढ़ा दिया है। इस नीति से साफ झलकता है कि इसके जरिये सीनियरों के साथ भद्दा मजाक किया जा रहा है। सीनियरों की बात करें तो पूर्व कप्तान कपिल देव ने मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर को उसकी विफलताओं पर आड़े हाथों लेते हुए यहां तक कह दिया है कि सचिन को संन्यास की घोषणा कर देनी चाहिए। कपिल ने कहा कि पिछले तीन महीनों में हमने जो देखा है उसे देखते हुए मेरा मानना है कि सचिन को विश्व कप के बाद या उससे पहले संन्यास ले लेना चाहिए था। क्रिकेट या कोई भी खेल इस मामले में विचित्र होता है। जब तक आप जीतते रहते हो या अच्छा परफार्म करते हो, सब ठीक-ठाक रहता है और जैसे ही आप हारना शुरू करते हो तो ऐसी सारी बातें होने लगती हैं।
Anil Narendra, Cricket Match, Daily Pratap, Vir Arjun

Wednesday, 8 February 2012

युवराज एक बॉर्न फाइटर हैं, जीत जरूर उनकी ही होगी

Vir Arjun, Hindi Daily Newspaper Published from Delhi
Published on 8th February  2012
अनिल नरेन्द्र
सोमवार टीम इंडिया के धुरंधर बल्लेबाज युवराज सिंह को कैंसर है, की खबर ने सब क्रिकेट प्रेमियों को हिलाकर रख दिया। तमाम अखबारों में, टीवी चैनलों में बस एक ही खबर छाई रही। खबर आई कि 30 वर्षीय युवराज सिंह को फेफड़े का कैंसर है और वह अमेरिका में बोस्टन के कैंसर रिसर्च इंस्टीट्यूट में इलाज करवा रहे हैं। मीडिया में बताया गया कि युवराज को कहां का कैंसर है और कैसे उनका इलाज चल रहा है। जब मैंने टीवी चैनलों पर यह खबर देखी तो मुझे पहली बात तो यह लगी कि युवराज की बीमारी के बारे में उनके फिजियो जतिन चौधरी बड़ी बारीकी से समझा रहे थे कि युवराज को क्या हुआ है और कैसे उनकी कीमोथैरेपी चल रही है। मुझे थोड़ा अजीब-सा लगा क्योंकि ऐसी गम्भीर बीमारी के बारे में बताने का काम एक फिजियो का नहीं। अगर बोस्टन का कोई सर्जन बताता तो बात समझ में आती। एक फिजियो ऐसी डिटेल्स बताने के लिए सक्षम नहीं है। फिजियो का काम तो ऑपरेशन या सर्जरी के बाद शुरू होता है। मंगलवार आते-आते कुछ डिटेल्स स्पष्ट हुईं। ताजा खबर आई है कि अमेरिका में कीमोथैरेपी करा रहे युवराज को फेफड़े का कैंसर नहीं है बल्कि उसके फेफड़ों के बीच में दुर्लभ किस्म का ट्यूमर है जो असाध्य नहीं है और उनके इलाज में शामिल मैक्स अस्पताल के डाक्टरों का मानना है कि वह 10 हफ्ते यानि मई के पहले सप्ताह तक मैदान में उतर सकते हैं। युवराज को कैंसर होने का खुलासा होने के बाद से मीडिया में लग रही तमाम अटकलों पर विराम लगाते हुए मैक्स साकेत के डाक्टर नीतेश रोहतगी ने स्पष्ट किया कि युवराज को कैंसर तो है पर फेफड़ों का कैंसर नहीं है। युवराज की बीमारी सुनकर न केवल भारत में ही उनके फैन परेशान हो गए पर सीमापार पाकिस्तान से लेकर तमाम दुनिया से गैट वेल की शुभकामनाओं का तांता लग गया। एक फैन ने कुछ यूं लिखा ः मैं एक पाकिस्तानी हूं और जाहिर है कि पाकिस्तानी क्रिकेट का फैन। पाकिस्तान और इंडिया का कम्पीटीशन भी हमेशा ऐसा ही रहेगा लेकिन यह किसी की जिन्दगी से जरूरी नहीं है। युवराज एक बहुत अच्छे और दमदार क्रिकेटर हैं, मैं उनकी हैल्थ के लिए दुआ करता हूं। क्रिकेट की दुनिया में युवी एक अकेले क्लीन हिटर हैं जल्दी ठीक हो जाओ दोस्त, अभी तुम्हारे बहुत सिक्सर और सेंचुरी देखनी हैं। युवराज जरूर ठीक हो जाएंगे, सारी दुनिया में उनके फैन आज दुआ कर रहे हैं। युवराज को दूसरे खिलाड़ियों से प्रेरणा लेनी चाहिए। वह ऐसे पहले खिलाड़ी नहीं हैं जो इस तरह की समस्या का सामना कर रहे हैं। इससे पहले भी ऐसे कई मौके आ चुके हैं जब खिलाड़ियों ने न केवल कैंसर को हराया है बल्कि अपने खेल में नए रिकार्ड कायम किए हैं। अमेरिका के लांस आर्यस्ट्रांग तो इसके एक चमकता उदाहरण हैं। लांस को 1996 में ही कैंसर का पता चला था, यह युवी से खतरनाक स्टेज पर था पर न केवल उसने इसका सफलतापूर्वक सामना किया बल्कि साइकिल रेसिंग के सबसे कठिन रेस टूर द फ्रांस को लगातार सात बार जीता भी। पिछले साल नवम्बर में ही लांस ने साइक्लिंग से रिटायरमेंट ली है। एक बात का दुख यह जरूर है कि युवराज की बीमारी का डायग्नोज पहले क्यों नहीं हुआ? युवराज पिछले काफी दिनों से बीमार चल रहे हैं। कहा यह जाता रहा कि उनके घुटने की सर्जरी हुई है। उनका अस्पताल और डाक्टरों से पिछले काफी समय से सम्पर्प बना हुआ है। पता नहीं किसी ने इससे पहले क्यों नहीं सोचा? टैस्ट इत्यादि तो जरूर हुए होंगे। क्या हमारे डाक्टरों को पता ही नहीं चला या फिर डायग्नोज में गलती हुई। बहरहाल आगे देखें, हमें पूरा विश्वास है कि युवी न केवल इस मनहूस बीमारी को हरा देंगे बल्कि बहुत जल्द मैदान में वापस लौटकर नए छक्के-चौके लगाएंगे। सारी दुनिया के फैन्स के साथ हम भी युवी की तेज रिक्वरी की दुआ करते हैं। वह एक बॉर्न फाइटर हैं, जीत जरूर होगी।
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Tuesday, 22 November 2011

विनोद काम्बली के मैच फिक्सिंग आरोप में कितना दम है?


Vir Arjun, Hindi Daily Newspaper Published from Delhi
Published on 22th November 2011
अनिल नरेन्द्र
क्रिकेट में मैच फिक्सिंग एक ऐसा मकड़जाल है जिसमें फंसने से न तो खिल़ाड़ी बच पा रहे हैं और न ही आईसीसी इस पर लगाम कस पा रही है। वर्ष 2000 में भी जब दक्षिण अफ्रीका के पूर्व कप्तान हैंसी क्रोनिए सहित चार भारतीय क्रिकेटरों पर मैच फिक्सिंग का आरोप लगा था तो कोई ठोस सुबूत न मिलने पर भी उन्हें अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट से प्रतिबंधित कर दिया गया था। कुछ चौंकाने वाले सच उभरकर सामने आते उससे पहले ही क्रोनिए की एक विमान दुर्घटना में रहस्यमय ढंग से मौत हो गई। मैच फिक्सिंग में हाल ही में तीन पाकिस्तानी क्रिकेटर फंस गए और आजकल वे इंग्लैंड में जेल में हैं। अब 15 साल बाद विनोद काम्बली ने आरोप लगाया है कि 1996 का विश्व कप सेमीफाइनल मैच जो भारत और श्रीलंका के बीच था वह मैच फिक्स था। काम्बली ने तत्कालीन कप्तान मोहम्मद अजहरुद्दीन सहित उस टीम के अन्य बल्लेबाजों और मैनेजर के इस फिक्सिंग में शामिल होने की बात कही है। काम्बली ने कहा कि जब अजहर ने टॉस जीतकर फील्डिंग करने का फैसला किया तो सारी टीम चौंक गई, क्योंकि हमने फैसला कर रखा था कि अगर हम टॉस जीतते हैं तो हम पहले बैटिंग करेंगे। इस इरादे से हमारे तीन-चार बल्लेबाजों ने पैड्स भी पहन रखे थे पर अजहर का यह फैसला हमारी समझ में नहीं आया और हम जीता हुआ मैच हारकर वर्ल्ड कप से बाहर हो गए। सिर्प विनोद काम्बली ने ही नहीं बल्कि तत्कालीन क्यूरेटर कल्याण मित्रा के बाद तत्कालीन भारतीय टीम के मैनेजर संवरन बनर्जी और श्रीलंकाई टीम के पूर्व लोकल मैनेजर समीर दास गुप्ता के सवाल से शक और गहरा गया है। समीर दास ने कहा कि मैंने श्रीलंका टीम के साथ चार-पांच दिन बिताए थे। श्रीलंका टीम भी टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करना चाहती थी और उन्हें लगा कि भारतीय टीम भी ऐसा ही करेगी। लेकिन जब अजहर ने टॉस जीतकर पहले फील्डिंग करने का फैसला किया तो श्रीलंकाई टीम हैरान हो गई। इसके बाद सभी में खुशी की लहर दौड़ गई क्योंकि अब श्रीलंका के जीतने का चांस और बढ़ गया था। वहीं बनर्जी ने कहा कि मैं भी अजहर के फैसले पर हैरान हो गया जबकि क्यूरेटर मित्रा का कहना है कि पिच में कोई गड़बड़ी नहीं थी। अरविन्द डीसिल्वा ने शतक जबकि सचिन ने यहां पचासा ठोका था। टॉस के समय सुनील गावस्कर, रवि शास्त्राr और टोनी ग्रेग भी पिच पर मौजूद थे। टॉस जीतने के बाद सनी ने पूछा, क्या हुआ अजहर! उसने कहा, फील्डिंग। इस पर सभी हैरान रह गए।
विनोद काम्बली के बयान के बाद शक के घेरे में आए मोहम्मद अजहरुद्दीन ने इस आरोप को बकवास बताया और काम्बली से प्रश्न किया कि वह 15 साल के बाद क्यों आरोप लगा रहे हैं? विवाद की गम्भीरता भांपते हुए भारत सरकार के खेल मंत्रालय ने इसकी सीबीआई जांच करने को कहा है लेकिन बीसीसीआई के अधिकारी इस पर तैयार नहीं हैं। वहीं पूर्व कप्तान सौरव गांगुली ने अजहर से खुद को बेदाग साबित करने को कहा है। इससे एक दिन पहले अजहरुद्दीन ने अपना बचाव करते हुए काम्बली के इस बयान को बकवास करार दिया। साथ ही उन्होंने काम्बली को अपना मुंह बन्द रखने की नसीहत देते हुए कहा कि इस बात को 15 साल बाद उठाने का क्या मतलब है। लेकिन अजहर शायद यह भूल गए कि 1996 के वर्ल्ड कप के बाद ही साल 2000 में उन पर मैच फिक्सिंग का आरोप लगा था। दक्षिण अफ्रीका के तत्कालीन कप्तान हैंसी क्रोनिए ने जांच के दौरान भारतीय खिलाड़ियों का नाम लिया था। इस प्रकरण में बीसीसीआई जांच कमेटी के प्रमुख के. माधवन ने उन पर आजीवन प्रतिबंध और अजय जडेजा पर चार साल का प्रतिबंध लगाया था। लेकिन 2006 में अजहरुद्दीन पर से प्रतिबंध हटा लिया गया। यहां तक कि चैंपियंस ट्रॉफी के दौरान उन्हें सम्मानित भी किया गया। यह मामला आज भी लम्बित है। विनोद काम्बली ने रोते-रोते यह भी कहा कि इस मैच के बाद न केवल मेरा कैरियर खत्म हो गया बल्कि मेरे ऊपर कई आरोप लगे। कहा गया कि इसने क्लाइव लॉयड को गालियां दीं। यह बराबर पार्टियों में जाता था और लेट नाइट आता था। आईसीसी अध्यक्ष शरद पवार ने काम्बली के आरोप को सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि आज इन आरोपों का कोई मतलब नहीं है। सचिन और काम्बली ने एक साथ अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट में प्रवेश किया लेकिन काम्बली ने खेल पर ध्यान नहीं दिया। अगर ध्यान दिया होता तो आज हमारे पास एक नहीं दो सचिन होते। वहीं पूर्व क्रिकेटर सैयद किरमानी बोले कि अगर उन्हें मालूम था तो 15 साल पहले क्यों शिकायत नहीं की?
विचारणीय प्रश्न यह है कि क्या वाकई काम्बली के पास मैच को पिक्स कहने का पुख्ता आधार है? अब तक काम्बली ने एक ही बात कही है कि कप्तान अजहरुद्दीन ने टॉस जीतने के बाद अचानक टीम के फैसले को पलट दिया। लेकिन अजहर ने ऐसा किया नहीं था। सच तो यह है कि उन्होंने वही किया जो टीम मीटिंग में तय हुआ था। टीम के कई सदस्यों और मैनेजर अजीत वाडेकर ने इसकी तस्दीक की है। इस आधार पर काम्बली का तर्प खारिज हो जाता है। अगर काम्बली के पास शक का कोई बिन्दु है तो वह उस तरफ साफ इशारा क्यों नहीं करते? काम्बली यह क्यों नहीं बताते कि उन्हें कैसे मालूम हुआ कि मैच फिक्सड था? अगर वे इतने ही आश्वस्त हैं तो उन्हें उन लोगों के नाम खुलकर बताने चाहिए। उन्होंने यह बात सचिन के साथ शेयर की थी क्या? विनोद काम्बली कुछ सालों पहले तक हमेशा दावा करते थे कि वे अपनी हर बात सचिन से शेयर करते थे लेकिन इतनी बड़ी बात क्या उन्होंने सचिन से शेयर की? इतने दिनों तक बीसीसीआई से भी क्यों छिपाई? फिक्सिंग की जांच करने वाली सीबीआई या माधवन कमेटी के साथ उन्होंने इसे साझा क्यों नहीं किया? वर्ष 1999 में सीबीआई ने इसकी जांच की थी। फिर माधवन कमेटी ने इसको आगे बढ़ाया। उसने उस दौरान तमाम लोगों से बात की। इसमें क्रिकेटर भी शामिल थे। उस दौर में रहने वाले हर क्रिकेटर से इन दोनों ने अपील की थी कि अगर उन्हें मैच फिक्सिंग के बारे में जरा-सा भी कुछ मालूम हो तो उसे साझा करें। तब काम्बली चुप क्यों बैठे रहे? जिस टीम की काम्बली बात कर रहे हैं उस टीम में सचिन तेंदुलकर, संजय मांजरेकर, नवजोत सिंह सिद्धू, अजय जडेजा, नयन मोंगिया, अजहर, श्रीनाथ, अनिल कुम्बले, वेंकटेश प्रसाद और आशीष कपूर शामिल थे, इनमें से कोई भी क्रिकेटर क्यों उनके साथ नहीं आ रहा? संजय मांजरेकर ने तो साफ कह दिया कि काम्बली गलत बोल रहे हैं। सचिन तो उनके खास मित्र हैं पर वह भी एक शब्द नहीं बोले? उस दिन विनोद काम्बली ने खराब प्रदर्शन क्यों किया? काम्बली उस दिन पांचवें नम्बर पर बैटिंग करने आए। उनकी इमेज वनडे में हिटर की थी। उन्होंने 29 गेंदें खेलीं। 49 मिनट क्रीज पर रुके। एक भी चौका नहीं लगाया। उन्हें खेलने में दिक्कत क्यों हो रही थी। क्या वो बताएंगे कि उन्होंने इतनी खराब बैटिंग क्यों की? दूसरी ओर प्रश्न यह भी उठता है कि ऐसी पिच पर जब सभी मान रहे हैं कि बैटिंग पहले करनी चाहिए थी फिर भी पहले बालिंग का फैसला क्यों किया गया? लक्ष्य का पीछा करते हुए भारत ने महज 22 रन पर अपने छह विकेट कैसे गंवाए? मैच से पहले कोच अजीत वाडेकर से कोई अनबन हुई थी और हां तो क्यों हुई थी? वाडेकर होटल छोड़कर घर वापस क्यों जा रहे थे? कौन-सा ऐसा जरूरी काम था जिसके चलते मैच से पहले टीम प्रैक्टिस रोक दी गई? क्या टीम मीटिंग में नवजोत सिंह सिद्धू ने पहले बल्लेबाजी करने की सलाह दी थी? टॉस के समय भारतीय ओपनर पैड बांधकर क्यों तैयार थे। कुल मिलाकर मामले की जांच जरूरी है। दोनों ओर के प्रश्नों के उत्तर जाने बिना किसी ठोस निष्कर्ष पर पहुंचना मुश्किल है और मामले की गहराई से जांच इसलिए जरूरी है ताकि दूध का दूध और पानी का पानी हो सके जिससे भविष्य में ऐसा कोई न कर सके।
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Friday, 4 November 2011

केवल प्रतिबंध से ही नहीं, कड़ी सजा से फिक्सिंग दूर हो सकती है

Vir Arjun, Hindi Daily Newspaper Published from Delhi
Published on4th November 2011
अनिल नरेन्द्र
 पाकिस्तान क्रिकेट के लिए मंगलवार का दिन बेहद शर्मनाक साबित हुआ। उसके दो क्रिकेटरों, पूर्व टेस्ट कैप्टन सलमान बट्ट और तेज गेंदबाज मोहम्मद आसिफ को लंदन में एक अदालत ने स्पॉट फिक्सिंग का दोषी करार दिया। साउथवर्प क्राउन कोर्ट की 12 सदस्यीय ज्यूरी ने 27 वर्षीय बट्ट को गलत तरीके से पैसा लेने की साजिश और धोखाधड़ी की साजिश का दोषी पाया। वहीं आसिफ (28) को धोखाधड़ी की साजिश का दोषी ठहराया गया। मुकदमे की सुनवाई के 20वें दिन अदालत ने उन्हें दोषी ठहराया। सजा एक-दो दिन में सुनाई जाएगी और तब तक यह जमानत पर बाहर रहेंगे। बट्ट को अधिकतम सात साल की सजा और आसिफ को अधिकतम दो साल की सजा हो सकती है। इस मामले में तीसरे आरोपी मोहम्मद आमेर को मुकदमे का सामना नहीं करना पड़ा क्योंकि उसने पहले ही जुर्म कुबूल कर लिया था। आमेर को स्कैंडल में उसकी भूमिका के लिए सात साल कैद तक की सजा सनाई जा सकती है। मालूम हो कि बन्द हो चुके ब्रिटिश टेब्लॉयड `न्यूज ऑफ द वर्ल्ड' ने स्टिंग ऑपरेशन कर पिछले साल अगस्त में इस स्कैंडल का खुलासा किया था। इसमें कहा गया था कि आसिफ और बट्ट ने सट्टेबाज मजहर मजीद से मिलकर इंग्लैंड के खिलाफ लॉर्ड्स में हुए टेस्ट मैच में नोबाल फेंकने की साजिश रची थी। इस खुलासे के बाद इन तीनों के होटल के कमरों में छापे मारे गए जिसमें नकदी बरामद हुई थी। आसिफ पर गलत तरीके से पैसा लेने के लगे आरोप पर ज्यूरी बंटी हुई थी, जिसके बाद इस पर फिर से विचार करने का फैसला किया गया है। स्पॉट फिक्सिंग मामले में ज्यूरी के फैसला सुनाने के साथ ही सलमान बट्ट और मोहम्मद आसिफ अदालत के भीतर बिना कोई प्रतिक्रिया किए अपने स्थान पर ऐसे स्थिर हो गए मानों वे पत्थर की मूर्त बन गए हों। ब्रिटिश मीडिया और अदालत में मौजूद अन्य लोग दोनों के भाव पढ़ने के लिए उनकी ओर झांक रहे थे लेकिन तब तक इन दोनों के चेहरे भावशून्य हो चुके थे और वे बस ज्यूरी की ओर देखे जा रहे थे। यह भी अजीबोगरीब संयोग रहा कि जब ज्यूरी ने बट्ट को दोषी करार दिया उससे कुछ ही देर पहले उनकी पत्नी गुल हसन ने दूसरे पुत्र को जन्म दिया।
स्पॉट फिक्सिंग के इस मामले में फैसला आने के बाद अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट जगत में प्रतिक्रिया होना स्वाभाविक ही है। हालांकि पीसीबी (पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड) इस फैसले पर खामोश है, उसका कहना है कि यह कानूनी मामला है और आईसीसी इसकी जांच कर रही है। लेकिन आईसीसी के पूर्व सीईओ अहसान मनी ने कहा कि लंदन की अदालत का यह फैसला पीसीबी के लिए कड़ा संदेश है और आसिफ और बट्ट इसी के लायक थे। उस विवादास्पद दौरे पर पाक टीम के मैनेजर रहे भावर सईद ने इस पूरे प्रकरण पर दुख जताते हुए कहा कि मुझे बहुत अफसोस महसूस हो रहा है क्योंकि उस समय एक मैनेजर के तौर पर मैंने सभी खिलाड़ियों को बुरे लोगों से दूर रहने और सिर्प खेल पर ध्यान केंद्रित करने की सलाह दी थी। उन्हें यह समझना चाहिए कि जब अगर देश का प्रतिनिधित्व करते हुए आप ऐसी बदतर चीज करते हो तो आपको बुरे अंजाम के लिए भी तैयार रहना चाहिए। टीम इंडिया के कप्तान महेन्द्र सिंह धोनी ने कहा कि सिर्प खिलाड़ी ही मैच फिक्स नहीं करते। कभी-कभी अम्पायर भी प्रशंसकों की मिलीभगत से ऐसा करते हैं। लेकिन इस रिपोर्ट को दबा दिया जाता है। यह भ्रष्टाचार का सबसे बुरा प्रारूप है। इसके आगे सब फीका है। पूर्व आईपीएल चेयरमैन ललित मोदी ने ट्विटर पर लिखा है कि मुझे इस पर कभी संदेह नहीं रहा कि पाक क्रिकेटर मैच फिक्सिंग में शामिल रहे हों उन्हें जेल में डाल देना चाहिए ताकि बाकी क्रिकेटरों में खौफ पैदा हो। वैसे पाठकों को बता दें कि स्पॉट फिक्सिंग के रेट इतने ज्यादा हैं कि पाकिस्तान जैसे देश में जहां कि क्रिकेटरों को कोई खास बड़ी रकम बतौर फीस नहीं मिलती, उनके लिए इससे ऊपर उठना मुश्किल है। एक टेस्ट मैच के फिक्सिंग का रेट 7.5 करोड़ रुपये है। टी-20 का 0.3 करोड़ रुपये। 10 ओवर का 60 लाख रुपये और नोबाल का 7.5 लाख रुपये। पाकिस्तानी खिलाड़ी जब पढ़ते और सुनते होंगे कि भारत के क्रिकेटरों को कितना पैसा मिलता है तो जाहिर है कि वह अपने आपको छोटा महसूस करते होंगे। हाल ही में बीसीसीआई ने टीम इंडिया के लिए नए ग्रेडों की घोषणा की है। ग्रेड ए में सालाना एक करोड़ रुपये, ग्रेड बी में 50 लाख और ग्रेड सी में 25 लाख। जब पाकिस्तानी खिलाड़ी यह देखते हैं कि भारतीय खिलाड़ियों को इतना पैसा मिलता है तो वह भी अधिक से अधिक कमाई करने की सोचते हैं और क्रिकेट में ज्यादा लम्बी पारी नहीं खेली जा सकती, कुछ ही वर्षों के लिए आप टॉप पर होते हैं, इसलिए जल्दी से जल्दी पैसा कमाने की होड़ लगी रहती है। दरअसल इससे भारत भी अछूता नहीं रहा। मोहम्मद अजहरुद्दीन, अजय शर्मा, मनोज प्रभाकर और अजय जडेजा उन खिलाड़ियों में से हैं जिन पर आजीवन प्रतिबंध लगाना पड़ा। इसके अलावा सट्टेबाज जॉन को मौसम और पिच की जानकारी देने पर आस्ट्रेलियाई क्रिकेट बोर्ड ने मार्प वॉ और शेन वार्न पर जुर्माना लगाया था। नवम्बर 2010 में पाकिस्तान के विकेटकीपर जुल्करनैन हैदर ने दुबई में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ पांचवां वनडे मैच छोड़कर लंदन आ गए और आरोप लगाया कि उन्हें खराब प्रदर्शन करने के लिए धमकी दी जा रही है। इसी के आधार पर उन्होंने वहां शरण भी मांगी। पैसे का लालच खिलाड़ी को कभी-कभी सारी सीमाएं तोड़ने पर मजबूर कर देता है। इसमें इन सट्टेबाजों और बुकियों का भी बड़ा योगदान है और भारतीय सट्टेबाज तो इसमें माहिर हैं। यह सख्त कानून और सख्त सजा से ही रुक सकता है। बीसीसीआई ने 2000 में क्रिकेट से फिक्सिंग को `आहट' करने की दिशा में कड़े कदम उठाए और अपने खिलाड़ियों पर प्रतिबंध लगाया। इसके अच्छे परिणाम रहे। कम से कम उसके बाद किसी भारतीय क्रिकेट खिलाड़ी पर फिक्सिंग का आरोप तो नहीं लगा। हालांकि पूर्व क्रिकेटरों का कहना है कि प्रतिबंध तो ठीक है पर इसके साथ सजा भी होनी चाहिए। इंग्लैंड की अदालत ने रास्ता दिखा दिया है। अब दुनिया के सभी क्रिकेट बोर्डों और सरकारों को भी ऐसा ही करना चाहिए। मुझे मोहम्मद आमेर पर जरूर थोड़ा दुख हो रहा है। इतना अच्छा नौजवान बालर किनके चक्कर में फंस गया और अपना शानदार भविष्य चौपट कर लिया। इन तीनों के एजेंट और कथित सट्टेबाज मजहर मजीद ने इस सट्टेबाजी प्रकरण का हिस्सा होना न केवल कुबूल ही किया है पर साथ-साथ यह भी माना है कि उसने इन तीन खिलाड़ियों को 77000 पाउंड स्टर्लिंग दी थी।
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Friday, 23 September 2011

टी-20 की घटती लोकप्रियता को रोकने के लिए सचिन के सुझाव


Published on 23rd September 2011
अनिल नरेन्द्र
मेरा क्रिकेट से थोड़ा मन खट्टा हो गया है। टीम इंडिया के इंग्लैंड दौरे ने कम से कम मेरा तो क्रिकेट के प्रति थोड़ा मोहभंग जरूर किया है। हार-जीत तो खेल का हिस्सा होता है पर जिस तरीके से टीम इंडिया ने इंग्लैंड दौरे में प्रदर्शन किया वह निराशाजनक और शर्मनाक था। एक भी मैच में वह टक्कर देते नजर नहीं आए। यह खिलाड़ी केवल पैसों के लिए खेलते हैं, देश के झंडे या सम्मान के लिए नहीं और पैसा इनको इतना मिल गया है कि इनके पांव जमीन पर ही नहीं टिक रहे। सच बताऊं तो मैं अब हॉकी या फुटबाल का मैच देखना ज्यादा पसंद कर रहा हूं। आजकल चैंपियन लीग 20-20 मुकाबला चल रहा है पर मेरा उसे देखने को भी दिल नहीं करता। विश्व चैंपियन बनने के मात्र पांच महीने बाद टीम इंडिया का ऐसा हश्र होगा, यह किसी ने सपने में भी नहीं सोचा होगा। इंग्लैंड दौरे में महेन्द्र सिंह धोनी और उनके धुरंधरों का गर्व चकनाचूर हो गया। पहुंची तो इंग्लैंड विश्व की नम्बर वन टेस्ट टीम और विश्व चैंपियन का रुतबा लेकर थी जब दौरा समाप्त हुआ तो भारत टेस्ट रैंकिंग में तीसरे और वन डे रैंकिंग में पांचवें स्थान पर गिर चुकी थी। यह एक ऐसा शर्मनाक प्रदर्शन था जो पिछले एक दशक से अधिक समय में किसी विदेशी दौरे में सुनने में नहीं आया हो। 
बहरहाल भारत के महान क्रिकेट सपूत सचिन तेंदुलकर ने वन डे क्रिकेट की घटती लोकप्रियता को देखते हुए अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) को एक पत्र लिखकर क्रिकेट के इस फार्मेट की लोकप्रियता वापस हासिल करने के लिए कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए हैं। वन डे क्रिकेट के बादशाह सचिन ने इस क्रम में आईसीसी के मुख्य अधिकारी हारुन लोगार्ट को सुझाव दिया है कि 50-50 ओवरों के मैच को 25-25 ओवरों की चार पारियों वाले मैच में परिवर्तित कर दिया जाए। वन डे और टेस्ट क्रिकेट में सर्वाधिक रन बनाने का विश्व रिकार्ड अपने नाम रखने वाले मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर पहले भी वन डे में बदलाव की बात उठाते रहे हैं, लेकिन इस बार उन्होंने हर पारी में ओरों की संख्या घटाने के अलावा कई और परिवर्तन सुझाए हैं। सचिन ने कहा है कि 25 ओवर की चार पारियों से मैच में संतुलन आएगा और पहले टास जीतने वाली टीम का एडवांटेज खत्म हो जाएगा। मैच में पारी में बल्लेबाजी करने वाली टीम की ओर से ही दो पॉवर प्ले होने चाहिए, लेकिन इसके साथ चार गेंदबाजों को 12-12 ओवर फेंकने की अनुमति होनी चाहिए। मौजूदा नियमों में एक गेंदबाज 10 ओवर फेंक सकता है। सचिन का मानना है कि पिच और मौसम की परिस्थितियों में टास की भूमिका मायने रखती है और सिक्के की उछाल से ही मैच का कुछ हद तक फैसला हो जाता है। गौरतलब है कि ब्रिटेन में जिलेट कप में दो बंटी हुई पार्टियों का प्रस्ताव दिया गया था जबकि आस्ट्रेलिया में इंटरस्टेट क्रिकेट टूर्नामेंट में 45 ओवरों के मैचों को 20-20 ओवर और 25-25 ओवरों में बांटा गया था। क्रिकेट आस्ट्रेलिया के अनुसार यह फार्मेट काफी सफल रहा था। भारत में सभी क्रिकेट कामेंटेटर हैं। आप सब का सचिन के सुझावों पर क्या राय है? मेरे ख्याल में सुझावों पर गौर करना चाहिए। हर सुझाव में दो पहलु होते हैं। ऐसे भी क्रिकेट प्रेमी होंगे जो सचिन के सुझाव से सहमत न हों।
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Thursday, 21 July 2011

धोनी को भज्जी के मजाक वाले विज्ञापन में काम नहीं करना चाहिए था


Vir Arjun, Hindi Daily Newspaper Published from Delhi

Published on 21th July 2011
अनिल नरेन्द्र
देश के दो शराब बनाने वाली कम्पनियों ने टीम इंडिया के दो खिलाड़ियों में बेकार विवाद पैदा करवा दिया है। मैकडोवेल कम्पनी और रॉयल स्टैग। इन दोनों शराब कम्पनियों में बीच बाजार में व्हिस्की ब्रांड्स को लेकर प्रतिद्वंद्विता है। ऑफ स्पिनर हरभजन सिंह ने विजय माल्या के स्वामित्व वाली कम्पनी यूबी प्रिट्स को एक टीवी विज्ञापन को लेकर कानूनी नोटिस भेजा है। इस विज्ञापन में भारतीय कप्तान महेन्द्र सिंह धोनी को उनका मजाक उड़ाते हुए दिखाया गया है। यह कानूनी नोटिस हरभजन सिंह की मां अवतार कौर ने अपने वकीलों के जरिये भेजा है। हरभजन के वकीलों ने कानूनी नोटिस में दावा किया है कि यह इस ऑफ स्पिनर, उनके परिवार और सिख समुदाय का व्यासायिक मजाक है। इनमें से एक वकील ने कहा कि क्रिकेटर ही नहीं उनका परिवार भी इस विज्ञापन से परेशान है। इस विज्ञापन के लिए नोटिस भेजते हुए भज्जी की मां अवतार कौर ने कहा कि इस तरह के विज्ञापन से भारतीय टीम में मतभेद पैदा होते हैं तथा इन्हें राष्ट्र विरोधी करार दिया जा सकता है। नोटिस में कम्पनी से हरभजन के परिवार से बड़े समाचार पत्रों तथा टेलीविजन चैनलों में सार्वजनिक तौर पर माफी मांगने और नोटिस मिलने के तीन दिन के अन्दर विज्ञापन हटाने की मांग की गई है। नोटिस में कहा गया है कि मेरा मुवक्किल आपको तुरन्त नोटिस भेजकर अपनी गलती स्वीकार करके उसमें सुधार करने का मौका दे रहा है। इसमें असफल रहने पर हमारे पास उचित कानूनी कार्यवाही करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचेगा जिसमें मानहानि का दावा और इस तरह की दीवानी और आपराधिक कार्रवाई भी शामिल है। इसमें नोटिस की लागत के लिए क्रिकेटर के परिवार ने एक लाख रुपये के मुआवजे की मांग भी की है। हरभजन और धोनी दो अलग-अलग ब्रांड का विज्ञापन करते हैं। भारतीय कप्तान मैकडोवेल नम्बर वन प्लेटिनम के विज्ञापन में कथित तौर पर हरभजन का मजाक उड़ाते हैं। हरभजन रॉयल स्टैग का विज्ञापन करता है। रॉयल स्टैग और मैकडोवेल नम्बर वन दोनों के बीच बाजार में व्हिस्की ब्रांड्स को लेकर प्रतिद्वंद्विता है। यह विज्ञापन हालांकि सोडा ब्रांड का है। हरभजन के रॉयल स्टैग विज्ञापन की मुख्य लाइन है, `हैव आई मेड इट लार्ज।' धोनी ने मैकडोवेल के लिए जो विज्ञापन किया है उसमें हरभजन जैसा दिखने वाला व्यक्ति कहता है, `हैव आई मेड इट लार्ज' जबकि धोनी कहता है कि अगर `जिन्दगी में कुछ करना है तो लार्ज छोड़ो, कुछ अलग करो यार।' धोनी के विज्ञापन में हरभजन की तरह दिखने वाला व्यक्ति बाल बैरिंग फैक्टरी में काम करता है और बड़ी बनाने के प्रयास में वह लोहे की गेंद को बहुत बड़ी बना देता है तो उसके पिता उस पर थप्पड़ मार देते हैं। उल्लेखनीय है कि हरभजन के पिता की बाल बैरिंग बनाने की फैक्टरी हुआ करती थी जहां पर हरभजन भी काम करता था। शराब निर्माताओं ने बिना वजह इन दो खिलाड़ियों में मतभेद करवा दिया है। मेरी राय में महेन्द्र सिंह धोनी को यह विज्ञापन करने से मना कर देना चाहिए था जब उन्होंने देखा होगा कि इसमें भज्जी के कैरेक्टर वाला व्यक्ति है और इसमें हरभजन का मजाक उड़ाने का प्रयास किया गया है। उधर विजय माल्या कहते हैं कि हम विज्ञापन बन्द नहीं करेंगे, न ही कोई संशोधन करेंगे।
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Sunday, 24 April 2011

श्रीलंकाई खिलाड़ियों को वापस बुलाना हर लिहाज से गलत फैसला है

Vir Arjun, Hindi Daily Newspaper Published from Delhi
प्रकाशित: 24 अप्रैल 2011
-अनिल नरेन्द्र

आईपीएल-4 में हिस्सा ले रहे श्रीलंकाई खिलाड़ियों की वतन वापसी को लेकर बीसीसीआई और श्रीलंकाई क्रिकेट बोर्ड (एसएलसी) के बीच चल रही खींचतान कुछ हद तक बृहस्पतिवार को खत्म हो गई। विश्व क्रिकेट के पॉवर हाउस बीसीसीआई के आगे झुकते हुए एसएलसी ने अपने स्टार खिलाड़ियों की वापसी की समय  सीमा 5 मई से बढ़ाकर 18 मई कर दी। इससे पहले एसएलसी ने अपने खिलाड़ियों को आगामी इंग्लैंड दौरे के तहत पांच मई तक स्वदेश लौटने के निर्देश दिए थे। श्रीलंकाई क्रिकेट बोर्ड के इस फैसले का बीसीसीआई ने कई स्तरों पर विरोध किया था। नैतिकता के तकाजे पर भी यह गलत था और कानूनी दृष्टि से भी। फिर जो करार आईपीएल फ्रेंचाइजियों ने खिलाड़ियों से किया था उसका भी यह उल्लंघन था। जब आईपीएल-4 के लिए खिलाड़ियों की नीलामी हुई थी तो कोच्चि टस्कर्स केरल ने महेला जयवर्द्धने के लिए 1.5 मिलियन डालर फीस दी थी। एंजेला मैथ्यूस के लिए पुणे वारियर्स ने 9,50,000 डालर दिए। कुमार संगकारा की 7,00,000 डालर की बोली डेक्कन चार्जर्स ने लगाई। तिलकरत्ने दिलशान के लिए रॉयल चैलेंजर्स ने 6,50,000 डालर दिए। मुंबई इंडियंस ने लसिथ मलिंगा के लिए 5 लाख डालर दिए। कुलशेखरा  को चेन्नई सुपर किंग्ज ने एक लाख डालर में खरीदा। सूरज रणदीव-चेन्नई सुपर किंग्स ने 80,000 डालर में, परेरा को कोच्चि टस्कर्स ने 80,000 डालर और नुवान पारादीप को रॉयल चैलेंजर्स ने 20,000 डालर में खरीदा। बीसीसीआई और एसएलसी में यह फैसला हुआ था कि श्रीलंकाई खिलाड़ी 22 मई तक आईपीएल खेलेंगे। नीलामी की शर्तों में यह तय है कि खिलाड़ियों को फीस तभी दी जाएगी जब वह पूरा सीजन फिट रहेंगे और मैच खेलेंगे। बीसीसीआई ने श्रीलंका क्रिकेट बोर्ड को यहां तक धमकी दे दी थी कि उसे जो खिलाड़ियों की नीलामी की पूरी कीमत में 10 प्रतिशत मिलना चाहिए वह रोक लिया जाएगा। खबर यह भी है कि बीसीसीआई ने श्रीलंका क्रिकेट बोर्ड को आईपीएल में खेल रहे श्रीलंकाई खिलाड़ियों की मैच फीस का 10 प्रतिशत हिस्सा (दो करोड़ रुपये) न देने की धमकी भी दी थी।
विश्व कप से ठीक पहले तक भारत-श्रीलंका क्रिकेट बोर्ड के रिश्ते ठीक थे, फिर अचानक सब कुछ बदल गया। आखिर ऐसा क्यों हुआ? विश्व कप फाइनल में श्रीलंका टीम इंडिया से हार के कारण बौखला गई। फिर यह भी आरोप लगाया जा रहा है कि बीसीसीआई ने फाइनल मैच के लिए आए कुछ श्रीलंकाई मंत्रियों से अच्छा व्यवहार नहीं किया और उन्हें टिकटें ब्लैक में खरीदनी पड़ीं। यह भी कहा जा रहा है कि पर्दे के पीछे का खेल पाकिस्तान खेल रहा था। पाक बोर्ड कई कारणों से बीसीसीआई से चोट खाए बैठा है। पहले तो उसे वर्ल्ड कप के आयोजन से किनारे किया। फिर आईपीएल से उसके क्रिकेटरों को हटा दिया। वह लम्बे समय से यूएई में बड़े कारपोरेट्स से आईपीएल के समानांतर लीग कराने की बात कर रहा था, उसे एक या दो देशों का साथ चाहिए था। उसे यह भी शिकायत है कि दुनिया में सबसे अमीर बीसीसीआई खुद तो बहुत कमाता है यह दूसरे बोर्डों को कुछ नहीं देता। इसलिए वह अपनी खुंदक श्रीलंका क्रिकेट बोर्ड को भारत के खिलाफ खड़ा करके निकाल रहा है। हालांकि मलिंगा चोटिल है और इंग्लैंड के दौरे के लिए नहीं चुने गए पर फिर भी उन्हें वापस बुला लिया गया है। आईपीएल-4 में कुल 11 श्रीलंकाई खिलाड़ी हैं।

Sunday, 17 April 2011

इंडिया को हरगिज पाकिस्तान में नहीं खेलना चाहिए

Vir Arjun, Hindi Daily Newspaper Published from Delhi
प्रकाशित: 17 अप्रैल 2011
-अनिल नरेन्द्र
पाकिस्तान के साथ बातचीत शुरू करने पर विपक्ष की तमाम आपत्तियों को नजरअंदाज करते हुए मनमोहन सरकार ने अपने संबंधों को सुधारने की न केवल अपनी कोशिशें तेज कर दी हैं बल्कि भारतीय क्रिकेट टीम के पाकिस्तान में मैच खेलने पर लगी पाबंदी हटा ली है। यह समझा जा रहा है कि पाकिस्तान में सुरक्षा हाल ठीक रहे तो इस वर्ष के अन्त में भारतीय क्रिकेट टीम पाकिस्तान में एक दिवसीय मैच खेलने जा सकती है। गृह मंत्रालय के सूत्रों ने बुधवार को स्पष्ट किया कि पड़ोसी देश में सुरक्षा माहौल का जायजा लेने के बाद सरकार ने भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड को अपनी सुविधा के अनुसार पाकिस्तान में मैच की सिद्धांतत अनुमति दे दी है। हालांकि अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट काउंसिल के कैलेंडर के मुताबिक अगले वर्ष फरवरी तक भारतीय टीम का दौरा कार्यक्रम पहले से ही तय है। इसमें फिलहाल पाकिस्तान शामिल नहीं है। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और गिलानी के बीच बनी सहमति के हिसाब से पहले भारतीय टीम पाकिस्तान का दौरा करेगी और उसके बाद पाकिस्तानी टीम भारत का। बाद में दोनों टीमों के बीच एक फाइनल मैच शारजाह में भी आयोजित किया जा सकता है। सरकार ने इस मामले में विपक्ष की आपत्तियों को खारिज कर दिया है।
हम भारत सरकार के फैसले से सहमत नहीं हैं और इसका विरोध करते हैं। जो देश अपने पूर्व प्रधानमंत्री, राज्यपाल, सांसद, खुफिया मुख्यालय को नहीं बचा सकता वह भला भारतीय टीम की सुरक्षा क्या करेगा? शायद भारत सरकार लाहौर का वह आतंकी हमला भूल गई जब श्रीलंकाई क्रिकेट खिलाड़ियों पर लश्कर के सूरमाओं ने गोलियां चलाई थीं? हमारा अनुभव तो यह है कि जब-जब भारत ने अपनी तरफ से शांति की पहल की है भारत को पाक प्रायोजित आतंकी हमले का जवाब मिला है। ऐसे में जब आतंकी राणा के कबूलनामे के बाद भारत को पाकिस्तान पर दबाव बनाना चाहिए था तब भारत क्रिकेट की सीरीज शुरू करने की कवायद में जुटा है। विदेश मंत्री कहते हैं कि शांतिवार्ता, खेल और आतंकवादियों को सजा दिलाने के काम साथ-साथ जारी रहेंगे। सरकार को चाहिए था कि वह अंतर्राष्ट्रीय मंच पर पाकिस्तान की करतूतों की कलई खोलती और उस पर आतंकी शिविरों को बन्द करने का दबाव बनाती, लेकिन इसकी बजाय वह उससे क्रिकेट के रिश्ते बहाल करने में लगी हुई है। टीम इंडिया पाकिस्तान की टीम के साथ खेले किन्तु पाकिस्तान की जमीन पर नहीं बल्कि किसी दूसरे देश के स्टेडियम में। पाकिस्तान की टीम के साथ खेलने में कोई एतराज नहीं है, एतराज सिर्प पाकिस्तान के तालिबानी आतंकियों से टीम इंडिया की सुरक्षा को मिल रही चुनौतियों से है।
भारत सरकार के पाकिस्तान की भूमि पर मैच खेलने के फैसले से टीम इंडिया के खिलाड़ी भी सहमत नहीं हैं। एक खिलाड़ी ने कहा कि पाकिस्तान के हालात बेकाबू हैं, वहां जितनी भी सिक्योरिटी क्यों न हो, कोई सुरक्षित नहीं। जब वह बेनजीर भुट्टो व श्रीलंका टीम को नहीं बचा सके तो इस बात की क्या गारंटी है कि हम नहीं मारे जाएं? एक अन्य का कहना था कि अगर क्रिकेट में इतनी राजनीति होगी  तो वह क्रिकेट कहां रहेगा? फिर टीम इंडिया ने खुलकर भी पाकिस्तान को क्या कुछ नहीं कहा? सचिन ने कहा था कि मुंबई में जो कुछ हुआ वह दुर्भाग्यपूर्ण था। क्रिकेट ने इससे कुछ नहीं सीखा। मुझे आशा है कि मेरा यह शतक लोगों में खुशी बढ़ाएगा। मैं एनएसजी कमांडो, ताज होटल के कर्मियों, पुलिस, जनता को प्रणाम करता हूं। सचिन ने यह बात दिसम्बर 2008 में कही थी। विश्व कप के फाइनल के पहले पाकिस्तान को हराने के बाद गौतम गम्भीर ने कहा : हम जागरूक हैं और सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करेंगे। अगर हम फाइनल जीत जाते हैं तो मैं इस जीत को मुंबई हमले में मारे गए लोगों को समर्पित करूंगा। मेरे विचार में पाक से जीत और फाइनल में जीत भी उन्हें समर्पित की जानी चाहिए।