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Thursday, 7 April 2022
पत्रकार से आतंकी जीवन गाथा
जम्मू-कश्मीर के रैनावारी इलाके में गत बुधवार को सुरक्षाबलों और आतंकवादियों के बीच मुठभेड़ में लश्कर-ए-तैयबा के दो आतंकी मारे गए। कश्मीर के आईजीपी विजय कुमार ने बताया कि मारे गए आतंकवादियों में से एक के पास मीडिया का पहचान पत्र था। कुमार ने ट्वीट किया मारे गए लश्कर के एक आतंकवादी के पास मीडिया का पहचान पत्र था जो मीडिया के गलत इस्तेमाल का साफ संकेत देता है। पहचान पत्र में नाम लिखा है रईस अहमद भट और वह वैली मीडिया सर्विस का मुख्य संपादक है। इस समाचार एजेंसी का कोई अता-पता नहीं है। दूसरे आतंकवादी की पहचान हिलाल अहमद के तौर पर हुई है। आईजीपी ने चेतावनी देते हुए कहा कि सूचना विभाग और पत्रकारों को भारतीय पेस परिषद की गाइड लाइंस का पालन करना चाहिए वरना पुलिस इस संबंध में कार्रवाई करेगी। उन्होंने आरोप लगाया कि पाकिस्तान और कश्मीर के कुछ पत्रकारों द्वारा सोशल मीडिया का गलत इस्तेमाल किया जा रहा है। कुमार ने कहा- मैं पत्रकारों से राष्ट्र विरोधी गतिविधियों, लोगों को उकसाने या झूठी खबरें फैलाने जैसे कृत्यों में शामिल नहीं होने की अपील करता हूं। पुलिस को आतंकवादियों के शहर के रैनावारी इलाके में छिपे होने की जानकारी मिली थी। पुलिस ने इलाके की घेराबंदी करके तलाशी अभियान शुरू किया था और इस दौरान आतंकवादियों के गोलीबारी करने के कारण अभियान मुठभेड़ में तब्दील हो गया। मारे गए दोनों आतंकवादी अनंतनाग जिले के निवासी थे। रईस अहमद भट 2021 में आतंकवादी संगठन में शामिल होने से पहले एक पत्रकार था। अनंतनाग जिले में हत्याओं की कई घटनाओं में शामिल था। उन्होंने कहा, भट कुछ लोगों को निशाना बनाने के लिए श्रीनगर आया था... हमें समय पर उसके संबंध में जानकारी मिल गई और तलाशी अभियान चलाया गया। वह आम नागरिकों की हत्या की घटनाओं में शामिल था और उसके खिलाफ दो पाथमिकी भी दर्ज हैं। उधर श्रीनगर जम्मू-पुलिस ने कहा कि सोपोर शहर में सीआरपीएफ के बंकर पर ग्रेनेड फेंकने वाली महिला की पहचान हो गई है। कश्मीर रेंज के आईजीपी विजय कुमार ने कहा कि बुर्का पहने महिला की पहचान हो गई है और इसे जल्द ही गिरफ्तार कर लिया जाएगा। महिला ने मंगलवार शाम को सीआरपीएफ के बंकर पर ग्रेनेड फेंका था। विस्फोट में एक स्थानीय पुलिसकर्मी और सीआरपीएफ का एक जवान घायल हो गया। ग्रेनेड फेंकने का पूरा कम मौके पर लगे सीसीटीवी कैमरों में रिकार्ड हो गया। अब आतंकी संगठन महिलाओं को भी आतंकी गतिविधियों में शामिल करने लगे हैं।
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