Saturday, 19 August 2017

आफत की बारिश

देश में भारी बारिश से हाहाकार मचा हुआ है। बारिश न हो तब भी हाहाकार और ज्यादा हो जाए तो तबाही। देश के चार राज्योंöउत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, बिहार और असम में बारिश से भारी तबाही हुई है। उत्तराखंड के पिथौरागढ़ में सोमवार को सुबह बादल फटने से नौ लोगों की मौत हो गई। वहीं उत्तर प्रदेश और बिहार में कई जिले जलमग्न हैं। असम में बाढ़ से बिगड़े हालात के कारण कई ट्रेनों को बुधवार तक रद्द कर दिया गया है। उत्तराखंड में कैलाश मानसरोवर मार्ग में रविवार देर रात भालपा और मांगती नाले से सटे क्षेत्र में बादल फटने से भारी तबाही हुई जिसमें सेना के जेसीओ सहित नौ लोगों की मौत हो गई। यूपी में नदियां ऊफान पर हैं। नेपाल के पहाड़ी क्षेत्र में लगातार हो रही भारी बारिश के चलते उत्तरी पूर्वांचल में नदियां उफान पर हैं। प्रदेश के 40 जिले बाढ़ से घिरे हैं। कुशीनगर में रिंग बांध सोमवार को टूट गया। इससे कई गांवों में बाढ़ का पानी भर गया। हिमाचल प्रदेश सहित नदियों के जल ग्रहण क्षेत्रों में हो रही लगातार बारिश के कारण जलाशयों का जल स्तर बढ़ने और इनका पानी छोड़े जाने से पंजाब में हजारों एकड़ की फसलें जलमग्न हो गई हैं और सैकड़ों लोग बेघर हो गए हैं। आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि पोंग डैम से पानी छोड़े जाने तथा अन्य सहायक नदियों के पानी ने पंजाब के तरनतारन जिले में ब्यास नदी के पानी ने तबाही मचाई हुई है। अरुणाचल प्रदेश में बाढ़ की स्थिति गंभीर बनी हुई है। राज्य के विभिन्न स्थानों पर सड़क यातायात बाधित है। कई जिलों में व्यापक तौर पर भोजन का संकट उत्पन्न हो गया है। बिहार और नेपाल में हो रही बारिश के कारण 13 जिले बाढ़ की चपेट में हैं। प्रभावित जिलों में रेल व सड़क सम्पर्क सेवा बाधित हुई है। सेना, एनडीआरएफ की टीम के अलावा सेना के दो हेलीकाप्टर की सहायता से युद्ध स्तर पर राहत और बचाव कार्य चलाया जा रहा है। असम में 22.5 लाख लोगों पर राज्य के 21 जिलों में आफत आ गई है। 99 लोगों की अब तक मौत हो चुकी है। राहत कार्य के लिए सेना बुलाई गई है। बाढ़ की गंभीरता को देखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्वीट कर कहा कि केंद्र सरकार बिहार, यूपी और असम की बाढ़ की स्थिति पर नजर रखे हुए है। बचाव राहत कार्य में मदद के लिए एनडीआरएफ के दल भेजे गए हैं। बारिश से तबाही का यह सिलसिला हर साल होता है। देश के कुछ भागों में पानी की कमी होने से लोग मरते हैं तो अन्य क्षेत्रों में ज्यादा बारिश होने से। इतने वर्षों में इसका कोई स्थायी समाधान नहीं हो सका। हमारे पास सब तरह के विभाग हैं, योजनाएं हैं पर समाधान नहीं।

-अनिल नरेन्द्र

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