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Saturday, 12 August 2017

मरी पड़ी कांग्रेस में पटेल की जीत की संजीवनी

मंगलवार बेहद देर रात तक चले हाई वोल्टेज ड्रामे में अंतत राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस के चाणक्य अहमद पटेल को फोटो फिनिश अंदाज में जिस तरह जीत मिली, जहां एक ओर खुद उनके सियासी अस्तित्व के लिए बेहद अहम बन गया था वहीं दूसरी ओर इसका असर कहीं न कहीं पूरी कांग्रेस पार्टी पर भी पड़ेगा। ऐसे में पटेल के आखिरी मौके तक अपनी जीत के लिए संघर्ष ने पार्टी के लिए संजीवनी का काम किया है। बीते कुछ वर्षों में यह पहला मौका है जब आमने-सामने की सियासी जंग में, मोदी-शाह की जोड़ी की गोटियों को कांग्रेस ने मात दे दी। इस जीत के बाद कांग्रेस पार्टी में इसी साल होने जा रहे गुजरात और हिमाचल प्रदेश के विधानसभा चुनावों को लेकर नए सिरे से जोश आना स्वाभाविक है। भाजपा ने इस चुनाव के सियासी माहौल को इतना बढ़ा दिया था कि राज्यसभा का यह चुनाव सामान्य नहीं रहा। भाजपा के चाणक्य अमित शाह ने कांग्रेस अध्यक्ष के राजनीतिक सलाहकार अहमद पटेल पर निशाना साधकर गुजरात और हिमाचल में विपक्ष के मनोबल को तोड़ने की योजना जो बनाई थी वह दांव भाजपा को उलटा ही पड़ गया। परिणाम आने के बाद अहमद पटेल ने कहा कि अब अगला लक्ष्य गुजरात विधानसभा का चुनाव है। गुजरात में कांग्रेस प्रभारी अशोक गहलोत के अनुसार इस जीत ने 2017 के विधानसभा चुनाव के लिए जोश भरा है। हम ब्लॉक स्तर पर नए सिरे से सम्पर्क अभियान शुरू करने जा रहे हैं। जहां आने वाले समय में गुजरात की सियासत में अहमद पटेल का कद और बढ़ेगा, साख बढ़ेगी, वहीं कांग्रेस के भीतर उनके विरोधियों का मनोबल गिरेगा। उल्लेखनीय है कि पार्टी में एक धड़ा ऐसा बताया जाता है जो अहमद पटेल की अहमियत से उतना खुश नहीं हैं और उन्हें लगातार हाशिये पर धकेलने को कोशिश करता आया है। ऐसे में अपने बूते पर अपनी राज्यसभा सीट निकालकर उन्होंने अपने उन विरोधियों को भी जोरदार जवाब दिया है। आने वाले दिनों में उनका कद पार्टी में और मजबूत होगा। साथ ही संगठन में बदलाव के नाम पर वह और उनके जैसे सीनियर नेताओं को किनारे पर करने की कोशिश जो युवा नेता कर रहे थे उस पर भी लगाम लगेगी। अगर कांग्रेस पार्टी इसी तरह का जोर गोवा में भी लगाती तो जीती हुई बाजी यूं न हार जाती। ताजा स्थितियों में कांग्रेस पार्टी ने भाजपा के मिशन गुजरात 150 की काट की योजना बनाने की तैयारी शुरू कर दी है। गुजरात में कांग्रेस बीते 33 साल से सत्ता से बाहर है। राज्यों में इतर कांग्रेस आलाकमान में अहमद पटेल की राहुल गांधी से नजदीकियां बढ़ने के संकेत हैं। राहुल का प्रभाव बढ़ने के साथ अहमद पटेल का कद घट रहा था। राज्यसभा चुनाव की जीत ने उन्हें कांग्रेस की नई पीढ़ी के करीब आने का स्वर्ण अवसर दिया है। इसमें कांग्रेस पार्टी और राहुल गांधी दोनों को फायदा है। राहुल के इर्द-गिर्द युवा छोकरों ने पार्टी को धरातल पर लाकर खड़ा कर दिया है। सोनिया के वरिष्ठ सलाहकारों को दरकिनार करने से पार्टी को भारी नुकसान हुआ है। पटेल ने माहिर राजनीतिज्ञ की अपनी छवि को मजबूती दी है। गुजरात का राज्यसभा चुनाव अशोक गहलोत के भविष्य को भी मजबूती दे सकता है। गहलोत को पंजाब में भी कांग्रेस के प्रचार के लिए भेजा गया था, वहां पार्टी सरकार बनाने में सफल रही। कुल मिलाकर अहमद पटेल की यह जीत कांग्रेस पार्टी में संजीवनी का काम कर सकती है। कांग्रेस को इसकी सख्त जरूरत भी है। अभी कुछ ही दिन पहले पार्टी को आत्ममंथन करने की वकालत की थी। कांग्रेस के अंदर जो उदासी छाई थी वह कुछ हद तक इस परिणाम से घटी है। कांग्रेसी कार्यकर्ताओं में एक नया जोश आया है। इस जीत ने साबित कर दिया कि अगर पार्टी सही मायनों में संघर्ष करे तो अच्छे परिणाम आ सकते हैं।

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