Wednesday, 19 September 2018

दहेज कानून बदलाव ः सारी ताकत पुलिस के पास फिर

सुप्रीम कोर्ट ने गत बुधवार अपने ही एक फैसले को पलटते हुए दहेज उत्पीड़न रोकने के लिए बनी भारतीय दंड संहिता की धारा 498ए के तहत सीधी गिरफ्तारी का अधिकार बरकरार रखा है। दहेज उत्पीड़न के मामलों में पति और उसके परिवार वालों को जो संरक्षण मिला हुआ था अब वह समाप्त हो गया है। सुप्रीम कोर्ट ने दहेज कानून का दुरुपयोग रोकने के लिए पिछले वर्ष जारी किए गए दिशानिर्देश में बदलाव करते हुए दहेज उत्पीड़न की शिकायतों की जांच के लिए परिवार कल्याण समिति गठित करने और उस समिति की रिपोर्ट आने तक गिरफ्तारी करने का निर्देश रद्द कर दिया है यानि अब अगर पुलिस को गिरफ्तारी का पर्याप्त आधार लगता है तो वह आरोपित को गिरफ्तार कर सकती है। अपने ही फैसले को पलटते हुए सुप्रीम कोर्ट ने गिरफ्तारी का अधिकार पुलिस के पास देकर अपनी सीमाएं रेखांकित कर ली हैं। अब पुलिस ही फैसला करेगी कि यह शिकायत सही है या नहीं? एक साल पहले 2017 के जुलाई में न्यायमूर्ति एके गोयल और न्यायमूर्ति यूयू ललित ने यह मानते हुए कि दहेज की फर्जी शिकायतें बहुत आ रही हैं और उसके कारण परिवार के बूढ़ों और रिश्तेदारों को भी परेशान किया जाता है, गिरफ्तार किया जाता है, फैसला दिया था कि अब दहेज की शिकायत आने पर एक कल्याण समिति जांच करेगी। जांच करने वाली समिति की फाइडिंग पर पुलिस गिरफ्तारी करेगी। मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा, एएम खानविल्कर और डीवाई चन्द्रचूड़ की पीठ ने ताजा फैसला न्यायधर नामक एनजीओ की याचिका पर दिया है। पीठ ने भले ही दहेज उत्पीड़न के मामले में सीधे गिरफ्तारी के प्रावधान को फिर से लागू कर दिया हो, लेकिन शीर्ष अदालत ने साथ ही यह भी माना कि दहेज उत्पीड़न कानून का दुरुपयोग होता है। पता नहीं यह हाल में आए एससी/एसटी कानून के बाद का असर है या फिर महिला अधिकार संगठनों का लेकिन अदालत मानवाधिकारों का हवाला देकर उन कानूनों को कमजोर करने से बचती नजर आ रही है, जिन्हें सामाजिक न्याय के लिए बनाया गया है। शायद अदालत को यह अहसास हो रहा है कि सामाजिक न्याय की आवश्यकता और उसके पक्ष में खड़े आंदोलन उसके फैसले की आलोचना और विरोध कर सकते हैं इसलिए यह मामला विधायिका के पाले में ही छोड़ना उचित है। हालांकि अदालत ने यह कहा है कि दहेज कानून का दुरुपयोग रोकने के लिए सीआरपीसी में धारा 41ए और अग्रिम जमानत के प्रावधान पहले से मौजूद हैं। इस फैसले के तहत अब दहेज की शिकायत की सत्यता जांचने वाली परिवार कल्याण समितियों का हस्तक्षेप खत्म हो जाएगा और यह पुलिस ही फैसला करेगी कि शिकायत सही है या गलत? पुलिस के इस अधिकार का पहले भी दुरुपयोग होने का खतरा था तभी तो फैसला बदला गया था। अब फिर से यह अधिकार पुलिस के पास आ गया है।

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