Tuesday, 25 September 2018

ईवीएम की विश्वसनीयता पर अमेरिका में भी विवाद

देश में इलैक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) से लोकसभा और विधानसभा चुनावों में मतदान को लेकर समय-समय पर इसकी विश्वसनीयता पर संदेह जताया जाता रहा है। बुधवार को मुख्य चुनाव आयुक्त ओपी रावत ने जयपुर में पत्रकारों को फिर भरोसा दिया कि ईवीएम भरोसे लायक है, इन्हें हमने हाइटैक कर लिया है। एम-3 ईवीएम मशीन ज्यादा सेंसेटिव है। मशीन से टेंपर करने का कोई प्रयास करेगा तो मशीन फैक्टरी मोड में चली जाएगी और ऐसा होने पर प्रभावित मशीन को बदल दिया जाएगा। अमेरिका जैसे मजबूत लोकतंत्र में भी ईवीएम की विश्वसनीयता को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। ऐसा ही एक विवाद कोर्ट में पहुंच गया है। अमेरिका में 14 ऐसे सूबे हैं, जहां टच क्रीन वोटिंग मशीन चुनावों में उपयोग के लिए लाई जाती है। इनमें से एक सूबा है जॉर्जिया, जहां इन वोटिंग मशीनों की विश्वसनीयता और सुरक्षा न होने का मामला वहां की जिला अदालत में पहुंचा तो उसने इनके असुरक्षित होने की बात तो मानी लेकिन फैसला दिया कि फिलहाल ईवीएम से ही वहां के मध्यावधि चुनाव कराए जाएं। सोमवार को ही सामने आए एक सर्वेक्षण से पता चला कि 56 फीसदी अमेरिकियों को विश्वास है कि ईवीएम चुनाव को असुरक्षित बनाती है। जबकि 68 फीसद ने माना कि मतपत्र से चुनाव कहीं ज्यादा सुरक्षित होते हैं। इस वर्ग में तीन में एक अमेरिकी यह मानता है कि आगामी मध्यावधि चुनावों में कोई भी देश मत-तालिका या नतीजे बदल सकता है। जिला अदालत की जज एमी टोटेन बर्ग ने जॉर्जिया और राज्य चुनाव विभाग के अधिकारियों को सुरक्षित चुनावों को लेकर उनकी तैयारी पर फटकार भी लगाई। टच क्रीन वोटिंग मशीनों का इस्तेमाल करने वाले 14 राज्यों में से जॉर्जिया भी एक है, लेकिन इन मशीनों में पेपर ट्रेल का बंदोबस्त नहीं है। लिहाजा मतदाता इस बात की पुष्टि नहीं कर पाता है कि उसका मत उसकी पसंद के उम्मीदवार को गया है या नहीं? अमेरिका में साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों में इस बात पर रजामंदी है कि ऐसी मशीनों के हैक होने की संभावना पूरी है। यदि हैकर वोट की कुल संख्या में हेरफेर करे या फिर कोई तकनीकी गड़बड़ी हो जाए तो वास्तविक मतों का कोई बैकअप इनमें नहीं होता। एनपीआर वेबसाइट के मुताबिक टोटेन बर्ग ने हालांकि जॉर्जिया में सुरक्षित चुनावों को लेकर अपनी चिन्ताएं जताईं लेकिन उन्होंने चुनाव इतने नजदीक होने के कारण 15 अक्तूबर से होने वाले मतदान को पूरी तरह टच क्रीन वोटिंग मशीन की बजाय मतपत्र से कराने के खिलाफ फैसला दिया। राज्य में मतपत्र से मतदान न कराने के फैसले में जो मुख्य आधार बने, उनमें सबसे प्रमुख था चुनाव का इतना नजदीक आना। बता दें कि जॉर्जिया उन 21 राज्यों में शरीक नहीं है जहां 2016 में राष्ट्रपति चुनाव में रूसी हैकरों ने सेंध लगाई थी।

-अनिल नरेन्द्र

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