Friday, 14 December 2018

राहुल गांधी मैन ऑफ द सीरीज

भाजपा का कांग्रेस मुक्त भारत का सपना पूरा होता नहीं दिखता, बल्कि राहुल के नेतृत्व में कांग्रेस का कद्दावर रूप सामने आया है। पांच राज्यों में हुए विधानसभा चुनाव के नतीजे बताते हैं कि केंद्र में कुर्सी पर बैठी भाजपा के लिए खतरे की घंटी बज गई है। नरेंद्र मोदी के 2014 में पीएम बनने के बाद भाजपा की यह सबसे बड़ी हार है। यह विधानसभा चुनाव 2019 के लोकसभा चुनाव के लिए सेमीफाइनल समझे जा रहे हैं। अगर इन चुनावों में कोई हीरो है तो वह राहुल गांधी हैं। उनके एक साल के नेतृत्व में कांग्रेस की वापसी हुई, पार्टी के लिए यह संजीवनी से कम नहीं है। इन चुनावों ने जहां राहुल गांधी को बतौर लीडर साबित किया वहीं विपक्ष को भी वह यह संदेश देने में सफल हुए कि वह अब उनके भी लीडर हैं। भाजपा के कांग्रेस मुक्त भारत अभियान का रथ पांच साल पहले जहां से चला था, वहीं आकर थम गया। कांग्रेस ने मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान तीनों हिन्दीभाषी राज्यों में भाजपा को सत्ता से बेदखल कर दिया है। मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ में तो भाजपा 15 साल से सत्ता में थी। सबसे चौंकाने वाला नतीजा छत्तीसगढ़ का रहा। वहां कांग्रेस ने 76 फीसदी सीटें जीत लीं। भाजपा सिर्प 15 सीटों पर सिमट गई है। 2014 में मोदी सरकार के केंद्र में सत्तारूढ़ होने के बाद यह पहला मौका है, जब कांग्रेस ने भाजपा से सत्ता छीनी है। इससे अब कांग्रेस की पांच राज्यों में (पंजाब, राजस्थान, छत्तीसगढ़, कर्नाटक, पुडुचेरी) में सरकारें हो गई हैं। भाजपा की 12 राज्यों में सरकारें हैं। काफी अरसे से बड़ी जीत के लिए तरसती कांग्रेस के लिए मंगलवार को आए पांच राज्यों के चुनावी नतीजों में तीन राज्यों में मिली जीत एक नई ऊर्जा की तरह सामने आई है। इस जीत का ज्यादा श्रेय कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी को जाता है। राहुल की कड़ी मेहनत आखिर रंग लाई। राहुल ने कुछ हफ्तों के भीतर 82 सभाएं और सात रोड शो किए। इन नतीजों के बाद अब कोई भी राहुल को पप्पू कहने का साहस नहीं कर सकेगा। इन नतीजों का सबसे बड़ा संदेश यह है कि अब इस जीत के बाद कांग्रेस यह संकेत देश की जनता को देने में सफल हो गई है कि वह भाजपा से सीधी टक्कर ले सकती है। इससे मध्यप्रदेश और राजस्थान में जीत और छत्तीसगढ़ में हुई एकतरफा जीत से कहीं न कहीं कांग्रेस के कार्यकर्ताओं का टूटा मनोबल और बिखरा आत्मविश्वास लौटेगा और बढ़ेगा। दरअसल इस जीत ने कहीं न कहीं कांग्रेस वर्पर्स के भीतर यह विश्वास लौटाया कि भाजपा से सीधी टक्कर में वह न सिर्प कड़ी चुनौती दे सकती है, बल्कि वह उसे हरा भी सकती है। अब राहुल  मोदी के सामने ज्यादा मजबूती से खड़े हो पाएंगे। इस जीत के बाद माना जा रहा है कि कांग्रेस का जमीनी आधार भी मजबूत होगा। दरअसल अगर इन तीन राज्यों में कांग्रेस का प्रदर्शन नहीं सुधरता तो कांग्रेस के संगठन के बिखरने की पूरी संभावना थी। लगातार हार का मुंह देख रहे कांग्रेस के वर्पर हतोत्साहित हो गए थे। इस शानदार जीत पर राहुल गांधी व कांग्रेस को बधाई।

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