Thursday, 27 December 2018

सीबीआई जज एसजे शर्मा का करियर का अंतिम फैसला

मुंबई के केन्द्राrय जांच ब्यूरो (सीबीआई) के विशेष न्यायाधीश एसजे शर्मा के लिए गैंगस्टर सोहराबुद्दीन शेख, उसकी पत्नी कौसर बी और उसके सहयोगी तुलसी पजापति की कथित फर्जी मुठभेड़ में हत्याओं के 22 आरोपियों को बरी करना उनके करियर का अंतिम फैसला रहा। इसी महीने सेवानिवृत्त हो रहे न्यायाधीश शर्मा ने अपने फैसले में कहा कि यह मेरा अंतिम फैसला है... यह  दुर्भाग्यपूर्ण है कि (पीड़ितों के) एक परिवार ने एक बेटा, भाई गंवा दिया... लेकिन यह साबित करने के लिए पर्याप्त साक्ष्य नहीं है कि ये आरोपी अपराध में शामिल थे। न्यायाधीश ने कहा कि उन्हें शेख और पजापति के परिवारों के लिए अफसोस है क्योंकि तीन लोगों की जान चली गई। लेकिन व्यवस्था की मांग है कि अदालत केवल साक्ष्यों के आधार पर चलती है। तेरह साल पुराने इस मामले में कई उतार-चढ़ाव देखे। इसमें अभियोजन पक्ष के 92 गवाह अपने बयान से मुकरे। एक समय इसी केस में भाजपा अध्यक्ष अमित शाह को भी 2010 में कुछ समय के लिए गिरफ्तार किया गया था। यह मामला 22 नवम्बर 2005 को शुरू हुआ, जब गुजरात के निवासी सोहराबुद्दीन, उनकी पत्नी कौसर बी और उनके साथी पजापति को हैदराबाद से सांगली जाते समय रास्ते में पुलिस ने अपनी हिरासत में लिया। सोहराबुद्दीन और कौसर को अहमदाबाद के एक फार्म हाउस में ले जाया गया जहां 26 नवंबर को सोहराबुद्दीन की कथित फर्जी मुठभेड़ मे हत्या कर दी गई। इस फर्जी तथाकथित मुठभेड़ के पीछे गुजरात और राजस्थान पुलिस की साझा टीम को जिम्मेदार बताया गया। सोहराबुद्दीन की कथित हत्या के बाद सोहराबुद्दीन के परिवार ने इस मामले की जांच के लिए सुपीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। साथ ही कई तरह के राज से पर्दा उठने लगा। इस मामले में सबसे बड़ा नाम आया मौजूदा वक्त में बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह औsर गुलाब चंद कटारिया का। इनके अलावा गुजरात और राजस्थान पुलिस के कांस्टेबल से लेकर आईपीएस अधिकारी पद तक के लोग इस मामले में लिप्त पाए गए। आईपीएस अधिकारी एमएन दिनेश, राजकुमार पंडियन और डीजी बंजारा सहित गुजरात के पूर्व गृहमंत्री अमित शाह तक को इस मामले में गिरफ्तारियां देनी पड़ी। जज शर्मा ने 13 साल पुराने इस मामले में कहा कि सोहराबुद्दीन की मौत गोली लगने से हुई हत्या का कोई सुबूत नहीं है। साजिश भी साबित नहीं हुई। अभियोजन पक्ष घटना में संदेह का लिंक जोड़ा नहीं जा सकता। परिस्थितिजन्य साक्ष्य भी आरोप सिद्ध नहीं करते। फैसले से सोहराबुद्दीन के परिजन निराश हैं। लेकिन हताश नहीं। हम जल्द ही सुपीम कोर्ट में अपील करेंगे यह कहा रुबाबुद्दीन शेख ने जो सोहराबुद्दीन के भाई हैं। ध्यान देने की बात है कि सीबीआई की जांच भी सुपीम कोर्ट के आदेश पर हुई थी।


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