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Friday, 1 March 2019

अरुणाचल प्रदेश में आग क्यों लगी हुई है?

पिछले कुछ दिनों से अरुणाचल प्रदेश में आग लगी हुई है। प्रदर्शनकारियों ने रविवार को कर्फ्यू को धता बताते हुए ईटानगर में अरुणाचल प्रदेश के उपमुख्यमंत्री चौना मैन के घर को पूंक दिया। दो पुलिस थानों को भी आग के हवाले कर दिया गया। वहीं मुख्यमंत्री आवास की ओर बढ़ रहे प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए पुलिस को गोली चलानी पड़ी। फायरिंग में दो प्रदर्शनकारियों की मौत हो गई। हिंसा और आगजनी के बाद ईटानगर और नाहरलगून में सेना को बुलाना पड़ा है। दोनों जगहों पर शनिवार को ही बेमियादी कर्फ्यू लगा दिया गया था। राज्य में इंटरनेट सेवाओं पर भी प्रतिबंध लगा दिया है, क्या है पूरा मामला? अरुणाचल प्रदेश पहले असम राज्य का हिस्सा था और 1987 में इसे अलग राज्य का दर्जा मिला। नए राज्य के दो जिलों नामसाई और छागलांग में दशकों से छह गैर-अरुणाचली जनजाति के लोग रह रहे थे। उनकी आबादी करीब 20-25 हजार है। उनके पास जमीन तो है, क्योंकि उस पर दो दशकों से रह रहे हैं लेकिन उनके पास पीआरसी नहीं है जिसके कारण उन्हें कई तरह की परेशानी उठानी पड़ रही है। अरुणाचल सरकार ने मई 2018 में एक संयुक्त उच्चाधिकार समिति का गठन किया था। समिति की जिम्मेदारी में तय करना था कि उन गैर-अरुणाचली जनजातियों के लिए क्या रास्ता निकाला जाए? समिति ने सिफारिश की है कि गैर-अरुणाचली छह समुदायों को भी राज्य में पीआरसी दी जाए। इसके विरोध में छात्रों और सिविल सोसाइटी समेत राज्य के कई संगठनों ने गुरुवार से लेकर शनिवार तक 48 घंटों के बंद का आह्वान किया था। भाजपा उपाध्यक्ष तंवर के अनुसार गैर-अरुणाचली लोग को अगर पीआरसी मिलता है तो इससे वह कई तरह की दिक्कतों का सामना करने से बच सकते हैं। अरुणाचल ईस्ट लोकसभा सीट से कांग्रेस के सांसद निनोंग इरिंग का भी मानना है कि इस पर विचार किया जा सकता है। लेकिन विरोध कर रहे संगठनों का कहना है कि सिफारिश मानी गई तो स्थानीय स्थायी निवासियों के अधिकारों पर विपरीत असर पड़ेगा। पूर्व छात्र नेता रितेमसो मान्यू ने कहा कि अरुणाचल में पहले से ही रोजगार की समस्या है और अगर इन जनजातियों को पीआरसी दी गई तो वो राज्य की दूसरी जनजातियों के बराबर हो जाएंगे और सारे अधिकार उन्हें भी मिलने लगेंगे। रितेमसो के अनुसार इससे अरुणाचली लोगों को नुकसान होगा। विश्लेषकों का मानना है कि हिंसा ने इस वजह से और भयानक रूप ले लिया क्योंकि पेमा खांडू ने नागरिकता संशोधन बिल का भी समर्थन किया था, जबकि मणिपुर के मुख्यमंत्री ने भाजपा के होते हुए भी इस  बिल का विरोध किया था। वहीं केंद्रीय गृह राज्यमंत्री किरन रिजिजू ने कांग्रेस पर अरुणाचल में  रह रहे छह समुदायों को स्थायी निवास प्रमाण पत्र देने के खिलाफ प्रदर्शन के लिए लोगों को भड़काने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि शुरुआत से ही सरकार से आग्रह किया है कि स्थानीय लोगों के अधिकारों की पूर्ण सुरक्षा सुनिश्चित होने से पहले पीआरसी नहीं देना चाहिए।

-अनिल नरेन्द्र

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