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Wednesday, 3 August 2016

कांग्रेस और नवाज शरीफ के मिलते सुर

यह अजीब इत्तिफाक है कि इधर कांग्रेस पार्टी कश्मीर में जनमत संग्रह की बात कर रही है तो उधर पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने कहा कि कश्मीर भारत का अंदरूनी मामला नहीं है, उसे कश्मीरियों के अधिकारों का सम्मान करते हुए वहां जनमत संग्रह करवाना चाहिए। लोकसभा के मानसून सत्र के तीसरे दिन नियम 193 के तहत कश्मीर के हालात पर बहस शुरू करते हुए कांग्रेस के ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा कि कश्मीर में आज रायशुमारी की जरूरत है। सीमा पार नवाज शरीफ ने कश्मीर घाटी के लोगों के साथ एकजुटता दिखाने के नाम पर आयोजित ब्लैक डे के मौके पर कहाöआज हम कश्मीरियों के साथ एकजुटता दिखाने के लिए ब्लैक डे मना रहे हैं। इससे दुनिया को सख्त संदेश देना चाहते हैं कि पाकिस्तानी लोग उनके (कश्मीरियों) अधिकारों के संघर्ष में हमेशा साथ हैं। अगर कश्मीरियों के अधिकारों की बात नवाज शरीफ कर रहे हैं तो पहले अपने कब्जे में जो कश्मीरी हैं उनको तो उनका अधिकार दे दें। पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में चुनावी धांधली को लेकर स्थानीय लोगों का गुस्सा थमने का नाम नहीं ले रहा है। पाक ने 21 जुलाई को अपने कब्जे वाले कश्मीर में चुनाव करवाया था। स्थानीय लोगों का कहना है कि चुनाव में आईएसआई ने नवाज शरीफ की पार्टी पाकिस्तान मुस्लिम लीग के पक्ष में खुलकर हेराफेरी की। नतीजा यह हुआ कि उसे 41 सीटों में से 32 पर जीत मिली। नतीजे आने के बाद स्थानीय लोग सड़क पर उतर आए। नीलम घाटी में गुस्साए लोगों ने पाकिस्तानी झंडे जलाए। इलेक्शन से जुड़े पोस्टरों पर लोगों ने कालिख पोत दी। चुनावी नतीजों और प्रक्रिया के विरोध में मुजफ्फराबाद, कोटली, चिन्नारी और मीरपुर में भारी संख्या में उग्र प्रदर्शन हुए। भारत के कश्मीरियों और उनके समर्थकों (कांग्रेस) के लिए उस पार के पाक अधिकृत कश्मीर (पीओके) में चुनावी धांधली के विरुद्ध हो रहा प्रदर्शन आंखें खोलने वाला है। इधर के आंदोलनकारियों को देख लेना चाहिए कि इस पार के कश्मीर को अपने में मिलाने का सपना देख रहे नवाज शरीफ उस हिस्से को ही नहीं संभाल पा रहे हैं, जो गलती से उनकी तरफ है। विडंबना देखिए कि हाल में पीओके में हुए चुनाव में सबसे ज्यादा गड़बड़ी शरीफ की पीएमएल-एन ने ही की है। धांधली का आलम यह है कि उनके प्रतिद्वंद्वी दलों पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी और मुस्लिम कांफ्रेंस को महज तीन-तीन सीटें मिलीं और जब वे  लोग विरोध पर उतरे तो मुस्लिम कांफ्रेंस के कार्यकर्ता को मार डाला गया। भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने सही टिप्पणी की है कि पाकिस्तान अवैध कब्जे को सही साबित करने के लिए फर्जी चुनाव करवाता है और जब उसकी कलई खुल जाती है तो वह  लोगों का दमन करता है। पीओके के इस चुनाव पर सिर्प भारत ने ही धांधलियों पर सवाल नहीं उठाया है, बल्कि वहां के मानवाधिकार संगठन भी यही बात कर रहे हैं।

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