Wednesday, 11 July 2018

दरिंदों में खौफ पैदा करने के लिए अविलंब फांसी पर लटकाओ

16 दिसम्बर 2012 की रात फिल्म देखकर लौटते समय 23 वर्षीय पैरामेडिकल छात्रा निर्भया के साथ जो हुआ उसने सारे देश को झकझोर दिया था। चलती बस में सामूहिक दुष्कर्म किया और हैवानियत की सारी सीमाएं लांघ दी थीं। सुप्रीम कोर्ट ने देश को झकझोर कर रख देने वाले इस दुष्कर्म मामले में दोषियों की फांसी की सजा बरकरार रखकर दोषियों को साफ कर दिया है कि उन्हें कोई राहत मिलने वाली नहीं है। हमारी कानून-व्यवस्था ऐसी लचर है कि 2012 की इस घटना में अभी तक न्याय नहीं हो सका। कानूनी दांव-पेंच में इनकी फांसी लटकी हुई है। और अब भी इन राक्षसों के पास विकल्प बचे हैं। यह रिव्यू पिटीशन खारिज होने के बाद अब यह मुजरिम सुप्रीम कोर्ट में ही क्यूरेटिव पिटीशन दाखिल कर सकते हैं। पर सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में स्पष्ट कर दिया है कि किसी प्रकार की रिव्यू पिटीशन की गुंजाइश नहीं है। इनका दोष पूरी तरह से साबित हो चुका है और इनके पास अब कोई बचने के ग्राउंड नहीं रहे। अगर सुप्रीम कोर्ट क्यूरेटिव पिटीशन खारिज कर देता है तो उनके पास राष्ट्रपति के पास दया याचिका दाखिल करने का ही अंतिम विकल्प बचता है। निर्भया के दोषियों को अविलंब फांसी पर लटकाया जाए। इस रिव्यू व याचिका को अविलंब निपटाया जाए यह देश की मांग है। आज कटु सत्य तो यह है कि दरिंदों में कानून का खौफ खत्म हो चुका है। बलात्कारियों के हौंसले इतने बढ़े हुए हैं कि यह न तो कानून को कुछ समझते हैं और न ही इंसानियत को। अगर निर्भया के दोषियों को अविलंब फांसी होती है तो इससे पूरे देश में एक मैसेज जाएगा। इन बलात्कारियों में थोड़ा खौफ पैदा होगा। निश्चित रूप से शीर्ष अदालत का यह फैसला स्वागतयोग्य है। इससे दुष्कर्म जैसे जघन्य अपराध करने वालों को सोचने पर मजबूर होना होगा। डर पैदा होगा। हालांकि इसके बावजूद दिल्ली में महिला सुरक्षा के लिए अभी भी बहुत कुछ करने की जरूरत है, क्योंकि आज भी देश की राजधानी की गिनती महिलाओं के लिए असुरक्षित शहरों में होती है। 2012 की इस जघन्य घटना के बाद आक्रोशित लोग सड़कों पर उतर आए थे। दिल्ली में कई दिनों तक आंदोलन चला था। इस कांड के बाद महिलाओं की सुरक्षा के लिए ऊषा मेहरा कमेटी खास गठित की गई जिसमें कई सुझाव दिए गए। पर दुख से कहना पड़ता है कि आज तक इन पर अमल नहीं हो पाया। नतीजा यह है कि आज पूरे देश में इन दरिंदों की बाढ़-सी आ गई है। आए दिन बच्चियों से दुष्कर्म और हैवानियत की खबरें आ रही हैं। दिल्ली को तो रेप कैपिटल भी कहा जाने लगा है। दिल्ली की महिलाओं को सुरक्षित बनाने के लिए हर जरूरी कदम उठाने की जरूरत है। यह सरकार, प्रशासन व दिल्ली पुलिस की जिम्मेदारी है। और इसे लेकर सियासत या बहानेबाजी नहीं होनी चाहिए। इसकी शुरुआत निर्भया के हत्यारों को फांसी पर लटका कर की जानी चाहिए।

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