Tuesday, 3 July 2018

स्विस बैंकों में भारत की धूम

निश्चित रूप से यह जानकारी हैरान, परेशान करने वाली है कि स्विस बैंकों में भारतीयों की जमा राशि में भारी इजाफा हुआ है। काले धन में कमी करने वाली मोदी सरकार के लिए स्विस नेशनल बैंक (एसएनबी) की ओर से जारी ताजा रिपोर्ट बड़े झटके से कम नहीं है। स्विस नेशनल बैंक ने 28 जून को अपने यहां विदेशियों की जमा राशि के बारे में जो आंकड़े जारी किए हैं वे भारत सरकार के दावे को धता बताने के लिए जरूर है और भ्रष्टाचार के विरुद्ध होने वाली सरकार की लड़ाई के दावे की पोल खोलते हैं। इसके मुताबिक स्विस बैंकों में भारतीयों का धन 50 प्रतिशत बढ़कर लगभग 7000 करोड़ रुपए हो गया है। भारतीयों द्वारा स्विस बैंक खातों में सीधे तौर पर रखा गया धन बढ़कर 99.9 करोड़ फ्रैंक (सीएमएफ) और दूसरों के माध्यम से जमा कराया गया धन भी बढ़कर 1.6 करोड़ स्विस फ्रैंक हो गया है। आंकड़ों के अनुसार स्विट्जरलैंड के बैंक खातों में विदेशी ग्राहकों का कुल धन 1460 अरब स्विस फ्रैंक या 100 लाख करोड़ रुपए से अधिक है। काले धन के खिलाफ अभियान के बावजूद यह चिन्ता की बात है कि स्विस बैंकों में भारतीयों के धन में वृद्धि हुई है। भारतीय अपना काला धन रखते रहे हैं, क्योंकि इन बैंकों में ग्राहकों की सूचनाओं को बेहद गोपनीय रखा जाता है। यहां आपके खातों को इतना गुप्त रखा जाता है कि आपके अकाउंट नाम से नहीं होते बल्कि आपको एक नम्बर दिया जाता है यानि नम्बर से ही आपका अकाउंट ऑपरेट होता है। काला धन रखने वाले जो अकाउंट खुलवाते हैं, उसे नम्बर अकाउंट कहा जाता है। इसमें ट्रांसजैक्शन के वक्त कस्टमर के नाम के बजाय सिर्प उसे दी गई आईडी का इस्तेमाल होता है। इसके लिए स्विट्जरलैंड में फिजिकल तौर पर जाना जरूरी होता है। खुद जाकर बैंक से कैश निकालना होता है। इससे डायरेक्ट कैश विड्राल से प्राइवेसी बनी रहती है क्योंकि ट्रांसजैक्शन रिकार्ड सिर्प बैंक के पास होता है। ट्रेवलर चेक का इस्तेमाल करना आसान है और ये हर जगह स्वीकार भी किए जाते हैं। पर इस चेक की रकम के हिसाब से बैंक को एक प्रतिशत कमीशन देना पड़ता है। आप 68 लाख रुपए से खाता खुलवा सकते हैं। स्विस बैंक में अकाउंट स्विस बैंकों में जमा होने वाली भारतीयों की राशि में 2017 में 50 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी यह बताती है कि काले धन के कारोबारी सरकार से ज्यादा चतुर हैं। सरकार अगर डाल-डाल तो वे पात-पात हैं। वरना क्या वजह है कि 2016 में स्विस बैंकों में जमा होने वाला भारतीयों का पैसा 45 प्रतिशत गिरा था। लेकिन अगले ही वर्ष उसमें उछाल आ गया। धन में तीन वर्षों तक ह्रास का दौर रहा और भारतीय अर्थव्यवस्था और सरकार को एक प्रकार की खुशी का अनुभव होता था। सरकार भी यह दावा करने लगी थी कि उसके प्रयासों के अच्छे परिणाम आने लगे हैं। भ्रष्टाचार मिटाने, विदेशों में जमा काला धन देश में वापस लाने से लेकर हर खाते में 15 लाख रुपए जमा करने के वादे के साथ सत्ता में आई मोदी सरकार ने काले धन पर कार्रवाई के लिए कई कदम उठाने का दावा किया। सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका के तहत विशेष जांच दल (एसआईटी) गठित किया गया। विदेशी बैंकों ने कई खातेदारों के नाम भी सरकार को दिए। हालांकि वे नाम कभी उजागर नहीं किए गए। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने शुक्रवार को कहा कि 2014 में प्रधानमंत्री ने कहा था कि मैं स्विस बैंकों में जमा काला धन वापस लाऊंगा और हर भारतीय के खाते में 15 लाख रुपए डालूंगा। 2016 में उन्होंने कहाöनोटबंदी से भारत काले धन से मुक्त हो जाएगा। कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि 2018 में वह (प्रधानमंत्री) कहते हैंöस्विस बैंकों में भारतीय नागरिकों द्वारा जमा कराए जाने वाले धन में 50 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी हुई है और यह सफेद धन है। स्विस बैंकों में कोई काला धन नहीं है। इसी मुद्दे पर पार्टी प्रवक्ता और पूर्व केंद्रीय मंत्री आरपीएन सिंह ने संवाददाताओं से कहा कि प्रधानमंत्री को बताना चाहिए कि आखिर क्या वजह है कि इससे पहले वर्ष 2004 में स्विस बैंकों में भारतीयों की जमा रकम का नया रिकॉर्ड बना था। तब भी केंद्र में भाजपा की अगुवाई वाली राजग सरकार थी और आज भी केंद्र में वही राजग सरकार है और एक बार फिर से स्विस बैंक में भारतीयों ने भारी रकम जमा कराई है। उन्होंने कहा कि इस सरकार के रहते भगोड़े देश का 70 हजार करोड़ रुपए लेकर भाग गए। स्विस बैंकों में भारतीयों की जमा राशि में उछाल की इन खबरों के बीच वित्तमंत्री पीयूष गोयल ने आश्चर्य जताया कि ऐसे सारे धन को कैसे काला धन माना जा सकता है? उन्होंने यह भी कहा कि पूर्व वित्तमंत्री पी. चिदम्बरम के समय से शुरू हो गई उदारीकृत रेमिटेंस (धन बाहर भेजने की) योजना से संभवत भारतीयों की जमा राशि में इजाफा हुआ है। हालांकि सरकार ने कहा कि इसमें किसी तरह की गड़बड़ी पाए जाने पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। वित्तमंत्री गोयल ने कहा कि भारत को एक द्विपक्षीय संधि के तहत स्विट्जरलैंड की सरकार की तरफ से वहां के बैंकों में भारतीयों के खातों से जुड़ी जानकारियां अगले साल से मिलना शुरू हो जाएंगी। उधर दूसरे वित्तमंत्री अरुण जेटली ने शुक्रवार को चेतावनी दी कि स्विस बैंकों में अवैध रूप से धन जमा कराने वाले भारतीयों की पहचान छुपाना अब मुश्किल होगा और ऐसे लोगों पर काला धन रोधी कानून के तहत सख्त दंडात्मक कार्रवाई होगी। जनवरी से वहां भारतीयों के खातों के बारे में तत्काल स्विट्जरलैंड से सूचनाएं मिलने लगेंगी। जेटली ने कहा कि स्विट्जरलैंड हमेशा से जानकारियां सांझा करने में अनिच्छुक रहा है। आल्पस देशों ने अपने घरेलू कानूनों को संशोधित किया है, जिनमें सूचनाएं सार्वजनिक करने के नियम भी शामिल हैं। इस बीच 2016 में नोटबंदी जैसा सख्त और चौंकाने वाला कदम भी भारत सरकार ने उठाया। जिसके चमत्कारी प्रभाव के बारे में किए गए दावे यथार्थ की कसौटी पर खरे नहीं उतरे। रिजर्व बैंक अभी भी घरेलू काले धन के बारे में स्पष्ट रूप से कोई ब्यौरा जारी नहीं कर सका है। इस मौके पर स्विस बैंकों की ओर से जारी आंकड़े यह सोचने पर मजबूर करते हैं कि क्या नोटबंदी के दुप्रभाव से बचने के लिए अमीर भारतीयों की तरफ से उठाया गया यह कदम तो नहीं है, क्योंकि जब घरेलू स्तर पर काले धन को रखने और चलाने की गुंजाइश नहीं बचती तभी उसे बाहर ले जाया जाता है। इसके अलावा आर्म्स व अन्य डीलों में आने वाला कमीशन भी स्विस बैंक में जमा किया जाता है। हालांकि संतोष इस बात का भी है कि 2017 में 7000 करोड़ रुपए का स्विस बैंक में जमा धन 2006 के 23,000 करोड़ रुपए से काफी कम है। बेहतर यह है कि जब तक स्विट्जरलैंड से वांछित जानकारी नहीं मिलती तब तक सरकार यह देखे-समझे कि स्विस बैंक भारतीयों के पसंदीदा बैंक क्यों बने हुए हैं।

-अनिल नरेन्द्र

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