Wednesday, 4 July 2018

आईडीबीआई के घोटालों पर पर्दा डालने का प्रयास

जिस तरह से देश की सबसे बड़ी बीमा कंपनी एलआईसी ने आईडीबीआई बैंक की 50 प्रतिशत से ज्यादा भागीदारी को अपने कब्जे में लिया है उससे देश के बैंकिंग सैक्टर में खलबली मचनी स्वाभाविक ही है। ऐसा लगता है कि सरकार कर्ज में डूबे बैंकों को अब इसी तरह अपनी बड़ी कंपनियों में खपाने की योजना को अंतिम रूप देने में लग गई है। सरकार यह भी चाहती है कि देश के सरकारी बैंकों से अब तक जिन बड़ी कंपनियों ने भारी कर्ज ले रखे हैं और लौटाए नहीं हैं, ऐसे बैंकों को देश की कंपनियों में खपाने के काम को भी अंजाम दिया जा रहा है। जीवन बीमा निगम (एलआईसी) को बीमा नियामक एवं विकास प्राधिकरण (इरडा) ने कर्ज में डूबे आईडीबीआई बैंक में 51 प्रतिशत हिस्सेदारी लेने को मंजूरी दे दी है। अब इसके बाद एलआईसी का बैंकिंग सैक्टर में उतरने का रास्ता साफ हो गया है, जिसके बाद पहले से जमे-जमाए कई बैंकों को कड़ी टक्कर मिलने की उम्मीद है। सूत्रों ने बताया कि यह फैसला हैदराबाद में इरडा के निदेशक मंडल की बैठक के दौरान लिया गया। वर्तमान में आईडीबीआई में एलआईसी की हिस्सेदारी 11 प्रतिशत है। एक आंकड़े के मुताबिक हर साल एलआईसी करीब 20 लाख पॉलिसी जारी करती है। एलआईसी के पास 250 मिलियन लोगों के भविष्य की जिम्मेदारी है, जिन्होंने एलआईसी से करीब 300 मिलियन लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी ले रखी हैं। एलआईसी के पास सालाना 53 लाख करोड़ रुपए का प्रीमियम जमा होता है। एलआईसी अपने पास जमा पूंजी के ज]िरये आईडीबीआई बैंक में सरकार की हिस्सेदारी को खरीदेगी। आईडीबीआई बैंक में केंद्र सरकार की 85 प्रतिशत हिस्सेदारी है और वित्त वर्ष 2018 के दौरान केंद्र सरकार ने बैंक की 10,610 करोड़ रुपए की मदद भी की थी। कांग्रेस ने शनिवार को आरोप लगाया कि मोदी सरकार एलआईसी से करोड़ों लोगों की गाढ़ी कमाई का इस्तेमाल अपने कार्यकाल में हुए बैंक घोटालों की भरपायी के लिए करना चाहती है और इसलिए नियमों को ताक पर रखकर सार्वजनिक क्षेत्र के आईडीबीआई बैंक के शेयर खरीदने के लिए उसे विवश कर रही है। पार्टी ने कहा कि सरकार बैंक घोटालों पर पर्दा डालने के लिए हर प्रयास कर रही है और इसके लिए उसने 38 करोड़ लोगों की एलआईसी में जमा की गई गाढ़ी कमाई पर सेंध लगाने का रास्ता निकाला है। एलआईसी बहुत खराब स्थिति में चल रही आईडीबीआई बैंक के शेयर खरीदने पर मजबूर किया जा रहा है। मोदी सरकार की नीतियों के कारण देश की अर्थव्यवस्था पहले ही गहरे संकट में चल रही है। इस सरकार ने बिना सोचे-समझे आधा-अधूरा वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) लागू किया और बिना होमवर्प किए नोटबंदी की जिसका खामियाजा देश की जनता को भुगतना पड़ रहा है और अब एलआईसी को मजबूर किया जा रहा है।

-अनिल नरेन्द्र

No comments:

Post a comment