Wednesday, 24 October 2018

आतंकी फंडिंग से बन रही मस्जिदें और मदरसे

आतंकी फंडिंग से मस्जिदों और मदरसों के निर्माण व उसके माध्यम से कट्टरता फैलाने की साजिश का पर्दाफाश हुआ है। दरअसल हुआ यह कि पिछले महीने राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने राजधानी दिल्ली में लश्कर--तैयबा की आतंकी फंडिंग का पर्दाफाश करते हुए तीन लोगों को गिरफ्तार किया था। गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ के दौरान पता चला कि आतंकी फंडिंग का जाल सिर्प कश्मीर में आतंकियों को धन मुहैया कराने तक सीमित नहीं है। लश्कर मस्जिदों और मदरसों के माध्यम से देश के भीतर कट्टरता फैलाने की भी साजिश कर रहा है। आतंकी फंडिंग के लिए निजामुद्दीन से गिरफ्तार मोहम्मद सलमान हरियाणा के पलवल जिले के एक गांव में मस्जिद का इमाम भी है। पूछताछ में सलमान ने स्वीकार किया कि आतंकी फंडिंग के पैसे का इस्तेमाल उसने मस्जिद और मदरसा बनाने में भी किया था। इसके बाद एनआईए ने मस्जिद की तलाशी भी ली थी और कई दस्तावेज भी बरामद किए थे। एनआईए ने सलमान के साथ-साथ हवाला ऑपरेटर दरियागंज के मोहम्मद सलीम उर्प मामा और श्रीनगर के अब्दुल राशिद को भी गिरफ्तार किया है। सलमान, सलीम और राशिद को गिरफ्तार करने के बाद एनआईए ने कूचा घसीटाराम में हवाला ऑपरेटर राजाराम एंड कंपनी के ठिकानों पर छापा भ्ााr मारा था। छापे में एक करोड़, 56 लाख रुपए नकद, 47 हजार रुपए की नेपाली मुद्रा, 14 मोबाइल फोन और पांच पेन ड्राइव बरामद हुए थे। एनआईए के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि बरामद मोबाइल फोन, पेन ड्राइव और हार्ड डिस्क की जांच और गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ के बाद आतंकी फंडिंग से आए धन को मस्जिद और मदरसों में लगाने का पता चला। पलवल के एक गांव उटावड़ में बन रही मस्जिद खुलाफा--रशीदन में टेरर फंडिंग मामले को लेकर एनआईए के खुलासे से गांव के लोग हैरान है। उनका कहना है कि इसमें गलत पैसा लगा है, इस पर विश्वास करना बेहद मुश्किल है, लेकिन एनआईए की टीम कह रही है तो कुछ तो गड़बड़ होगी ही। मस्जिद निर्माण में लगे राजमिस्त्राr आस मोहम्मद कहते हैं कि यह मस्जिद 2010 से बन रही है, अगर इसमें आतंकी संगठनों का पैसा लगा है तो यह मस्जिद अधर में नहीं होती पहले ही बनकर तैयार हो जाती। इन सालों में मस्जिद में रुक-रुक कर काम चलता रहा है। पुलिस अधीक्षक वसीम अकरम का कहना है कि इस मामले की जांच एनआईए कर रही है। जब एनआईए की टीम यहां आती है तो वे सुरक्षा के लिए पुलिस मांगती है तो उनकी पूरी सुरक्षा की जाती है। मगर जांच के मामले में स्थानीय पुलिस का अभी तक इससे किसी प्रकार का संबंध नहीं है। लगता है कि पाक समर्थित यह नेटवर्प मदरसों में आधुनिक शिक्षा को किसी कीमत पर लागू नहीं होने देना चाहता है। इसलिए यह मौलाना का सहारा ले रहे हैं।

-अनिल नरेन्द्र

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