Thursday, 24 May 2018

...और अब चमगादड़ से फैलने वाला निपाह वायरस

आजकल हम अजीबो-गरीब वायरसों के बारे में सुन रहे हैं। मैंने तो कम से कम ऐसे वायरस के बारे में नहीं सुना। देश में पहली बार आए मलेशियाई वायरस निपाह ने केरल में नौ लोगों की जान ले ली है। केरल के कोझिकोड जिले में सिरदर्द व तेज बुखार के बाद एक ही परिवार के तीन लोगों की मौत हो गई। उनकी देखभाल करने वाली नर्स की भी सोमवार सुबह मौत हो गई। मलप्पुरम जिले में भी इन्हीं लक्षणों के साथ पांच लोगों के मरने की सूचना है। जानवरों से फैलने वाला यह वायरस चमगाद़ड़ के जरिये फैला है। फ्रूट बैट कहा जाने वाला चमगादड़ मुख्यत फल या फल के रस का सेवन करता है। निपाह वायरस जानवरों से आदमियों में फैलने वाला एक नया संक्रमण है। यह इंसानों और जानवरों को गंभीर रूप से बीमार कर देता है। कोझिकोड के जिस परिवार में इस वायरस से तीन लोगों की मौत हुई है और कुछ अन्य का इलाज चल रहा है, उनके घर के कुएं में यह फ्रूट बैट मिला है। स्वास्थ्य मंत्री केके शिलाजा ने कहा कि अब यह कुआं बंद कर दिया गया है। इस वायरस की सबसे पहले पहचान 1998 में मलेशिया में हुई। उस वक्त यह सूअरों में फैला था। यह संक्रमित चमगादड़ द्वारा खाए गए फल खाने से फैलता है। यह संक्रमण फ्रूट बैट प्रजाति के चमगादड़ से तेजी से फैलाता है। इसकी वजह यह है कि यह एकमात्र स्तनधारी है जो उड़ सकता है। यह पेड़ पर लगे फलों को खाकर उसे संक्रमित कर देता है। जब पेड़ से गिरे इन संक्रमित फलों को इंसान खा लेता है तो वह इस बीमारी की चपेट में आ जाता है। इस बीमारी के लक्षण कुछ ऐसे होते हैंöधुंधला दिखना, सांस में तकलीफ, एनसेफलाटिस जैसे अन्य लक्षण। सिर में लगातार दर्द रहना, चक्कर आना। बचने के उपायöपेड़ से गिरे फल न खाएं। जानवरों के निशान हों तो ऐसी सब्जियां न खरीदें। जहां चमगादड़ अधिक रहते हैं वहां खजूर खाने से परहेज करें। संक्रमित रोगी, जानवरों के पास न जाएं। फिलहाल निपाह वायरस से संक्रमण का कोई इलाज नहीं है। एक बार संक्रमण फैल जाने पर मरीज 24 से 48 घंटे तक कोमा में जा सकता है और मौत तक संभव है। इसलिए आप अपना ध्यान रखें और जहां चमगादड़ हों वहां के फ्रूट-सब्जी खाने से बचें।

-अनिल नरेन्द्र

No comments:

Post a comment