Friday, 11 May 2018

पर्यटक की हत्या ने पत्थरबाजों की कलई खोल दी

दक्षिणी कश्मीर के शोपियां जिले में स्कूली बस पर पथराव की घटना के चार दिन बाद सोमवार को पत्थरबाजों ने श्रीनगर-गुलमर्ग हाइवे पर एक वाहन को निशाना बनाया। इसमें चेन्नई के एक पर्यटक की मौत हो गई। इस हमले में एक स्थानीय लड़की भी घायल हो गई। पर्यटक की शिनाख्त चिरुमणि (22) के रूप में हुई है, जबकि घायल लड़की हंदवाड़ा की सबरीना है। इससे पहले गत बुधवार को 40 से 50 बच्चों से भरी स्कूली बस को शोपियां के जबूरा इलाके में घेर कर पथराव किया गया था। इन दो घटनाओं ने सूबे की सरकार की पत्थरबाजों को आम माफी देने की नीति पर सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं। राज्य में एक पर्यटक की मौत की यह पहली घटना है। इस घटना के बाद कश्मीर के पर्यटन पर बुरा असर पड़ने के अलावा आने वाले दिनों में शुरू होने वाली पवित्र अमरनाथ यात्रा पर भी ऐसे हमलों की आशंका के बादल मंडराने लगे हैं। इससे घाटी में अपने ही स्कूली बच्चों की बस पर पहली बार की गई पत्थरबाजी व पर्यटक की मौत से खुफिया तथा सुरक्षा एजेंसियों की भृकुटियां तन गई हैं। पत्थरबाजी करने वाले कोई बच्चे नहीं हैं। सबके सब होशो-हवास वाले बालिग हैं। जाहिर है कि यह दोनों कायराना हमले लक्ष्यविहीन नहीं थे। इनका मकसद खास था। सत्ता और समाज को संदेश देना था। पत्थरबाजों के आका चाहते हैं कि अगर आतंकवादियों को मुठभेड़ में मार गिराया जाता रहा तो पत्थरबाजी जारी रहेगी। यह क्या सीधे-सीधे आतंकवाद का समर्थन नहीं है? वह तो चाहते हैं कि कश्मीर की वादियों में आतंक रहे और आतंकवादी सलामत रहें। सुरक्षा एजेसिंयां या सेना उनको सलाम करती रही। अगर ऐसा नहीं हुआ तो वे कश्मीर के अशांत रहने का इजहार पूरी दुनिया में करेंगे। यह संदेश उस वक्त दिया जा रहा है जब जम्मू-कश्मीर की मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती इन पत्थरबाजों को `गुमराह मासूम' मानते हुए उन्हें एकमुश्त माफी दिए जाने और पुनर्वासित करने की वकालत करती रही हैं। मालूम हो कि सूबे की पीडीपी-भाजपा गठबंधन सरकार ने इस साल के शुरू में करीब 5500 पत्थरबाजों को आम माफी देते हुए उनके खिलाफ दर्ज मुकदमों को वापस लिया था। सूबे की महबूबा मुफ्ती सरकार ने यह जोखिमपूर्ण कदम घाटी में गुमराह युवकों को मुख्य धारा में जोड़ने के लिए केंद्रीय गृह मंत्रालय की रजामंदी के बाद उठाया था। तब सूबे की सरकार ने यह कहा था कि पत्थरबाजी करते हुए पहली बार पकड़े जाने वाले सभी पत्थरबाजों को आम माफी दी गई है। हालांकि उस वक्त भी गठबंधन सरकार के इस फैसले की चौतरफा आलोचना हुई थी। तब विपक्षी दलों के अलावा आलोचकों ने यह भी कहा था कि गठबंधन सरकार का यह कदम उचित नहीं है। इससे पत्थरबाजों को शह मिलेगी और पत्थरबाजी बढ़ेगी। शोपियां की यह घटनाएं इसे साबित ही करती हैं।

-अनिल नरेन्द्र

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