Saturday, 26 May 2018

राज्यसभा और लोकसभा में बदलता दलीय अंक-गणित

उपचुनावों के कारण दोनों लोकसभा और राज्यसभा में दलों की स्थिति बदलती रहती है। पहले बात करते हैं लोकसभा की। लोकसभा में दलीय अंक-गणित लगातार बदल रहा है। कर्नाटक के भाजपा नेता येदियुरप्पा और बी. श्रीरामुलु के अलावा जेडीएस के सीएस पुत्तराजु के इस्तीफा स्वीकार हो जाने के बाद भाजपा की मौजूदा संख्या 272 तक पहुंच गई है। दरअसल कैराना समेत चार लोकसभा सीटों पर चुनाव हो रहा है। इसके बाद कर्नाटक की तीन लोकसभा सीटों को मिलाकर कुल सात सीटें खाली रहेंगी। इस लिहाज से सदन के मौजूदा संख्याबल में भाजपा की स्थिति सहज बनी रहेगी। लेकिन विपक्ष नैतिक रूप से दबाव के  लिए अपने बड़े संख्याबल को आधार बनाने का प्रयास जरूर करेगा। कई उपचुनावों के हार के बावजूद भाजपा की अगुवाई में एनडीए की ताकत]िवरोधी दलों की तुलना में काफी ज्यादा है। उसके पास 306 के आसपास सीटें हैं। जबकि कांग्रेस के साथ खड़े दलों के अलावा तटस्थ मानी जा रही अन्नाद्रमुक, टीआरएस, बीजद आदि राजनीतिक पार्टियों को भी मिला लें तो भी  लोकसभा में इनकी संख्या 230 के आसपास है। प्रमुख विपक्षी दल कांग्रेस ने अपनी मूल संख्या 44 में चार सीटों का इजाफा किया है। सदन में कांग्रेस की मौजूदा संख्या 48 है। कांग्रेस ने भाजपा से दो सीटें राजस्थान और एक मध्यप्रदेश में छीनी है। समाजवादी पार्टी ने दो सीटें उत्तर प्रदेश में गोरखपुर और फूलपुर की अत्यंत महत्वपूर्ण सीटें भाजपा से छीनी हैं। यह दोनों सीटें मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री के त्यागपत्र से खाली हुई थीं। कांग्रेस के बाद अन्नाद्रमुक की संख्या ही उसके पास है, जिसकी 37 सीटें हैं। तृणमूल कांग्रेस 34 सीटों के साथ चौथा सबसे बड़ा दल है। जबकि बीजद की संख्या 20 और शिवसेना की संख्या 18 सीटें हैं। तेलुगूदेशम के पास 16 सीटें और टीआरएस के पास कुल 11 लोकसभा सीटें हैं। 16वें लोकसभा चुनाव के बाद भाजपा ने 282 सीटें हासिल की थीं। अब उसकी संख्या 272 है। राज्यसभा की 58 सीटों के लिए हाल ही में हुए द्विवार्षिक चुनावों के बाद भाजपा के खाते में 11 सीटों का इजाफा हुआ है। भाजपा की सीटों में वृद्धि हुई है जबकि कांग्रेस ने अपनी चार सीटें खो दी हैं। आंकड़ों की गणना यह दर्शाती है कि 245 सदस्यीय राज्यसभा में अब भाजपा की सीटों की संख्या मौजूदा 58 से बढ़कर 69 हो जाएगी और कांग्रेस की सीटें अब 54 से गिरकर 50 रह जाएंगी। हालांकि अब भी भाजपा गठबंधन राजग राज्यसभा में बहुमत से बहुत दूर है। पार्टी को अभी हाल में एक झटका लगा है जब चार साल से उसकी सहयोगी रही तेलुगूदेशम पार्टी ने उससे नाता तोड़ लिया। सदन में इस समय तेदेपा के छह सदस्य हैं। पर्याप्त संख्याबल न होने के कारण मोदी सरकार द्वारा लाए गए विधेयक लोकसभा में पारित होने के बावजूद विपक्षी दलों के एकजुट हो जाने के कारण अटक जाते हैं।

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