Thursday, 24 January 2019

123 सांसदों और 22 विपक्षी दलों की महारैली...(1)

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी आम चुनावों से पहले विपक्षी एकता दिखाने में कामयाब रहीं। शनिवार को कोलकाता में भारी जनसैलाब के बीच हुई रैली में 22 विपक्षी दलों के नेता जुटे। उनके अलावा शत्रुघ्न सिन्हा, यशवंत सिन्हा, अरुण शौरी और हार्दिक पटेल जैसे नेता भी शामिल हुए। सभी ने मिलकर नारा दिया कि केंद्र की भाजपा सरकार को हटाना है। सभी ने केंद्र की मोदी सरकार को उखाड़ फेंकने की हुंकार भरी। आयोजकों के रूप में रैली की अगुवाई कर रहीं ममता बनर्जी ने कहा कि मोदी सरकार की एक्सपायरी डेट खत्म हो गई है। उन्होंने बदल दो, बदल दो, दिल्ली में सरकार बदल दो का नया नारा भी दिया। पहली बार नरेंद्र मोदी सरकार के खिलाफ उत्तर से दक्षिण तक के विपक्षी दल एकजुट हुए और उन्होंने असहिष्णुता से लेकर नोटबंदी, जीएसटी, किसानों का असंतोष, बेरोजगारी और राफेल जैसे मुद्दों पर सरकार की नीतियों की जमकर आलोचना की। लोकतंत्र में इस तरह की रैलियां अस्वाभाविक नहीं हैं, इससे पहले भी देश ऐसी रैलियां देख चुका है। पर इस रैली को हल्के से भी नहीं लिया जा सकता। लोकसभा चुनाव से करीब तीन महीने पहले 22 विपक्षी दलों का एक साथ एक मंच पर आना भाजपा के लिए खतरे की घंटी बजाता है। 22 विपक्षी दलों के कुल 123 सांसदों ने एकमत से ऐलान किया कि अगर मोदी सरकार को हटाना है तो सारे मतभेद दूर करके एकजुटता दिखानी होगी। लिहाजा इस जमावड़े को खारिज करना सही नहीं होगा। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भी कहा कि एकजुट विपक्ष आगामी आम चुनाव में जीत हासिल तभी हासिल करेगा जब सभी मिलकर काम करेंगे। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री कौन होगा, यह हम चुनाव के बाद तय करेंगे। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार की एक्सपायरी डेट खत्म हो गई है। मुख्यमंत्री ने इस बात का जिक्र किया कि देश में मौजूदा हालात सुपर इमरजेंसी के हैं और उन्होंने नारा दिया कि बदल दो, बदल दो, दिल्ली में सरकार बदल दो। उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र (48) के बाद पश्चिम बंगाल में 42 लोकसभा सीटें हैं और इस महारैली ने यह साबित कर दिया कि राज्य में सिर्प ममता का ही बोलबाला है। कहते हैं कि दिल्ली का रास्ता उत्तर प्रदेश से निकलता है। 80 सीटों वाला उत्तर प्रदेश देश की राजनीतिक बदलने की क्षमता रखता है और इस रैली में समाजवादी पार्टी के सुप्रीमो अखिलेश यादव जमकर गरजे। अखिलेश ने केंद्र की मोदी सरकार पर जमकर प्रहार किए। उन्होंने कहा कि जो बात पश्चिम बंगाल से चलेगी वो पूरे देश में दिखाई देगी। लोग सोचते थे कि सपा और बसपा का गठबंधन नहीं होगा, लेकिन गठबंधन हो गया। गाहे-बगाहे अकसर भाजपा खेमा के नेता कहते फिरते हैं कि विपक्ष के पास दूल्हे यानि प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार बहुत हैं तो जनता जिसे चुनेगी वो ही पीएम होगा। उन्होंने कहा कि गठबंधन का तरीका भाजपा से ही सीखा है। चुनाव को सिर पर आता देख भाजपा ने सीबीआई और ईडी से गठबंधन कर लिया तो हम भी जनता से गठबंधन कर रहे हैं। उत्तर प्रदेश में सपा और बसपा के गठबंधन के बाद से ही भाजपा भयभीत है। भाजपा ने समाज में जहर घोलने और बंटवारा कराने का काम किया है। बहुजन समाज पार्टी के वरिष्ठ नेता व राष्ट्रीय महासचिव सतीश चन्द्र मिश्रा ने कहा कि केंद्र में भाजपा सरकार ने किसान, मजदूर और दलितों को केवल परेशान किया है। नोटबंदी व जीएसटी जैसे तुगलकी फरमान की वजह से सबसे ज्यादा गरीबों को नुकसान हुआ है। किसी का रोजगार छिन गया तो किसी का उद्योग बंद हो गया। करोड़ों लोगों को इनके कामों की वजह से बेरोजगार होना पड़ा है। केंद्र की सरकार ने कई कारखाने बंद करवा दिए, इसलिए ऐसी सरकार को उखाड़ फेंकना जरूरी है। इसके लिए विपक्ष को एक होना है और सपा-बसपा ने गठबंधन कर इसकी शुरुआत कर दी है। कांग्रेस के अध्यक्ष राहुल गांधी ने विपक्ष की इस रैली के संबंध में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बचाओ-बचाओ टिप्पणी को लेकर रविवार को मोदी पर निशाना साधते हुए कहा कि यह मदद की गुहार उन लोगों की है जो आपके अत्याचार और अक्षमता से मुक्त होना चाहते हैं। राहुल ने कहा कि आने वाले 100 दिनों में लोगों को मोदी सरकार से मुक्ति मिल जाएगी। प्रधानमंत्री ने एक दिन पहले ही कोलकाता में रैली पर तंज कसते हुए कहा था कि पश्चिम बंगाल में भाजपा का सिर्प एक विधायक है लेकिन वे हमसे बहुत डरे हुए हैं, क्योंकि हम सच्चाई के मार्ग पर चलते हैं। इसलिए उन्होंने पूरे देश से पार्टियों को एकत्रित किया और बचाओ, बचाओ, बचाओ चिल्ला रहे हैं। राहुल ने कहा कि महामहिम मदद के लिए गुहार लाखों बेरोजगार युवाओं, संकटग्रस्त किसानों, वंचित, दलितों, आदिवासियों और अल्पसंख्यकों को बरी किया जा रहा है, भाजपा को यह नहीं भूलना चाहिए कि हाल के विधानसभा चुनाव के बाद हिन्दी बेल्ट की तीन राज्यों में उसे कांग्रेस के हाथों करारी हार मिली है। मध्यप्रदेश की 29 लोकसभा सीटों को अगर राजस्थान की 25 सीटें और छत्तीसगढ़ की 11 सीटें जहां कांग्रेस का राज है का योग करते हैं तो बन जाता है 65 सीटें। इनको अगर उत्तर प्रदेश (80), बिहार (40), पश्चिम बंगाल (42) को ही जोड़ा जाए तो यह टोटल बन जाता है 227 लोकसभा सीटें। इन राज्यों के जो प्रतिनिधि कोलकाता में आए थे वह सब अपने-अपने क्षेत्र में प्रभाव रखते हैं और सभी राज्यों में भाजपा गठबंधन को हराने की क्षमता रखते हैं। बिहार भी 2019 के लोकसभा चुनाव में खासा महत्व रखते हैं। कोलकाता की रैली में बिहार का प्रतिनिधित्व कर रहे नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने रैली में क्या कहा यह कल के  लेख में पढ़िए। (क्रमश)

-अनिल नरेन्द्र

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