Saturday, 6 June 2015

मिलावट करने वाला समाज के लिए खतरा है

दुनिया में ऐसे बहुत कम मुल्क होंगे जहां खाने-पीने की चीजों में मिलावट होती है। दुख से कहना पड़ता है कि हमारा देश उनमें से है जहां खाने-पीने में मिलावट की जाती है। मिलावट करने वाले समाज के लिए खतरा हैं और यह मसला गंभीर चिन्ता का विषय है। पटियाला हाउस में जिला अदालत के एसीएमएम गौरव राव ने मिलावटखोरी के मामले में तीन लोगों को ढाई वर्ष कैद की सजा सुनाई है। अदालत ने सजा सुनाने के दौरान कहा कि खाद्य अपमिश्रण निवारण अधिनियम को इस उद्देश्य से लागू किया गया कि समाज में मिलावटखोरी को खत्म किया जा सके और लोगों को शुद्ध खाद्य पदार्थ मुहैया कराया जा सके। इस कानून का उद्देश्य प्रतिष्ठित कारोबार की आड़ में निर्दोष ग्राहकों के स्वास्थ्य को खतरे में डालने वालों से बचाया जा सके। अदालत ने कहा कि दोषियों का अपराध गंभीर प्रवृत्ति का है। इसे देखते हुए अदालत ने आरोपियों को 30 महीने कैद की सजा  और सभी पर 10-10 हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया। हमें खुशी है कि दिल्ली सरकार इन मिलावटखोरों के खिलाफ फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड एक्ट में संशोधन करने जा रही है। संशोधन प्रस्ताव विधानसभा की आगामी बैठकों में पेश किया जाएगा। मिलावट से संबंधित अपराधों पर अतिरिक्त जिलाधिकारी व मेट्रोपोलिटिन मजिस्ट्रेट स्तर का अधिकारी न्यायिक अफसर होगा। आम जनता को शुद्ध पदार्थ उपलब्ध कराने के लिए मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने मिलावट, भ्रमित करने वाले विज्ञापनों, खाद्य पदार्थों के उत्पादन में सफाई का ख्याल न रखने तथा असुरक्षित खाद्य पदार्थों आदि के मामले में सजा व जुर्माने को सख्त बनाने का निर्णय लिया है। यह निर्णय लिया गया है कि आगामी विधानसभा सत्र में फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड एक्ट 2005 में संशोधन का प्रस्ताव पेश किया जाएगा। इस संशोधन के तहत जहां इस कानून की विभिन्न धाराओं के तहत जुर्माना बढ़ाया जाएगा, वहीं मिलावट के कारण स्वास्थ्य के नुकसान पर आजीवन कारावास की सजा का प्रावधान किया जाएगा। एक्ट की धारा 53 के तहत विज्ञापन के जरिए भ्रमित करने पर मौजूदा 10 लाख रुपए जुर्माने की जगह अब विज्ञापन की लागत से तीन गुना जुर्माने का प्रावधान किया जाएगा। खाद्य पदार्थों के उत्पादन की प्रक्रिया में साफ-सफाई का ख्याल न रखने पर कानून की धारा 56 के तहत अभी तक एक लाख रुपए के जुर्माने का प्रावधान है, लेकिन अब इसे बढ़ाकर पांच लाख रुपए तक किया जाएगा। हमें प्रसन्नता है कि दिल्ली सरकार ने इस मामले को गंभीरता से लिया है और इसका उल्लंघन करने वालों पर सख्ती होगी, कानून को और मजबूत किया जाएगा। दिल्ली सरकार के प्रस्ताव के मुताबिक मिलावटखोरी के संगीन मामलों में उम्रकैद की सजा का प्रावधान किया जाएगा। वर्तमान खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम में संशोधन किया जाए। इस मसौदे के तहत दोषी पाए जाने पर कम से कम पांच वर्ष और अधिकतम उम्रकैद की सजा का प्रावधान होगा पर एक बात का ध्यान रखा जाए कि जबरन किसी निर्दोष व्यक्ति को न फंसाया जाए। मार्केटों में बिकने वाले पदार्थों पर भी यह कानून लागू होना चाहिए।

-अनिल नरेन्द्र

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