Friday, 9 November 2018

आम चुनाव से पहले भाजपा को लगा तगड़ा झटका

 कर्नाटक में तीन लोकसभा और दो विधानसभा उपचुनाव में कांग्रेस का बेहतर प्रदर्शन आम चुनाव से पहले एक बड़ी सफलता है। यह जीत इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इसमें विपक्षी एकता को एक टॉनिक मिला है। चुनाव से पहले कांग्रेस और जद(एस) के बीच मतभेदों की बात उठ रही थी। इसमें क्षेत्रीय पार्टियों को भी एक तरह से बल मिला है। विधानसभा चुनाव में बेशक कांग्रेस और जेडीएस अलग-अलग लड़ी थीं लेकिन चुनाव के बाद दोनों को गठबंधन करने का बेहतर नतीजा मिला इससे अब दोनों ने मिलकर लोकसभा चुनाव लड़ने का फैसला किया है। उपचुनावों में जीत से उत्साहित कर्नाटक के मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी और कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष दिनेश गुंडू राव ने कहा कि वह भाजपा के खिलाफ 2019 लोकसभा चुनाव साथ मिलकर लड़ेंगे। दोनों नेताओं ने चुनावी सफलता का श्रेय कांग्रेस-जद(एस) की नीतियों को दिया। इस शानदार सफलता से उत्साहित कर्नाटक के मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी ने कहा कि कांग्रेस को 2019 चुनाव में भाजपा के खिलाफ प्रस्तावित महागठबंधन की अगुवाई करनी चाहिए, क्योंकि यह विपक्ष की अग्रणी पार्टी होगी और सबसे ज्यादा सीटों पर जीत दर्ज करेगी। उन्होंने यह भी कहा कि सभी क्षेत्रीय पार्टियों को अगले आम चुनावों में कांग्रेस को समर्थन देने के लिए एक साथ आना चाहिए। बता दें कि कर्नाटक में लोकसभा की तीन और दो विधानसभा सीटों पर उपचुनाव हुए थे। कांग्रेस ने लोकसभा की तीन सीटों में से दो और विधानसभा की दोनों सीटों पर शानदार जीत दर्ज की। वहीं भाजपा शिमोगा सीट बचाने में कामयाब रही। यह विपक्ष के नेता बीएस येदियुरप्पा का घर मानी जाती है। उनके बेटे बीवाई राघवेंद्र ने कड़े मुकाबले में जद(एस) के मधु बंगरप्पा पर 52,148 मतों से जीत हासिल की। यह उपचुनाव 2019 में होने वाले लोकसभा चुनावों से पहले भाजपा के लिए झटका माना जाएगा। जो बेल्लारी लोकसभा सीट भाजपा की मजबूत सीट मानी जा रही थी उसमें भी पार्टी को पराजय का मुंह देखना पड़ा। इस सीट को खनन उद्योग के विवादित रेड्डी बंधुओं का मजबूत गढ़ माना जाता था। इस सीट पर कांग्रेस प्रत्याशी वीएस उगरप्पा 2,43,161 के भारी मतों से विजयी रहे। उन्होंने भाजपा की जे. शांता को हराया जो रेड्डी बंधुओं के मुख्य सहयोगी तथा इस सीट से पूर्व सांसद वी. श्रीरामुलु की बहन हैं। बता दें कि 2014 के लोकसभा चुनाव के बाद से अभी तक 30 लोकसभा सीटों पर उपचुनाव हुए हैं। भाजपा लगातार अपनी जीती हुई सीटें एक-एक करके हारती जा रही है। नरेंद्र मोदी की अगुवाई में 282 सीटों पर कमल खिलाने वाली भाजपा 1984 के बाद के 30 साल में अपने दम-खम पर बहुमत हासिल करने वाली पहली पार्टी बनी थी। 2014 के बाद से 30 लोकसभा सीटों पर उपचुनाव हुए हैं जिनमें से 16 सीटें भाजपा के कब्जे में थीं लेकिन अब महज छह सीटें ही भाजपा बरकरार रख सकी है यानि पार्टी ने 10 सीटें गंवा दी हैं। यही वजह है कि लोकसभा में भाजपा की सीटों का आंकड़ा 282 से घटकर 272 रह गया है।

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