Thursday, 15 November 2018

गनतंत्र पर भारी जनतंत्र

छत्तीसगढ़ में जबरदस्त सुरक्षा प्रबंधों के बीच पहले चरण में नक्सलवाद से प्रभावित 18 विधानसभा सीटों पर मतदान शांतिपूर्ण सम्पन्न हो गया। नक्सली धमकियों की परवाह न करते हुए मतदाताओं ने उत्साह के साथ मतदान किया और लोकतंत्र में एक बार फिर अपनी आस्था जताई है। नक्सलियों के गनतंत्र के मुकाबले जनतंत्र हावी रहा। पहले चरण में जिन 18 विधानसभा सीटों पर मतदान हुआ, उनमें नक्सल प्रभावित आठ जिले थे। हर बार की तरह इस बार भी नक्सलियों ने चुनाव बहिष्कार की अपील करते हुए न केवल पर्चे लगाए और धमकियां दीं बल्कि लोगों में यह भय भी था कि सीपीआई, माओवादी में नेतृत्व परिवर्तन के कारण हिंसा बढ़ सकती है। इसके बावजूद दूरदराज के इलाकों तक से निकल कर लोगों ने जिस तरह वोट डाले, वह लोकतंत्र के इस पर्व के प्रति उनकी आस्था का सबूत है। सुकमा जिले के कोटा स्थित बांदा में एक मतदान केंद्र के पास आईडी विस्फोटक तक लगाई गई पर इससे भी मतदाता डरे नहीं और मतदान केंद्र से दूर एक पेड़ के नीचे बनाए गए अस्थायी मतदान बूथ के बाहर लंबी कतारों में खड़े अपनी बारी की प्रतीक्षा करते रहे। राज्य के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने बताया कि दंतेवाड़ा जिले में नक्सलियों ने बारूदी सुरंग में विस्फोट कर सुरक्षा बलों को नुकसान पहुंचाने की भी कोशिश की। प्रथम चरण में मतदाताओं के उत्साह और हौंसले के आगे नक्सल खौफ को मैदान छोड़कर भागना पड़ा। लोकतंत्र की विजयश्री में बूथों पर जमकर वोट बरसे। इस बार यहां 75 प्रतिशत से अधिक मतदान हुआ है। शेष 72 सीटों पर 20 नवम्बर को मतदान होगा। नक्सली खतरे को देखते हुए भारी सुरक्षा व्यवस्था और तैयारी भी की गई थी, जिनमें सुरक्षा बलों के एक लाख जवानों की तैनाती, नक्सल प्रभावित इलाकों में सुबह सात बजे से तीन बजे शाम तक मतदान और संवेदनशील इलाकों में ड्रोन से निगरानी की व्यवस्था भी इस बार की गई। इसके बावजूद ऐन वोटिंग के दिन बीजापुर के पामेड़ में सुरक्षा बलों के साथ मुठभेड़ में पांच नक्सली मारे गए, जबकि कोबरा बटालियन के कुछ जवान घायल हुए। नक्सली हिंसा की चुनौती जितनी विकट है, उसके समाधान के प्रति राजनीतिक दलों में वैसी दूरदर्शिता और तैयारी नहीं है। छत्तीसगढ़ में पिछले 15 साल से भाजपा की सरकार है। अगर उसने समझदारी से नक्सल समस्या के समाधान की दिशा में कदम उठाया होता तो शायद ऐसी स्थिति नहीं होती जैसी कि दिखाई देती है। जहां तक कांग्रेस की बात है तो प्रथम चरण की जिन 18 सीटों पर वोटिंग हुई, उनमें से 12 सीटें उसके पास हैं और उसने वादा किया है कि सत्ता में आने पर वह विकास और मानवीय स्पर्श देगी, लेकिन यूपीए के दौर में यही छत्तीसगढ़ ऑपरेशन ग्रीन हंट का साक्षी रही। नक्सलियों की धमकियों के बावजूद चुनाव दर चुनाव मतदान के लिए उमड़ी भीड़ यह दर्शाती है कि वहां की जनता हिंसा और अस्थिरता के बजाय बेहतर जीवन और शांति चाहती है। हम इस साल चुनाव के लिए चुनाव आयोग और सुरक्षा बलों की सराहना करते हैं।

-अनिल नरेन्द्र

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