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Thursday, 6 October 2016

समाजवादी पार्टी में टिकटों को लेकर मचा घमासान

समाजवादी पार्टी की अंतर्कलह घटने की बजाय और बढ़ती नजर आ रही है। पार्टी में शीर्ष स्तर पर चल रहा घमासान सोमवार को और तेज हो गया। होना भी था क्योंकि मामला 2017 विधानसभा चुनाव में टिकटों के बंटवारे का था। टिकट वितरण के अधिकार की मांग कर रहे सीएम अखिलेश यादव से सलाह-मशविरा किए बिना चाचा शिवपाल ने उम्मीदवारों की सूची जारी कर दी। इतना ही नहीं अखिलेश के नजदीकियों पर गाज भी गिरा दी। सपा पदेश अध्यक्ष शिवपाल सिंह यादव ने सोमवार सुबह साढ़े दस बजे ही 26 पत्याशियों की सूची जारी कर दी। इनमें नौ नए उम्मीदवार हैं जबकि 17 के टिकट बदले गए हैं। इनमें सीएम के कुछ नजदीकी नेताओं के भी टिकट कटे हैं। अभी युवा नेताओं की बहाली की जद्दोजहद चल ही रही थी कि सीएम  की सलाह लिए बिना पत्याशियों की सूची आ गई। पार्टी में घमासान का अंदाज इसी से लगाया जा सकता है कि अधिकतर नेताओं के बीच मुलायम परिवार में शीर्ष स्तर पर खासतौर से अखिलेश के अपने पिता और चाचा से तकरीबन बोलचाल बंद हो गई है। अखिलेश यादव ने कहा है कि पार्टी पत्याशियों के टिकट बदले जाने को लेकर उन्हें कोई जानकारी नहीं है। वैसे भी राजनीति में कब क्या हो जाए, किसी को मालूम नहीं है। अखिलेश ने कहा कि जिसके पास तुरुप का इक्का होगा, वही जीतेगा। समाजवादी पार्टी के लिए जिस तरह 2017 का चुनाव अहम है, उसी तरह अखिलेश यादव और शिवपाल के लिए पत्याशियों के चयन में उनकी भूमिका अहम है। शायद 2017 के समीकरणों को देखते हुए इसकी कोशिशें की जा रही हैं। किसके साथ कितने विधायक हैं। पार्टी में वजन का यही पैमाना होता है। अखिलेश अगर फिर मुख्यमंत्री बनना चाहते हों तो यह तभी संभव होगा जब उनकी सरकार और पार्टी की छवि विकास करने वाली होगी। अखिलेश अगर अपने आदमियों को टिकट नहीं दिला सके तो मुख्यमंत्री कैसे बनेंगे? अखिलेश यह समझते हैं और इस मामले में पीछे नहीं रहना चाहते। वह एक कार्यकम में सार्वजनिक तौर पर कह चुके हैं कि इम्तिहान तो मेरा होना है। इसलिए टिकटों के वितरण का अधिकार भी मेरा होना चाहिए। यही बात वह पार्टी मुखिया व अपने पिता मुलायम सिंह को भी बता चुके हैं। चूंकि सपा में पदेश अध्यक्ष ही राज्य संसदीय बोर्ड का अध्यक्ष होता है, इसलिए सपा में घमासान को थामने के लिए अखिलेश को संसदीय बोर्ड का अध्यक्ष बनाने की मांग उठी थी। इसके लिए संविधान में संशोधन जरूरी है लेकिन पार्टी में इसके लिए पकिया शुरू नहीं हो सकी। सपा एक महत्वपूर्ण चरण में पवेश कर रही है। टिकटों के बंटवारे में सारा दारोमदार निर्भर करता है। फिलहाल शिवपाल का पलड़ा भारी है।

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