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Saturday, 25 February 2017

जेल में बंद हैं पर फिर भी दांव ठोक रहे हैं चुनाव में

यूपी की राजनीति में हमेशा जेलों की अहम भूमिका रही है। विधानसभा चुनाव 2017 में भी यूपी जेलों के कई बंदी चुनावी दंगल में अपने दांव आजमा रहे हैं। कई बंदी जहां जेलों में रहकर खुद ताल ठोक रहे हैं तो कइयों के रिश्तेदार चुनाव में अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। यूपी के चुनावों में जेलों से चुनाव लड़ने वालों का इतिहास लंबा है। माफिया मुख्तार अंसारी अपने सभी चुनाव जेल में रहकर लड़े हैं। इस बार भी वह जेल में हैं। उन्हें 17 फरवरी से चार मार्च तक की पैरोल मिली थी लेकिन चुनाव आयोग की अर्जी पर तीन दिन की रोक लगा दी गई। वह हर बार चुनावों के दौरान जेल से चिट्ठी भेजकर अपने लिए वोट मांगते हैं। इस बार वह अपने साथी भाई सिगबतुल्ला और बड़े बेटे अब्बास अंसारी के लिए भी वोट मांग रहे हैं। मधुमिता कांड से पूरे देश में चर्चा में आए बाहुबली अमरमणि त्रिपाठी और उनकी पत्नी मधुमणि त्रिपाठी गोरखपुर जेल में बंद हैं। उनके बेटे अमनमणि को भी चुनावों की घोषणा से पहले सीबीआई ने उसकी पत्नी सारा सिंह की हत्या के आरोप में गिरफ्तार किया है। अमनमणि को पहले सपा ने टिकट दी और फिर काट दी। अब वह पिता की विरासत महाराजगंज की नौतनवा सीट से चुनाव लड़ रहे हैं। अमनमणि की बहन तनुश्री भाई के जेल में होने की दुहाई देकर वोट मांग रही हैं। उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल में कई ऐसी सीटें हैं जहां जेल से ही वोटों की फसल उगाने की कोशिश चल रही है। बाहुबली उम्मीदवारों को चुनावी समीकरण की बजाय अपने लोगों की ताकत पर ज्यादा भरोसा है। चंदौली की सैयदराजा सीट से बसपा उम्मीदवार श्याम नारायण उर्फ विनीत सिंह पर वाराणसी, भदोही के साथ ही झारखंड और बिहार में हत्या, हत्या का प्रयास, रंगदारी, अपहरण जैसे दो दर्जन से ज्यादा संगीन मामले हैं। सैयदराजा सीट से भाजपा के सुशील सिंह को वाराणसी, भदोही, चंदौली और दिल्ली में हत्या सहित आधा दर्जन मामलों में आरोपी बताया जाता है। इंजीनियर हत्याकांड में बाराबंकी जेल में बंद पूर्व बसपा विधायक शेखर तिवारी का दिवियापुर सीट पर प्रभाव देखते हुए जेल में उनकी निगरानी की जा रही है। इसके अलावा आगरा जेल में बंद अमित गर्ग फिरोजाबाद की सदर सीट से चुनाव लड़ रहे हैं। लखनऊ जेल में बंद भगवती सिंह का भतीजा मनीश सिंह रायबरेली के हरचंदपुर से चुनाव लड़ रहे हैं। ऐसे दर्जनों केस हैं जहां या तो बाहुबली जेलों से चुनाव लड़ रहे हैं या फिर उनके करीबी रिश्तेदार व खासमखास चुनाव मैदान में हैं। एडीजे जेल जीएल मीणा का कहना है कि जेल प्रशासन ने उन सभी बंदियों की सूची बनाकर रखी है जो या खुद चुनाव लड़ रहे हैं या उनके रिश्तेदार मैदान में हैं। उन पर नजर रखी जा रही है।

-अनिल नरेन्द्र

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