Sunday, 12 August 2018

भीख मांगना अब अपराध नहीं

भिक्षावृत्ति अब अपराध नहीं होगी। यह फैसला दिल्ली हाई कोर्ट ने गत दिनों दिया है। दिल्ली हाई कोर्ट की कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश गीता मित्तल और न्यायमूर्ति सी. हरिशंकर की पीठ ने भिक्षावृत्ति को दंडनीय अपराध की श्रेणी में रखने वाले कानून को असंवैधानिक बताते हुए इसे रद्द कर दिया। पीठ ने कहा कि भीख मांगने को अपराध बनाने वाले बंबई भीख रोकथाम कानून के प्रावधान संवैधानिक जांच में टिक नहीं सकते। पीठ ने 23 पेज के फैसले में कहा कि इस फैसले का अपरिहार्य परिणाम यह होगा कि भीख मांगने का अपराध कथित रूप से करने वालों के खिलाफ कानून के तहत मुकदमा खारिज करने योग्य होगा। अदालत ने कहा कि इस मामले में सामाजिक और आर्थिक पहलू पर अनुभव पर आधारित विचार करने के बाद दिल्ली सरकार भीख के लिए मजबूर करने वाले गिरोहों पर काबू के लिए वैकल्पिक कानून लाने को स्वतंत्र है। हाई कोर्ट में सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने कहा था कि बंबई भिक्षावृत्ति रोकथाम अधिनियम-1959 में काफी संतुलन है। इस कानून के तहत भीख मांगना अपराध की श्रेणी में है। दिल्ली सरकार और केंद्र सरकार दोनों ने अक्तूबर 2016 को हाई कोर्ट को बताया था कि सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय ने भिक्षावृत्ति को अपराध की श्रेणी से बाहर करने और भिखारियों और बेघर लोगों के पुनर्वास के लिए विधेयक का मसौदा तैयार किया है। हालांकि बाद में सरकार ने इस कानून में संशोधन करने से इंकार कर दिया था। एक समस्या यह भी है कि राजधानी में ठक-ठक गिरोह के बदमाश भिखारी के वेश में सड़कों पर अपराध को अंजाम देते हैं। इनका प्रमुख अपराध लोगों की कार से बैग, लैपटॉप आदि सामान चुराना है। कई बार नशैड़ी भी भिखारी के वेश में वारदात को अंजाम देते हैं। कई बार पकड़े भी गए हैं। राजधानी दिल्ली में ही 75 हजार से अधिक भिखारी हैं। इनमें से 30 प्रतिशत 18 साल से कम उम्र के हैं। 40 प्रतिशत हैं राजधानी में महिला भिखारी। एक प्रतिशत नशा करने वाले भिखारी हैं। हाई कोर्ट ने मामले की सुनवाई के दौरान यह भी कहा कि अगर कोई सुनियोजित ढंग से भिखारियों का गैंग या रैकेट चलाता है तो उस पर कार्रवाई की जानी चाहिए। आपको बता दें कि बॉम्बे प्रिवेंशन ऑफ बेगिंग एक्ट के अनुसार अगर कोई व्यक्ति पहली बार भीख मांगते हुए पकड़ा जाता है तो उसे तीन साल तक की सजा हो सकती है। इसके अलावा इस कानून के अंतर्गत 10 साल तक हिरासत में रखने का भी प्रावधान है। आवश्यकता इस बात की है कि दिल्ली सरकार को समाज कल्याण विभाग की मदद से भिखारियों को लेकर कोई ठोस स्थायी विस्तृत कार्ययोजना को तैयार करना होगा। इनका पुनर्वास करना होगा।

-अनिल नरेन्द्र

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