Friday, 24 August 2018

इमरान खान के सामने अनेक चुनौतियां

इमरान खान द्वारा प्रधानमंत्री पद की शपथ लेने के साथ दुनियाभर की नजरें उनकी ओर टिक गई हैं। सभी यह देखने के लिए उत्सुक हैं कि भूतपूर्व क्रिकेटर राजनीति की पिच पर किस प्रकार की अपनी व्यूह रचना करते हैं। नए पाकिस्तान की नई सुबह जब इमरान खान इस देश के नए प्रधानमंत्री की जिम्मेदारी उठा रहे हैं, पाकिस्तान की जनता भी दम साधे देख रही है आने वाले दिनों की तरफ। नए पाकिस्तान के समर्थकों में तो रोमांच है ही लेकिन इमरान के दर्जनों आलोचक भी नजरें लगाए बैठे हैं कि पाकिस्तान को बदलने का नारा लगाने वाले अब देश में कैसे बदलाव लेकर आते हैं। चुनावी अभियान के दौरान आरोप-प्रत्यारोप खूब होते रहे और इस तल्खी की एक दलील तो हमेशा यही दी जाती रही कि जलसे का माहौल और होता और सरकार के सदनों का माहौल और ही। पाकिस्तान जिस तरह आतंकवाद का केंद्र बना हुआ है, उस कारण पूरी दुनिया की अभिरुचि उसकी नीतियों पर रहती है। चुनाव में सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरने के बाद इमरान खान ने अपनी लंबी तकरीरों में आतंकवाद के खिलाफ लड़ने का संकल्प तक व्यक्त नहीं किया था। इस कारण भी उत्सुकता बनी हुई है कि आखिर आतंकवाद के मामले में उनकी सरकार का रुख क्या होता है? पूर्व सरकार वजीरिस्तान सहित सीमावर्ती इलाकों में आतंकवादियों के खिलाफ ऑपरेशन चला रही थी, अनेक आतंकियों को फांसी पर चढ़ाया गया। इमरान उसे जारी रखते हैं या उसे बंद करते हैं यह देखना होगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने कूटनीतिक दायित्व का निर्वहन करते हुए नवनिर्वाचित प्रधानमंत्री इमरान खान को सद्भावनापूर्ण पत्र क्या लिखा, दोनों देशों के राजनीतिक क्षेत्रों में तूफान आ गया। मोदी के पत्र का मजमून इतना भर था कि भारत पाकिस्तान के साथ रचनात्मक और सार्थक बातचीत के लिए प्रतिबद्ध है। इसका आशय यह नहीं था कि दिसम्बर 2015 में दोनों देशों के बीच शुरू की गई समग्र वार्ता को फिर से बहाल किया जाए, जो जनवरी 2016 में पठानकोट एयरबेस पर हुए आतंकी हमले के बाद से स्थगित है। लेकिन पाकिस्तान के नए विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने मोदी के इस खत की व्याख्या ऐसे की मानो उन्होंने इमरान खान को बातचीत का न्यौता दिया हो। यह कहना मुश्किल है कि उन्होंने जानबूझ कर ऐसा किया या उनकी कूटनीतिक नासमझी थी। लेकिन इतना जरूरी है कि उनके इस कूटनीतिक दांव से भारत के विपक्षी दल कांग्रेस को मोदी सरकार की पाकिस्तान नीति को घेरने का मौका मिल गया। हालांकि भाजपा ने नवजोत सिंह सिद्धू प्रकरण से हिसाब-किताब बराबर कर लिया। बदले हुए माहौल की एक झलक पूरी दुनिया 20 जुलाई को देख ही चुकी है। जब एक भाषण में इमरान खान ने अपनी जीत का ऐलान किया। वही सफेद कुर्ता-सलवार, गले में वही पाकिस्तान तहरीक--इंसाफ के रंगों का मफलर और वही कमरा। अगर कुछ बदला हुआ था तो इमरान खान के शब्द और उनका लहजा। उनके भाषण को लगभग सभी पाकिस्तानी वर्गों में अच्छी नजर से देखा गया। उनके समर्थक और विरोधी इस बात पर सहमत हैं कि उस दिन वो इमरान नजर आए जो पहले कभी नहीं देखे गए। अब तो सबकी नजर पाकिस्तान तहरीक--इंसाफ के पहले सौ दिनों के कार्यकाल के प्लान पर हैं, जिसमें पीटीआई ने पाकिस्तान की आर्थिक परिस्थितियों को बदलने, संघ को मजबूत करने, सामाजिक सेवाओं और शासन को बेहतर बनाने, कृषि क्षेत्र में कमियों को दूर करना, बलूचिस्तान में सुरक्षा व्यवस्था बनाने और दक्षिणी पंजाब को अलग राज्य बनाने, आम आदमी का जीवन बेहतर करने समेत ऐसे वादे किए हैं जो पूरे होंगे तो पाकिस्तान जन्नत न सही, जन्नत जैसा तो बन ही सकता है। इमरान खान को प्रधानमंत्री बनने पर हम उन्हें बधाई देते हैं और उम्मीद करते हैं कि उनके राज में दोनों देशों के रिश्ते सुधरेंगे और एक नया अध्याय लिखेंगे।

-अनिल नरेन्द्र

No comments:

Post a comment