Thursday, 9 August 2018

मुजफ्फरपुर के बाद अब देवरिया कांड

बिहार के मुजफ्फरपुर कांड पर विवाद अभी ठंडा भी नहीं हुआ कि यूपी के देवरिया में भी उसी जैसा यौन शोषण का मामला सामने आ गया है। इसका खुलासा तब हुआ जब देवरिया के शेल्टर होम से रविवार रात भागकर 10 साल की बच्ची महिला थाने पहुंची और खुलासा किया कि किस तरह बच्चियों से जबरन वेश्यावृत्ति कराई जाती है। लड़की के बयान के बाद पशासन ने देवरिया के बाल और महिला संरक्षण गृह पर छापा मारा और वहां मौजूद 24 लड़कियों को रिहा कराया। इस शेल्टर होम की 18 लड़कियां अब भी गायब हैं, जिन्हें तलाशा जा रहा है। मुजफ्फरपुर और देवरिया की घटनाओं से पता चलता है कि अपने देश में बालिका अथवा नारी संरक्षण गृह चलाने का कार्य धूर्त एवं लंपट किस्म के लोग कर रहे हैं। इससे भी चिंताजनक बात यह है कि ऐसे तथाकथित समाजसेवी किस किस्म की किमिनल गतिविधियों में लिप्त हैं? जैसे यह साफ है कि मुजफ्फरपुर के बालिका आश्रम गृह का संचालन एवं संरक्षण खराब छवि और दागदार अतीत वाले शख्स के हाथ में था वैसे ही यह जानने के पर्याप्त कारण हैं कि देवरिया के नारी संरक्षण गृह की कमान भी संदिग्ध किस्म के लोगों के हाथ पहुंच गई थी। वे समाज सेवा के नाम पर किस तरह का काला गोरखधंधा कर रहे थे अब पता चल रहा है। जिन बालिकाओं को संरक्षण देकर एक सुयोग्य, साहसी और स्वावलंबी बनाने की जिम्मेदारी थी, उनको पैसे के लिए देह व्यापार में संलिप्त होने को मजबूर कर fिदया गया। इन घटनाओं के सामने आने का मतलब है कि बालिका संरक्षण गृह के नाम पर अन्यय ऐसी ही संस्थाओं में हमारी बच्चियों का दैहिक शोषण हो रहा होगा। इससे सबक लेकर देशभर में चलने वाले ऐसे संरक्षण गृहों की त्वरित जांच कराई जानी चाहिए। ऐसा केवल इन दो संस्थाओं तक सीमित नहीं हो सकता। इन दो का तो खुलासा हुआ इसलिए पता चला। यह शासन-पशासन की नाकामी तो है ही पर साथ-साथ ज्यादा कसूरवार वह तत्व हैं जो आश्रय स्थल चलाते हैं। यह केवल इन बच्चियों के लिए दोषी नहीं हैं बल्कि सभ्य समाज के लिए शत्रु हैं। चाहे बालिका गृह का संचालन कोई एनजीओ करे या सरकार, यह सुनिश्चित करना होगा कि जो नियम-कानून हैं, उनका पालन हो। संबंधित पूरे तंत्र की व्यापक समीक्षा एवं उसमें आवश्यक बदलाव करने की सख्त जरूरत है। बेहतर होगा कि केंद्र इस मामले पर सभी राज्यों से मिलकर पूरे मामले-नियमों की समीक्षा करे। इससे भी जरूरी है कि ऐसे बाल गृहों की रेग्यूलर चैकिंग हो। यह घटनाएं राष्ट्रीय शर्म का विषय हैं और सरकार, पशासन दोषी हैं तो समाज भी कम दोषी नहीं।

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