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Saturday, 7 July 2012

गरीब आदमी को बीमारी आना मौत से कम नहीं

अगर किसी गरीब आदमी को भारत में बीमारी आ जाए तो समझो उस पर तो आफत आ गई। बीमारी का इलाज इतना महंगा हो गया है कि समझ नहीं आता कि गरीब आदमी कैसे अपना इलाज करवाए। दिल्ली की बात करें तो समझ नहीं आता कि दिल्ली के गरीब मरीज आखिर कहां जाएं? सरकारी अस्पतालों में महीनों-सालों की डेट मिल रही है। सरकार से सस्ती दर पर जमीन लेने वाले यह फाइव स्टार अस्पताल गरीब का इलाज करने को तैयार नहीं। सरकार का पीपीपी मॉडल बर्बाद हो चुका है और सरकार की राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना फेल हो चुकी है। दिल्ली की मुख्यमंत्री खुलकर फाइव स्टार निजी अस्पतालों का पक्ष जब रखती हैं तो दुख होता है कि गरीब जनता के हितों की रक्षा करने वाले राजनेताओं को गरीबों की कितनी परवाह है। सरकार से सस्ती दर पर जमीन हासिल करने और गरीबों का इलाज नहीं करने वाले अस्पतालों ने अदालती आदेश के बाद कुछ इलाज की शुरुआत तो की है, लेकिन इस बीच मुख्यमंत्री का कहना है कि इन अस्पतालों का गला और कितना दबाया जाए। वास्तव में इन अस्पतालों को सरकार ने एक रुपए एकड़ से लेकर कुछ सौ रुपए एकड़ के हिसाब से जमीन केवल इस शर्त पर दी थी कि वह ओपीडी व आईपीडी में गरीब मरीजों का इलाज करेंगे। इसके तहत आईपीडी में 10 फीसदी और ओपीडी में 25 फीसदी गरीबों का इलाज मुफ्त करना था। अस्पताल मुकरते रहे, अन्त में अदालत के कठोर निर्णय के बाद उन्होंने इलाज करना शुरू किया। वर्ष 2008 में शुरू की गई राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना बन्द होने के कगार पर पहुंच चुकी है। बीमा कम्पनियों द्वारा अस्पतालों को समय पर पैसे नहीं देने के कारण अस्पतालों ने गरीब मरीजों का इलाज करने से मना कर दिया है। अस्पतालों ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर इलाज नहीं करने के बारे में अवगत करा दिया है, यह अलग बात है कि इसके बावजूद मुख्यमंत्री इस योजना के फेल होने के कारण जनता की जागरुकता में कमी को बता रही हैं। ज्ञात हो कि राजधानी में नौ लाख बीपीएल कार्डधारक हैं। राजधानी में करीब 40 अस्पताल इस योजना से संबद्ध हैं। ये अस्पताल गरीबों का इलाज करते हैं, जिसके एवज में बीमा कम्पनी इन्हें पैसे का भुगतान करती हैं। बीमा कम्पनी को सरकार का श्रम विभाग पैसा देता है। जानकारी के अनुसार श्रम विभाग ने तो बीमा कम्पनी को भुगतान कर दिया है, लेकिन बीमा कम्पनी ने अस्पतालों को भुगतान नहीं किया। राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना के चेयरमैन डॉ. प्रेम अग्रवाल का कहना है कि बीते एक साल से अस्पतालों को योजना के तहत खर्च होने वाली धनराशि की अदायगी नहीं की गई है, फिलहाल 28 अप्रैल से इस योजना के तहत इलाज करने वाले अस्पतालों ने सार्वजनिक रूप से कार्डधारकों को भर्ती करने से मना कर दिया है। अब सवाल उठता है कि दिल्ली का गरीब मरीज आखिर कहां जाए?

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